इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय
माता-पिता और छात्रों के लिए बड़ी राहत: डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म शैक्षणिक रिकॉर्ड तक निर्बाध पहुंच के माध्यम से स्कूलों और उच्च शिक्षण संस्थानों के बीच स्थानांतरण की प्रक्रिया को आसान बनाते है
प्रतियोगी परीक्षाओं के आवेदनों की डिजिटल माध्यम से जांच मानवीय हस्तक्षेप को कम करके प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाती है
डिजिटल इंडिया के 11 वर्ष: 110 करोड़ से अधिक शैक्षणिक रिकॉर्ड सुरक्षित, आसान और डिजिटल रूप से सत्यापन योग्य शैक्षणिक सेवाएं सुनिश्चित करते हैं
प्रविष्टि तिथि:
02 JUL 2026 6:05PM by PIB Delhi
1 जुलाई, 2026 को डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के 11 साल पूरे होने के साथ ही, भारत शासन को अधिक पारदर्शी, सुगम और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को निरंतर मज़बूत कर रहा है। 2015 में अपनी शुरुआत के बाद से ही, डिजिटल इंडिया ने भरोसेमंद डिजिटल प्लेटफ़ॉर्मों के ज़रिए शिक्षा समेत कई क्षेत्रों में सार्वजनिक सेवाओं को प्रदान करने के तरीके को बदला है। ये प्लेटफ़ॉर्म जीवन को आसान बनाने और कुशल शासन को बढ़ावा देने का काम करते हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में, डिजिटल इंडिया ने ऐसे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के विकास में मदद की है जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुसार जीवन भर सीखने, एकेडमिक मोबिलिटी और सुरक्षित डिजिटल प्रमाण-पत्रों (क्रेडेंशियल्स) को प्रोत्साहित करते हैं। एकेडमिक बैंक ऑफ़ क्रेडिट्स (एबीसी) और नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी (एनएडी) उन मुख्य पहलों में शामिल हैं जो इस बदलाव को आगे बढ़ा रहे हैं।
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एकेडमिक बैंक ऑफ़ क्रेडिट्स: छात्रों की सुविधा अनुसार शिक्षा को बढ़ावा
एकेडमिक बैंक ऑफ़ क्रेडिट्स (एबीसी) शिक्षा मंत्रालय की एक पहल है जिसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) विनियमित (रेगुलेट) करता है। यह मान्यता प्राप्त उच्च शिक्षा संस्थानों से छात्रों द्वारा हासिल किए गए एकेडमिक क्रेडिट को स्टोर करने, स्थानांतरित करने और रिडीम करने का एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है। यह मल्टीपल एंट्री-मल्टीपल एग्जिट (एमईएमई), क्रेडिट ट्रांसफर और छात्र की स्थिति के अनुरूप शिक्षण के तरीकों को संभव बनाकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क का समर्थन करता है।
अपार (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री) के साथ एकीकृत, एबीसी हर शिक्षार्थी को जीवन भर के लिए एक अद्वितीय शैक्षणिक पहचान प्रदान करता है। इससे एक ही डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, कौशल विकास और अन्य मान्यता प्राप्त शिक्षण कार्यक्रमों के शैक्षणिक रिकॉर्ड्स तक सुरक्षित पहुंच की सुविधा मिलती है।
नवीनतम जानकारी के अनुसार, 2,963 उच्च शिक्षण संस्थानों ने एबीसी प्लेटफ़ॉर्म पर पंजीकरण कराया है। 26.29 करोड़ से ज़्यादा अपार आईडी बनाई गई हैं और 110.65 करोड़ से अधिक शैक्षणिक रिकॉर्ड अपलोड किए गए हैं, जो देश भर में डिजिटल शैक्षणिक इकोसिस्टम को तेज़ी से अपनाने को दर्शाता है।
एबीसी कागज़ी दस्तावेज़ों की जगह सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड का इस्तेमाल करके एकेडमिक एडमिनिस्ट्रेशन को आसान बनाता है, जिससे छात्र ऑनलाइन एकेडमिक क्रेडिट को देख, स्थानांतरित और रिडीम कर सकते हैं। यह एडमिशन, छात्रवृत्ति, इंटर्नशिप और रोजगार के लिए शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों के तेज़ी से सत्यापन में भी मदद करता है, जिससे कागज़ी काम कम होता है और पारदर्शिता व भरोसा बढ़ता है।
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नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी: विश्वसनीय डिजिटल शैक्षणिक रिकॉर्ड
नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी (एनएडी) एकेडमिक अवॉर्ड्स का ऑनलाइन रिपॉजिटरी है। यह शैक्षणिक संस्थानों को शैक्षणिक प्रमाण-पत्र, डिग्री, डिप्लोमा और मार्कशीट को सुरक्षित डिजिटल फॉर्मेट में जारी करने, स्टोर करने और सत्यापित करने की सुविधा देता है। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत विकसित एनएडी, शिक्षार्थियों को कभी भी और कहीं भी उनके प्रमाणित शैक्षणिक रिकॉर्ड्स तक पहुंचने की सुविधा प्रदान करता है, साथ ही संस्थानों, एम्प्लॉयर्स और सरकारी एजेंसियों को क्रेडेंशियल्स को डिजिटल रूप से सत्यापित करने में भी मदद करता है।
कागजी प्रमाण-पत्रों की जगह डिजिटल रूप से प्रमाणित रिकॉर्ड का इस्तेमाल करके, एनएडी प्रशासनिक खर्चों को कम करता है, कागजी काम-काज को घटाता है और शैक्षणिक दस्तावेजों के खोने या खराब होने के जोखिम को खत्म करता है। सुरक्षित ऑनलाइन सत्यापन से जाली प्रमाणपत्र के इस्तेमाल पर रोक लगाने में भी मदद मिलती है, साथ ही एडमिशन, भर्ती, छात्रवृत्ति और अन्य पब्लिक सर्विस में पारदर्शिता और कार्यक्षमता बेहतर होती है।
एबीसी, अपार और एनएडी के मुख्य लाभ
Together, the Academic Bank of Credits (ABC), APAAR and the National Academic Depository (NAD) are strengthening India's digital academic ecosystem by:
एकेडमिक बैंक ऑफ़ क्रेडिट्स (एबीसी), अपार और नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी (एनएडी) मिलकर भारत के डिजिटल शैक्षणिक इकोसिस्टम को इस प्रकार मज़बूत कर रहे हैं:
- सुरक्षित डिजिटल शैक्षणिक रिकॉर्ड उपलब्ध कराना, जो कागजी प्रमाण-पत्रों पर निर्भरता कम करते हैं और उनके खोने, खराब होने या जालसाजी के जोखिम को कम करते हैं।
- एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से शैक्षणिक क्रेडिट, प्रमाण-पत्र और मार्कशीट को कभी भी, कहीं भी प्राप्त करने की सुविधा प्रदान करना।
- एनईपी 2020 के अनुसार एकेडमिक क्रेडिट ट्रांसफर और मल्टीपल एंट्री-मल्टीपल एग्जिट (एमईएमई) की सुविधा देकर शिक्षार्थी के अनुरूप शिक्षण को बढ़ावा देना।
- शैक्षणिक संस्थानों, नियोक्ताओं और सरकारी एजेंसियों द्वारा शैक्षणिक दस्तावेजों के तेज़ी से डिजिटल सत्यापन के माध्यम से एडमिशन, छात्रवृत्ति और रोज़गार की प्रक्रिया को गति देना।
- मैन्युअल वेरिफिकेशन और बार-बार होने वाले दस्तावेजीकरण की जगह प्रमाणित डिजिटल रिकॉर्ड्स का इस्तेमाल करके कागज़ी काम-काज और प्रशासनिक बोझ को कम करना।
- डिजी लॉकर और अन्य डिजिटल इंडिया पहलों के साथ एकीकरण के ज़रिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करना, जिससे शैक्षणिक रिकॉर्ड्स का सुरक्षित आदान-प्रदान और इंटरऑपरेबिलिटी संभव हो सके।
लाभार्थियों के अनुभव
छत्तीसगढ़ के भिलाई में स्थित रुंगटा इंटरनेशनल स्किल्स यूनिवर्सिटी की एमबीए की छात्रा अंजलि राठौर ने बताया कि अपार आईडी ने सत्यापन प्रक्रिया को आसान बना दिया है और कागजी काम को काफी कम कर दिया है। उन्होंने कहा कि वे ज़रूरत पड़ने पर आसानी से अपने शैक्षणिक दस्तावेजों को देख सकती हैं, जिससे सेमिनार, कॉम्पिटिशन, इंटर्नशिप और छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करना अधिक सुविधाजनक हो गया है। उनके अनुसार, इस डिजिटल प्रणाली ने समय और मेहनत दोनों की बचत की है और यह छात्रों के लिए आधुनिक, विश्वसनीय और काफी फायदेमंद साबित हुआ है।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग स्थित शासकीय वी. वाई. टी स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय के छात्र आशीष तिवारी ने बताया कि अपार आईडी ने उनकी पढ़ाई-लिखाई को बहुत आसान बना दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी मार्कशीट, प्रमाण-पत्र और शैक्षणिक रिकॉर्ड अब डिजिटल रूप से सुरक्षित हैं और ज़रूरत पड़ने पर उन्हें आसानी से देखा जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि अपार आईडी भविष्य में एडमिशन के लिए एकेडमिक क्रेडिट ट्रांसफर में मदद करती है और छात्रवृत्ति के सत्यापन को आसान बनाती है। उनके अनुसार, इस पहल ने स्टूडेंट इकोसिस्टम को स्मार्ट, आसान और पेपरलेस बना दिया है, जिससे छात्रों को बहुत लाभ हुआ है।
डिजिटल इंडिया के तहत एक विश्वसनीय डिजिटल शैक्षणिक इकोसिस्टम बनाना
एबीसी, एनएडी, अपार और डिजीलॉकर के एक साथ जुड़ने से एक ऐसा डिजिटल शैक्षणिक इकोसिस्टम बना है, जो शैक्षणिक रिकॉर्ड्स को सुरक्षित रूप से स्टोर करने, आसानी से साझा करने और डिजिटल रूप से सत्यापन करने की सुविधा देता है। ये सभी पहल शिक्षण संस्थानों के बीच आपसी तालमेल को बढ़ावा देती हैं, एकेडमिक मोबिलिटी में मदद करती हैं और एनईपी 2020 के उद्देश्यों के अनुसार निरंतर सीखने को प्रोत्साहित करती हैं।
पिछले ग्यारह वर्षों में, डिजिटल इंडिया ने शैक्षणिक रिकॉर्ड्स को सुरक्षित, पोर्टेबल और डिजिटल रूप से सत्यापन योग्य बनाकर शैक्षणिक सेवाओं को प्रदान करने के तरीके को बदल दिया है। एबीसी और एनएडी जैसी पहलों के माध्यम से, सरकार पेपरलेस गवर्नेंस को बढ़ावा दे रही है, प्रशासनिक बोझ कम कर रही है और एक विश्वसनीय, नागरिक-केंद्रित डिजिटल शिक्षा इकोसिस्टम बना रही है जो विकसित भारत के विज़न के अनुरूप है।
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पीके/केसी/एसके /डीए
(रिलीज़ आईडी: 2280593)
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