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उन्नत सेल एवं जीन थेरॅपी का एकसमान विनियमन सुनिश्चित करने के लिए केंद्र ने औषधि नियम, 1945 में संशोधन किया


केंद्र ने सेल एवं स्टेम सेल-व्युत्पन्न उत्पादों, जीन चिकित्सीय उत्पादों तथा जीनोट्रांसप्लांट के लिए केंद्रीकृत लाइसेंस अनुमोदन प्राधिकरण (सीएलएए) ढांचे के दायरे का विस्तार किया

प्रविष्टि तिथि: 02 JUL 2026 5:24PM by PIB Delhi

उन्नत एवं उभरती चिकित्सा प्रौद्योगिकियों पर नियामकीय निगरानी को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने औषधि नियम, 1945 में संशोधन कर सेल (कोशिका) या स्टेम सेल-व्युत्पन्न उत्पादों, जीन चिकित्सीय उत्पादों तथा जीनोट्रांसप्लांट को केंद्रीकृत लाइसेंस अनुमोदन प्राधिकरण (सीएलएए) ढांचे के दायरे में शामिल किया है।

औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के अंतर्गत कुछ विनिर्दिष्ट श्रेणियों की महत्वपूर्ण औषधियाँ तथा जैविक उत्पाद केंद्र और राज्य नियामकों की संयुक्त नियामकीय निगरानी के अधीन आते हैं। इनमें टीके, बड़ी मात्रा में अंतःशिरा प्रविष्ट किए जाने वाले द्रव (100 मि.ली. से अधिक के आईवी सॉल्यूशंस) तथा आर-डीएनए आधारित औषधियाँ शामिल हैं। इस संशोधन के माध्यम से इस दायरे का विस्तार करते हुए इसमें अतिरिक्त उभरती प्रौद्योगिकियों को भी शामिल किया जा रहा है।

सेल या स्टेम सेल-व्युत्पन्न उत्पाद, जैसे स्टेम सेल-आधारित पुनर्योजी उपचार तथा सीएआर-टी सेल उपचार, का उपयोग ल्यूकीमिया और लिम्फोमा जैसे रक्त कैंसरों के उपचार में बढ़ता जा रहा है। जीन चिकित्सीय उत्पाद, जैसे जीन प्रतिस्थापन तथा जीन संपादन उत्पाद, का उपयोग आनुवंशिक विकारों और विभिन्न प्रकार के कैंसरों के उपचार में किया जा रहा है। जीनोट्रांसप्लांट पशु ऊतकों से प्राप्त उत्पाद हैं, जैसे हृदय वाल्व, जिन्हें मनुष्यों में प्रत्यारोपित किया जा सकता है। इनका उपयोग हृदय रोग विज्ञान तथा अस्थि रोग विज्ञान में किया जाता है।

 

चूँकि ये प्रौद्योगिकियाँ चिकित्सा विज्ञान के अत्यंत जटिल, विशिष्ट तथा तीव्र गति से विकसित हो रहे क्षेत्र हैं, इसलिए रोगी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इन पर अधिक सुदृढ़ नियामकीय निगरानी की आवश्यकता है।

इन उत्पादों को सीएलएए ढाँचे के अंतर्गत शामिल किए जाने से केंद्रीय तथा राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरणों द्वारा संयुक्त निगरानी की व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा, जिससे पूरे देश में नियामकीय मानकों में एकरूपता सुनिश्चित होगी। यह संशोधन उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए नियामकीय सख्ती को बढ़ाएगा तथा वैज्ञानिक प्रगति और वैश्विक स्तर की सर्वोत्तम पद्धतियों के अनुरूप भारत के नियामकीय ढाँचे को और सुदृढ़ करेगा।

यह पहल जन स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवा और जीवन विज्ञान क्षेत्रों में नवाचार को प्रोत्साहित करने तथा नवीनतम प्रौद्योगिकियों को शीघ्र अपनाने के प्रति सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

विस्तृत संशोधनों से संबंधित राजपत्र अधिसूचना मंत्रालय/विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध है और त्वरित संदर्भ के लिए इसे यहाँ देखा जा सकता है:

https://egazette.gov.in/(S(t3khz0ekbif5wgz2z23i0zvb))/ViewPDF.aspx

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पीके/केसी/पीके


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