रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय : उर्वरक विभाग
सरकार ने इस साल खरीफ फसल के लिए सभी राज्यों में उर्वरकों की समय पर पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की
सरकार ने डीएपी की कीमत 1,350 रूपए प्रति 50 किलो बैग पर बनाए रखने के लिए विशेष वित्तीय सहायता प्रदान की
प्रविष्टि तिथि:
24 JUL 2026 3:16PM by PIB Delhi
सरकार ने दोहराया है कि प्रत्येक फसल मौसम के दौरान देश भर में उर्वरकों की समय पर पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक सुदृढ़ तंत्र स्थापित किया गया है। अग्रिम योजना, निरंतर निगरानी और राज्य सरकारों के साथ समन्वित कार्रवाई के माध्यम से चालू खरीफ 2026 के दौरान सभी प्रमुख उर्वरकों जैसे यूरिया, डीएपी, एमओपी और एनपीकेएस की पर्याप्त उपलब्धता राज्यों में बनाए रखी गई है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (डीए एंड एफडब्ल्यू) उर्वरकों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों के परामर्श से प्रत्येक फसल ऋतु से पहले राज्यवार और माहवार उर्वरक आवश्यकताओं का आकलन करता है। इन अनुमानों के आधार पर, उर्वरक विभाग मासिक आपूर्ति योजनाओं के माध्यम से उर्वरक आपूर्ति आवंटित करता है और उपलब्धता की निरंतर निगरानी करता है। सब्सिडी वाले उर्वरकों की आवाजाही को एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली (आईएफएमएस) के माध्यम से ट्रैक किया जाता है। दूसरी ओर राज्य सरकार के कृषि अधिकारियों के साथ नियमित साप्ताहिक समीक्षा बैठकें आपूर्ति सम्बंधी उभरते मुद्दों को हल करने में सहायक होती हैं। राज्यों के भीतर वितरण का प्रबंधन सम्बंधित राज्य सरकारों द्वारा किया जाता है। 01.04.2026 से 21.07.2026 की अवधि के दौरान राज्यों में इन उर्वरकों की आवश्यकता, उपलब्धता, बिक्री और अंतिम स्टॉक से संबंधित जानकारी नीचे विस्तार से दी गई है:-
अनुलग्नक
इसके अलावा, सरकार ने फॉस्फेट और पोटैशियम उर्वरकों के लिए 01.04.2010 से पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना लागू की है। एनबीएस नीति के तहत, फॉस्फेट और पोटैशियम उर्वरकों के मूल्य में पर कोई नियंत्रण नहीं है और कंपनियां अपने व्यवसाय की आवश्यकताओं के अनुसार उचित स्तर पर मूल्य तय करने के लिए स्वतंत्र हैं। किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एनबीएस सब्सिडी, अधिसूचित फॉस्फेट और पोटैशियम उर्वरकों की बिक्री पर निर्माता/आयातकर्ता को, उनके पोषक तत्वों की मात्रा के आधार पर, फसल के मौसम में उनके पीओएस पर दी जाती है। किसानों के लिए उर्वरक किफायती बनाने के उद्देश्य से फॉस्फेट और पोटैशियम उर्वरकों के लिए एनबीएस दरें तय करते समय प्रमुख उर्वरकों और कच्चे माल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखा जाता है।
प्रमुख उर्वरक डीएपी को 1350 रुपये प्रति 50 किलोग्राम बैग की किफायती कीमत पर उपलब्ध कराने के लिए, आयातित और घरेलू डीएपी तथा आयातित टीएसपी पर एनबीएस सब्सिडी के अतिरिक्त विशेष प्रावधान किए गए हैं। इन प्रावधानों में कारखाने से खेत तक होने वाली लागत, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि/कमी के कारण होने वाला लाभ/हानि, एमआरपी में शामिल जीएसटी घटक का प्रावधान और शुद्ध एमआरपी (एमआरपी-जीएसटी) के 4प्रतिशत की दर से उचित प्रतिफल का प्रावधान शामिल है। उर्वरकों की कीमतों को स्थिर रखने के लिए ये प्रावधान लागू किए गए हैं।
सरकार मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना के माध्यम से उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देती है। उत्पादकता और मृदा उर्वरता में सुधार के लिए संतुलित और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा देने हेतु सभी कृषि जोतों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड (एसएचसी) प्रदान करने के लिए यह योजना 2014-15 से लागू की जा रही है।
- मिट्टी के नमूनों को मानक प्रक्रियाओं के अनुसार संसाधित किया जाता है और पीएच, विद्युत चालकता, कार्बनिक कार्बन, उपलब्ध नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम, सल्फर और सूक्ष्म पोषक तत्वों (जिंक, कॉपर, आयरन, मैंगनीज और बोरॉन) जैसे मापदंडों के लिए उनका विश्लेषण किया जाता है।
- वर्ष 2014-15 से अब तक देश भर में 26.09 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी/वितरित किए जा चुके हैं।
- उपर्युक्त राज्य स्तरीय मृदा प्रयोगशालाओं के अतिरिक्त, विद्यालय मृदा स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत देश में 1020 विद्यालय स्तरीय लघु मृदा प्रयोगशालाएं भी स्थापित की गई हैं।
- इस योजना के तहत, इसकी शुरुआत से अब तक 2153.29 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की जा चुकी है।
- देश भर में मृदा स्वास्थ्य कार्ड संबंधी सिफारिशों पर 93781 किसान प्रशिक्षण, 6.80 लाख प्रदर्शन और 7425 किसान मेले/अभियान आयोजित किए गए हैं।
- इस योजना के अंतर्गत सूक्ष्म पोषक तत्वों के संवर्धन एवं वितरण के लिए 1351166 हेक्टेयर क्षेत्र भी शामिल है।
- नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (एनपीसी) ने 2017 में मध्य प्रदेश सहित 19 राज्यों के 76 जिलों में 'भारत में एसएचसी की त्वरित डिलीवरी के लिए मृदा परीक्षण अवसंरचना' नामक एक अध्ययन किया। इसमें 170 मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं और 1700 किसानों को शामिल किया गया। एसएचसी की सिफारिशों के अनुसार उर्वरक और सूक्ष्म पोषक तत्वों के प्रयोग के परिणामस्वरूप, रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में 8-10 प्रतिशत की कमी पाई गई। एसएचसी के अनुसार उर्वरक और सूक्ष्म पोषक तत्वों के प्रयोग से फसलों की उपज में कुल मिलाकर 5-6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
- हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंधन संस्थान (मैनेज) द्वारा मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना (नवंबर 2017) का प्रभाव अध्ययन किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 62.8 प्रतिशत किसान मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना में दी गई सिफारिशों के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करते हैं। कम उर्वरक उपयोग के कारण प्रति एकड़ लागत में 4 से 10 प्रतिशत की कमी आई। अधिकांश फसलों की पैदावार में मामूली वृद्धि हुई। कुल मिलाकर, धान किसानों ने यूरिया का उपयोग 9 प्रतिशत और डायअमोनियम फॉस्फेट (डीएपी)/सिंगल सुपर फॉस्फेट का उपयोग 7 प्रतिशत कम किया, जबकि पोटेशियम का उपयोग 20 प्रतिशत बढ़ा दिया।
- धान और कपास में उर्वरकों, विशेषकर यूरिया और डीएपी के उपयोग में काफी कमी आई है। इसके परिणामस्वरूप प्रति इकाई क्षेत्र में खेती की लागत में कमी आई।
इसके अलावा, नीति आयोग ने पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना पर एक अध्ययन किया है। मूल्यांकन में पता चला है कि योजना में कई वैचारिक खूबियां हैं। इनमें पोषक तत्वों से जुड़ी सब्सिडी के माध्यम से संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देना, 28 उर्वरक श्रेणियों तक कवरेज का विस्तार और यूरिया की तुलना में अपेक्षाकृत कम सब्सिडी आवश्यकताएं शामिल हैं। अध्ययन में यह भी बताया गया है कि एनबीएस ढांचे में यूरिया को शामिल करके, परिचालन प्रक्रियाओं को और सुव्यवस्थित करके, आयात पर निर्भरता कम करके और छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए इसे वहनीय बनाकर योजना की प्रभावशीलता को और मजबूत करने की गुंजाइश है।
माननीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
cmc.fertilizers[at]gmail[dot]com
पीके/केसी/वीके/एम
(रिलीज़ आईडी: 2289023)
आगंतुक पटल : 57