युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 'विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान' का शुभारंभ किया; प्रत्येक नागरिक से इस अभियान से जुड़ने का आह्वान किया


100 सप्ताह के 'विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान' के शुभारंभ के साथ एक करोड़ से अधिक युवा नशा मुक्त भारत के लिए प्रधानमंत्री के आह्वान से जुड़े

आने वाले 100 रविवार नशा मुक्त भारत की दिशा में 100 सशक्त कदम होंगे": प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में 'विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान' देशव्यापी जन भागीदारी का अभियान बनेगा: डॉ. मनसुख मंडाविया

प्रविष्टि तिथि: 02 AUG 2026 7:13PM by PIB Delhi

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज 'विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान' का शुभारंभ किया। इस अवसर पर आयोजित राष्ट्रव्यापी वीडियो कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने 28,000 से अधिक स्थानों से जुड़े एक करोड़ से अधिक युवा नागरिकों सहित विविध समूहों का औपचारिक रूप से स्वागत किया। इस अवसर के सामूहिक महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने इसे राष्ट्र के एक महत्वपूर्ण सामूहिक संकल्प का अवसर बताया। श्री मोदी ने कहा, "आज हम सभी देशवासी एक महान और महत्वपूर्ण संकल्प के लिए एकजुट हुए हैं।"

प्रधानमंत्री ने इस पहल की व्यापक प्रकृति को रेखांकित करते हुए कहा कि यह अभियान केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार, समाज और पूरे राष्ट्र के व्यापक हितों से जुड़ा हुआ है।'विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान' के मूल उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए यह आवश्यक है कि देश की युवा पीढ़ी शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से सशक्त, आत्मविश्वास से परिपूर्ण और नशे जैसी आत्म विनाशकारी आदतों से पूरी तरह मुक्त हो। श्री मोदी ने कहा, "आज जब राष्ट्र ने विकसित भारत का लक्ष्य निर्धारित किया है, तब यह आवश्यक है कि देश का युवा शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहे, आत्मविश्वास से भरपूर हो और नशे जैसी विनाशकारी आदतों से हमेशा दूर रहे।"

अभियान की शुरुआत का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने संतोष व्यक्त किया कि यह पहल पिछले वर्ष पवित्र भूमि काशी से एक प्रायोगिक परियोजना के रूप में शुरू की गई थी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक स्पष्टता, आध्यात्मिक ऊर्जा और गहरे सांस्कृतिक समर्पण के अनूठे समन्वय से प्रेरित इस अभियान का व्यापक विस्तार हुआ है। श्री मोदी ने कहा, "काशी घोषणा के तहत 125 से अधिक आध्यात्मिक संगठनों और अनेक गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के सहयोग से शुरू हुई यह जन कल्याणकारी पहल अब सफलतापूर्वक एक राष्ट्रीय परियोजना बन गई है।"

प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने कहा कि "विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान" का शुभारंभ, प्रधानमंत्री के विकसित भारत @2047 के विजन को साकार करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्र निर्माण के केंद्र में हमेशा भारत के युवाओं को रखा है और उन्हें अमृत काल की प्रेरक शक्ति के रूप में देखा है।

इस विजन से प्रेरित होकर सरकार ने युवाओं को स्वयंसेवा, नेतृत्व, मार्गदर्शन और राष्ट्र सेवा के अवसर उपलब्ध कराने के लिए मेरा युवा भारत (MY Bharat) को एकल खिड़की मंच के रूप में स्थापित किया है, जिसके माध्यम से देशभर के 2.23 करोड़ से अधिक युवा जुड़े हैं। लाल किले से प्रधानमंत्री द्वारा नशा मुक्त भारत के आह्वान का उल्लेख करते हुए डॉ. मांडविया ने कहा कि मेरा युवा भारत (MY Bharat) निरंतर युवा भागीदारी के माध्यम से इस मिशन को आगे बढ़ा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि 100 सप्ताह की कार्य योजना और प्रमुख आध्यात्मिक संगठनों के साथ विचार-विमर्श के माध्यम से तैयार काशी घोषणा ने मादक पदार्थों के दुरुपयोग के विरुद्ध देशव्यापी जन आंदोलन की नींव रखी है। अभियान के प्रति विश्वास व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जन भागीदारी ने स्वच्छ भारत, फिट इंडिया और कई अन्य राष्ट्रीय अभियानों को जन आंदोलन की सफलता में परिवर्तित किया है, उसी प्रकार "विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान" भी लाखों-करोड़ों भारतीय युवाओं को स्वस्थ, नशा मुक्त और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करेगा।

केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खडसे, 26 राज्यों के राज्यपालों और 11 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी इस राष्ट्रव्यापी अभियान में भाग लिया।

नशा विरोधी शपथ लेने वाले लाखों युवाओं की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने उनके नशामुक्त जीवन जीने के संकल्प और अपने विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा समुदायों में नशा मुक्त जीवन का संदेश सक्रिय रूप से प्रसारित करने के प्रयासों की प्रशंसा की। अभियान की महत्वाकांक्षी 100 सप्ताह की कार्य योजना का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि प्रत्येक आगामी रविवार को कला, संस्कृति, खेल और ध्यान से संबंधित विशेष गतिविधियां आयोजित की जाएंगी, जिससे नए प्रतिभागियों को लगातार जोड़ा जा सकेगा।

श्री मोदी ने कहा, "आने वाले 100 रविवार निश्चित रूप से पूरी तरह नशा मुक्त भारत की दिशा में 100 सशक्त कदम साबित होंगे।"

छात्रों, राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के सदस्यों और मेरा युवा भारत (MY Bharat) के स्वयंसेवकों की विशाल ऑनलाइन सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं द्वारा प्रदर्शित जागरूकता, संवेदनशीलता और गंभीर प्रतिबद्धता पर गर्व व्यक्त किया।

युवा पीढ़ी को भारत की 'अमृत पीढ़ी' बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी ऊर्जा, कल्पनाशक्ति और प्रतिभा वर्ष 2047 तक देश के विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

श्री मोदी ने कहा, "देश के उज्ज्वल भविष्य और अपने स्वयं के जीवन के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि आप स्वयं को नशे से पूरी तरह मुक्त रखें।"

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नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के विनाशकारी प्रभावों की तुलना करते हुए प्रधानमंत्री ने आज के युवाओं की स्टार्टअप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, खेल और अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियों का उल्लेख किया और चेतावनी दी कि नशे की लत किस प्रकार एकाग्रता को भटकाती है तथा सपनों को नष्ट कर देती है। परिवारों पर पड़ने वाले इसके गंभीर दुष्प्रभावों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि इससे माता-पिता के सपने टूटते हैं और बुजुर्गों को प्रतिदिन पीड़ा का सामना करना पड़ता है। उन्होंने समाज पर पड़ने वाले इसके व्यापक प्रभावों पर भी प्रकाश डाला। श्री मोदी ने कहा, "जब किसी परिवार या समाज में यह विनाश होता है, तो पूरे राष्ट्र की समग्र शक्ति भी कमजोर हो जाती है।"

युवाओं को नशीले पदार्थों की भ्रामक प्रकृति से आगाह करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि नशीले पदार्थों से मिलने वाला क्षणिक नशे का प्रभाव अंततः उनके करियर और पारिवारिक जीवन के लिए स्थायी नुकसान का कारण बनता है। भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक गुरुओं के गहन ज्ञान, जिसमें श्री गुरु ग्रंथ साहिब की शिक्षाओं का भी उल्लेख शामिल है, का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय समाज ने ऐतिहासिक रूप से चेतना को प्रभावित करने वाले पदार्थों को स्वीकार नहीं किया है। श्री मोदी ने कहा, "हमें किसी भी परिस्थिति में नशे को किसी भी प्रकार की सामाजिक स्वीकृति नहीं देनी चाहिए।"

नशे की लत से मुक्ति के लिए उपलब्ध व्यापक सहायता प्रणालियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सामाजिक सहयोग, योग, ध्यान और आधुनिक पुनर्वास केंद्र नशे की आदत को दूर करने में प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने परिवारों से सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़ी गलत चिंताओं के बजाय चिकित्सा सहायता को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। साथ ही, उन्होंने घरों में खुले संवाद की संस्कृति को बढ़ावा देने की अपील की, ताकि संवेदनशील बच्चे नशे के जाल में फंसने से बच सकें। श्री मोदी ने कहा, "यदि कोई युवा गलती से नशे की लत में पड़ गया है, तो इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि उसके सभी रास्ते हमेशा के लिए बंद हो गए हैं।"

शैक्षणिक क्षेत्र से जुड़े लोगों से विशेष अपील करते हुए प्रधानमंत्री ने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के शिक्षकों से आग्रह किया कि वे अपने नियमित पाठ्यक्रम में नशीले पदार्थों के खतरों से संबंधित चर्चाओं को सक्रिय रूप से शामिल करें और अपने परिसरों में नशा विरोधी विशेष अभियान शुरू करें। नशे की लत से उबर रहे लोगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने समाज से उनके प्रति सम्मान और दूसरा अवसर देने का आह्वान किया तथा उनके अतीत से जुड़े कलंक को पूरी तरह अस्वीकार करने की बात कही। श्री मोदी ने कहा, "नशे की लत से संघर्ष कर बाहर आने वाले युवा कमजोर नहीं होते; वे सच्चे योद्धा होते हैं, जिनका अद्भुत साहस ही उनकी वास्तविक पहचान है।"

अपने संबोधन के समापन पर प्रधानमंत्री ने युवाओं को आश्वस्त किया कि इस महत्वपूर्ण लड़ाई में सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने देश भर में नशीले पदार्थों के खिलाफ की गई अभूतपूर्व कड़ी कार्रवाई, हजारों करोड़ रुपये मूल्य की जब्ती और नशीले पदार्थों के तस्करों तथा कारोबारियों के खिलाफ बढ़ती गिरफ्तारियों का उल्लेख किया। युवा पीढ़ी की दृढ़ता पर अटूट विश्वास व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह राष्ट्रीय अभियान अत्यंत सफल होगा। श्री मोदी ने कहा, "मुझे विश्वास है कि हमारे युवा नशे से मुक्त रहकर अपनी ऊर्जा की रक्षा करेंगे और विकसित भारत के संकल्पों को आगे बढ़ाएंगे।"

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पीके/केसी/एके


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