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जीएसटी के नौ वर्ष: कराधान का सरलीकरण, सशक्त भारत का निर्माण
प्रविष्टि तिथि:
30 JUN 2026 2:15PM by PIB Delhi
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जीएसटी ने अलग-अलग बिखरे हुए केंद्रीय और राज्य करों की जगह कराधान का एकीकृत ढांचा प्रस्तुत करके भारत की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में बड़ा परिवर्तन किया है। इससे एक साझा राष्ट्रीय बाजार का निर्माण करने और एक राष्ट्र, एक कर के दृष्टिकोण का समर्थन करने में सहायता मिली है। जीएसटी 2017 में कार्यान्वयन के बाद से निरंतर सुधारों, डिजिटल प्रणालियों और केंद्र-राज्य के बीच मजबूत समन्वय के माध्यम से विकसित हुआ है। 2025 में अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों ने कम दरों, छूटों और आसान प्रक्रियाओं के माध्यम से इस संरचना को और सरल बना दिया। इन उपायों का उद्देश्य घरेलू करदाताओं, एमएसएमई, किसानों, कारीगरों, निर्यातकों और विभिन्न व्यापार क्षेत्रों को लाभ पहुंचाना है।
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जीएसटी : भारत की कर सुधार यात्रा में ऐतिहासिक मील का पत्थर
1 जुलाई, 2017 को वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) का शुभारंभ भारत की कर सुधार यात्रा में ऐतिहासिक उपलब्धि है। "एक राष्ट्र, एक कर" का सिद्धांत अब वास्तविकता बन गया है जिससे भारत को एकीकृत कर प्रणाली की ओर अग्रसर होने में सहायता मिल रही है।
विगत नौ वर्षों में जीएसटी ने देश के 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' के दृष्टिकोण को मजबूत किया है। इसके अंतर्गत तर्कसंगत कर दरों और मानकीकृत प्रक्रियाओं के माध्यम से देश में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के साथ आर्थिक विकास हो रहा है।
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जीएसटी के अंतर्गत 17 अलग-अलग करों और 13 उपकरों को एक साझा ढांचे में समाविष्ट कर दिया गया। इससे पूर्व, भारत की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में कई केंद्रीय और राज्य-स्तरीय कर शामिल थे जिससे दरों और संरचनाओं में अंतर पैदा हुआ। इसके कारण व्यापार और उद्योग के लिए छिपी हुई लागतों को जोड़कर करों में वृद्धि हुई जिसे अक्सर "कर पर कर" के रूप में वर्णित किया जाता है। इसके अतिरिक्त, सूचना प्रौद्योगिकी की मजबूत अवसंरचना के सहयोग से जीएसटी का उद्देश्य कर आधार को व्यापक बनाना और कर अनुशासन में सुधार करना था।
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जीएसटी की मुख्य विशेषताएं
जीएसटी की संरचना में एक साथ कई प्रमुख विशेषताएं शामिल हैं, जो यह परिभाषित करती है कि कर कैसे लगाया जाएगा और कैसे इसका प्रबंधन किया जाएगा।
व्यावहारिक उपयोग: जीएसटी के अंतर्गत वस्तुओं या सेवाओं की "आपूर्ति" पर कर लगाया जाता है, न कि अलग-अलग निर्माण, बिक्री या सेवा पर।
गंतव्य-आधारित उपभोग पर कर: जीएसटी एक गंतव्य-आधारित उपभोग कर है। इसका अर्थ यह है कि यह उस राज्य को प्राप्त होगा जहां अंततः वस्तुओं या सेवाओं का उपभोग किया जाता है।
कवरेज और एकरूपता: यह लगभग सभी वस्तुओं और सेवाओं पर लागू होता है। लोगों के लिए शराब के उपभोग को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। यह देश भर में सामान्य कर दरों को लागू करके अधिक एकरूपता भी लाता है। ऐसी 5 वस्तुएं हैं जिन पर जीएसटी परिषद का अनुमोदन होने पर जीएसटी लगाया जा सकता है।
जीएसटी परिषद: परिषद जीएसटी पर प्रमुख निर्णयों का मार्गदर्शन करती है और देश भर में इसके कार्यान्वयन में सहयोग करती है।
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सहकारी संघवाद का निर्माण
जीएसटी परिषद ने निर्णय लेने के लिए केंद्र और राज्यों को एक साथ लाकर सहकारी संघवाद को सुदृढ़ किया है। यह एक वैधानिक निकाय है जिसने नियमित रूप से मुद्दों की समीक्षा करके और उभरती चुनौतियों पर प्रतिक्रिया देकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस लचीले दृष्टिकोण से अर्थव्यवस्था के सहयोग के लिए समय पर कर प्रणाली में बदलाव और सुधार संभव हुआ है।
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गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स नेटवर्क (जीएसटीएन): जीएसटीएन केंद्र और राज्य सरकारों की 50-50 प्रतिशत स्वामित्व वाली कंपनी है जो वस्तु और सेवा कर प्रणाली के लिए सामान्य डिजिटल बुनियादी ढांचा प्रदान करती है। यह विभिन्न डिजिटल सेवाओं को चालू करके केंद्र, राज्यों, करदाताओं और अन्य हितधारकों का सहयोग करती है।
दोहरा जीएसटी : जीएसटी दोहरी संरचना का पालन करता है जिसके अंतर्गत केंद्र की ओर से केंद्रीय वस्तु और सेवा कर (सीजीएसटी) लगाया जाता है और राज्यों की ओर से राज्य में आपूर्ति पर राज्य वस्तु और सेवा कर (एसजीएसटी) लगाया जाता है। वहीं, एकीकृत वस्तु और सेवा कर (आईजीएसटी) वस्तुओं और सेवाओं की सभी प्रकार की अंतर-राज्यीय आपूर्ति पर लगाया जाता है। आईजीएसटी दरें आम तौर पर सीजीएसटी/एसजीएसटी के दोगुने के बराबर होती हैं।
अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार
जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक में आम लोगों के जीवन को बेहतर बनाने और व्यवसायों के लिए कर प्रक्रियाओं को सरल बनाने के उद्देश्य से अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों को स्वीकृति दी गई। 22 सितंबर 2025 से लागू इन सुधारों में दरों और छूटों को संशोधित किया गया। जीएसटी 2.0 के रूप में चर्चित ये सुधार कर सुधारों का वह नया चरण हैं जिनसे विकास की संभावनाएं प्रबल होती हैं।
इसका एक विस्तृत अवलोकन यहां उपलब्ध है : जीएसटी सुधार 2025: आम आदमी के लिए राहत, व्यवसायों के लिए प्रोत्साहन।
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प्रमुख उपाय
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सुव्यवस्थित दर संरचना: कर संरचना मुख्य रूप से 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत के दो स्लैब में बदल दी गई है।
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विलासिता और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक वस्तुओं पर कर : निष्पक्ष कर संरचना सुनिश्चित करते हुए राजस्व संतुलन बनाए रखने में सहायता प्रदान करने के लिए विलासिता और हानिकारक वस्तुओं पर कर की 40 प्रतिशत की दर शुरू की गई है। इसमें लॉटरी/ऑनलाइन गेमिंग, तंबाकू, कार्बोनेटेड पेय, अत्यधिक महंगी कारें, नौकाएं और निजी विमान शामिल हैं।
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आसान अनुपालन: जीएसटी 2.0 में कर की रकम की वापसी को तेज करते हुए और लागत को कम करते हुए पंजीकरण और रिटर्न फाइलिंग को भी आसान बनाया गया है। इससे व्यवसायों, विशेष रूप से एमएसएमई और स्टार्टअप के लिए प्रक्रिया आसान हुई है।
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जीएसटी 2.0 कर दरों में कटौती के अतिरिक्त, लागत में कमी लाकर, सामर्थ्य में सुधार, अनुपालन और आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करके भारत के विकास चक्र में सहयोग कर रहा है। जीएसटी 2.0 का उद्देश्य व्यापक क्षेत्रीय पहुंच के साथ निर्यात, कारीगरों, किसानों और दीर्घकालिक विनिर्माण को लाभ पहुंचाना है।

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परिवारों और उपभोक्ताओं के लिए राहत :
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सस्ती वस्तुओं और सेवाओं से खपत में वृद्धि होती है और बचत में सहायता मिलती है।
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बीमा और आवश्यक दवाओं पर जीएसटी छूट से पारिवारिक सुरक्षा सुदृढ़ होती है और स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में सुधार होता है।
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एमएसएमई और उद्योग के लिए प्रोत्साहन :
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सीमेंट, हस्तशिल्प जैसे प्रमुख क्षेत्रों और कच्चे माल पर जीएसटी दरों में कमी से उत्पादन लागत घटती है और व्यापार संबंधी प्रतिस्पर्धा में सुधार होता है।
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सरलीकृत कर संरचना वर्गीकरण से संबंधित विवादों में कमी लाती है और व्यवसायों के लिए कर संबंधी निर्णयों को आसान बनाती है। समय के साथ, यह कर आधार का विस्तार करने और राजस्व वृद्धि में सहयोग करने में सहायक है।
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जहां कच्चे माल या इनपुट पर चुकाए गए कर की दर, अंतिम तैयार माल पर लगने वाले कर की दर से अधिक होती है (इन्वर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर) उसमें कर संरचना में सुधार से घरेलू सामग्री की गुणवत्ता में वृद्धि को प्रोत्साहन मिलता है और निर्यात को बढ़ावा मिलता है।
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एमएसएमई और छोटे करदाताओं के लिए अनुपालन में आसानी
एमएसएमई, स्टार्टअप्स और छोटे करदाताओं के लिए भी अनुपालन को आसान बनाने के उद्देश्य से समय के साथ अनेक उपाय किए गए हैं।
अधिकाधिक छूट: वस्तुओं के आपूर्तिकर्ताओं के लिए जीएसटी पंजीकरण सीमा 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 40 लाख रुपये कर दी गई जो अप्रैल 2019 से प्रभावी है। कंपोजिशन स्कीम की सीमा भी 75 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये (कुछ विशेष श्रेणी के राज्यों को छोड़कर) कर दी गई है।
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कंपोजिशन स्कीम
यह योजना छोटे करदाताओं के लिए तैयार की गई है जिससे उन्हें टर्नओवर पर एक निश्चित दर पर जीएसटी का भुगतान करने की अनुमति मिलती है। इसमें कम दस्तावेज़ओं की आवश्यकता और सरल रिटर्न-फाइलिंग शामिल हैं।
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सरल रिटर्न फाइलिंग: त्रैमासिक रिटर्न फाइलिंग और मासिक भुगतान (क्यूआरएमपी) योजना 2020 में शुरू की गई ताकि रिटर्न की त्रैमासिक फाइलिंग की अनुमति मिल सके। इसमें 5 करोड़ रुपये तक के वार्षिक टर्नओवर वाले करदाताओं को शामिल किया गया है।
इसके अतिरिक्त, जिन करदाताओं ने लेनदेन नहीं किया वे भी एसएमएस के माध्यम से शून्य मासिक जीएसटी रिटर्न दाखिल कर सकते हैं।
छोटे व्यवसायों और ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए सहायता : ई-कॉमर्स ऑपरेटरों के माध्यम से राज्यों के अंदर ही वस्तुओं की आपूर्ति करने वाले छोटे करदाताओं को अक्टूबर 2023 से अनिवार्य जीएसटी पंजीकरण से छूट दी गई है।
कम जोखिम वाले आवेदकों के लिए आसान पंजीकरण योजना भी शुरू की गई है जिससे तीन कार्य दिवसों के भीतर पंजीकरण की अनुमति मिलती है।
विवादों और पिछली मांगों में राहत: जीएसटी अपील दायर करने के लिए आवश्यक प्री-डिपॉजिट राशि को कम करने के लिए संशोधन किया गया है।
कुछ शर्तों के साथ कुछ मांग नोटिसों के लिए ब्याज और जुर्माने में छूट का भी प्रावधान किया गया है। इसमें वित्तीय वर्ष 2017-18, 2018-19 और 2019-20 के मामले शामिल हैं।
जीएसटी के अंतर्गत डेटा-संचालित कर प्रशासन का उदय
जीएसटी सुधारों ने कर प्रशासन को तेजी से प्रौद्योगिकी-संचालित ढांचे की ओर स्थानांतरित कर दिया है।
वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) पोर्टल और ई-इनवॉइसिंग ने चालान संबंधी आंकड़ों को वास्तविक समय पर हासिल करने में सक्षम बनाकर प्रशासन को अधिक पारदर्शी बना दिया है। इससे कर्मचारियों की ओर से खुद रिपोर्ट बनाने की व्यवस्था में कमी आई है, सटीकता में सुधार हुआ है और रिपोर्टिंग में विसंगतियों को कम करने में मदद मिली है।
व्यवस्था के स्वचालन ने करदाताओं के लिए फाइलिंग प्रक्रियाओं को भी आसान बना दिया है। प्राप्तकर्ता इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के साथ आपूर्तिकर्ता की कर देयता के मिलान ने प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया है। पहले से भरे हुए रिटर्न, सरलीकृत समाधान और वास्तविक समय में सत्यापन ने त्रुटियों को कम कर दिया है और प्रक्रिया संबंधी समग्र आवश्यकताएं घटा दी हैं।
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जीएसटी प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए एआई और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग अधिक लक्षित तरीके से निगरानी के लिए किया जा रहा है। वे डेटा पैटर्न और जोखिम संकेतकों का विश्लेषण करके संभावित कर चोरी की पहचान करने में सहायता करते हैं। इन उपकरणों को पंजीकरण, जांच आदि जैसी विभिन्न प्रक्रियाओं में लागू किया गया है। यह प्रणाली को उच्च जोखिम वाले करदाताओं पर ध्यान केंद्रित करने की अनुमति देता है जबकि अनुपालन करने वाले करदाताओं के लिए नियामक संबंधी आवश्यकताओं को आसान बनाता है।
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इन उपायों का प्रभाव प्रशासनिक दक्षता में सुधार से कहीं आगे तक है और इससे भारत की व्यापक व्यापक आर्थिक मजबूती में सहयोग मिल रहा है। उन्होंने कर संग्रह के अनुमान को अधिक आसान बना दिया है जिससे राजस्व में तेजी से वृद्धि और अधिक राजकोषीय पारदर्शिता में सहायता मिलती है।
कर की औपचारिक व्यवस्था का लाभ जीएसटी वृद्धि में परिलक्षित होता है
जीएसटी संग्रह आर्थिक गतिविधि का एक अहम और तेजी से बदलने वाला संकेत बन गया है। राजस्व में वृद्धि न केवल उच्च खपत और व्यापार को दर्शाती है, बल्कि करदाताओं की बढ़ती संख्या, मजबूत रिपोर्टिंग प्रणाली और बेहतर अनुपालन को भी दर्शाती है।
जीएसटी करदाताओं की संख्या 2017 में 66.5 लाख से बढ़कर मई 2026 तक 1.65 करोड़ हो गई। यह अर्थव्यवस्था में अधिकाधिक व्यवसायों के कर व्यवस्था से औपचारिक रूप से जुड़ने की ओर संकेत देता है।
2017-18 में सकल जीएसटी संग्रह लगभग 7.4 लाख करोड़ रुपये था और पिछले कुछ वर्षों में इसमें लगातार वृद्धि हुई है।
पिछले पांच वर्षों में, कर संग्रह 2021-22 में ~13.76 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में ~22.27 लाख करोड़ रुपये हो गया। यह गति 2026-27 में भी जारी रही है। अप्रैल-मई 2026 के दौरान जीएसटी संग्रह लगभग 4.37 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
जीएसटी की निरंतर सुधार यात्रा
जीएसटी दिवस का महत्व ऐतिहासिक कर सुधार व्यवस्था के शुभारंभ को स्मरण करने तक ही सीमित नहीं है। यह एक सरल, अधिक पारदर्शी और एकीकृत अप्रत्यक्ष कर प्रणाली के निर्माण के भारत के निरंतर प्रयास को दर्शाता है। जीएसटी 2.0 के अंतर्गत किए गए सुधार नागरिकों और व्यवसायों की आवश्यकताओं को पूरा करके और विकसित भारत की दिशा में भारत के विकास में सहयोग करके इस प्रगति को आगे बढ़ा रहे हैं।
संदर्भ
प्रधान मंत्री कार्यालय (पीएमओ)
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2163986&lang=1®=3
वित्त मंत्रालय
https://www.indiabudget.gov.in/budget2017-2018/es2016-17/echap01_vol2.pdf
https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?ModuleId=3&NoteId=155151®=48&lang=2
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https://cbic-gst.gov.in/pdf/01012018-GST-Concept-and-Status.pdf
https://gstcouncil.gov.in/about-us
https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/186/AU2414_pElIGR.pdf?source=pqals
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https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/187/AU1430_6jAjKo.pdf?source=pqals
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https://www.gstn.org.in/
विश्व बैंक
https://documents1.worldbank.org/curated/en/348501542614212003/pdf/India-develoment-Update-GST-December-2017.pdf
पत्र सूचना कार्यालय
https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?NoteId=154789&ModuleId=3®=48&lang=2
https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?NoteId=155151&ModuleId=3®=48&lang=1
https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?NoteId=155156&ModuleId=3®=48&lang=1
https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?ModuleId=3&NoteId=151915®=48&lang=2
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