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एस्पायर की कहानी
प्रविष्टि तिथि:
26 JUN 2026 2:41PM by PIB Delhi
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एस्पायर: ग्रामीण महत्वाकांक्षा को एक उद्योग में बदलना
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मेघालय के मॉसिनराम में बारिश से भीगी एक सुबह, श्री बंशैलंग मारबानियांग पहाड़ियों पर छाए काले बादलों को देख रहे थे। बारिश लगातार हो रही थी, जैसा कि दुनिया की सबसे ज़्यादा बारिश वाली इस जगह पर अक्सर होता है। फिर भी, उनके दिमाग में मौसम नहीं, बल्कि एक ऐसा सवाल चल रहा था, जो बरसों से उनके साथ था: देश के सबसे दूर-दराज़ इलाकों में से एक में रहने वाला कोई युवा अपना भविष्य कैसे बनाए, जब वहाँ मौके उतने ही कम हों, जितनी ज़्यादा वहाँ बारिश होती है?
सालों से, श्री मारबानियांग ने अपने दोस्तों और पड़ोसियों को काम की तलाश में मॉसिनराम छोड़कर जाते देखा था। संसाधन सीमित थे, और अपना खुद का बिज़नेस शुरू करना उनकी पहुँच से बाहर लगता था। आर्थिक तंगी ने इस सपने को और भी दूर कर दिया था। फिर भी, यह ख्याल उनके दिमाग से नहीं जा रहा था। इलाके की भरपूर कृषि उपज के बीच, वे सोचते थे कि क्या इन स्थानीय संसाधनों को किसी उद्योग का आधार बनाया जा सकता है।
बदलाव तब आया, जब उन्हें गुवाहाटी में भारतीय उद्यमिता संस्थान (आईआईई) द्वारा दी जा रहे उद्यमिता प्रशिक्षण और कौशल विकास समर्थन के बारे में पता चला। आईआईई, एमएसएमई मंत्रालय की एस्पायर योजना (नवाचार, ग्रामीण उद्योगों और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए योजना) के तहत एक मेंटर इंस्टीट्यूट है। यह नए उद्यमियों को ऐसे कौशल, आत्मविश्वास और उद्योगों की जानकारी हासिल करने में मदद करता है, जिनकी ज़रूरत विचारों को बिज़नेस में बदलने के लिए होती है।

श्री मारबानियांग के लिए, इस प्रशिक्षण ने नई संभावनाओं के दरवाज़े खोल दिए। तकनीकी जानकारी और उद्यमिता से जुड़े कौशल के साथ, उन्होंने एक खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ा व्यापार शुरू किया। इस बिज़नेस ने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों को आर्थिक अवसरों में बदल दिया, जिससे यह साबित हुआ कि सही परामर्श और कौशल के साथ कहीं भी मौके पैदा किए जा सकते हैं।
घर के नज़दीक ही अवसर पैदा करना
श्री मारबानियांग की कहानी ग्रामीण भारत में हो रहे बड़े बदलाव को दिखाती है।
उद्योगों के विकास से जुड़ी सेवाएं, तकनीकी सहायता और उद्यमों को बढ़ावा देने जैसी सुविधाएं ज़्यादातर कुछ शहरी केंद्रों तक ही सीमित रही हैं। हालांकि ग्रामीण भारत में प्रतिभा, कौशल और संसाधन मौजूद थे, लेकिन नए उद्यमियों के पास अक्सर विचारों को टिकाऊ बिज़नेस में बदलने के लिए ज़रूरी प्रशिक्षण, निर्देशन और संस्थागत सहायता की कमी होती थी।
इस कमी को समझते हुए, एमएसएमई मंत्रालय ने 2015 में एस्पायर योजना शुरू की, ताकि खास तौर पर ग्रामीण और कृषि-आधारित क्षेत्रों में उद्यमिता और रोज़गार को बढ़ावा दिया जा सके।
समय के साथ, बदलती ज़रूरतों को पूरा करने के लिए इस योजना में बदलाव किए गए हैं। 2018 में जारी ऑपरेशनल गाइडलाइंस ने प्रारंभिक फ्रेमवर्क को मज़बूत किया। 2023 के संशोधित दिशानिर्देशों में आजीविका बनाने, उद्यमों के विकास और मापने योग्य नतीजों पर ज़्यादा ध्यान दिया गया। आज, एस्पायर का मुख्य केंद्र आजीविका व्यवसाय इनक्यूबेटर (एलबीआई) का बढ़ता नेटवर्क है, जो लोगों को कौशल हासिल करने से लेकर उद्यम बनाने तक में मदद करते हैं।
प्रशिक्षण, सही निर्देशों और शुरूआती मदद के ज़रिए, एस्पायर कृषि-ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमी बनने के इच्छुक लोगों को सक्षम बनाता है और एमएसएमई क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को मज़बूत करने के लिए नवाचार को बढ़ावा देता है।
जहाँ उद्यम लेते हैं नया आकार
एस्पायर की सफलता के केंद्र में इसके एलबीआई यानी आजीविका व्यवसाय इनक्यूबेटर हैं। इसका मकसद सिर्फ़ कौशल विकास नहीं, बल्कि ऐसे औपचारिक और बड़े किए जा सकने वाले सूक्ष्म-उद्यम बनाना है, जो आजीविका और रोज़गार के अवसर पैदा करें।
ये इनक्यूबेटर आधुनिक उपकरण, बिज़नेस में परामर्श और तकनीकी मदद उपलब्ध कराते हैं। उद्यमियों को उत्पादों के विकास, ब्रांडिंग, मान्यता, नियमन नियमों का पालन, बाज़ार से जुड़ाव और फाइनेंस तक पहुँच में भी मदद मिलती है, जिससे उन्हें एक विचार से उद्यम बनाने तक के सफ़र में आसानी होती है।
एस्पायर का संस्थागत ढांचा यह सुनिश्चित करता है कि प्रशिक्षण पूरा होने के काफी समय बाद भी उद्यमियों को लगातार मदद मिलती रहे। यह योजना तीन-स्तरीय ढांचे के ज़रिए काम करती है, जिसमें स्कीम स्टीयरिंग कमेटी, तय किए गए मेंटर संस्थान और होस्ट संस्थान (जो एलबीआई चलाते हैं) शामिल हैं। मेंटर संस्थान इनक्यूबेटर की पहचान करने, प्रोजेक्ट की योजना तैयार करने, इनक्यूबेशन प्रोग्राम डिज़ाइन करने, लागू करने की प्रक्रिया को मज़बूत करने और नतीजों की निगरानी करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
इनक्यूबेशन व्यवस्था में कई तरह के संस्थान एक साथ आते हैं, जिनमें भारतीय उद्यमिता संस्थान (आईआईई), गुवाहाटी, कृषि विश्वविद्यालय, तकनीकी संस्थान और आईआईटी जोधपुर जैसे प्रमुख संस्थान शामिल हैं। इन केंद्रों का मकसद एग्रो-इंडस्ट्री में उद्यमिता को बढ़ावा देना और स्टार्टअप्स को आगे बढ़ाना भी है।
पूरे देश में, एलबीआई खाद्य प्रसंस्करण, शहद उत्पादन, बांस के उत्पाद, मशरूम की खेती, मसाला प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और कॉयर (नारियल के रेशे) से बने उत्पादों जैसे क्षेत्रों में उद्यमों की मदद कर रहे हैं। इस नज़रिए की अहमियत भारत की अर्थव्यवस्था में मूल्य वर्धित ग्रामीण उद्योगों के बढ़ते योगदान से साफ़ झलकती है। कई ग्रामीण समुदायों के लिए, उद्यम शुरू करने से न सिर्फ़ आमदनी का ज़रिया मिलता है, बल्कि बड़ी मूल्य श्रृंखला में शामिल होने का मौका भी मिलता है। कृषि और स्थानीय संसाधनों से जुड़े क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा देकर, एस्पायर लोगों को सिर्फ़ शुरुआती उत्पादन से आगे बढ़कर प्रसंस्करण, विनिर्माण और मूल्य संवर्धन की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती है।
समय के साथ इस नेटवर्क का लगातार विस्तार हुआ है। जून 2026 तक, 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 109 एलबीआई को मंज़ूरी दी जा चुकी थी। इन इनक्यूबेटर्स ने मिलकर 1.23 लाख से ज़्यादा लोगों को प्रशिक्षण दिया है। वित्त वर्ष 2022-23 में व्यवस्थित ट्रैकिंग शुरू होने के बाद से, एस्पायर से जुड़े इनक्यूबेटर्स ने देश भर में 1,200 से ज़्यादा सूक्ष्म उद्यम शुरू करने में भी मदद की है।

भारत के महत्वाकांक्षी उद्यमियों को सशक्त बनाना
एस्पायर की सफलता को असल में इस बात से नहीं मापा जाता कि यह कितने इनक्यूबेटर्स को समर्थन देती है, बल्कि इसका मापदंड यह है कि इसने कितने लोगों की ज़िंदगी बदलने में मदद की है।
वित्त वर्ष 2022-23 से, इस योजना ने देश भर में 28,500 से ज़्यादा महिलाओं के लिए उद्यमिता के मौके बनाए हैं, जो उद्यमी बनाने में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने में इसकी बढ़ती भूमिका को दिखाता है। साथ ही, एस्पायर 8,700 से ज़्यादा अनुसूचित जाति के लाभार्थियों, 9,600 से ज़्यादा अनुसूचित जनजाति के लाभार्थियों और 17,600 से ज़्यादा अन्य पिछड़ा वर्ग के लाभार्थियों तक पहुँचा है, जिससे उद्यमिता को ज़्यादा समावेशी और सुलभ बनाने में मदद मिली है।

ये आँकड़े सिर्फ़ संख्या से कहीं ज़्यादा हैं। अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक समूहों को उद्यमी बनने में मदद देकर, एस्पायर यह सुनिश्चित करने में मदद कर रही है, कि उद्यम बनाना अब सिर्फ़ बड़े शहरों तक ही सीमित न रहे। इसके बजाय, यह भारत भर के गाँवों, छोटे कस्बों और कम सुविधा वाले समुदायों में विकास, आत्मनिर्भरता और रोज़गार पैदा करने के एक रास्ते के तौर पर तेज़ी से उभर रहा है।
मॉसिनराम से कर्तव्य पथ तक
सालों बाद, श्री मारबानियांग के सफ़र को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।
वे उत्तर-पूर्व के उन दस उद्यमियों में शामिल थे, जिन्हें नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर 75वें गणतंत्र दिवस समारोह में विशेष अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया था। अलग-अलग क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हुए, वे भारत के गांवों, छोटे कस्बों और दूर-दराज के इलाकों से उभरने वाले उद्यमियों की नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। देश के सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रमों में से एक में उनकी मौजूदगी सिर्फ़ एक व्यक्तिगत सम्मान से कहीं बढ़कर थी। यह उन पहलों की बढ़ती सफलता को दर्शाता है, जो नौकरी चाहने वालों को नौकरी देने वालों में और स्थानीय उम्मीदों को फलते-फूलते उद्यमों में बदलने में मदद कर रही हैं।

हालांकि मॉसिनराम की बारिश से भीगी पहाड़ियों से कर्तव्य पथ की दूरी किलोमीटर में मापी जाती है, लेकिन अनिश्चितता से उद्यमिता तक का सफ़र अवसरों के ज़रिए मापा जाता है। एस्पायर के ज़रिए, हज़ारों भारतीयों को अपनी उम्मीदों को उद्यमों में बदलने के लिए ज़रूरी मदद, कौशल और संसाधन मिल रहे हैं। नवाचारों को बढ़ावा देकर और उद्यमिता को प्रोत्साहित करके, विचारों को कारोबार में, कौशल को आजीविका में और महत्वाकांक्षा को आर्थिक अवसरों में बदला जाता है।
ऐसा करके, एस्पायर न केवल उद्यम बना रही है, बल्कि समुदायों को सशक्त बना रही है, रोज़गार पैदा कर रही है और एक ज़्यादा समावेशी और आत्मनिर्भर भारत बनाने में भी योगदान दे रही है।
संदर्भ
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय
https://iie.gov.in/news-and-events/iie-trained-ne-entrepreneurs-invited-to-republic-day-parade-as-symbol-of-skill-development-push467#gsc.tab=0
https://iie.gov.in/pr/projects/a-scheme-for-promotion-of-innovation--rural-industries---entrepreneurship---aspire-#gsc.tab=0
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय
https://aspire.msme.gov.in/ASPIRE/AFHome.aspx
https://dashboard.msme.gov.in/aspire.aspx
https://www.pib.gov.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=133532®=48&lang=2
https://aspire.msme.gov.in/WriteReadData/DocumentFile/New_Operational_Guidelines_ASPIRE_2018.pdf
https://aspire.msme.gov.in/WriteReadData/DocumentFile/ASPIRE_New_21112023.pdf
https://aspire.msme.gov.in/WriteReadData/DocumentFile/Annexure-I.pdf
लोकसभा
https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/187/AS550_07VFJm.pdf?source=pqals
भारतीय उद्यमिता संस्थान
https://www.iie.gov.in/pdf/IIE-Annual-Report-2024-25.pdf
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