वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
भारत और माली ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश सहयोग को और मजबूत करने के लिए पहले भारत-माली निर्यात संवर्धन मंच का आयोजन किया
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत-माली द्विपक्षीय व्यापार 326 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा, 55 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई
भारत और माली ने कपास, खनन, ऊर्जा, औषधि तथा सामाजिक अवसंरचना क्षेत्रों में आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया
माली ने दिसंबर 2026 में निवेश मंच आयोजित करने की घोषणा की
प्रविष्टि तिथि:
03 JUL 2026 7:03PM by PIB Delhi
द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत और माली ने पहले भारत-माली निर्यात संवर्धन मंच का आयोजन कर अपने बढ़ते वाणिज्यिक सहयोग को संस्थागत स्वरूप प्रदान किया है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश सहयोग को नई गति मिलने की आधारशिला रखी गई है।
"व्यापार और रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ बनाना" विषय पर आयोजित दो दिवसीय इस मंच का आयोजन बमाको में किया गया। इसकी अध्यक्षता माली की अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री, मेजर जनरल अब्दुलाये माइगा ने की। इसका संयुक्त आयोजन माली के उद्योग एवं व्यापार मंत्रालय, बमाको स्थित भारतीय दूतावास और माली निर्यात संवर्धन एजेंसी (एपीईएक्स-माली) द्वारा किया गया था। इस मंच में दोनों देशों की सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भारत के लगभग 30 व्यापारिक नेताओं ने भाग लिया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भारत सरकार के वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव (एफटी-अफ्रीका) श्री अमित कुमार ने किया। माली में भारत के राजदूत डॉ. एन. नंदकुमार ने पूरे कार्यक्रम के दौरान भारतीय मिशन का प्रतिनिधित्व किया।
भारत और माली के द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में यह 326.61 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 55 प्रतिशत अधिक है। माली से भारत को होने वाले प्रमुख निर्यातों में कच्चा कपास, तैयार चमड़ा, काजू, सीसा, गोंद अरबी और तिल शामिल हैं। वहीं भारत से माली को औषधियां, सूती वस्त्र, दोपहिया और तिपहिया वाहन और साइकिलों का निर्यात किया जाता है। भारत की शुल्क-मुक्त टैरिफ वरीयता (डीएफटीपी) योजना ने द्विपक्षीय व्यापार को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। माली के लगभग 4 बिलियन अमेरिकी डॉलर के वैश्विक निर्यात की तुलना में भारतीय बाजार में उसके अप्रयुक्त निर्यात की संभावित क्षमता लगभग 3.96 बिलियन अमेरिकी डॉलर आंकी गई है, जो भविष्य में व्यापार विस्तार की व्यापक संभावना का संकेत देती है।
उद्घाटन सत्र और भारतीय और माली प्रदर्शनी स्टॉलों के दौरे के बाद, जहाँ सोनालिका ट्रैक्टर और महिंद्रा तथा टाटा मोटर्स द्वारा निर्मित वाहन प्रदर्शित किए गए थे, प्रतिनिधिमंडलों ने व्यापार-से-व्यापार (बी2बी), व्यापार-से-सरकार (बी2जी) और सरकार-से-सरकार (जी2जी) स्तर पर गहन बैठकों में भाग लिया। इन बैठकों में नवीकरणीय ऊर्जा, औषधि, वस्त्र, ऑटोमोटिव विनिर्माण और खनन क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विर्मश किया गया, ताकि व्यावसायिक अवसरों को व्यापारिक साझेदारियों और समझौता ज्ञापनों में परिवर्तित किया जा सके।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने दूसरे दिन माली के उद्योग एवं व्यापार मंत्री श्री मूसा अलासाने डियालो से मुलाकात की। इस अवसर पर एपीईएक्स-माली ने तत्काल निवेश के लिए "तैयार व्यापार योजनाएं" भी प्रस्तुत कीं। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने माली की अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री से भेंट की।
दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए कपास और वस्त्र, खनन और ऊर्जा, कृषि-उद्योग और शीया प्रसंस्करण, औषधियाँ और स्वास्थ्य एवं शिक्षा सहित सामाजिक अवसंरचना को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया। माली ने अपने उद्गम प्रमाण पत्र प्रणाली के डिजिटलीकरण में भारत के सहयोग तथा स्वीकृत भारतीय औषधियों के शीघ्र पंजीकरण में विशेष रुचि व्यक्त की। भारतीय पक्ष ने शीया-नट के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध पर पुनर्विचार का अनुरोध किया और माली में भारतीय नागरिकों और भारतीय निवेशों की सुरक्षा के महत्व को पुन: रेखांकित किया।
इस मंच को दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी की आधारशिला के रूप में देखा गया। इसके समापन अवसर पर माली ने कारोबारी माहौल को सुरक्षित करने और अपने ‘विज़न माली 2063’ रोडमैप के तहत पश्चिम अफ्रीका के लिए खुद को एक रणनीतिक निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करने की अपनी प्रतिबद्धता हो दोहराया। इस दिशा में अगले ठोस कदम के रूप में माली ने 3-4 दिसंबर 2026 को एक विशेष निवेश मंच आयोजित करने की घोषणा की, जिसमें अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए अतिरिक्त निवेश-योग्य परियोजनाएं प्रस्तुत की जाएंगी।
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पीके/केसी/आईएम/केके
(रिलीज़ आईडी: 2280923)
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