रक्षा मंत्रालय
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उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए मजबूत रक्षा प्रणाली में सैन्य व नागरिक सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है: रक्षा मंत्री

'राष्ट्र सर्वोपरि' की अवधारणा सैन्य और नागरिक सेवाओं की साझा प्रतिबद्धता है; यदि लक्ष्य एक हो, तो हर तत्व राष्ट्रीय शक्ति में बदल जाता है

सशस्त्र बल मुख्यालय की असैन्य सेवाओं को देश के रक्षा प्रबंधन के रणनीतिक केंद्र के रूप में विकसित होना चाहिए, राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए अनुसंधान, भू-रणनीतिक सोच और नवीन विचारों की महत्वपूर्ण भूमिका है

प्रविष्टि तिथि: 03 AUG 2026 2:35PM by PIB Delhi

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने रक्षा मंत्रालय के सैन्य और नागरिक घटकों के बीच सहयोग को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने यह बात ऐसे समय में कही है जब रक्षा बल नए उत्साह के साथ बेहतर समन्वय की दिशा में अग्रसर हो रहे हैं। रक्षा मंत्री की इस अपील का उद्देश्य सुरक्षा और तकनीकी चुनौतियों से निपटने के लिए रक्षा तंत्र में अधिक तालमेल स्थापित करना, संस्थागत स्मृति, स्थिरता और नियमों के प्रभावी अनुप्रयोग को सुनिश्चित करना है। 3 अगस्त, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 85वें सशस्त्र सेना मुख्यालय (एएफएचक्यू) सिविलियन सेवा दिवस समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सैन्य और नागरिक सेवाएं दोनों ही 'राष्ट्र सर्वोपरि' के प्रति समान रूप से प्रतिबद्ध हैं और जब उद्देश्य एक ही होता है तो व्यवस्था का प्रत्येक तत्व राष्ट्रीय शक्ति में परिवर्तित हो जाता है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि सैन्य और प्रशासनिक सहयोग अलग-अलग रास्तों पर नहीं चल सकते। उन्होंने कहा कि संयुक्त और एकीकृत संरचनाओं के विकास के साथ-साथ नीति, प्रशासन, मानव संसाधन प्रबंधन, वित्तीय प्रक्रियाओं, रसद और संस्थागत ज्ञान सहित सभी क्षेत्रों में निरंतरता और विशेषज्ञता की आवश्यकता होगी। उन्होंने नागरिक और सैन्य अधिकारियों के बीच आपसी संपर्क को और बढ़ाने के महत्व पर बल दिया और दोनों पक्षों के लिए संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा विकासात्मक कार्य सौंपे जाने का सुझाव दिया ताकि वे एक-दूसरे के अनुभवों से सीख सकें।

श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सैन्य अधिकारी परिचालन अनुभव, कमान का दृष्टिकोण और युद्ध की समझ लाते हैं, जबकि नागरिक अधिकारी प्रशासनिक निरंतरता, नीतिगत अनुभव, सरकारी प्रक्रियाओं की समझ और संस्थागत स्मृति के माध्यम से योगदान देते हैं। जब ये शक्तियां आपस में मिलती हैं, तो निर्णय लेना अधिक संतुलित और प्रभावी हो जाता है।

रक्षा मंत्री ने 'साइबर युद्ध' का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर सशस्त्र सेना मुख्यालय सिविलियन सेवा के अधिकारी अपनी विशेषज्ञता का उपयोग करते हुए रक्षा-विशिष्ट साझा साइबर उपकरण विकसित करें, तो यह रक्षा बलों के लिए लाभदायक सिद्ध हो सकता है। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय सैन्य इतिहास के अध्ययन के लिए एक मंच विकसित किया जा सकता है, जिसमें नागरिक परिप्रेक्ष्य से इसके विश्लेषण से नए विचार व दृष्टिकोण विकसित हो सकें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन क्षेत्रों में विशेषज्ञता का लाभ उठाकर वायु सेना मुख्यालय के नागरिक सेवा अधिकारी रक्षा क्षेत्र में अधिक सार्थक योगदान दे सकेंगे।

श्री राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र की व्यापक समझ विकसित करके, संयुक्त वातावरण में प्रभावी ढंग से कार्य करके और उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए अपनी विशेषज्ञता को निरंतर बढ़ाकर, भारत की रक्षा प्रबंधन संरचना के रणनीतिक केंद्र के रूप में विकसित होने के लिए सशस्त्र बल मुख्यालय को आह्वान किया।

श्री राजनाथ सिंह ने सशस्त्र सेना मुख्यालय से आह्वान किया कि वह भारत की रक्षा प्रबंधन संरचना के रणनीतिक केंद्र के रूप में विकसित हों। इसके लिए उन्होंने रक्षा क्षेत्र की गहन समझ विकसित किए जाने, संयुक्त वातावरण में दक्षता से कार्य करने और उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए अपनी विशेषज्ञता को निरंतर बढ़ाए जाने पर बल दिया। उन्होंने बदलते समय के साथ तालमेल बिठाते हुए आगे बढ़ने के लिए सशस्त्र बल मुख्यालय नागरिक सेवा की सराहना करते हुए कहा कि आधुनिक युद्ध के तकनीकी गतिशीलता से प्रेरित होने के समय में, इस कैडर को सेवा नियमों, विनियमों और आदेशों के उचित कार्यान्वयन के अपने विशिष्ट दायित्व से आगे बढ़कर कार्य करना होगा।

रक्षा मंत्री ने कहा कि सेना को अपनी शक्ति केवल हथियारों और गोला-बारूद से ही नहीं मिलती, बल्कि उन हजारों अदृश्य हाथों से भी मिलती है जो हमेशा उसका समर्थन करते हैं। सशस्त्र सेना मुख्यालय सिविलियन सेवा इन्हीं अदृश्य लेकिन निर्णायक शक्तियों में से एक है। इसे अनुसंधान, भू-रणनीतिक चिंतन और नवोन्मेषी विचारों के माध्यम से सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। श्री राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि रक्षा मंत्रालय के स्थायी कैडर होने के नाते, इसके पास गहन क्षेत्र का ज्ञान है, इसलिए रक्षा संबंधी मुख्य मामलों में इसकी सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

इस अवसर पर श्री राजनाथ सिंह ने संयुक्त सचिव एवं मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (जेएस एवं सीएओ) कार्यालय की कई डिजिटल पहलों और इसके संशोधित विजन एवं मिशन वक्तव्य का शुभारंभ किया। इन पहलों में इंटरनेट आधारित आवास प्रबंधन प्रणाली (आईबीएएमएस) rakshaawas.caomod.gov.in पोर्टल, दावों के प्रसंस्करण के लिए ईएचआरएमएस का टीयूएलआईपी 2.0 प्रणाली के साथ एकीकरण, वेतन एवं भत्तों के प्रसंस्करण के लिए सीएओ कार्यालय का टीयूएलआईपी 2.0 के साथ एकीकरण और स्मार्ट परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट रिकॉर्डिंग ऑनलाइन विंडो (एसपीएआरआरओ) पोर्टल पर ऑनबोर्डिंग शामिल हैं।

रक्षा मंत्री ने 'संवाद' पत्रिका का 34वां अंक भी जारी किया जिसमें सेवा मुख्यालयों और अंतर-सेवा संगठनों में तैनात विभिन्न रैंकों के कर्मचारियों के लिखित यात्रा वृत्तांत, निबंध, लेख और कविताएं शामिल हैं। उन्होंने खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धियों के लिए एएफएचक्यू कर्मियों को पुरस्कार भी प्रदान किए और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों के कुछ बच्चों को भी सम्मानित किया।

इस अवसर पर रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह, सचिव (रक्षा उत्पादन) श्री संजीव कुमार, सचिव (रक्षा वित्त) श्री विश्वजीत सहाय, वायुसेना के वाइस चीफ एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित, अपर सचिव श्री मनीष त्रिपाठी, संयुक्त सचिव और सीएओ श्री अमिताभ प्रसाद और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

रक्षा मंत्रालय के तीन एकीकृत सेवा मुख्यालयों, एकीकृत रक्षा स्टाफ मुख्यालय और 24 अंतर-सेवा संगठनों में सेवा कर्मियों के साथ मिलकर काम करने वाले कर्मियों को सम्मानित करने के लिए प्रतिवर्ष अगस्त के पहले दिन सशत्र सेना मुख्यालय सिविलियन सेवा दिवस मनाया जाता है। सशस्त्र सेना मुख्यालय कैडर की स्थापना 1 अगस्त, 1942 को हुई थी। उस समय विकेंद्रीकृत नागरिक पदों और कैडर संचालन को मुख्य प्रशासनिक अधिकारी की देखरेख में विभिन्न सेवा मुख्यालयों और रक्षा तथा वित्त मंत्रालय (रक्षा) के सचिवालय के तहत अलग-अलग इकाइयों के रूप में संगठित किया गया था।

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पीके/केसी/बीयू/एसएस

 


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