वित्त मंत्रालय
आरबीआई और स्टेट बैंक ऑफ वियतनाम ने 5 मई, 2026 को डिजिटल भुगतान और वित्तीय नवाचार को सुदृढ़ करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए
वित्तीय नवाचार और डिजिटल भुगतान में द्विपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे सीमा पार भुगतान संबंधों को बेहतर बनाने और भारत को एक प्रमुख फिनटेक केंद्र के तौर पर स्थापित करने की क्षमता है
भारत-वियतनाम साझेदारी क्यूआर कोड-आधारित सीमा पार भुगतान प्रणालियों का विस्तार करेगी
प्रविष्टि तिथि:
29 MAY 2026 6:34PM by PIB Delhi
भारतीय रिजर्व बैंक और स्टेट बैंक ऑफ वियतनाम ने 05.05.2026 को वित्तीय नवाचार और डिजिटल भुगतानों में सहयोग को प्रोत्साहन देने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस सहयोग में सूचना साझा करना, विनियामक समन्वय और सीमा-पार क्यूआर कोड-आधारित मर्चेंट भुगतानों के लिए भुगतान प्रणाली कनेक्टिविटी शामिल है।
यह समझौता ज्ञापन वित्तीय नवाचार और डिजिटल भुगतानों के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक दूरदर्शी और ठोस कदम है, जिसमें सीमा-पार भुगतान संपर्कों को बेहतर बनाने और भारत को एक प्रमुख फिनटेक केंद्र के तौर पर स्थापित करने की क्षमता है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के साथ, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और स्टेट बैंक ऑफ वियतनाम (एसबीवी) ने 05.05.2026 को वित्तीय नवाचार और डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और स्टेट बैंक ऑफ वियतनाम (एसबीवी) का उद्देश्य संभावित संयुक्त नवाचार और डिजिटल भुगतान कार्यक्रमों तथा परियोजनाओं को सरल बनाकर वित्तीय नवाचार और डिजिटल भुगतान के क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करना है; इसमें भुगतान प्रणाली में कनेक्टिविटी का विकास भी शामिल है, जिससे दोनों देशों के बीच क्यूआर कोड-आधारित मर्चेंट भुगतानों के लिए सीमा-पार लेन-देन को सक्षम बनाया जा सके।
समझौता ज्ञापन के बारे में संक्षिप्त जानकारी
- यह समझौता ज्ञापन, आरबीआई और एसबीवी के बीच वित्तीय नवाचार और डिजिटल भुगतानों के क्षेत्र में सहयोग करने के उद्देश्य का एक उत्तर है। इसका उद्देश्य सहयोग, सूचना के आदान-प्रदान और कार्यान्वयन सहायता के लिए एक व्यापक फ्रेमवर्क प्रदान करना है, जो दोनों पक्षों पर लागू होने वाले कानूनों, नियमों और विनियमों की मंजूरी की सीमा तक हो।
- इस समझौता ज्ञापन के अंतर्गत सहयोग के दायरे में, अन्य बातों के साथ ही, उभरते बाजार के रुझानों और विकास, डिजिटल भुगतान और नई तकनीकों में मानकों और बेहतरीन तरीकों, नवाचारों से जुड़े नियामक फ्रेमवर्क, और वित्तीय सेवाओं में डिजिटल भुगतान के विकास और निगरानी पर जानकारी साझा करना शामिल है। यह समझौता ज्ञापन संभावित संयुक्त कार्यक्रमों और परियोजनाओं का भी प्रावधान करता है, जिसमें भारत और वियतनाम के बीच सीमा-पार क्यूआर कोड-आधारित मर्चेंट भुगतानों के लिए भुगतान प्रणाली कनेक्टिविटी शामिल है।
- इस समझौता ज्ञापन से उम्मीद है कि यह दोनों देशों के बीच सीमा-पार लेन-देन की प्रक्रिया को अधिक कुशल बनाएगा, और इन लेन-देन को पारदर्शी (शुल्क का स्पष्ट प्रदर्शन), सुविधाजनक, त्वरित समय पर और अधिक किफायती बनाएगा। साथ ही, यह दोनों देशों के बीच व्यापार और पर्यटन को प्रोत्साहन देगा, जिससे भारत के कारोबार को निर्यात के अधिक मौके मिलेंगे।
- आरबीआई डिप्टी गवर्नर और एसबीवी के डिप्टी गवर्नर ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
रोजगार निर्माण की संभावना के साथ व्यापक प्रभाव
भारतीय रिजर्व बैंक और स्टेट बैंक ऑफ वियतनाम के बीच यह समझौता ज्ञापन मुख्य रूप से एक नियामक सहयोग फ्रेमवर्क है, जो सुचारू सीमा-पार वित्तीय गतिविधियों को बनाए रखने के लिए जरूरी है। इसमें मूल रूप से तेज भुगतान प्रणालियों, मैसेजिंग सिस्टम और कार्ड स्विच के क्षेत्र में सहयोग और सूचना आदान-प्रदान के लिए एक तंत्र की परिकल्पना की गई है।
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पीके/केसी/एमएम/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2266784)
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