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सीएसआईआर-राष्ट्रीय एयरोस्पेस प्रयोगशाला ने स्वदेशी अत्यंत छोटे और लघु गैस टरबाइन इंजन पेश किए, भारत की मानवरहित रक्षा क्षमताओं को मजबूती

प्रविष्टि तिथि: 25 AUG 2026 2:51PM by PIB Delhi

वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद्.-राष्ट्रीय एयरोस्पेस प्रयोगशाला -सीएसआईआर-एनएएल ने आज नई दिल्ली स्थित सीएसआईआर मुख्यालय सभागार में नए तीन स्वदेशी अत्यंत छोटे और लघु गैस टर्बाइन इंजन 05 किलोग्राम थ्रस्ट वाला एनजे-05, 50 किलोग्राम थ्रस्ट वाला एनजे-50 और 100 किलोग्राम थ्रस्ट वाला एनजे-100 पेश किए। उन्नत एयरोस्पेस प्रणोदन में आत्मनिर्भरता की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।  यह गैस टर्बाइन इंजन स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों में महत्वपूर्ण आवश्यकताएं पूरी करने हेतु विकसित किए गए हैं। ये छोटे और सुव्यवस्थित प्रणोदन प्रणाली सामरिक मानवरहित यूएवी, ड्रोन इंटरसेप्टर और सघन मिसाइल प्रणाली सहित विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए निर्मित किए गए हैं।

लघु गैस टर्बाइन इंजन उद्घाटन कार्यक्रम में भारत के वरिष्ठ रक्षा और वैज्ञानिक नेतृत्व ने भाग लिया। चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष के एकीकृत रक्षा स्टाफ प्रमुख, परम विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, वायु सेना मेडल प्राप्त एयर मार्शल तेजिंदर सिंह, मुख्य अतिथि के रूप में इस अवसर पर उपस्थित हुए।

बाएं से दाएं: डॉ (श्रीमती) एन कलाइसेल्वी, महानिदेशक (सीएसआईआर) और सचिव (डीएसआईआर), एयर मार्शल तेजिंदर सिंह पीवीएसएम, वीएसएम, वीएम (मुख्य अतिथि और सीआईएससी) और डॉ अभय ए पशिलकर, निदेशक (सीएसआईआर-एनएल) ने नई दिल्ली के एसएसबी सभागार में स्वदेशी माइक्रो और स्मॉल गैस टर्बाइन इंजनों के अनावरण के अवसर पर भाग लिया।

सीएसआईआर-एनएएल के निदेशक डॉ. अभय ए. पशिलकर ने स्वागत संबोधन में देश के बढ़ते ड्रोन पारितंत्र के बहु-स्तरीय समेकित ढ़ांचा तैयार करने में वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद्-राष्ट्रीय एयरोस्पेस प्रयोगशाला की उभरती भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तेजी से विस्तार कर रहे एयरोस्पेस स्टार्टअप पारितंत्र वाले भारतीय उद्योग की देश की रक्षा आवश्यकताएं पूरी करने में बड़े पैमाने पर ऐसे उन्नत इंजनों की उत्पादन क्षमता है।

इस अवसर पर श्री आर. प्रथापनायका के नेतृत्व में सीएसआईआर-एनएएल की वैज्ञानिक टीम ने गैस टरबाइन इंजन विकसित किए जाने संबंधी तकनीकी प्रस्तुति दी जिसमें उच्च-आरपीएम टर्बोमशीनरी और उच्च-तापमान दहन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हुई प्रगति की जानकारी दी, जिससे ये स्वदेशी प्रणोदन प्रणाली विकसित हो पाई हैं।

वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद महानिदेशक और वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग सचिव डॉ. श्रीमती एन. कलाइसेल्वी ने अपने संबोधन में परियोजना दल के सहयोगात्मक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बल देकर कहा कि इस तरह के अत्यधिक विशिष्ट और महत्वपूर्ण उप-प्रणालियों को स्वदेशी तौर पर विकसित किया जाना, एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ने की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धि है।

प्रणोदन प्रणालियों का उद्घाटन करते हुए, एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ने देश में उन्नत गैस टरबाइन इंजन प्रौद्योगिकियों के विकास के रणनीतिक महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में स्वदेशी क्षमता हासिल होने से राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी और सशस्त्र बलों की तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

एनजे-05, एनजे-50 और एनजे-100 सफलता से विकसित किया जाना लघु गैस टरबाइन प्रणोदन प्रणालियों के डिजाइन, विकास और निर्माण में स्वदेशी पारितंत्र की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उभरती घरेलू विनिर्माण क्षमताओं के साथ ही इन प्रौद्योगिकियों से भारत के बढ़ते यूएवी, ड्रोन और रक्षा एयरोस्पेस पारितंत्र में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

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पीके/केसी/एकेवी/केएस


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