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वाइस एडमिरल संजय वात्सायन, पीवीएसएम, एवीएसएम, एनएम ने पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का पदभार संभाला

प्रविष्टि तिथि: 30 MAY 2026 8:04PM by PIB Delhi

वाइस एडमिरल संजय वात्सायन, पीवीएसएम, एवीएसएम, एनएम ने 30 मई 2026 को मुंबई में आयोजित एक औपचारिक परेड में पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का पदभार ग्रहण कर लिया है। इससे पहले, उन्होंने नौसेना मुख्यालय, नई दिल्ली में नौसेना स्टाफ के उप प्रमुख के रूप में कार्य किया। उन्होंने पदभार ग्रहण करने के अवसर पर गौरव स्तम्भ, नौसेना डॉकयार्ड, मुंबई में राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले बहादुरों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खडकवासला पुणे के पूर्व छात्र, फ्लैग ऑफिसर को 01 जनवरी 1988 को भारतीय नौसेना में नियुक्‍त किया गया था। तोप और मिसाइल प्रणालियों के विशेषज्ञ के तौर पर, तीन दशकों से अधिक के अपने विशिष्ट नौसेना करियर के दौरान, उन्होंने समुद्र और ज़मीन पर कमांड, परिचालन, स्टाफ और प्रशिक्षण से जुड़े विभिन्न प्रकार के दायित्वों का निर्वहन किया है।

फ्लैग ऑफिसर ने विभिन्न फ्रंटलाइन युद्धपोतों पर अपनी सेवाएं दी हैं, जिसमें तटरक्षक पोत सी-05, मिसाइल पोत आईएनएस विभूति और नाशक, मिसाइल युद्धपोत आईएनएस कुठार तथा गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस सह्याद्री की कमान संभालना भी शामिल है। डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन, नौसेना युद्ध महाविद्यालय, गोवा और प्रतिष्ठित राष्‍ट्रीय रक्षा महाविद्यालय, नई दिल्ली के स्नातक, फ्लैग ऑफिसर ने प्रमुख रणनीतिक और नीति-उन्मुख स्टाफ भूमिकाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। उन्होंने नौसेना मुख्यालय में कार्मिक और योजना निदेशालयों में स्टाफ संबंधी दायित्वों का निर्वहन किया है, जिसमें 'फ्लैग रैंक' पर पदोन्नति के बाद 'सहायक नौसेना प्रमुख (नीति और योजना)' का पद भी शामिल है। इसके बाद, उन्होंने भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े की कमान संभाली और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के उप-कमांडेंट तथा पूर्वी नौसेना कमान के चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में अपनी सेवाएं दीं।

उन्होंने मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ (डीसीआईडीएस) में ऑपरेशन्‍स और डीसीआईडीएस (नीति, योजनाएं और सेना के विकास) के उप प्रमुख के रूप में भी कार्य किया है। इस दौरान उन्होंने ऑपरेशनों के समन्वय, एकीकरण और संयुक्तता को बढ़ाने, सेना के विकास तथा तीनों सेनाओं में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने वाली नीतियां बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का कार्यभार संभालने से पहले वे नौसेना स्टाफ के 47वें वाइस चीफ थे और भारतीय नौसेना की क्षमता बढ़ाने तथा भविष्य की तैयारियों के लिए उत्तरदायी थे।

उन्‍हें परम विशिष्ट सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक और नौ सेना पदक से सम्मानित किया गया है।

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