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व्‍यापार और निवेश विधि केंद्र ने भारतीय एमएसएमई का वैश्विक बाजारों में विस्तार करने में मदद करने के लिए एक गाइडबुक का विमोचन किया

प्रविष्टि तिथि: 16 JUL 2026 8:15PM by PIB Delhi

व्‍यापार और निवेश विधि केंद्र (सीटीआईएल), भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी) ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के सहयोग से आज नई दिल्ली में 'गोइंग ग्लोबल: ए प्रैक्टिकल गाइड फॉर इंडियन एमएसएमई' नामक मार्गदर्शिका (गाइडबुक) का विमोचन किया। सीआईआई के प्रतिनिधियों ने गाइडबुक के बारे में जानकारी दी। इसे एमएसएमई की सहायता के लिए एक-स्टॉप व्यावहारिक संसाधन के रूप में तैयार किया गया है, ताकि वे निर्यात अवसरों की पहचान कर सकें, बाजार पहुंच आवश्यकताओं को समझ, आसानी से उपलब्ध व्यापार से संबंधित जानकारी के साधनों का लाभ उठा, अंतर्राष्ट्रीय मानकों और स्थिरता आवश्यकताओं का अनुपालन कर और निर्यात के लिए तैयार हो सकें।

यह गाइडबुक एमएसएमई के समक्ष आने वाली आम चुनौतियों का समाधान करती है, जिसमें बाजार की जानकारी तक सीमित पहुंच, विदेशी खरीदारों के बारे में कम जानकारी, अंतर्राष्ट्रीय मानकों और प्रमाणन का अनुपालन करने में कठिनाइयां और मूल्य प्रतिस्पर्धा बनाए रखना शामिल है। इसमें बाजार विश्लेषण को सरल बनाकर, मानकों और प्रमाणन आवश्यकताओं को समझा कर, खरीदारों की पहचानने में मदद करके और बाजार अनुसंधान की लागत को कम करने वाले भरोसेमंद, आसानी से उपलब्ध साधनों के बारे में बता कर एक व्यावहारिक रोडमैप उपलब्‍ध कराया गया है। इस प्रकाशन का उद्देश्य एमएसएमई को सही जानकारी के साथ व्यावसायिक निर्णय लेने और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अधिक प्रभावी तरीके से शामिल होने में मदद करना है।

विमोचन के बाद, श्री सुमंता चौधरी द्वारा संचालित एक पैनल चर्चा में सीटीआईएल के वरिष्‍ठ शोधार्थी श्री रिधीश राजवंशी, नीती अपैरेल्स के प्रबंध निदेशक और एफआईएसएमई के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अनिमेष सक्सेना और अराइना ग्रुप के अध्यक्ष श्री नलिन कोहली शामिल हुए। इस दौरान भारत के मुक्त व्यापार समझौतों के तहत अधिमान्य मूल नियमों और सहयोग तंत्र के प्रभावी उपयोग के माध्यम से भारतीय एमएसएमई का अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में विस्तार करने के अवसरों के बारे में विचार-विमर्श किया गया। पैनलिस्टों ने आशाजनक निर्यात गंतव्यों की पहचान करने, अंतर्राष्ट्रीय मानकों और प्रमाणन आवश्यकताओं को समझने, वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए उत्पादों की स्थिति और विविधीकरण तथा मूल्य संवर्धन के माध्यम से प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने की रणनीतियों पर भी चर्चा की।

कार्यक्रम में सीटीआईएल की सलाहकार सुश्री तन्वी प्रवीण ने ट्रेड रेमेडीज़ एडवाइजरी सेल (टीआरएसी) पर एक प्रस्तुति भी दी। प्रस्तुति में व्यापार सुधारात्‍मक कानूनों के बारे में जागरूकता फैलाकर और अनुचित व्यापार तरीकों और आयात वृद्धि से संबंधित मुद्दों पर मार्गदर्शन प्रदान करके घरेलू उद्योग की सहायता करने में टीआरएसी की भूमिका के बारे में बताया गया।

इस कार्यक्रम में नीति निर्माता, उद्योग प्रतिनिधि, व्यापार विशेषज्ञ और एमएसएमई से संबद्ध लोग एकजुट हुए, ताकि भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने के लिए व्यावहारिक रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया जा सके।

उद्घाटन सत्र की शुरुआत व्‍यापार और निवेश विधि केंद्र के प्रमुख डॉ. जेम्स जे. नेदुम्पारा  के स्वागत भाषण से हुई, जिसके बाद सीआईआई के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नीति प्रभाग में प्रधान सलाहकार श्री सुमंता चौधरी ने कार्यक्रम की पृष्ठभूमि के बारे में बात की। सत्र में फेडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो एंड स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एफआईएसएमई) के महासचिव श्री अनिल भारद्वाज ने भी अपने विचार रखे। वाणिज्य विभाग में अपर सचिव, श्री अमिताभ कुमार ने विशेष संबोधन दिया।

कार्यक्रम का समापन एक इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जिससे प्रतिभागियों को निर्यात तैयारी, मानकों के अनुपालन और बाजार पहुंच जैसे व्यावहारिक पहलुओं पर नीति निर्माताओं और उद्योग विशेषज्ञों के साथ बातचीत करने का मौका मिला। समापन भाषण में संयुक्त उद्यमों, व्यापार प्रदर्शनियों में भागीदारी, मजबूत संस्थागत सहयोग और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में उनके एकीकरण को सुविधाजनक बनाने के लिए गाइडबुक में दिए गए साधनों के प्रभावी उपयोग के माध्‍यम से एमएसएमई के बीच विश्वास और साझेदारी बनाने के महत्व पर जोर दिया गया।

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पीके/केसी/एमके


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