रेल मंत्रालय
भारतीय रेलवे कोचों में आग की घटनाओं को रोकने के लिए कई स्तरों पर अग्नि सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करता है
प्रत्येक कोच में कम से कम दो अग्निशामक यंत्र, पैंट्री कारों में वॉटर मिस्ट अग्निशामक यंत्र और यात्री आपातकालीन संचार सुविधाएं कोच की सुरक्षा को मजबूत करती हैं
इंटीग्रेटेड रेल मदद हेल्पलाइन 139 यात्रियों के लिए आपातकालीन सहायता तक त्वरित पहुंच सक्षम बनाती है
आपात स्थिति में, भारतीय रेलवे का प्रारंभिक ध्यान लोगों की जान बचाने, घायलों की देखभाल करने और फंसे हुए यात्रियों को राहत प्रदान करने पर होता है: श्री अश्विनी वैष्णव
177 दुर्घटना राहत ट्रेनें, 100 ब्रेकडाउन क्रेन और 170 चिकित्सा राहत इकाइयां रेलवे की आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करती हैं
प्रविष्टि तिथि:
05 AUG 2026 3:24PM by PIB Delhi
भारतीय रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में आकस्मिक कारणों से लगने वाली आग सहित सभी संभावित खतरों से निपटने के लिए, अपने सभी जोनों में रोकथाम, तैयारी, त्वरित कार्रवाई और राहत कार्यों में लगातार जुटा हुआ है।
भारतीय रेलवे द्वारा रेलवे स्टेशनों पर किए गए महत्वपूर्ण अग्नि सुरक्षा उपाय निम्नलिखित हैं:
- आग लगने की स्थिति में उपयोग के लिए रेलवे स्टेशनों पर पोर्टेबल अग्निशामक यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) उपलब्ध कराए गए हैं।
- आग लगने की स्थिति में उपयोग के लिए रेलवे स्टेशनों पर रेत और पानी से भरी आग बुझाने वाली बाल्टियाँ भी उपलब्ध कराई गई हैं।
- भारतीय रेलवे यह सुनिश्चित करता है कि उसके फ्रंटलाइन कर्मचारी अग्निशामन (फायर फाइटिंग), प्राथमिक चिकित्सा (फर्स्ट एड) और आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण लेकर आपात स्थितियों से निपटने के लिए हमेशा तैयार रहें। इन विषयों को स्टेशन मैनेजर, ट्रेन मैनेजर (गार्ड), कमर्शियल-कम-टिकट क्लर्क, लोको पायलट, असिस्टेंट लोको पायलट आदि जैसे फ्रंटलाइन कर्मचारियों के प्रशिक्षण मॉड्यूल में शामिल किया गया है।
- भारतीय रेल आपदा प्रबंधन संस्थान (आईआरआईडीएम), जो एक विशेष प्रशिक्षण संस्थान है, महत्वपूर्ण शुरुआती समय (गोल्डन ऑवर) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पहले प्रतिक्रियाकर्ताओं यानी ट्रेन क्रू और ऑन-बोर्ड कर्मचारियों (जैसे ट्रेन टिकट परीक्षक, एसी कोच स्टाफ और एस्कॉर्टिंग स्टाफ) को प्रशिक्षित करने के लिए अग्निशामन, प्राथमिक चिकित्सा, ट्रॉमा मैनेजमेंट आदि में नियमित पाठ्यक्रम संचालित करता है।
- रेलवे स्टेशनों और नियंत्रण कक्षों के अधिकारियों के लिए निकटतम दमकल विभाग, पुलिस, चिकित्सा सुविधाओं, एम्बुलेंस, जिला प्रशासन, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) आदि से संपर्क करने हेतु उचित संचार प्रोटोकॉल निर्धारित किए गए हैं। उनके संपर्क नंबर सभी संबंधित रेलवे अधिकारियों को उपलब्ध करा दिए गए हैं।
- बड़े रेलवे स्टेशनों पर रिले रूम और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग रूम में ऑटोमैटिक फायर अलार्म लगाए जा रहे हैं।
- रेलवे स्टेशनों पर स्टेशन मास्टर के लिए कंट्रोल फोन की व्यवस्था होती है, ताकि ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) में आग लगने की स्थिति में ओएचई की बिजली आपूर्ति को तुरंत काटा जा सके।
- रेलवे स्टेशनों पर लगे पब्लिक एड्रेस सिस्टम (सार्वजनिक घोषणा प्रणाली) का उपयोग आग जैसी आपात स्थिति में लोगों को बाहर निकालने के लिए मार्गदर्शन करने हेतु किया जा सकता है।
- यात्रियों और आम जनता को ज्वलनशील वस्तुएं न ले जाने के महत्व के प्रति जागरूक करने के लिए लगातार घोषणाएं की जाती हैं।
- बड़े रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के सामान की स्कैनिंग की जाती है।
- विशेष अवधियों के दौरान यात्रियों द्वारा ज्वलनशील सामग्री ले जाने से रोकने के लिए विशेष अभियान चलाए जाते हैं।
- शॉर्ट-सर्किट के कारण आग लगने की किसी भी संभावना को रोकने के लिए स्टेशनों पर विद्युत प्रणालियों का नियमित रखरखाव किया जाता है। इलेक्ट्रिकल पैनलों में मिनिएचर सर्किट ब्रेकर (एमसीबी) और मोल्ड्ड केस सर्किट ब्रेकर (एमसीसीबी) का उपयोग किया जाता है। स्टेशनों पर आपातकालीन लाइटें भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
- आपात स्थिति के दौरान जनता को बाहर निकलने में मदद करने के लिए स्टेशनों पर निकास द्वारों को अच्छी तरह से चिह्नित किया गया है।
- आग लगने जैसी आपातकालीन स्थितियों में इस्तेमाल के लिए, कोच में पानी भरने की सुविधा वाले बड़े रेलवे स्टेशनों पर जल भंडारण करने की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है।
- रेलवे स्टेशन के प्लेटफ़ॉर्म पर आग जलाकर खाना पकाने की अनुमति नहीं है।
- रेलवे स्टेशनों और कार्यालय भवनों के अंदर और आसपास के सभी इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशन का नियमित ऑडिट/सुरक्षा अभियान चलाया जा रहा है।
भारतीय रेलवे की ट्रेनों में अग्नि सुरक्षा में ट्रेनों के डिजाइन, निर्माण, रखरखाव और संचालन के सभी चरण शामिल हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि भारतीय रेलवे की ट्रेनों में आग लगने की घटनाएं न हों, बड़ी संख्या में कदम उठाए गए हैं, जिनमें से प्रमुख निम्नलिखित हैं:
- भारतीय रेलवे के सभी डिब्बों (कोचों) में कम से कम दो अग्निशामक यंत्रों (फायर एक्सटिंग्विशर) की व्यवस्था।
- जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, पावर कारों और पैंट्री कारों के आग लगने की आशंका वाले क्षेत्रों में फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम (आग का पता लगाने और बुझाने की प्रणाली) की व्यवस्था की गई है।
- जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, मौजूदा दिशा-निर्देशों के अनुसार कोचों में आग और धुएं का पता लगाने वाली प्रणाली (फायर एंड स्मोक डिटेक्शन सिस्टम) की व्यवस्था की गई है।
- चरणबद्ध तरीके से पैंट्री कारों और पावर कारों में वाटर मिस्ट प्रकार के अग्निशामक यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
- आग लगने की स्थिति में बाहर निकलने के लिए कोचों में आपातकालीन खिड़कियों (इमरजेंसी विंडो) की व्यवस्था।
- बेहतर अग्नि सुरक्षा के लिए कोचों की सीटों/बर्थ, पैनलों, फर्श, इंसुलेशन, शौचालयों आदि में ग्लोबल फ़ायर-रिटार्डेंट मानदंडों के अनुसार अग्नि-रोधी सामग्री का उपयोग।
- कोचों में फायर-रिटार्डेंट ई-बीम केबल्स का उपयोग।
- इलेक्ट्रिकल फॉल्ट्स या सर्ज से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए विद्युत सर्किट में फ़्यूज़, मिनिएचर सर्किट ब्रेकर (एमसीबी) और मोटर प्रोटेक्शन सर्किट ब्रेकर (एमपीसीबी) के रूप में विभिन्न स्तरों की सुरक्षा का उपयोग।
- इलेक्ट्रिकल कैबिनेट में एरोसोल-आधारित अग्नि शमन प्रणाली (एयरोसोल बेस्ड फायर सप्रेशन सिस्टम) की व्यवस्था।
- अमृत भारत और वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों में आधुनिक सामग्री की फिटिंग के साथ, वैश्विक मानकों के अनुरूप सामग्री का नियमित रूप से अप-ग्रेडेशन किया जा रहा है।
- आग को रोकने के लिए "क्या करें" और "क्या न करें" के बारे में यात्रियों को सूचित करने और सतर्क करने के लिए सभी कोचों में व्यापक जानकारी हेतु "फायर नोटिस" का प्रदर्शन। इनमें ज्वलनशील सामग्री, विस्फोटक न ले जाने, कोचों के अंदर धूम्रपान पर प्रतिबंध और दंड आदि से संबंधित संदेश शामिल हैं, जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है।
- कोच में आग जलाकर खाना पकाने पर रोक।
- वंदे भारत के प्रत्येक कोच में 4 इमरजेंसी टॉक बैक यूनिट का प्रावधान है। यह आपात स्थिति में यात्रियों को ट्रेन मैनेजर (गाड़ी प्रबंधक) / लोको-पायलट से संवाद करने की सुविधा प्रदान करता है। वंदे भारत ट्रेन में पैसेंजर इमरजेंसी अलार्म बटन भी उपलब्ध कराए गए हैं। आपातकालीन उपयोग के लिए प्रत्येक कोच में ऐसे 4 पुश बटन लगाए गए हैं।
- 'रेल मदद' नाम की एक इंटीग्रेटेड हेल्पलाइन है, जिसका उपयोग आपात स्थिति के दौरान सहायता प्राप्त करने के लिए उपयोगकर्ता 139 नंबर के माध्यम से कर सकते हैं।
यद्यपि उपर्युक्त उपायों से भारतीय रेलवे को आग की घटनाओं को रोकने में मदद मिली है, फिर भी भारतीय रेलवे विभिन्न कारकों के कारण संभावित रूप से होने वाली आग जैसी आपात स्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए हमेशा तैयार है।
भारतीय रेलवे आग सहित किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में त्वरित और प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने के लिए हमेशा तैयार है। ऐसी किसी भी आपात स्थिति में, पहले प्रतिक्रिया देने वाले (फर्स्ट रिस्पॉन्डर) रेलवे कर्मचारी होते हैं, जिन्हें ऐसी आपात स्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। इस तरह की आपात स्थिति की सूचना मिलते ही, भारतीय रेलवे अपनी व्यवस्था, उपकरणों, डॉक्टरों और कर्मचारियों का उपयोग करते हुए तुरंत कार्रवाई करता है, और तुरंत बचाव एवं राहत कार्य शुरू करने के लिए राज्य सरकार तथा जिला प्रशासन के साथ भी तालमेल बिठाता है।
आरंभिक ध्यान जान बचाने, घायलों की देखभाल करने और फंसे हुए यात्रियों को सहायता प्रदान करने पर होता है।
भारतीय रेलवे के पास पूरे रेल नेटवर्क को कवर करने के लिए चिन्हित स्थानों पर 177 एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेनें (एआरटी), 100 उच्च क्षमता वाली 140टी ब्रेकडाउन डीजल-हाइड्रोलिक क्रेन और 170 एक्सीडेंट रिलीफ मेडिकल इक्विपमेंट (एआरएमई) स्केल-I मौजूद हैं। इसके अलावा, तुरंत चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए चिन्हित स्थानों पर एआरएमई स्केल-II और दुर्घटनाओं के लिए पोर्टेबल मेडिकल किट भी उपलब्ध कराई गई हैं। एआरएमई स्केल-I पहियों पर बने अस्पताल की तरह हैं, जिन्हें चिकित्सा उपकरणों, सामग्री और कर्मियों से पूरी तरह तैयार करके तुरंत दुर्घटना स्थल के लिए रवाना किया जाता है।
ऐसी दुर्घटनाओं से निपटने के लिए सड़क वाहन, अर्थमूवर, एम्बुलेंस आदि जैसे अतिरिक्त उपकरण भी मंगाए जाते हैं। ऐसी आपात स्थितियों में प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी की भूमिका तय होती है और उन्हें अपनी जिम्मेदारियाँ निभाने के लिए आवश्यक ट्रेनिंग और अधिकार दिए जाते हैं।
साथ ही, आग लगने जैसी किसी भी बड़ी असामान्य घटना की सूचना मिलने पर, भारतीय रेलवे स्थिति से तुरंत और प्रभावी ढंग से निपटने में सहायता के लिए आवश्यकतानुसार जिला अधिकारियों, दमकल विभाग (फायर ब्रिगेड), चिकित्सा सुविधाओं, पुलिस बलों आदि सहित स्थानीय नागरिक प्रशासन को तुरंत सूचित करती है। रेलवे और इन अन्य एजेंसियों दोनों द्वारा समन्वित प्रतिक्रिया के लिए पूरे भारतीय रेलवे में प्रणालियां और प्रोटोकॉल स्थापित किए गए हैं।
आग जैसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए प्रक्रियाएं और दिशा-निर्देश जोन और मंडलों की आपदा प्रबंधन योजनाओं, सामान्य एवं सहायक नियमों, दुर्घटना नियमावली और संचालन नियमावली में निर्धारित किए गए हैं। रेलवे स्टेशन तत्काल आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए अपने टेलीफोन नंबरों के साथ-साथ नजदीकी अग्निशामक केंद्रों की सूची और आस-पास उपलब्ध सभी रेलवे तथा गैर-रेलवे चिकित्सा संस्थानों, निजी चिकित्सकों और फर्स्ट-एइडर्स की सूची को बनाए रखते हैं और प्रदर्शित करते हैं।
भारतीय रेलवे के पास अपनी प्रणालियों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रखने हेतु नियमित मॉक ड्रिल आयोजित करने की एक सुविकसित प्रणाली है। मंडलों द्वारा भारतीय रेलवे के भीतर की सभी बचाव एजेंसियों के साथ-साथ दमकल विभाग, पुलिस, जिला अधिकारियों, चिकित्सा प्रणालियों एवं सुविधाओं और आपदा प्रतिक्रिया बलों को शामिल करते हुए फुल-स्केल मॉक ड्रिल आयोजित की जाती हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान अहमदाबाद, वडोदरा, राजकोट और भावनगर मंडलों में ऐसे चार मॉक ड्रिल सहित कुल 71 पूर्ण-स्तरीय मॉक ड्रिल आयोजित किए गए।
यह जानकारी केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव द्वारा आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी गई।
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(रिलीज़ आईडी: 2294941)
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