पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय
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विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सरकार के प्रयासों के तहत भारत समुद्री क्षमता के विस्तार में तेजी ला रहा है


केन्द्रीय मंत्री श्री सर्बानंद सोणोवाल ने "तेज़ क्रियान्वयन" पर ज़ोर देते हुए वर्ष 2030 के समुद्री लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए "गति और स्केल" से कार्य करने का आह्वान किया

सरकार ने बंदरगाह क्षमता विस्तार, जहाज़ निर्माण और डिजिटलीकरण को विकास के प्रमुख प्रेरक माना है

बंदरगाह विस्तार योजना के तहत वर्ष 2030 तक 700 एमटीपीए से अधिक अतिरिक्त क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है

अधिक मशीनीकरण और निजी क्षेत्र की बढ़ी हुई भागीदारी से वर्ष 2030 तक भारत के बंदरगाह इको सिस्टम में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है

नए औद्योगिक क्लस्टरों के कारण जहाज़ निर्माण उत्पादन में 41% की वृद्धि हुई है, जिससे भारत वैश्विक विनिर्माण के क्षेत्र में एक मजबूत केंद्र के रूप में उभर रहा है

प्रविष्टि तिथि: 30 JUL 2026 8:03PM by PIB Delhi

भारत, विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय(एमओपीएसडब्ल्यू) के रोडमैप के तहत बंदरगाहों, अंतर्देशीय जलमार्गों और जहाज़ निर्माण में निवेश को तेज़ी से बढ़ा रहा है, इसी सिलसिले में क्षमता विस्तार, निजी निवेश, डिजिटलीकरण तथा समुद्री विनिर्माण को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।

पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोणोवाल ने मंत्रालय के 'विकसित भारत' लक्ष्यों  को हासिल करने के लिए उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को प्रमुख परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने तथा निर्धारित समय-सीमा का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने मंत्रालय, प्रमुख बंदरगाहों और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण(आईएडब्ल्यूआई) के अधिकारियों से एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया, जिससे भारत की दीर्घकालिक समुद्री महत्वाकांक्षाओं को सफलतापूर्वक प्राप्त किया जा सके।

यह समीक्षा ऐसे समय में की गई है, जब मंत्रालय ने विभिन्न प्रदर्शन संकेतकों में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है। भारत ने विश्व के सबसे बड़े जहाज़ पुनर्चक्रण करने वाले देश के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है,वहीं दूसरी ओर अंतर्देशीय जलमार्गों के माध्यम से माल परिवहन 200 मिलियन टन के आंकड़े को पार कर चुका है। इस उपलब्धि के साथ ही भारत ने मैरिटाइम इंडिया विजन(एमआईवी) 2030 का लक्ष्य निर्धारित समय से कई वर्ष पहले ही हासिल कर लिया है।

मंत्री श्री सर्बानंद सोणोवाल ने कहा, "ये उपलब्धियां दर्शाती हैं कि जब नीतियां, प्रभावी क्रियान्वयन और टीमवर्क एक साथ आगे बढ़ते हैं, तो भारत क्या हासिल कर सकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में समुद्री क्षेत्र भारत के आर्थिक परिवर्तन के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक बनकर उभरा है। हमें इसी उद्देश्य और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करते रहना होगा, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 'गति और स्केल' के मंत्र का पालन करना होगा तथा यह सुनिश्चित करना होगा कि 'विकसित भारत 2047' के अंतर्गत निर्धारित हरेक लक्ष्य समय से पूरा किया जाए।"

मंत्री श्री सोणोवाल ने अधिकारियों से भविष्य की योजनाओं में वैश्विक व्यवधानों से मिले अनुभवों को शामिल कर संस्थागत क्षमता और लचीलापन को मजबूत करने का भी आह्वान किया। श्री सर्बानंद सोणोवाल ने कहा, "बदलती वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विकास जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण लचीलापन भी है। हरेक चुनौती हमें अधिक मजबूत व्यवस्थाएं विकसित करने, क्षमता बढ़ाने और भारत को भविष्य के लिए तैयार करने का अवसर प्रदान करती हैं। हमारी योजनाएं वैश्विक अनिश्चितताओं का पहले से अनुमान लगाते हुए भारत की विकास यात्रा को निरंतर सही दिशा में आगे बढ़ाने वाली होनी चाहिए।"

वर्ष 2030 तक 700 एमटीपीए क्षमता में बढ़ोतरी

मंत्रालय देश के सबसे बड़े समुद्री बुनियादी ढ़ांचे के विस्तार कार्यक्रमों में से एक पर कार्य कर रहा है, जिसके तहत वर्ष 2030 तक बंदरगाहों की क्षमता में 700-मिलियन टन प्रति वर्ष(एमटीपीए) से अधिक की अतिरिक्त वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। इस कार्यक्रम की प्रमुख परियोजनाओं में वधावन बंदरगाह शामिल है, जिससे वर्ष 2030-31 तक 164-एमटीपीए अतिरिक्त क्षमता जुड़ेगी। इसके अलावा, तूतीकोरिन आउटर हार्बर परियोजना से 39-एमटीपीए तथा कांडला टुना टेकरा टर्मिनल से वर्ष 2027-28 तक 33-एमटीपीए अतिरिक्त क्षमता मिलने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, मंत्रालय का लक्ष्य वर्ष 2030 तक नए बुनियादी ढ़ांचे, मशीनीकरण और निजी निवेश के माध्यम से 682-मिलियन टन प्रति वर्ष(एमटीपीए) की अतिरिक्त क्षमता विकसित करना है। इसमें प्रमुख बंदरगाहों पर 306-एमटीपीए, मुख्य गैर-प्रमुख बंदरगाहों पर 193-एमटीपीए तथा उभरते हुए गैर-प्रमुख बंदरगाहों में मशीनीकरण, परिचालन दक्षता में सुधार, सार्वजनिक-निजी भागीदारी(पीपीपी) और क्षमता विस्तार के माध्यम से अतिरिक्त 183-एमटीपीए क्षमता शामिल है।

मशीनीकरण और पीपीपी से कार्यकुशलता बढ़ेगी

मंत्रालय का लक्ष्य वर्ष 2025-26 में बंदरगाहों पर माल प्रबंधन के मशीनीकरण को 76% से बढ़ाकर वर्ष 2030 तक 93% करना है। इससे परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा तथा जहाज़ों के बंदरगाह पर ठहरने और कार्य पूरा करने में लगने वाला समय कम हो जाएगा। निजी क्षेत्र की भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी(पीपीपी) परियोजनाओं के माध्यम से कार्य़ करने वाले माल का हिस्सा वर्ष 2013-14 के 44% से बढ़कर वर्ष 2030-31 तक 85% होने का अनुमान है। यह बंदरगाह विकास में निजी निवेश और परिचालन विशेषज्ञता को बढ़ावा देने पर सरकार के निरंतर जोर को दर्शाता है। मंत्रालय ने वर्ष 2030 तक समुद्री क्षेत्र में 100% डिजिटलीकरण का लक्ष्य भी निर्धारित किया है। एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से लॉजिस्टिक्स की कार्यकुशलता, पारदर्शिता तथा सेवा वितरण में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है।

जहाज निर्माण को बढ़ावा मिलने से तेजी आई

समीक्षा अवधि के दौरान भारत के जहाज निर्माण क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई। देश में जहाज निर्माण उत्पादन में 41% की वृद्धि हुई, जो वर्ष 2024 में 40,923 ग्रॉस टन(जीटी) से बढ़कर वर्ष 2025 में 57,637 ग्रॉस टन(जीटी) हो गया। दीर्घकालिक विनिर्माण विकास को बढ़ावा देने के लिए, सरकार ने तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और गुजरात में नए ग्रीनफील्ड जहाज निर्माण क्लस्टरों की स्थापना को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की है। इनमें से हरेक की नियोजित क्षमता 12 लाख(1.2 मिलियन) ग्रॉस टन(जीटी होगी। महाराष्ट्र और ओडिशा में भी ऐसे ही जहाज निर्माण क्लस्टरों को अगस्त-सितंबर 2026 तक सैद्धांतिक स्वीकृति मिलने की संभावना है।

तमिलनाडु में जहाज निर्माण क्लस्टर विकसित करने के लिए एचडी ह्युंडई-केएसओई के साथ एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए हैं। साथ ही, इन औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्रों के लिए आवश्यक साझा समुद्री बुनियादी ढ़ांचे के विकास हेतु 100% वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। समीक्षा में यह भी उल्लेख किया गया कि देश में निर्मित जहाजों के मूल्य में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रति जहाज़ औसत अनुबंध मूल्य पहले के ₹41 करोड़ की तुलना में पांच गुना से अधिक बढ़कर ₹212 करोड़ हो गया है, जो यह दर्शाता है कि भारत अब बड़े और तकनीकी रूप से अधिक उन्नत जहाजों के निर्माण में लगातार अधिक सक्षम होता जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री श्री सर्बानंद सोणोवाल ने 'विकसित भारत 2047' के अंतर्गत मंत्रालय की उस कार्ययोजना पर प्रकाश डाला, जिसका उद्देश्य बुनियादी ढ़ांचे को मजबूती प्रदान करना, लॉजिस्टिक्स क्षमता का विस्तार करना, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में तेजी लाकर भारत को विश्व की अग्रणी समुद्री अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करना है।

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पीके/केसी/पीकेपी/


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