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केंद्रीय मंत्री श्री गिरिराज सिंह 3 अगस्त को आईआईटी दिल्ली में हथकरघा प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता केंद्र का उद्घाटन करेंगे


अनुसंधान, नवाचार और डिजिटल प्रौद्योगिकियों से भारत के हथकरघा क्षेत्र को मजबूत करने और इसकी प्रतिस्पर्धात्मकता, स्थिरता और वैश्विक पहुंच को बढ़ावा देने के लिए उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की गई है

प्रविष्टि तिथि: 30 JUL 2026 3:36PM by PIB Delhi

केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह 3 अगस्त 2026 को आईआईटी दिल्ली में हथकरघा प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता केंद्र (सीओई-एचटी) का उद्घाटन करेंगे। प्रौद्योगिकी आधारित, भविष्य के लिए तैयार हथकरघा इकोसिस्‍टम के निर्माण की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। केंद्रीय वस्त्र राज्य मंत्री श्री पबित्रा मार्गेरिटा, वस्त्र सचिव श्रीमती नीलम शमी राव, विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना भी वस्त्र मंत्रालय और आईआईटी दिल्ली के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उद्घाटन समारोह में उपस्थित रहेंगी।

सरकार के 11.99 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित इस उत्कृष्टता केंद्र का उद्देश्य हथकरघा क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता, स्थिरता और वैश्विक पहुंच को मजबूत करने के लिए भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत को अत्याधुनिक अनुसंधान, नवाचार और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के साथ एकीकृत करना है। यह केंद्र हथकरघा क्षेत्र के लिए उन्नत समाधान विकसित करने हेतु शिक्षाविदों, उद्योग जगत, डिजाइनरों, प्रौद्योगिकीविदों, स्टार्टअप्स और हथकरघा संस्थानों को एक साथ लाने के लिए राष्ट्रीय ज्ञान और नवाचार केंद्र के रूप में कार्य करेगा। इसके प्रमुख फोकस क्षेत्रों में करघे का आधुनिकीकरण और एर्गोनॉमिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्थिरता, कार्यात्मक नवाचार, डिजिटल ज्ञान प्रणाली और उद्यमिता शामिल हैं।

अगले पांच वर्षों में, यह केंद्र हथकरघा ज्ञान का एक राष्ट्रीय डिजिटल भंडार विकसित करेगा, एआई-सक्षम उपकरण बनाएगा, बेहतर करघा प्रौद्योगिकियों का विकास करेगा, पेटेंट और अनुसंधान को बढ़ावा देगा, स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करेगा और देश भर में बुनकरों, संकाय सदस्यों और हथकरघा पेशेवरों को प्रशिक्षित करेगा।

हथकरघा प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता केंद्र का शुभारंभ भारत की समृद्ध बुनाई परंपराओं को संरक्षित करते हुए हथकरघा क्षेत्र के आधुनिकीकरण के सरकारी प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देकर, यह केंद्र एक सशक्त इकोसिस्‍टम का निर्माण करेगा जो बुनकरों को सशक्त बनाएगा, उत्पादकता बढ़ाएगा, टिकाऊ प्रथाओं को बढ़ावा देगा और भारतीय हथकरघा को घरेलू और वैश्विक स्तर पर उभरते अवसरों के लिए तैयार करेगा।

भारत का हथकरघा क्षेत्र 35 लाख से अधिक बुनकरों और संबद्ध श्रमिकों को रोजगार प्रदान करता है, इनमें से लगभग 70 प्रतिशत महिलाएं हैं। सदियों पुरानी बुनाई परंपराओं को संरक्षित करते हुए, यह क्षेत्र उत्पादकता, प्रौद्योगिकी अपनाने, पहचान योग्यता, प्रामाणिकता, स्थिरता और बाजार प्रतिस्पर्धा से सम्‍बंधित चुनौतियों का भी सामना करता है। इस केंद्र की स्थापना अनुसंधान, नवाचार, क्षमता निर्माण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए की गई है।

उद्घाटन कार्यक्रम में पांच प्रमुख पहलों का भी शुभारंभ होगा जो परंपरा और प्रौद्योगिकी के संयोजन के केंद्र के दृष्टिकोण को प्रदर्शित करती हैं:

  • हैंडलूम 4.0 - प्रत्येक करघे के लिए एक डिजिटल साथी, जो बुनकरों को उत्पादकता और स्थिरता का आकलन करने में सक्षम बनाता है, सहकारी समितियों और सरकारी एजेंसियों को समय पर सबके लिए सहायता प्रदान करने में मदद करता है।
  • हैंडलूम ई-विद्या , एक समस्या-आधारित डिजिटल शिक्षण और ज्ञान केंद्र है जो हथकरघा इकोसिस्‍टम में बुनकरों, छात्रों और अन्य प्रमुख हितधारकों के लिए व्यावहारिक, सुनियोजित समाधान प्रदान करता है।
  • हैंडलूमएक्स , हथकरघा मूल्य श्रृंखला में स्टार्टअप और नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए एक एक्सेलेरेटर और इनक्यूबेशन प्लेटफॉर्म है।
  • कलागृह हैंडलूम स्टूडियो (जेनजेड डिजाइन स्टूडियो) का उद्देश्य डिजिटल दृश्‍यता, सुविधास्‍वरूप और उत्पाद प्रमाणीकरण के माध्यम से हथकरघा को अगली पीढ़ी के उपभोक्ताओं से जोड़ना है।
  • थ्रेड्स ऑफ वैलोर एक ऐसी पहल है जो पुनर्चक्रित रक्षा वस्त्रों को प्रीमियम हथकरघा उत्पादों में परिवर्तित करके चक्रीयता को बढ़ावा देती है।

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पीके/केसी/वीके/एम

 


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