सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय
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वाहन-से-वाहन संचार प्रणाली

प्रविष्टि तिथि: 03 AUG 2026 1:20PM by PIB Delhi

 सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहनों में वाहन-से-वाहन (वी-2-वी) संचार प्रणालियों के चरणबद्ध कार्यान्वयन के लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन प्रस्तावित करते हुए एक मसौदा अधिसूचना जारी की है।

5.875 गीगा हर्ट्ज से 5.925 गीगा हर्ट्ज आवृत्ति बैंड को वी-टू-वी और अन्य बुद्धिमान परिवहन प्रणाली अनुप्रयोगों के लिए विचाराधीन किया गया है। दूरसंचार विभाग ने 10 जून 2026 के जीएसआर 466(ई) के माध्यम से इस आवृत्ति बैंड के उपयोग को लाइसेंसिंग जरूरतों से छूट दी है।

वी-टू-वी संचार से आस-पास के वाहन गति, स्थिति, दिशा, त्वरण आदि सहित वास्तविक समय की जानकारी का आदान-प्रदान कर सकते हैं। यह जानकारी अचानक ब्रेक लगाने, आगे से टक्कर का खतरा, असुरक्षित लेन परिवर्तन और आपातकालीन वाहनों के आने जैसी सुरक्षा-महत्वपूर्ण स्थितियों में चालकों या वाहन प्रणालियों को अग्रिम चेतावनी प्रदान कर सकती है।

परंपरागत वाहन सुरक्षा प्रणालियों के विपरीत जो मुख्य रूप से वाहन में लगे सेंसर और चालक की प्रतिक्रिया पर निर्भर करती हैं, वी-टू-वी संचार प्रत्यक्ष दृष्टि रेखा से परे की जानकारी भी प्रदान कर सकता है। इसलिए, यह उन्नत चालक सहायता प्रणालियों (एडीएएस) का पूरक होने और सक्रिय दुर्घटना रोकथाम, कनेक्टेड मोबिलिटी और भविष्य के बुद्धिमान परिवहन अनुप्रयोगों को समर्थन देने की उम्मीद है।

मसौदा अधिसूचना के तहत, निम्नलिखित समयसीमा प्रस्तावित है:

  • श्रेणी एल, एम और एन के वे वाहन जिनका निर्माण 1 अक्टूबर 2027 को या उसके बाद हुआ है, उन्हें एआईएस-230 का अनुपालन करना आवश्यक होगा यदि उनमें वी-टू-वी संचार प्रणाली लगी हो।
  • श्रेणी एल, एम और एन के वे वाहन, जिनका निर्माण 1 अक्टूबर 2028 को या उसके बाद हुआ है, उनमें एआईएस-230 के अनुरूप वी-टू-वी संचार प्रणाली लगाना अनिवार्य होगा।

इस चरणबद्ध दृष्टिकोण से वाहन निर्माताओं और अन्य हितधारकों को नई आवश्यकताओं के कार्यान्वयन की तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।

एआईएस-230 को भारतीय सड़कों पर चलने वाले वाहनों में स्थापित वी2वी संचार प्रणालियों के लिए न्यूनतम तकनीकी, कार्यात्मक, प्रदर्शन, पर्यावरणीय और सुरक्षा आवश्यकताओं को निर्दिष्ट करने के लिए सक्षम सुविधाओं के साथ विकसित किया गया है।

यह मानक 5.875 गीगा हर्ट्ज से 5.925 हर्ट्ज आवृत्ति बैंड में सेलुलर व्हीकल-टू-एवरीथिंग (सी-वी2एक्स) तकनीक का उपयोग करने वाली फैक्ट्री-स्थापित ऑन-बोर्ड इकाइयों को कवर करता है।

इसकी प्रमुख आवश्यकताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • रेडियो प्रदर्शन, आवृत्ति स्थिरता और आउटपुट-पावर संबंधी आवश्यकताएं;
  • रिसीवर की संवेदनशीलता और चयनात्मकता;
  • वैश्विक नौवहन उपग्रह प्रणाली (जीएनएसएस) और स्थिति निर्धारण संबंधी आवश्यकताएं;
  • विद्युत एवं विद्युत आपूर्ति संबंधी आवश्यकताएं;
  • विद्युतचुंबकीय हस्तक्षेप और अनुकूलता संबंधी आवश्यकताएं;
  • साइबर सुरक्षा और संचार-सुरक्षा प्रावधान; और
  • सड़क सुरक्षा अनुप्रयोगों के लिए प्रदर्शन संबंधी आवश्यकताएं।

मानक में सुरक्षा संबंधी उपयोग के मामलों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का प्रावधान भी है, जैसे कि:

  • आपातकालीन ब्रेक चेतावनी;
  • आगे से टक्कर की चेतावनी;
  • गलत दिशा में गाड़ी चलाना; और
  • आपातकालीन वाहन चेतावनी।

मंत्रालय ने देश में बुद्धिमान परिवहन प्रणाली (आईटीएस) के विकास और कार्यान्वयन के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया था, जिसमें वी2वी संचार पर विशेष जोर दिया गया था। टास्क फोर्स ने सड़क सुरक्षा में सुधार के लिए 5.9 गीगा हर्ट्ज आईटीएस/वी2एक्स आवृत्ति रेंज के उपयोग की सिफारिश की।

एआईएस-230 के निर्माण पर केंद्रीय मोटर वाहन नियम-तकनीकी स्थायी समिति द्वारा 7 मई 2026 को आयोजित अपनी 56वीं बैठक में भी विचार किया गया था। यह मानक भारत में वी2वी संचार प्रणालियों के विनियामक कार्यान्वयन के लिए तकनीकी आधार प्रदान करता है।

प्रस्तावित ढांचा वाहनों की स्थितिजन्य जागरूकता में सुधार लाने, समय पर सुरक्षा चेतावनी प्रदान करने और सड़क दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने के लिए कनेक्टेड प्रौद्योगिकियों के उपयोग को मजबूत करने की उम्मीद है।

नियमों के मसौदे पर प्राप्त सुझावों/टिप्पणियों की जांच 30 दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद की जाएगी, और फिर उसके बाद अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी।

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पीके/केसी/एके/एचबी

 


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