विधि एवं न्‍याय मंत्रालय
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न्याय तक समग्र पहुंच को मजबूत करने के लिए केंद्रीय क्षेत्र की योजना 'न्याय तक समग्र पहुंच के लिए अभिनव समाधान तैयार करना' (दिशा) 2.0 को केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा अनुमोदित किया गया


दिशा 2.0 के लिए वर्ष 2026-27 से वर्ष 2030-31 की अवधि के लिए 16वें वित्त आयोग चक्र के अंतर्गत कुल 255 करोड़ रुपये का वित्तीय परिव्‍यय स्वीकृत किया गया

प्रौद्योगिकी-सक्षम न्याय वितरण के लिए केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म और एआई-संचालित न्याय सेतु चैटबॉट के साथ नया घटक विध‍ि-संजीवनी पेश किया गया

दिशा 2.0 का लक्ष्य कार्यक्रम के सभी चार घटकों के माध्यम से कुल 3 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंचाना है

प्रविष्टि तिथि: 22 JUN 2026 1:44PM by PIB Delhi

केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल ने केंद्रीय क्षेत्र की  योजना 'न्याय तक समग्र पहुंच के लिए अभिनव समाधान तैयार करना (दिशा)' को दिशा 2.0 के रूप में पुनर्गठित करके 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 तक पांच वर्षों की अवधि के लिए जारी रखने की मंजूरी दे दी है जो वित्त आयोग के 16वें चक्र के साथ समाप्त होगी। इस योजना के लिए कुल स्वीकृत वित्तीय परिव्यय 255 करोड़ रुपये है, जिसका पूर्ण वित्तपोषण भारत सरकार के सकल बजटीय समर्थन से किया जाएगा। केंद्रीय क्षेत्र की योजना दिशा 2.0 का मूल्यांकन और अनुशंसा विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग के सचिव श्री नीरज वर्मा की अध्यक्षता में हुई स्थायी वित्त समिति की बैठक में की गई थी।

दिशा 2.0 (2026-31), एक सुविचारित और पुनर्गठित योजना है जिसे विधि (सामंजस्‍यपूर्ण कानूनी पहलों के एकीकृत कार्यान्‍वयन के लिए दृष्टिकोण) संजीवनी नामक एक नए घटक के साथ शुरू किया गया है। दिशा 2.0 का उद्देश्य भारत के संविधान की प्रस्तावना और अनुच्छेद 14, 21 और 39A के अंतर्गत प्रतिपादित "न्याय तक पहुंच" के संवैधानिक जनादेश को पूरा करना है और शांति, न्याय और सशक्त संस्थानों पर संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य 16 (एसडीजी-16) के कार्यान्वयन का समर्थन करना है। मौजूदा दिशा योजना के तीन घटकों पर आधारित दिशा 2.0, प्रौद्योगिकी-सक्षम न्याय वितरण के लिए केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म और एआई-संचालित न्याय सेतु चैटबॉट के साथ विधि-संजीवनी नामक एक नया घटक प्रस्तुत करता है। दिशा 2.0 में निम्नलिखित चार घटक शामिल हैं और इसे अखिल भारतीय स्तर पर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा:

  1. टेली-लॉ (वंचितों तक पहुंच): ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम स्तरीय उद्यमियों (वीएलई) द्वारा संचालित 2,50,000 सामान्य सेवा केंद्रों (सीएससी) के नेटवर्क के माध्यम से सभी व्यक्तियों को मुकदमे से पहले मुफ्त कानूनी सलाह प्रदान की जाएगी। यह नेटवर्क 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 784 जिलों को कवर करता है, जिसमें 112 आकांक्षी जिले और 500 आकांक्षी ब्लॉक शामिल हैं। आकांक्षी ब्लॉकों में न्याय सहायक घर-घर जाकर कानूनी सहायता प्रदान करना जारी रखेंगे। एआई एकीकरण, बहुभाषी पहुंच और डिजिटल प्लेटफार्मों के उन्नयन के माध्यम से कार्यक्रम को और मजबूत किया जाएगा।
  2. न्याय बंधु (प्रो-बोनो कानूनी सेवाएं) कार्यक्रम: यह कार्यक्रम विधि सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 12 के अंतर्गत निःशुल्क कानूनी सहायता के पात्र व्यक्तियों को निःशुल्क कानूनी सहायता और न्यायालय में प्रतिनिधित्व प्रदान करके अधिवक्ताओं और विधि छात्रों के बीच निःशुल्क कानूनी सेवाओं की संस्कृति को बढ़ावा देगा। निःशुल्क कानूनी अधिवक्ताओं की नियुक्ति, निःशुल्क कानूनी क्लब (पीबीसी) योजना के अंतर्गत विधि महाविद्यालयों को शामिल करने और डिजिटल माध्यमों से प्रचार-प्रसार के माध्यम से कार्यक्रम का विस्तार किया जाएगा।
  3. कानूनी साक्षरता एवं कानूनी जागरूकता कार्यक्रम (एलएलएलएपी): यह कार्यक्रम मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू), नागरिक समाज संगठनों (सीएसओ), विधि विश्वविद्यालयों और मीडिया भागीदारों के साथ साझेदारी के माध्यम से कानूनी जागरूकता और साक्षरता का प्रसार करता है। सरकारी, निजी और सीएसओ क्षेत्रों की कार्यान्वयन एजेंसियों को समझौता ज्ञापनों के माध्यम से ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों प्रकार के प्रचार अभियानों के लिए शामिल किया जाएगा।
  4. विधि संजीवनी: संपूर्ण कार्यक्रम निगरानी और डेटा-आधारित निर्णय लेने के लिए चौथे घटक के रूप में एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पेश किया गया है। इसमें एक एकीकृत डैशबोर्ड होगा जो चारों घटकों से वास्तविक समय के डेटा स्ट्रीम को समेकित करेगा; कानूनी प्रश्नों के समाधान और डेटा विश्लेषण एवं रिपोर्टिंग के लिए एआई-संचालित बहुभाषी न्याय सेतु चैटबॉट (भाषिनी के साथ विकसित) का एकीकरण शामिल होगा।

दिशा 2.0, सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी-16) और वर्ष 2047 के विकसित भारत विज़न के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को सीधे तौर पर आगे बढ़ाती है। यह प्रधानमंत्री के उस विज़न के अनुरूप है, जिसे उन्होंने 8 नवंबर, 2025 को 'कानूनी सहायता वितरण तंत्र को सुदृढ़ करना' विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में व्यक्त किया था जिसमें उन्होंने कहा था कि "न्याय की सुगमता" के बिना "व्यापार करने में सुगमता" और "जीवन की सुगमता" अधूरी रहेगी । दिशा 2.0 भारत सरकार की इस अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 39A के अंतर्गत निहित आर्थिक या अन्य अक्षमताओं के कारण किसी भी नागरिक को न्याय से वंचित न किया जाए। दिशा 2.0 का लक्ष्य कार्यक्रम के सभी चार घटकों के माध्यम से कुल 30 लाख लाभार्थियों तक पहुंचना है।

पूर्व दिशा योजना (2021-26), जिसका वित्तीय परिव्यय 250 करोड़ रुपये था, को न्याय विभाग द्वारा अखिल भारतीय स्तर पर कार्यान्वित किया गया था। 31 मई, 2026 तक, दिशा योजना के अंतर्गत 2.37 करोड़ से अधिक लाभार्थियों तक पहुंच बनाई गई थी, जिसमें टेली-लॉ के अंतर्गत 1.13 करोड़ से अधिक मुकदमेबाजी-पूर्व कानूनी सलाह, न्याय बंधु के अंतर्गत 31 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में स्थापित 10,681 पंजीकृत प्रो-बोनो अधिवक्ता और 109 प्रो-बोनो क्लब, और कानूनी साक्षरता एवं कानूनी जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत 1.24 करोड़ से अधिक लाभार्थियों तक पहुंच शामिल है।

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पीके/केसी/एचएन/एमयू


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