वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
भारत ने डब्ल्यूटीओ व्यापार और पर्यावरण सप्ताह 2026 के दौरान अपनी कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना और नवीकरणीय ऊर्जा मानकों का प्रदर्शन किया
भारत ने डब्ल्यूटीओ के कार्यक्रम में संवहनीय विकास और स्वच्छ ऊर्जा की ओर परिवर्तन के प्रयासों को रेखांकित किया
भारत ने कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय कार्बन मार्केट फ्रेमवर्क को प्रदर्शित किया
प्रविष्टि तिथि:
05 JUN 2026 6:39PM by PIB Delhi
भारत ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जेनेवा में डब्ल्यूटीओ व्यापार और पर्यावरण सप्ताह 2026 के दौरान एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जिसका शीर्षक ‘भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना का शोकेस और नवीकरणीय ऊर्जा में मानकीकरण’ था।
इस कार्यक्रम के जरिए भारत ने संवहनीय विकास की दिशा में प्रयासों, स्वच्छ ऊर्जा की ओर परिवर्तन और पेरिस समझौते के अंतर्गत राष्ट्रीय तौर पर निर्धारित अपने योगदान को रेखांकित किया। कार्यक्रम में न्यून कार्बन अर्थव्यवस्था में भारत के रूपांतरण के उद्देश्य से बनाई गई महत्वपूर्ण नीतियों और नियामक पहलकदमियों को प्रदर्शित किया गया।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, ऊर्जा दक्षता ब्यूरो, बिजली मंत्रालय तथा नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिकारियों ने कार्यक्रम में अपने प्रस्तुतियां रखीं।
कार्यक्रम की शुरुआत भारत की जलवायु कार्रवाई और पर्यावरणीय संवहनीयता की पहलकदमियों पर प्रस्तुति के साथ हुई। इस प्रस्तुति में राष्ट्रीय तौर पर निर्धारित योगदान, कार्बन बाजार प्रणाली तथा पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन से संबंधित पहलकदमियों की उपलब्धियों को रेखांकित किया गया। इसने निष्पक्षता के सिद्धांतों, साझा मगर विभाजित जिम्मेदारियों और संबंधित क्षमताओं (सीबीडीआर-आरसी) तथा जलवायु कार्रवाई और संवहनीय विकास के बारे में भारत के दृष्टिकोण को निर्देशित करने वाले बहुपक्षीय सहयोग को रेखांकित किया।
इस बात पर ज़ोर दिया गया कि भारत लगातार अपने जलवायु संबंधी लक्ष्यों को समय से पहले ही हासिल कर रहा है। मार्च 2026 तक, गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता का हिस्सा 53.21 प्रतिशत तक पहुँच गया, जबकि 2030 तक का लक्ष्य 50 प्रतिशत था; इस तरह भारत ने यह लक्ष्य लगभग पाँच साल पहले ही हासिल कर लिया। इसी तरह, भारत की जीडीपी की उत्सर्जन तीव्रता 2005 और 2022 के बीच 37.38 प्रतिशत घट गई, जो निर्धारित समय-सीमा से काफी पहले 2030 तक 33-35 प्रतिशत की कमी के एनडीसी लक्ष्य से कहीं बेहतर है।
इस सत्र में भारत के विकसित होते कार्बन बाजार की संरचना और उभरते नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में मानक व प्रमाणन प्रणाली स्थापित करने के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला गया। कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना (सीसीटीएस) के तहत विकसित भारतीय कार्बन बाजार के लिए भारत के राष्ट्रीय ढांचे का उद्देश्य एक राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म स्थापित करना है। साथ ही, इसका लक्ष्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने वाली गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए बाजार-आधारित उपकरणों का उपयोग करना है।
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत हासिल की गई प्रगति को भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें हाइड्रोजन को "हरित हाइड्रोजन" के रूप में वर्गीकृत करने के लिए अधिसूचित उत्सर्जन सीमा और तकनीकी मानदंड शामिल थे। इन मानकों का उद्देश्य उत्पादकों, निवेशकों और उपभोक्ताओं के लिए पारदर्शिता, विश्वसनीयता और निश्चितता प्रदान करना है और साथ ही एक मजबूत हरित हाइड्रोजन पारिस्थितिकी तंत्र के विकास में सहायता करना है।
इससे पहले, 2 जून 2026 को, भारत और जापान के प्रतिनिधिमंडलों ने डब्ल्यूटीओ व्यापार और पर्यावरण सप्ताह के दौरान पारदर्शिता और एकतरफा व्यापार-प्रतिबंधात्मक उपायों पर चर्चा की थी। यह चर्चा इस बात पर केंद्रित थी कि व्यापार और जलवायु से जुड़े उपाय किस तरह अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अनावश्यक बाधाएं पैदा कर सकते हैं और इसमें सीमित क्षमता वाले देशों की सरकारों और हितधारकों द्वारा ऐसे उपायों का पालन करने में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों की समीक्षा की गई।
डब्ल्यूटीओ व्यापार और पर्यावरण सप्ताह ने भारत को व्यापार, पर्यावरणीय संवहनीयता, उत्सर्जन मानकों और कार्बन बाजारों पर अपने अनुभवों और नीतिगत दृष्टिकोणों को साझा करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। भारत का अनुभव यह दर्शाता है कि उपयुक्त नीतिगत ढाँचे और तकनीकी नवाचार के माध्यम से आर्थिक विकास, ऊर्जा तक पहुँच और पर्यावरणीय स्थिरता को एक साथ आगे बढ़ाया जा सकता है।
डब्ल्यूटीओ व्यापार और पर्यावरण सप्ताह में भारत की भागीदारी, वैश्विक व्यापार और पर्यावरणीय मुद्दों पर रचनात्मक जुड़ाव के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इसने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सामने भारत की घरेलू पहलों और नियामक विकासों को प्रदर्शित करने का अवसर भी प्रदान किया और साथ ही जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए संवहनीय तथा समावेशी मार्ग पर होने वाली चर्चाओं में अपना योगदान दिया।
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पीके/केसी/एसके/डीए
(रिलीज़ आईडी: 2269569)
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