पंचायती राज मंत्रालय
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सात राज्यों में वर्चुअल आउटरीच कार्यशालाओं के माध्यम से पंचायती राज मंत्रालय ने पंचायतों की वित्तीय आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया

आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम के तहत स्वयं के राजस्व स्रोतों के मानदंडों को पूरा करने वाली पंचायतों को नवाचार आधारित परियोजना प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया

प्रविष्टि तिथि: 14 JUL 2026 6:02PM by PIB Delhi

पंचायती राज मंत्रालय ने आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम के अंतर्गत 13 और 14 जुलाई 2026 को वर्चुअल आउटरीच कार्यशालाओं का आयोजन किया, जिसमें छत्तीसगढ़, पंजाब, असम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश सहित सात राज्यों के प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यशाला में प्रतिभागियों को स्वयं के राजस्व स्रोतों (ओएसआर) को बढ़ाकर पंचायतों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के दृष्टिकोण, उद्देश्यों और कार्यान्वयन ढांचे से परिचित कराया गया। प्रतिभागियों को अपने संदेश में पंचायती राज मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज ने पंचायती राज संस्थाओं से सतत राजस्व स्रोतों के निर्माण के लिए स्थानीय संसाधनों और नवोन्मेषी विचारों का उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आर्थिक रूप से सशक्त पंचायतें विकसित भारत की नींव हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को आश्वासन दिया कि मंत्रालय पंचायतों को ऐसे विचारों को सफल, आत्मनिर्भर परियोजनाओं में बदलने और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आत्मविश्वासपूर्ण कदम उठाने में मदद करने के लिए निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान करता रहेगा।

राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) के अंतर्गत पंचायती राज मंत्रालय द्वारा संचालित आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम का उद्देश्य पंचायतों के स्वयं के राजस्व स्रोतों (ओएसआर) को मजबूत करके उनकी वित्तीय आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। इस कार्यक्रम के तहत, पारदर्शी राष्ट्रीय चैलेंज प्रक्रिया के माध्यम से पंचायतों को स्थानीय संसाधनों और क्षमताओं पर आधारित, निष्क्रिय परिसंपत्तियों तथा अप्रयुक्त स्थानीय अवसरों का उपयुक्त उपयोग कर राजस्व सृजन करने वाली नवाचारी परियोजनाओं के प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया है। कम से कम 50 लाख रुपये के ओएसआर वाली ग्राम पंचायतें और कम से कम 1 करोड़ रुपये के ओएसआर वाली ब्लॉक पंचायतें, जिनका कार्यकाल कम से कम तीन वर्ष शेष हो, आवेदन करने के लिए पात्र हैं। चयनित प्रस्तावों को बैंक से वित्तपोषण योग्य परियोजनाओं में विकसित करने के लिए तकनीकी सहायता प्राप्त होती है, और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी), कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर), बैंक वित्त और सरकारी योजनाओं के साथ समन्वय के माध्यम से वित्तपोषण की सुविधा प्रदान की जाती है। नाबार्ड और हुडको कार्यक्रम के संस्थागत भागीदार हैं, जो परियोजना विकास और वित्तीय सुविधा सहायता प्रदान करते हैं। कार्यशालाओं के दौरान, प्रतिभागियों को स्थायी राजस्व सृजन के लिए स्थानीय अवसरों की पहचान करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इन सत्रों में नाबार्ड और हुडको द्वारा प्रस्तुतियाँ, कार्यक्रम के दिशा-निर्देशों का अवलोकन, आत्मनिर्भर पंचायत पोर्टल का लाइव प्रदर्शन और एक संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र भी शामिल थे, ताकि प्रतिभागियों को कार्यक्रम और इसके कार्यान्वयन ढांचे की व्यापक समझ प्राप्त हो सके।

इसके साथ ही, आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम का दायरा अब देश भर के दस राज्यों तक विस्तारित हो गया है। इससे पहले हैदराबाद (तेलंगाना, 2 मई 2026), गांधीनगर (गुजरात, 9 जून 2026) और कोच्चि (केरल, 7 जुलाई 2026) में व्यक्तिगत और हाइब्रिड कार्यशालाएँ आयोजित की जा चुकी थीं। अब तेलंगाना, गुजरात, केरल, छत्तीसगढ़, पंजाब, असम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे दस राज्यों तक पहुँच बढ़ने के साथ, मंत्रालय देश भर की योग्य पंचायतों को इस मौके का फ़ायदा उठाने और 'विकसित भारत' के लिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर पंचायत बनाने के अभियान में शामिल होने के लिए अपने नए और अनोखे विचारों के साथ आगे आने के लिए आमंत्रित करता है।

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पीके/केसी/जीके/एसएस


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