रक्षा मंत्रालय
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रक्षा मंत्री ने श्रीलंका के रक्षा मंत्रालय में कहा- हिंद महासागर क्षेत्र की सामूहिक सुरक्षा एवं समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए समुद्री मार्गों की संरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता बेहद महत्वपूर्ण है


“भारत व श्रीलंका समुद्री क्षेत्र में करीबी साझेदार हैं और हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर कार्य करने की बेहतर स्थिति में हैं”

“एक सच्चे विश्व मित्र के रूप में भारत अपने साझा पड़ोस में रचनात्मक, भरोसेमंद और जिम्मेदार भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है”

प्रविष्टि तिथि: 09 SEP 2026 6:13PM by PIB Delhi

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र की सामूहिक सुरक्षा एवं समृद्धि के लिए सुरक्षित समुद्री मार्ग, नौवहन की स्वतंत्रता, अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान और निर्बाध समुद्री व्यापार बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने भारत व श्रीलंका के बीच सहयोग को और विस्तारित करने का आह्वान किया, ताकि सुरक्षित एवं अनुकूल समुद्री वातावरण तैयार किया जा सके तथा उभरती समुद्री चुनौतियों का समय रहते सामना किया जा सके। श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इन चुनौतियों से समय रहते निपटना जरूरी है, ताकि वे विकास की प्राथमिकताओं और बेहतर भविष्य की दिशा में गंभीर बाधा न बन सकें। रक्षा मंत्री ने 9 सितंबर, 2026 को कोलंबो में श्रीलंका के रक्षा मंत्रालय की यात्रा के दौरान श्रीलंका के रक्षा उप मंत्री श्री अरुणा जयसेकरा, श्रीलंकाई सेना, नौसेना और वायु सेना के कमांडरों तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित करते हुए अपने ये विचार व्यक्त किये।

रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा व आर्थिक विकास को एक-दूसरे से अलग करके नहीं देखा जा सकता, क्योंकि दोनों ही भूगोल और सुरक्षा से गहराई से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि भारत और श्रीलंका, दोनों ही देशों के लिए क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रमों के प्रति उदासीन रहना संभव नहीं है। श्री सिंह ने बताया कि भारत और श्रीलंका ने क्षमता निर्माण से लेकर संयुक्त सैन्य अभ्यासों तक विभिन्न पहलों के माध्यम से अपनी सुरक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ किया है। हालांकि, उन्होंने समुद्री सहयोग पर विशेष ध्यान देते हुए दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रक्षा तथा रणनीतिक साझेदारी को और सशक्त करने की आवश्यकता पर बल दिया।

 

 

श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक व क्षेत्रीय परिदृश्य से उत्पन्न नई चुनौतियों एवं खतरों से निपटने हेतु हमें मिलकर कार्य करने के लिए प्रभावी प्रोटोकॉल विकसित और लागू करने, अपनी क्षमताओं को मजबूत करने तथा अनुभव साझा करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह एक सतत प्रक्रिया होनी चाहिए। हमें समुद्री क्षेत्र में करीबी और मजबूत साझेदारी के लिए नए तौर-तरीके विकसित करने होंगे। रक्षा मंत्री ने कहा कि यही प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के महासागर (सभी क्षेत्रों में सुरक्षा एवं विकास के लिए आपसी और समग्र प्रगति) दृष्टिकोण का मूल आधार है। ‘आपसी’ और ‘समग्र’ जैसे शब्द तालमेल, सहयोग व मिलकर काम करने के महत्व को उजागर करते हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत एवं श्रीलंका एक ही समुद्री क्षेत्र से जुड़े हैं और समुद्री सुरक्षा कोई काल्पनिक अवधारणा नहीं, बल्कि एक वास्तविकता है, जो दोनों देशों के व्यापार, सुरक्षा तथा भविष्य को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि श्रीलंका भारत का मित्र पड़ोसी, पुराना दोस्त और भरोसेमंद साझेदार है। हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा से जुड़ी किसी भी रणनीतिक चर्चा में दोनों देशों की महत्वपूर्ण भूमिका है। श्री सिंह ने कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच मजबूत समुद्री सहयोग न केवल दोनों देशों के लिए लाभकारी है, बल्कि क्षेत्र के सामूहिक विकास व सुरक्षा के उद्देश्य से भी बेहद जरूरी है।

श्री राजनाथ सिंह ने समुद्री सहयोग, विशेष रूप से ‘खोज एवं बचाव’ अभियानों में हुई महत्वपूर्ण प्रगति का उल्लेख किया, जिसके माध्यम से समुद्र में कई बहुमूल्य जानें बचाई गई हैं। उन्होंने कहा कि भारत और श्रीलंका नशीली दवाओं की तस्करी, समुद्री डकैती तथा मानव तस्करी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर कार्य कर रहे हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि इस संदर्भ में, कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव में हमारा आपसी सहयोग पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है, जो समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी उपायों, साइबर सुरक्षा और संगठित अपराध पर केंद्रित है।

रक्षा मंत्री ने दोनों देशों के सहयोग से स्थापित समुद्री बचाव समन्वय केंद्र को हिंद महासागर के जलक्षेत्र को सुरक्षित रखने की साझा प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा किश्रीलंका के साथ मिलकर भारत क्षमता निर्माण व संयुक्त अभ्यास करने जैसे क्षेत्रों में सहयोग करने के लिए तैयार है, ताकि दोनों देश एक-दूसरे के अनुभवों से सीख सकें और संयुक्त गतिविधियों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रोटोकॉल को कहीं अधिक बेहतर बना सकें। श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हम इस तरह के सहयोग को बढ़ावा देने हेतु श्रीलंका को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

 

 

श्री राजनाथ सिंह ने ऐसे भविष्य की परिकल्पना की, जिसमें भारत और श्रीलंका मिलकर दोनों देशों के हित में एक सशक्त ‘समुद्री क्षेत्र जागरूकता प्रणाली’ विकसित करें, जो समुद्री गतिविधियों की वास्तविक समय में व्यापक जानकारी उपलब्ध करा सके। उन्होंने कहा कि इसके लिए दोनों देशों की संबंधित एजेंसियों, नौसेनाओं तथा तटरक्षक बलों के बीच व्यवस्थित सहयोग और नियमित संवाद आवश्यक होगा, ताकि अवैध मछली पकड़ने, संदिग्ध जहाजों की निगरानी, नशीली दवाओं की तस्करी, अन्य अवैध गतिविधियों, आतंकवाद तथा समुद्री सुरक्षा से जुड़े अन्य खतरों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

रक्षा मंत्री ने मछुआरों के सामने आने वाली चुनौतियों का उल्लेख करते हुए इन समस्याओं के समाधान के लिए भारत और श्रीलंका को मिलकर काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समुद्री सहयोग का दायरा केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसमें जलीय कृषि, समुद्री जैव-प्रौद्योगिकी, महासागर विज्ञान, समुद्री पर्यावरण का संरक्षण एवं सुरक्षा और समुद्री पर्यटन जैसे क्षेत्र भी शामिल किए जाने चाहिए। श्री सिंह ने यह भी सुझाव दिया कि प्राकृतिक व मानव-जनित आपदाओं के दौरान बेहतर समन्वय और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए दोनों देश संबंधित एजेंसियों की भागीदारी से एक संयुक्त ‘समुद्री मानवीय सहायता एवं आपदा राहत’ (एचएडीआर) प्रणाली स्थापित करने की संभावनाओं पर विचार कर सकते हैं।

श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र गहरे रणनीतिक और आर्थिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में भारत और श्रीलंका को मिलकर प्रयास करने, अपनी सामूहिक क्षमताओं का प्रभावी उपयोग करने तथा उभरती चुनौतियों का संयुक्त रूप से सामना करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बड़े बदलाव और तेजी से हो रहे परिवर्तन अपने साथ चुनौतियों के साथ-साथ नए अवसर भी लेकर आए हैं। इन अवसरों को साझा विकास में बदलने के लिए भारत और श्रीलंका को अपनी पुरानी व मजबूत समुद्री साझेदारी का लाभ उठाना चाहिए।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत-श्रीलंका संबंधों का भविष्य इस मूल विचार पर आधारित होना चाहिए कि भौगोलिक निकटता आपसी निर्भरता को बढ़ावा देती है और मिलकर आगे बढ़ने के अनेक अवसर पैदा करती है। उन्होंने भारत को एक सच्चा विश्व मित्र और भरोसेमंद वैश्विक साझेदार बताते हुए साझा पड़ोस में रचनात्मक व विश्वसनीय भूमिका निभाने के भारत के संकल्प को दोहराया। श्री सिंह ने कहा कि व्यापक समुद्री सुरक्षा और आपसी समृद्धि एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि करीबी समुद्री साझेदार के रूप में भारत और श्रीलंका हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर प्रभावी भूमिका निभाने की बेहतर स्थिति में हैं।

 

इस अवसर पर श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त श्री संतोष झा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

 

 

श्री राजनाथ सिंह को रक्षा मंत्रालय पहुंचने पर ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया। इसके बाद उन्होंने बट्टारामुल्ला स्थित भारतीय शांति सेना (आईपीकेएफ) स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी।

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पीके/केसी/एनके


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