जल शक्ति मंत्रालय
जल जीवन मिशन 2.0 के तहत सिक्किम के साथ सुधार संबंधी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए
केंद्र-राज्य साझेदारी एक जवाबदेह और समुदाय-संचालित जल प्रशासन के लिए स्थायी ग्रामीण जल वितरण के लिए सुधारों को आगे बढ़ाती है
प्रविष्टि तिथि:
09 JUN 2026 7:00PM by PIB Delhi
जल जीवन मिशन 2.0 के तहत ग्रामीण जल आपूर्ति अवसंरचना को मजबूत करने और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) ने आज सिक्किम राज्य के साथ सुधार से संबंधित एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
सुधार से संबंधित समझौता ज्ञापन में ग्राम पंचायत के नेतृत्व वाली, सेवा-आधारित और समुदाय-केंद्रित ग्रामीण जल प्रबंधन प्रणाली को अनिवार्य किया गया है, जो जल जीवन मिशन 2.0 के उद्देश्यों के अनुरूप है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक ग्रामीण परिवार को पर्याप्त मात्रा और निर्धारित गुणवत्ता का पेयजल नियमित रूप से प्राप्त हो। इसके लिए जन भागीदारी को मजबूत किया जाएगा और ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों के सतत संचालन और रखरखाव के लिए संरचनात्मक सुधार किए जाएंगे, जिससे ग्रामीण समुदायों के जीवन स्तर में सुधार होगा और 2047 में विकसित भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप दीर्घकालिक जल सुरक्षा में योगदान मिलेगा ।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल और सिक्किम के मुख्यमंत्री श्री प्रेम सिंह तमांग की उपस्थिति में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए ।
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के दौरान डीडीडब्ल्यूएस के वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें डीडीडब्ल्यूएस के सचिव श्री अशोक के.के. मीना, राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (एनजेजेएम) के अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक श्री कमल किशोर सोआन, संयुक्त सचिव और निदेशक श्री डी. सेंथिल पांडियन उपस्थित थे।
सिक्किम के साथ समझौता ज्ञापन पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल, सिक्किम के मुख्यमंत्री श्री प्रेम सिंह तमांग, सिक्किम सरकार के एडीजीपी सह प्रधान निवासी आयुक्त श्री अश्विनी कुमार चंद और सिक्किम सरकार के आर.डी.डी. सचिव श्री अनिल राज राय की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए।
श्री डी. सेंथिल पांडियन, संयुक्त सचिव, एनजेजेएम, और श्री अश्विनी कुमार चंद, एडीजीपी सह प्रधान निवासी आयुक्त, सिक्किम सरकार के बीच समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान हुआ।
सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए जल जीवन मिशन ने देश भर में ग्रामीण पेयजल आपूर्ति में क्रांतिकारी बदलाव लाया है और विशेषकर महिलाओं और लड़कियों के लिए पानी लाने की कठिनाई को कम किया है। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत, अब मिशन के अंतर्गत निर्मित बुनियादी ढांचे को बनाए रखने, नल कनेक्शनों की कार्यक्षमता, जल की गुणवत्ता, जल स्रोतों की स्थिरता, संचालन एवं रखरखाव, सामुदायिक स्वामित्व और नियमित निगरानी को प्रमुख प्राथमिकताएं दी जा रही हैं।
उन्होंने जेजेएम के तहत राज्य द्वारा हासिल की गई प्रगति की सराहना की और ग्राम पंचायत स्तर पर जल सेवा आकलन के आधार पर जिला सुधार योजनाओं को तैयार करके जिला स्तरीय योजना को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से सेवा संबंधी कमियों की पहचान करने, योजना के प्रदर्शन में सुधार करने, निगरानी को मजबूत करने और जिला स्तर पर बेहतर सेवा वितरण सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
केंद्रीय मंत्री ने राज्य से सतत सेवा वितरण के लिए सभी 19 आवश्यक बिंदुओं को शामिल करते हुए संचालन एवं रखरखाव नीति को अधिसूचित करने का आग्रह किया और साथ ही समयबद्ध तरीके से सुजल ग्राम आईडी और सुजलम भारत आईडी के निर्माण को पूरा करने का भी अनुरोध किया।
उन्होंने आगे कहा कि राज्य को मिशन के अनुमोदित दिशानिर्देशों और मौजूदा ढांचे के भीतर काम करना जारी रखना चाहिए, जिसमें ग्रामीण बस्तियों में टिकाऊ, समुदाय के स्वामित्व वाली और विश्वसनीय जल आपूर्ति सेवाओं पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
अपने संबोधन में सिक्किम के मुख्यमंत्री श्री प्रेम सिंह तमांग ने जल जीवन मिशन के तहत निरंतर सहयोग के लिए जल शक्ति मंत्रालय के प्रति आभार व्यक्त किया और सिक्किम जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण और आपदाग्रस्त हिमालयी राज्य में इस मिशन के परिवर्तनकारी प्रभाव को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री के प्रत्येक ग्रामीण परिवार में सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस मिशन ने राज्य भर के ग्रामीण समुदायों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार किया है।
उन्होंने कहा कि सिक्किम ने स्थापना के समय से ही जेजेएम के उद्देश्यों के प्रति प्रतिबद्धता बनाए रखी है और कठिन भूभाग, बिखरी हुई बस्तियों और बुनियादी ढांचे के विकास की उच्च लागत के बावजूद कवरेज हासिल किया है। राज्य ने 2019 में जारी मिशन दिशानिर्देशों के अनुसार ग्रामीण जल आपूर्ति बुनियादी ढांचे का व्यापक उन्नयन, विस्तार और आधुनिकीकरण किया है।
राज्य सरकार की इन उपलब्धियों को बनाए रखने की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, मुख्यमंत्री ने ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों को मजबूत करने और दीर्घकालिक सेवा वितरण सुनिश्चित करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने प्रत्येक ग्रामीण परिवार को सुरक्षित, विश्वसनीय और टिकाऊ पेयजल सेवाएं प्रदान करने के साझा लक्ष्य को साकार करने के लिए भारत सरकार के साथ मिलकर काम करने की सिक्किम की प्रतिबद्धता को फिर से व्यक्त किया।
उन्होंने सीएएमपीए परियोजना और वीबी-जी आरएएम जी के तहत सतत जल स्रोत स्थिरता उपायों के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समझौता ज्ञापन विशेषकर दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यात्मक नल जल कनेक्शनों के विस्तार के प्रयासों को और मजबूत करेगा।
अपने आरंभिक संबोधन में, डीडीडब्ल्यूएस के सचिव श्री अशोक के.के. मीना ने इस बात पर जोर दिया कि समझौता ज्ञापन में न केवल पाइपलाइनों के बुनियादी ढांचे के निर्माण को प्राथमिकता दी गई है, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रबंधित स्थायी सेवाओं को भी प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने विकेंद्रीकरण और सामुदायिक स्वामित्व पर बल दिया, जिसके तहत ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (वीडब्ल्यूएससी) को गांवों में जल आपूर्ति प्रणालियों के प्रबंधन और संचालन का अधिकार दिया गया है। राज्य के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के महत्व को बताते हुए, श्री मीना ने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह समझौता ज्ञापन राज्य और ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित, संरक्षित और स्थायी पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जेजेएम 2.0 दिशानिर्देशों के अनुपालन को सुनिश्चित करने की एक साझा प्रतिबद्धता है।
सतत जल सेवा वितरण के लिए संस्थागत तंत्रों के महत्व पर जोर देते हुए सचिव ने कहा कि सभी जिला कलेक्टरों द्वारा जिला जल एवं स्वच्छता मिशन (डीडब्ल्यूएसएसएम) की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि समय पर होने वाली बैठकों से ग्राम कार्य योजनाओं को तैयार करने में सहायता मिलेगी और ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों के प्रबंधन के लिए सक्षम संस्थाओं के रूप में पंचायतों के प्रमाणीकरण में भी सहयोग मिलेगा। सचिव ने रेखांकित किया कि कार्यान्वयन की निगरानी, आवधिक समीक्षा करने और आवश्यकता पड़ने पर ग्राम पंचायतों को आवश्यक सहायता प्रदान करने में जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यह कदम प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के हर घर निरंतर नल से जल के दृष्टिकोण की पूर्ति के अनुरूप एक पहल है।
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पीके/केसी/जीके
(रिलीज़ आईडी: 2270910)
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