सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
सतत जलीय कृषि में क्रांति: अनुसूचित जातियों के लिए उद्यम पूंजी कोष द्वारा अनुसूचित जाति के एक उद्यमी को भारत का पहला उन्नत रेनबो ट्राउट आरएएस केंद्र स्थापित करने में मदद
तेलंगाना का रंगा रेड्डी जिला | सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
प्रविष्टि तिथि:
01 AUG 2026 5:38PM by PIB Delhi
नवाचार, उद्यमिता और समय पर संस्थागत सहायता ने कई महत्वाकांक्षी उद्यमियों को ऐसे व्यवसाय स्थापित करने के लिए सशक्त बनाया है जो भारत के आर्थिक विकास और सतत विकास में योगदान देते हैं। ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण स्मार्टग्रीन एक्वाकल्चर प्राइवेट लिमिटेड है। यह कंपनी तेलंगाना के रंगा रेड्डी जिले में स्थित है और इसे अनुसूचित जाति के उद्यमी श्री आदित्य ऋत्विक नर्रा ने शुरू किया। उनकी उद्यमशीलता की यात्रा, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत अनुसूचित जातियों के लिए उद्यम पूंजी कोष (वीसीएफ-एससी) के परिवर्तनकारी प्रभाव को दर्शाती है।
स्मार्टग्रीन एक्वाकल्चर प्राइवेट लिमिटेड ने एडवांस्ड रीसर्क्युलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) का उपयोग करके रेनबो ट्राउट मछली पालन के लिए एक अत्याधुनिक सुविधा केंद्र स्थापित किया है। इस परियोजना में पानी के परिसंचरण की कुल क्षमता 36 लाख लीटर है और वार्षिक मछली उत्पादन क्षमता 360 टन है। कंपनी ने व्यावसायिक स्तर की मशीनरी, प्रक्रिया आधारित कामकाज, प्रजाति-विशिष्ट इंजीनियरिंग और उन्नत जैव सुरक्षा प्रणालियों से लैस खास हैचरी और ग्रो-आउट इकाइयां विकसित की हैं, जिससे यह देश की अग्रणी सतत जलीय कृषि सुविधा केंद्रों में से एक बन गई है। इस परियोजना की क्षमता को ध्यान में रखते हुए, अनुसूचित जातियों के लिए उद्यम पूंजी कोष ने 2022 में इक्विटी और वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय डिबेंचर के माध्यम से 15 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की।

श्री आदित्य ऋत्विक नर्रा, निदेशक
इस वित्तीय सहायता ने कंपनी को भारत की पहली उन्नत आरएएस-आधारित रेनबो ट्राउट फार्मिंग सुविधा स्थापित करने, आधुनिक ग्रो-आउट इकाइयों और हार्वेस्टिंग टैंकों का निर्माण करने, विशेष एक्वाकल्चर उपकरण खरीदने, वैज्ञानिक मछली पालन और निगरानी क्षमताओं को सुदृढ़ करने और जलीय कृषि क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने में मदद की।
इस पहल का असर काफी बड़ा रहा है। आज, इस कंपनी ने 25 लोगों के लिए रोज़गार पैदा किए हैं, 40 करोड़ रुपये की परिसंपत्ति बनाई है, 8 करोड़ रुपये की नेट वर्थ हासिल की है, और अंतर्राष्ट्रीय जलीय कृषि विशेषज्ञों, हैचरी सप्लायर्स, उपकरण प्रदाताओं और मछली बाज़ारों के साथ व्यावसायिक संबंध स्थापित किए हैं। इस परियोजना ने सतत जलीय कृषि पद्धतियों को भी अपनाया है, जो भारत के मछली पालन पारिस्थितिकी तंत्र को मज़बूत करती हैं और साथ ही ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर भी पैदा करती हैं।

आरएएस-आधारित सतत जलीय कृषि और मछली पालन सुविधा
इस यात्रा के बारे में बात करते हुए, श्री आदित्य ऋत्विक नर्रा ने कहा "सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की अनुसूचित जातियों के लिए उद्यम पूंजी कोष (वीसीएफ-एससी) योजना के तहत समय पर मिली वित्तीय सहायता से हम उन्नत और टिकाऊ आरएएस तकनीक पर आधारित एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित कर पाए। इस सहायता से स्मार्टग्रीन एक्वाकल्चर वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन को बढ़ावा देने, ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर पैदा करने और भारत के जलीय कृषि क्षेत्र के लिए एक टिकाऊ भविष्य बनाने में योगदान दे पाया है।"
आरएएस-आधारित सतत जलीय कृषि और मछली पालन सुविधा
स्मार्टग्रीन एक्वाकल्चर प्राइवेट लिमिटेड की सफलता यह दर्शाती है कि अनुसूचित जातियों के लिए उद्यम पूंजी कोष के तहत लक्षित वित्तीय सहायता, अनुसूचित जाति के उद्यमियों को उभरते हुए सेक्टर में अभिनव उद्मय स्थापित करने, स्थायी रोजगार पैदा करने और आधुनिक, तकनीक-आधारित खेती व जलीय कृषि के भारत के विजन में योगदान देने में किस तरह मदद कर रही है। उद्यमिता को बढ़ावा देकर और समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देकर, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय देश भर में अन्वेषकों (इनोवेटर्स) को सशक्त बनाने और स्थायी आजीविका के अवसर पैदा करने का काम निरंतर कर रहा है।
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पीके/केसी/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2293090)
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