सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय
आपातकालीन देखभाल को सशक्त बनाना: सड़क एम्बुलेंस के लिए बेहतर सुरक्षा उपाय
एआईएस-125 में संशोधन के मसौदे में विशेष प्रकार की एम्बुलेंस, बचाव के लिए अनिवार्य उपकरण और ई-एम्बुलेंस के लिए प्रावधान शामिल किए गए हैं
प्रविष्टि तिथि:
02 JUL 2026 4:28PM by PIB Delhi
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) ने देश भर में सड़क एम्बुलेंस की सुरक्षा, कामकाज और चिकित्सीय सुविधाओं को बेहतर बनाने हेतु ‘ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड (एआईएस)-125’ में बदलाव का प्रस्ताव दिया है। सड़क एम्बुलेंस आपातकालीन देखभाल में महत्वपूर्ण जीवनरक्षक लिंक हैं; ये मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को उन्नत जीवनरक्षक सहायता (एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट) देने में मदद करती हैं। भारत में हर वर्ष सड़क दुर्घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों की मौत होती है, जिनमें से कई मौतों को समय पर चिकित्सीय सहायता देकर रोका जा सकता है। विभिन्न अध्ययनों से पता चलता है कि अगर दुर्घटना के शिकार लोगों को पहले घंटे के अंदर अस्पताल में भर्ती करा दिया जाए, तो सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली लगभग 50 प्रतिशत मौतों को रोका जा सकता है।
मोटर वाहनों के उपयोग से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के सभी पीड़ितों को जरूरी चिकित्सीय उपचार की सुविधा प्रदान करने हेतु “प्रधानमंत्री - सड़क दुर्घटना पीड़ितों की अस्पताल में भर्ती और सुनिश्चित उपचार (पीएम-राहत) योजना” जैसी योजनाएं भले ही शुरू की गई हैं, लेकिन यह भी उतना ही जरूरी है कि जरूरत पड़ने पर नागरिकों को सड़क एम्बुलेंस आसानी से मिलें और उन्हें इस तरह से डिजाइन किया जाए कि चिकित्सा कर्मियों को काम करने में आसानी हो और मरीजों को ले जाते समय अधिक से अधिक आराम एवं सुरक्षा मिले।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 8 सितंबर, 2016 को जारी अधिसूचना जी.एस.आर 868 (ई) के जरिए एआईएस-125 (भाग 1) मानक को अधिसूचित किया था, ताकि सड़क पर चलने वाली एम्बुलेंस की बनावट और कामकाज से जुड़ी जरूरतों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। इसके अलावा, एआईएस-125 (भाग 2) को एक मानक दिशानिर्देश के तौर पर प्रकाशित किया गया था। इसमें अलग-अलग तरह की सड़क एम्बुलेंस के लिए जरूरी चिकित्सीय उपकरण के बारे में बताया गया था ताकि वे अपने निर्धारित काम ठीक से कर सकें।
सड़क एम्बुलेंस की सुरक्षा और कामकाज की क्षमता को बेहतर बनाने हेतु अब एआईएस-125 (भाग 1) और एआईएस-125 (भाग 2) में संशोधन अपनाए गए हैं। इन संशोधनों में विशेष प्रकार के सड़क एम्बुलेंस शामिल हैं, जैसे कि:
(i) नवजात शिशु सड़क एम्बुलेंस – बीमार या समय से पहले जन्मे नवजात शिशुओं को आमतौर पर उच्चस्तर की चिकित्सीय देखभाल के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक ले जाने के लिए डिजाइन की गई है; और
(ii) मल्टी-स्ट्रेचर रोड एम्बुलेंस – इसे एक साथ कई स्ट्रेचर ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है, जबकि आम तौर पर यह एक बार में एक मरीज को सघन देखभाल सहायता (इंटेंसिव केयर सपोर्ट) देने पर ध्यान केन्द्रित करती है।
जरूरी बचाव उपकरण - इसके अलावा, वर्ग बी, सी और डी श्रेणी में आने वाली सभी सड़क एम्बुलेंस में आपातकालीन और बचाव के उपकरण होने चाहिए। ये उपकरण सड़क दुर्घटनाओं में क्षतिग्रस्त गाड़ियों से पीड़ितों को बाहर निकालने में मदद करेंगे और साथ ही, अगर खुद एम्बुलेंस ही किसी दुर्घटना का शिकार हो जाती है, तो बचाव कार्य में भी सहायता करेंगे।
ई-एम्बुलेंस के लिए खास पावर सोर्स – मरीजों की देखभाल से समझौता किए बिना ग्रीन मोबिलिटी की दिशा में बढ़ने में मदद देने हेतु, ई-एम्बुलेंस में चिकित्सा उपकरण चलाने के लिए खास पावर सोर्स भी दिए जाएंगे। इसके अलावा, एआईएस-125 (भाग 2) उन मानकों के बारे में बताता है जिनका पालन एम्बुलेंस में लगे सभी चिकित्सीय उपकरणों को करना होगा।
दिनांक 14.05.2026 वाली मसौदा अधिसूचना जीएसआर 382(ई) जारी कर दी गई है और इसे अंतिम रूप देने के लिए जनता से सुझाव/टिप्पणियां आमंत्रित करने के उद्देश्य से मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है। ये संशोधन अंतिम अधिसूचना में निर्धारित तिथि से लागू होंगे।
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पीके/केसी/आर
(रिलीज़ आईडी: 2280462)
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