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भारत के कौशल पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाना


कक्षा से लेकर उद्यम तक सरकार की पहलें

प्रविष्टि तिथि: 15 JUL 2026 5:09PM by PIB Delhi

भारत का प्रतिभा पारिस्थितिकी तंत्र संपूर्ण जीवन वाले दृष्टिकोण के साथ विकसित हो रहा है जो शिक्षा, कौशल, रोजगार और उद्यमिता को एकीकृत कर रहा है। नीतिगत सुधार और प्रमुख कार्यक्रम स्कूली स्तर से ही पाठ्यक्रम में व्यावसायिक शिक्षा को शामिल कर रहे हैं, और साथ ही निरंतर कौशल विकास और जीवन भर सीखते रहने  को बढ़ावा दे रहे हैं। यह तंत्र कार्यबल की बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए उद्योग की प्रासंगिकता, डिजिटल प्रौद्योगिकियों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भविष्य के लिए जरूरी दक्षताओं पर अधिक जोर देता है। शिक्षा जगत, उद्योग, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों के साथ मज़बूत साझेदारी से गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और रोज़गार के अवसरों तक पहुंच बढ़ रही है। महिलाओं, कारीगरों, ग्रामीण समुदायों और अन्य वंचित समूहों के लिए विशेष पहलें कौशल विकास को अधिक समावेशी बना रही हैं। ये सभी प्रयास मिलकर एक सुदृढ़ और नवाचार-आधारित कार्यबल तैयार कर रहे हैं, जो आर्थिक बदलाव, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और सतत विकास में सहयोग करने के लिए तैयार है।

 भारत के प्रतिभा पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाना

विकसित भारत 2047 की दिशा में भारत की यात्रा एक सुदृढ़ प्रतिभा पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण पर आधारित है। आर्थिक विकास को बनाए रखने, प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और समान विकास सुनिश्चित करने के लिए कुशल, उपयोगी और नवोन्मेषी कार्यबल आवश्यक है। सरकार ने प्रतिभा विकास को एक निरंतर प्रक्रिया मानकर 'जीवन-चक्र दृष्टिकोण' को अपनाया है। इसमें स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा, कार्यबल का कौशल विकास, अप्रेंटिसशिप, उद्यमिता विकास, महिला-केंद्रित कौशल और आजीवन सीखना शामिल है। इन सभी पहलों का उद्देश्य एक ऐसा प्रतिभा तंत्र बनाना है जो समावेशी और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप हो।

रोजगार की क्षमता और कार्यबल की उत्पादकता बनाए रखने के लिए जीवन के हर पड़ाव पर कौशल विकास महत्वपूर्ण है। यह भारत को दुनिया के प्रमुख प्रतिभा केंद्र (हब) के रूप में स्थापित करता है, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक विकास और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता बढ़ती है।

हाल ही में, वैश्विक श्रम बाजारों में तेजी से हो रहे बदलावों के कारण निरंतर कौशल विकास की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटलीकरण, जलवायु परिवर्तन और जनसांख्यिकीय बदलाव काम करने के तरीके को बदल रहे हैं।  इन रुझानों के कारण नए और बदलते कौशल की मांग बढ़ रही है।

भारत की बेहतर कौशल तत्परता, 2047 तक रोजगार के साथ शत-प्रतिशत कुशल श्रमशक्ति हासिल करने के अवसर को और बढ़ाती है। इंडिया स्किल्स रिपोर्ट 2026 से पता चलता है कि रोजगार योग्यता 2020 के 46 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 56.4 प्रतिशत हो गई है। यह लक्षित कौशल विकास और समावेशी पहलों के प्रभाव को दिखाता है। मजबूत हायरिंग सेंटिमेंट से भविष्य के लिए कार्यबल की बढ़ती मांग का भी संकेत मिलता है।

कौशल विकास को प्राथमिकता

कौशल विकास अब भारत के आर्थिक और सामाजिक बदलाव का एक अहम आधार बन गया है। यह लोगों को बदलते श्रम बाजारों और नई प्रौद्योगिकियों के अनुरूप ढलने के लिए आवश्यक क्षमताएं प्रदान करता है। यह भारत को अपनी जनसांख्यिकीय बढ़त का लाभ उठाने, वैश्विक कार्यबल की मांग को पूरा करने और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को बनाए रखने में भी मदद करता है।

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  • आर्थिक विकास को बढ़ावा देना: कौशल और ज्ञान आर्थिक विकास व सामाजिक प्रगति के मूलभूत कारक बने हुए हैं। रोजगार योग्यता और उत्पादकता को बढ़ाकर, कौशल विकास गरीबी कम करने, टिकाऊ उद्यम के निर्माण और व्यापक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे उत्पादकता बढ़ती है, रोज़गार के अवसर बढ़ते हैं और आय में वृद्धि होती है, जिससे एक सकारात्मक चक्र बनता है।
  • वैश्विक स्तर पर उभरती कौशल आवश्यकताओं को पूरा करना: तीव्र तकनीकी और जनसांख्यिकीय बदलाव दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं और श्रम बाजारों को नया आकार दे रहे हैं। ऑटोमेशन, जलवायु परिवर्तन, डिजिटलीकरण और जनसांख्यिकीय बदलावों के परिदृश्य में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए, हमारे युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करने हेतु आवश्यक कौशल सिखाना और उनके कौशल को निरंतर उन्नत करना बहुत जरूरी है। आईएमएफ के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रीपेयर्डनेस सूचकांक में भारत का स्कोर 49.3 रहा, जो उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के 42.1 के औसत से अधिक है। यह दर्शाता है कि भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाने और उसका लाभ उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
  • जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाना: भारत की 54 प्रतिशत से अधिक आबादी 25 साल से कम आयु की है। 62 प्रतिशत से अधिक कामकाजी आयु वर्ग (15–59 साल) के हैं। उम्मीद है कि यह जनसांख्यिकीय बढ़त लगभग 2040 तक बनी रहेगी। इसलिए, इस अवसर का लाभ उठाने और भविष्य के अनुरूप कार्यबल तैयार करने के लिए विशेष रूप से कौशल विकास पर ध्यान देना जरूरी है।  
  • वैश्विक स्तर पर प्रतिभा की मांग को पूरा करना: 2030 तक भारत में 4.5 करोड़ कुशल पेशेवर अतिरिक्त संख्या में होंगे। साथ ही, वैश्विक स्तर पर कामगारों की कमी 8.5 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। यह भारत के लिए कुशल प्रतिभा की बढ़ती वैश्विक मांग को पूरा करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इसलिए, कौशल विकास के लिए जीवन-चक्र दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।

कम उम्र से ही कौशल विकसित करना

कम उम्र से ही कौशल विकास जीवन भर काम करने की क्षमता, कार्यबल में भागीदारी और उद्योग के अनुरूप कौशल की नींव रखता है। सरकार ने कम उम्र से ही कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं।

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समग्र शिक्षा योजना

समग्र शिक्षा, प्री-स्कूल से बारहवीं कक्षा तक की स्कूली शिक्षा के लिए एक व्यापक कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य समान पहुंच और सीखने के परिणामों के माध्यम से स्कूलों की कार्यक्षमता को बेहतर बनाना है। यह योजना स्कूली शिक्षा को एक निरंतर प्रक्रिया के रूप में देखती है और शिक्षा के लिए सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी-4) के अनुरूप है। दिसंबर 2025 तक, इस योजना ने कौशल शिक्षा के क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल की हैं:

  • कुल 138 जॉब रोल्स को स्वीकृति दी गई है और 25,140 स्कूलों में कौशल विकास कार्यक्रम शुरू किए गए हैं, जिसमें 35.5 लाख से अधिक छात्र जुड़े हैं।
  • इस योजना के अंतर्गत हब एंड स्पोक मॉडल को अपनाया गया है, जिससे आस-पास के स्कूलों (स्पोक स्कूलों) के छात्र कौशल प्रशिक्षण के लिए हब स्कूलों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं का उपयोग कर सकें। 975 स्पोक स्कूल बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाते हैं और देश भर में कौशल प्रशिक्षण की पहुंच बढ़ाते हैं।
  • स्कूलों में कौशल प्रशिक्षण के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) ने 1,200 व्यावसायिक कौशल प्रयोगशालाएं स्थापित की हैं। ये प्रयोगशालाएं 400 जवाहर नवोदय विद्यालयों (जेएनवी) और 200 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) में हैं।

पीएम श्री स्कूल

2022 में शुरू किए गए पीएम श्री स्कूल, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने के लिए मौजूदा स्कूलों को सुदृढ़ बनाते हैं। ये स्कूल आस-पास के स्कूलों को मार्गदर्शन देने वाले आदर्श संस्थानों के तौर पर काम करते हैं। इनका उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना और ऐसे स्टूडेंट्स तैयार करना है जिनका सर्वांगीण विकास हो और जिनमें 21वीं सदी के कौशल ​​हों।

  • जून 2026 तक, 776 जिलों में 14,500 के लक्ष्य के मुकाबले 13,092 पीएम श्री स्कूल विकसित किए जा चुके हैं।

अटल टिंकरिंग प्रयोगशालाएं

'भारत में दस लाख बच्चों को आधुनिक नवोन्मेषी (इनोवेटर) के रूप में विकसित करने' के दृष्टिकोण के साथ, अटल इनोवेशन मिशन ने स्कूलों में अटल टिंकरिंग प्रयोगशालाएं (एटीएल) स्थापित कीं। यह छात्रों के बीच जिज्ञासा, रचनात्मकता और नवाचार-उन्मुख कौशल को बढ़ावा देता है। जून 2026 तक:

•  722 ज़िलों में 10,000 से अधिक अटल टिकरिंग प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं।

और, 1.1 करोड़ से अधिक छात्र इससे जुड़े हुए हैं।

एआई तत्परता के लिए कौशल विकास (एसओएआर)

एआई तत्परता के लिए कौशल विकास (एओएआर) का उद्देश्य छठी से बारहवीं कक्षा के छात्रों और शिक्षकों को कोर्स के माध्यम एआई कौशल से लैस करना है। ये कोर्स माइक्रोसॉफ्ट, एचसीएल टेक्नोलॉजीज  और नैसकॉम की साझेदारी में कराए जाते हैं।

  • फ़रवरी 2026 तक, 'एआई टू अवेयर', 'एआई टू एस्पायर', 'एआई टू एक्वायर' और 'एआई फॉर एजुकेटर' में 2.30 लाख छात्र नामांकन करवा चुके हैं।

राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ)

राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) एक योग्यता आधारित फ़्रेमवर्क है जो सीखने के परिणामों के आधार पर योग्यता को आठ स्तरों में व्यवस्थित करता है। यह औपचारिक, गैर-औपचारिक और अनौपचारिक शिक्षा के माध्यम से प्राप्त ज्ञान, कौशल, योग्यता, जिम्मेदारी और व्यावहारिक अनुभव को मान्यता प्रदान करता है। यह फ़्रेमवर्क अकादमिक शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण को एकीकृत करता है। यह स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा और कौशल विकास के बीच क्रेडिट-आधारित प्रगति को भी संभव बनाता है, जिससे जीवन भर सीखने और करियर में आगे बढ़ने के अवसरों को बढ़ावा मिलता है।

युवा एआई फॉर ऑल

इंडियाएआई मिशन के तहत, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने नवंबर 2025 में ‘युवा एआई फॉर ऑल’ की शुरुआत की है। यह 4.5 घंटे का एक निःशुल्क कोर्स है जिसे स्वयं की सुविधा अनुसार किया जा सकता है। इसका उद्देश्य सभी नागरिकों, विशेषकर युवाओं को एआई की बुनियादी जानकारी देना है। फ्यूचरस्किल्स प्राइम और आईजीओटी कर्मयोगी पर उपलब्ध, इस कोर्स में व्यावहारिक ज्ञान मिलता है और पूरा करने पर भारत सरकार का सर्टिफिकेट दिया जाता है।

  • 8 जुलाई 2026 तक, कुल नामांकन 85.27 लाख था।

 

विद्यांजलि कार्यक्रम

विद्यांजलि एक ऐसी पहल है जो समुदायिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी से स्कूलों को उन्नत बनाती है। यह स्कूलों को स्वयंसेवकों से जोड़ता है, जिनमें पेशेवर, सेवानिवृत्त शिक्षक, सरकारी अधिकारी, एनजीओ, सीएसआर भागीदार और प्रवासी भारतीय शामिल हैं। स्वयंसेवक मार्गदर्शन, करियर परामर्श, कौशल विकास और अन्य शैक्षिक सहायता के माध्यम से योगदान देते हैं।

  • जून 2026 तक, 8,44,925 स्कूलों को इसमें शामिल किया गया है।
  • इस पहल के तहत 5,62,296 स्वयंसेवकों और 2,705 सीएसआर संगठनों व गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को पंजीकृत किया गया है।
  • इस कार्यक्रम से 2.04 करोड़ से अधिक छात्र लाभान्वित हुए हैं।

कार्यबल के कौशल को उन्नत करना और उन्हें नए कौशल सिखाना

श्रम बाजार में तेजी से हो रहे बदलावों के कारण, नए पेशेवरों की मदद करने और करियर के बीच में बदलाव को सक्षम करने के लिए निरंतर कौशल को उन्नत करना (अपस्किलिंग) और नए कौशल सिखाना (री-स्किलिंग) आवश्यक हो गया है। विशेष उपाय कार्यबल को रोजगार योग्य और उद्योग के लिए तैयार रखते हैं।

स्किल इंडिया मिशन

स्किल इंडिया मिशन (एसआईएम) कामकाजी उम्र के लोगों के लिए एनएसक्यूएफ के अनुसार स्किलिंग, अपस्किलिंग और रीस्किलिंग की सुविधा प्रदान करता है। इसका रोजगार मेलों और स्किल इंडिया डिजिटल हब के माध्यम से देश भर में प्रसार किया जाता है। कौशल विकास केंद्रों (एसडीसी) के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से भी प्रशिक्षण प्रदान किए जाते हैं। मिशन के तहत प्रमुख योजनाओं में शामिल हैं:

  • प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई),
  • जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस),
  • राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना (एनएपीएस), और
  • औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (सीटीएस)

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) एक प्रमुख अल्पकालिक कौशल पहल है। अपने चार चरणों के दौरान, यह एक पायलट प्रोत्साहन-आधारित प्रमाणन पहल से आगे बढ़कर एक बड़े पैमाने के, मांग-आधारित और परिणाम-केंद्रित कौशल नेटवर्क में बदल गई है। प्रमुख उपलब्धियां नीचे दी गई हैं:

  • 30 जून 2026 तक, पीएमकेवीवाई 4.0 के तहत 36 राज्यों और 738 जिलों में 36 क्षेत्रों के 28.17 लाख उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया गया है।
  • 1 अप्रैल 2024 और 31 मार्च 2026 के बीच 21.91 लाख से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया गया। प्रमुख क्षेत्रों में आईटी-आईटीईएस, एयरोस्पेस और एविएशन, कृषि, रबर, चमड़ा, अपैरल, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंस्ट्रक्शन, पर्यटन एवं आतिथ्य शामिल हैं।
  • इस योजना के तहत उद्योग की उभरती जरूरतों को पूरा करने के लिए 68 विशेष कोर्स और 189 फ्यूचर-स्किल जॉब रोल्स शुरू किए गए हैं।
  • पीएमकेवीवाई 4.0 को देश भर में 16,900 से अधिक संस्थान लागू कर रहे हैं, जिनमें 6,800 से ज़्यादा स्किल हब शामिल हैं।

जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस) एनजीओ के माध्यम से नव-साक्षरों और स्कूल छोड़ चुके लोगों को समुदाय-आधारित, अनौपचारिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करता है, जिसे शत-प्रतिशत सरकारी वित्तपोषण प्राप्त है। 31 मार्च 2026 तक, इस योजना की महत्वपूर्ण उपलब्धियां इस प्रकार हैं:

  • 2018 से अब तक 36.52 लाख लाभार्थियों को प्रशिक्षित किया गया है।
  • 4.8 लाख आदिवासी लाभार्थियों ने प्रशिक्षण पूरा कर लिया है।
  • जेएसएस के लाभार्थियों में 82 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं।
  • एनसीवीईटी द्वारा मान्यता प्राप्त एनएसक्यूएफ लेवल 3, 3.5 और 4 के 83 कोर्स शुरू किए गए हैं।
  • स्थानीय स्तर पर प्रासंगिक पाठ्यक्रमों (कोर्स) में सिलाई, कढ़ाई, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण और स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं।
  • दिसंबर 2024 से, जेएसएस उत्पादों को उद्यमकार्ट पोर्टल के माध्यम से बेचा जा रहा है, जिससे कारीगरों और सूक्ष्म उद्यमियों की बाज़ार तक पहुंच आसान हुई है।

राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना (एनएपीएस) 'अर्न व्हाइल यू लर्न' (सीखते हुए कमाएं) मॉडल के ज़रिए उद्योग-आधारित शिक्षुता प्रशिक्षण को बढ़ावा देती है। एनएपीएस 2.0 के अंतर्गत, सरकार स्टाइपेंड का 25 प्रतिशत सीधे प्रशिक्षुओं के बैंक खाते में जमा करती है, जो 1,500 रुपये प्रति माह तक हो सकता है और शेष 75 प्रतिशत स्टाइपेंड नियोक्ता द्वारा दिया जाता है। 31 मार्च 2026 तक, इस योजना के महत्वपूर्ण योगदान इस प्रकार हैं:

  • 2016 से ऑटोमोटिव, आईटी-आईटीईएस, इलेक्ट्रॉनिक्स, खुदरा और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में 54.41 लाख से अधिक प्रशिक्षुओं  (अप्रेंटिस) को काम पर रखा गया है।
  • वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग 12.35 लाख प्रशिक्षुओं को नियुक्त किया गया, जबकि 6.42 लाख ने कार्यस्थल पर प्रशिक्षण पूरा किया।
  • 31 मार्च 2026 में लॉन्च होने के बाद से 1,32,000 दक्षता प्रमाण-पत्र (सीओपी) जारी किए गए हैं।
  • 1 अप्रैल 2025 और 31 मार्च 2026 के बीच 40.10 लाख प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से 562.75 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की गई

शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (सीटीएस) उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप कुशल कार्यबल विकसित करने के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के माध्यम से दीर्घकालिक व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करती है। मार्च 2026 तक की प्रमुख उपलब्धियां हैं:

  • 13,888 आईटीआई के माध्यम से 169 पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण दिया जाता है।
  • पिछले 3 सालों में उद्योग की जरूरतों के अनुरूप 14 नए सीटीएस पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं और 22 मौजूदा पाठ्यक्रमों को संशोधित किया गया है।
  • आईटीआई में नामांकन वित्तीय वर्ष 2022–23 के 12.51 लाख से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025–26 में 14.70 लाख हो गया।                                       

पीएम-सेतु

2025 में शुरू की गई पीएम-सेतु (उन्नत आईटीआई के माध्यम से प्रधानमंत्री कौशल विकास और रोजगार योग्यता परिवर्तन) योजना का उद्देश्य है:

  • 1,000 सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को आधुनिक, उद्योग-अनुकूल कौशल विकास संस्थानों में उन्नत किया जाएगा। इन आईटीआई को हब-एंड-स्पोक क्लस्टर मॉडल में उन्नत किया जाएगा, जिसमे 200 हब आईटीआई से 800 स्पोक आईटीआई जुड़े होंगे।
  • कौशल विकास के लिए 5 राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
  • पांच साल की अवधि में 20 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा।

सेवा क्षेत्र, मल्टी-स्किल कोर्स और आजीविका संवर्धन से संबंधित पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। यह रोजगार योग्यता में सुधार करता है और व्यावसायिक प्रशिक्षण को वर्तमान और भविष्य के जॉब मार्केट के लिए प्रासंगिक बनाता है।

  • मई 2026 तक, 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने राज्य संचालन समितियां गठित कर ली हैं। इनमें से 12 ने पीएम-सेतु के तहत उद्योग भागीदारों को शामिल करने के लिए प्रस्तावों के लिए अनुरोध (आरएफपी) जारी किए हैं।
  • आंध्र प्रदेश, विशाखापत्तनम आईटीआई क्लस्टर के माध्यम से पीएम-सेतु को लागू करने वाला पहला राज्य बन गया
  • ओडिशा, गुजरात और तेलंगाना में आईटीआई क्लस्टर्स के लिए 1,237.58 करोड़ रुपये की रणनीतिक निवेश योजनाओं (एसआईपी) को मंजूरी मिलने के साथ ही इस योजना का और विस्तार हुआ है।

फ्यूचरस्किल्स पिलर

इंडियाएआई मिशन के अंतर्गत फ्यूचरस्किल्स पिलर का उद्देश्य एक मजबूत एआई प्रतिभा पारिस्थितिकी तंत्र बनाना और पूरे भारत में एआई शिक्षा तक पहुंच बढ़ाना है। यह अंडरग्रेजुएट से लेकर पीएचडी स्तर तक के छात्रों की मदद करता है। यह पहल यूजी, पीजी, डुअल डिग्री और पीएचडी छात्रों के लिए राष्ट्रीय एआई फेलोशिप प्रदान करती है। यह व्यावहारिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए टियर 2 और टियर 3 शहरों में 570 एआई और डेटा लैब भी स्थापित कर रहा है। बाजार-उन्मुख, एनसीवीईटी से मान्यता प्राप्त एआई कोर्स कृषि, स्वास्थ्य सेवा, विनिर्माण और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में चलाए जा रहे हैं।

फ्यूचरस्किल्स प्राइम

फ्यूचरस्किल्स प्राइम, नैसकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की एक पहल है। यह कार्यक्रम एक सुविधानुसार, ऑनलाइन डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों को नई और उभरती हुई तकनीकों में स्किलिंग, री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग प्रदान करने पर केंद्रित है।

  • इसमें 2,800 से अधिक कोर्सेस और पाथवे उपलब्ध हैं और इसके 33 लाख से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं।
  • इसकी पहुंच बढ़कर 41 प्रतिशत महिला शिक्षार्थियों और 740 टियर-2 और टियर-3 शहरों तक हो गई है।

प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना

प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (2025) के तहत, ईपीएफओ ​​में पंजीकृत पहली बार नौकरी पाने वाले कर्मचारियों को उनके शुरुआती सीखने के चरण के दौरान सहायता के लिए दो किस्तों में ₹15,000 तक का एकमुश्त प्रोत्साहन दिया जाता है। यह योजना कौशल को उन्नत करने की लागत को कम करती है और उत्पादकता व रोज़गार क्षमता को बढ़ाती है। साथ ही, यह नए कर्मचारियों को धन प्रबंधन कौशल से लैस करने के लिए वित्तीय साक्षरता को भी बढ़ावा देती है। यह योजना नियोक्ताओं को भी प्रोत्साहित करती है, जिसके तहत कम से कम छह महीने तक लगातार काम करने वाले प्रत्येक अतिरिक्त कर्मचारी के लिए दो साल तक प्रति माह 3,000 रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जाता है।

  • इस योजना ने 2,400 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि के वितरण के साथ 15 लाख रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद की है (19 जून, 2026)।

अंतर्राष्ट्रीय और निजी क्षेत्र की भागीदारी को मजबूत करना

सार्वजनिक-निजी और अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी भारत के कौशल विकास तंत्र को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वे उद्योग के अनुरूप प्रशिक्षण, डिजिटल कौशल और वैश्विक स्तर पर काम करने के अवसरों को बढ़ावा दे रही हैं।

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उद्यमिता कौशल को विकसित करना

उद्यमिता  रोजगार सृजन, नवाचार और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कौशल विकास सफल उद्यम स्थापित करने के लिए आवश्यक क्षमताओं को मजबूत करता है।

पीएम विश्वकर्मा

पीएम विश्वकर्मा योजना कौशल उन्नयन, टूलकिट प्रोत्साहन, ऋण सहायता और बाज़ार संपर्क के माध्यम से पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को व्यापक सहायता प्रदान करती है। इस योजना में महिलाओं और वंचित समूहों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, दिव्यांगजन, ट्रांसजेंडर और पूर्वोत्तर क्षेत्र, द्वीपीय क्षेत्रों और पहाड़ी इलाकों के कारीगर शामिल हैं। कौशल प्रशिक्षण के दौरान लाभार्थियों को प्रतिदिन 500 रुपये का स्टाइपेंड मिलता है

  • जून 2026 तक, 24.50 लाख से अधिक आवेदकों ने सफलतापूर्वक बुनियादी प्रशिक्षण पूरा कर लिया है।
  • 5,165.84 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए गए हैं।
  • 35 करोड़ रुपये से अधिक का डिजिटल इंसेंटिव दिया गया है।

स्टार्टअप इंडिया कोर्सेस

स्टार्टअप इंडिया प्लेटफ़ॉर्म पर सभी पंजीकृत उपयोगकर्ताओं के लिए व्यावहारिक शिक्षा और निःशुल्क ऑनलाइन कोर्स उपलब्ध हैं इन कोर्स में प्रोग्रामिंग, सुरक्षा, लेखांकन और वित्त से लेकर प्रबंधन और उद्यमिता तक शामिल हैं। ये कोर्स उपयोगकर्ताओं को उद्यमिता का ज्ञान हासिल करने और साथ ही अपने संगठनों को उन्नत बनाने में मदद करते हैं

उद्यमिता और कौशल विकास कार्यक्रम  

कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय अपने स्वायत्त संस्थानों के माध्यम से उद्यमिता विकास कार्यक्रम (ईएपी) और उद्यमित कौशल विकास कार्यक्रम (ईएसडीपी) चलाता है। ये संस्थान- राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान (एनआईईएसबीयूडी), नोएडा और भारतीय उद्यमिता संस्थान (आईआईई), गुवाहाटी- हैं। इससे देश भर में उद्यमिता को बढ़ावा मिलता है और उद्यमिता की संस्कृति विकसित होती है।  ये संस्थान उद्यमियों को उद्यमिता और प्रबंधन प्रशिक्षण के माध्यम से संपूर्ण सहायता प्रदान करते हैं, साथ ही प्रशिक्षण के बाद परामर्श, मार्गदर्शन और इनक्यूबेशन सहायता भी देते हैं।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) के उद्यमिता कौशल विकास कार्यक्रम (ईएसडीपी) युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित करते हैं। ये कार्यक्रम एससी, एसटी, महिलाओं, दिव्यांगों, पूर्व-सैनिकों और बीपीएल लाभार्थियों को तकनीकी व व्यावसायिक कौशल प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

 कौशल के माध्यम से महिलाओं का सशक्तिकरण

महिलाओं के कौशल विकास से कार्यबल में उनकी भागीदारी, आर्थिक स्वतंत्रता और समान विकास को बढ़ावा मिलता है। विशेष रूप से कौशल पहल रोजगार में लैंगिक अंतर को दूर करने में मदद करती हैं और महिलाओं को विभिन्न क्षेत्रों में उभरते अवसरों का लाभ उठाने में सक्षम बनाती हैं।

एआई करियर फॉर वुमेन

'एआई करियर फॉर वुमेन (2025)' एक 320 घंटे का गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य ग्रामीण स्नातक कॉलेजों की युवा महिलाओं और लड़कियों को भविष्योन्मुखी एआई कौशल से लैस करना है। यह कार्यक्रम हब-एंड-स्पोक मॉडल के अंतर्गत चल रहे 25 एआई उत्कृष्टता केंद्रों के माध्यम से उभरती प्रौद्योगिकियों में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ा रहा है। इस कार्यक्रम ने 10,000 से अधिक छात्रों तक पहुंच बनाई है, जिसमें हब कॉलेजों के 2,500 से अधिक और स्पोक कॉलेजों के 7,500 से अधिक छात्र शामिल हैं।

स्वावलंबिनी

कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) ने नीति आयोग के 'वुमेन एंटरप्रेन्योरशिप प्लेटफॉर्म' के सहयोग से फरवरी 2025 में स्वावलंबिनी- महिला उद्यमिता कार्यक्रम शुरू किया। इसे असम, मेघालय, मिजोरम, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना में लागू किया जा रहा है। यह कार्यक्रम 'उद्यमिता जागरूकता और विकास कार्यक्रमों' के माध्यम से महिलाओं में उद्यमशीलता की सोच को बढ़ावा देता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान, भारतीय उद्यमिता संस्थान ने निम्नलिखित गतिविधियां आयोजित कीं:

  • 82 संकाय सदस्यों के लिए संकाय विकास कार्यक्रम,
  • 1200 प्रतिभागियों के लिए उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम और;
  • 602 महिला उम्मीदवारों के लिए उद्यमिता विकास कार्यक्रम।

नव्या (युवा किशोरियों के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से आकांक्षाओं का पोषण)

नव्या को जून 2025 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के साथ साझेदारी में एमएसडीई द्वारा शुरू किया गया। इस योजना का उद्देश्य आकांक्षी जिलों में 16-18 वर्ष की किशोरियों को कौशल-आधारित उपायों के माध्यम से सामाजिक-आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। 

  • नव्या का लक्ष्य पीएमकेवीवाई 4.0 के अंतर्गत 19 राज्यों के 27 जिलों में 3,850 लड़कियों को प्रशिक्षित करना है।

यह पहल गैर-पारंपरिक और भविष्योन्मुखी नौकरियों में मांग-आधारित व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करती है। यह डिजिटल मार्केटिंग, साइबर सिक्योरिटी, एआई-आधारित सेवाओं और ग्रीन जॉब्स जैसे क्षेत्रों में जीवन कौशल, वित्तीय साक्षरता और डिजिटल क्षमताएं भी विकसित करती है। यह वंचित क्षेत्रों में रोज़गार क्षमता, स्वरोजगार के अवसरों और लैंगिक-समावेशी कौशल प्रशिक्षण को बढ़ावा देती है।

केंद्रीय बजट 2026–27: कौशल विकास की मुख्य पहलें

 

  • खेलो इंडिया मिशन के तहत प्रतिभा को निखारने, कोचों को प्रशिक्षित करने और खेल विज्ञान व तकनीक के बेहतर इस्तेमाल का प्रस्ताव है।
  • 12 हफ़्ते के मानकीकृत हाइब्रिड पाठ्यक्रम के माध्यम से 10,000 पर्यटक गाइडों को कौशल प्रदान करने के लिए एक प्रायोगिक कार्यक्रम
  • शिक्षा, अनुसंधान और नैदानिक सेवाओं को बेहतर करने के लिए 3 नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान
  • पूर्वी भारत में डिज़ाइन शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रीय डिज़ाइन संस्थान
  • 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित करना।
  • बुज़ुर्गों और संबद्ध देखभाल के लिए 1.5 लाख मल्टी-स्किल्ड केयरगिवर्स को प्रशिक्षित करने के लिए एनएसक्यूएफ-अनुरूप कार्यक्रम।
  • इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर के पास पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप बनाई जाएंगी। ये टाउनशिप उच्च शिक्षा, अनुसंधान, कौशल विकास और आवासीय बुनियादी ढांचे को एकीकृत करेंगी।

केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित कौशल विकास पहलों के बारे में अधिक जानने के लिए, यहां क्लिक करें 

निष्कर्ष

भारत के कौशल परिदृश्य को एक व्यापक और जीवन-चक्र वाले दृष्टिकोण से सुदृढ़ किया जा रहा है। इसमें स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, कार्यबल का कौशल विकास, उद्यमिता और महिला-केंद्रित पहल शामिल हैं। कौशल विकास को नई तकनीकों, उद्योग की मांग और वैश्विक श्रम बाजार में हो रहे बदलावों के अनुरूप ढाला जा रहा है। युवाओं, महिलाओं और कमज़ोर वर्गों के लिए विशेष रूप से किए जा रहे प्रयासों से सबकी भागीदारी और समान विकास सुनिश्चित हो रहा है।

 कुल मिलाकर, ये पहलें भारत को अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाने और विश्व-स्तर पर प्रतिस्पर्धी कार्यबल तैयार करने में मदद करती हैं।

संदर्भ

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https://aicw.in/skilling

 

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