पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली के आईजीआई हवाई अड्डे पर भारत की पहली 'स्काईकास्ट' प्रणाली का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत ने कोहरा-मुक्त और मौसम-स्मार्ट विमानन के नए युग में प्रवेश किया
'स्काईकास्ट' पायलटों को वास्तविक समय में मौसम की जानकारी प्रदान करेगा, जिससे कोहरे और ट्रबुलेंस के कारण होने वाली उड़ान देरी, मार्ग परिवर्तन और रद्द होने की घटनाओं में कमी आएगी : डॉ. जितेंद्र सिंह
भारत उन्नत एकीकृत विमानन मौसम निगरानी प्रणाली तैनात करने वाला विश्व का 19वां देश बना : डॉ. जितेंद्र सिंह
अगली स्काईकास्ट सुविधा जेवर हवाई अड्डे पर स्थापित की जाएगी, जिसके बाद भारत के अन्य हवाई अड्डों पर इसका विस्तार किया जाएगा : डॉ. जितेंद्र सिंह
"मिशन मौसम" के तहत विकसित स्काईकास्ट ने सुरक्षित टेक-ऑफ और लैंडिंग के लिए उन्नत वायुमंडलीय प्रौद्योगिकियों को एकीकृत किया
यह प्रणाली रडार विंड प्रोफाइलर, ग्राउंड-बेस्ड फॉग एरोसोल स्पेक्ट्रोमीटर, लिडार सीलोमीटर और अन्य उन्नत सेंसरों को जोड़कर 3 किमी तक के वायुमंडल की निगरानी करती है
प्रविष्टि तिथि:
29 MAY 2026 4:56PM by PIB Delhi
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भारत की पहली "स्काईकास्ट प्रणाली" का उद्घाटन करते हुए इसे भारतीय विमानन में एक नए युग की शुरुआत बताया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि विश्व भर में अब तक केवल 18 ऐसी उन्नत प्रणालियां मौजूद हैं और भारत अब विमानन मौसम निगरानी के लिए इस एकीकृत वायुमंडलीय रिमोट सेंसिंग प्रणाली को स्थापित करने वाला विश्व का 19वां देश बन गया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के आईजीआई हवाई अड्डे के बाद दूसरी ऐसी सुविधा जेवर हवाई अड्डे पर स्थापित की जाएगी, जिसके बाद भारत भर के अन्य हवाई अड्डों पर इसका विस्तार किया जाएगा।
नई दिल्ली के आईजीआई हवाई अड्डे पर उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया, जिसमें पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम), जीएमआर के वरिष्ठ अधिकारी और विमानन क्षेत्र के प्रतिनिधि की उपस्थित थे। डॉ. जितेंद्र सिंह ने ग्लाइड पाथ 10 पर स्काईकास्ट सिस्टम और फॉग ऑब्जर्वेटरी सुविधा का उद्घाटन किया, जिसके बाद आईआईटीएम के वैज्ञानिकों द्वारा एक तकनीकी ब्रीफिंग और प्रदर्शन प्रस्तुत किया गया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने भविष्य की ऐसी उन्नत मौसम संबंधी अवसंरचना को संभव बनाने का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की "मिशन मौसम" की दूरदृष्टि को दिया। उन्होंने कहा कि स्काईकास्ट गंभीर मौसम स्थितियों के दौरान पायलटों और विमानन संचालकों को वास्तविक समय की जानकारी प्रदान करके विमानन सुरक्षा में एक बड़ा बदलाव लाएगा।
डॉ. सिंह ने कहा कि यात्री ऐसे भविष्य की उम्मीद कर सकते हैं, जहां कोहरे और ट्रबुलेंस के कारण होने वाली उड़ान संबंधी बाधाएं काफी हद तक कम हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली विमान चालक दल और पायलटों को लगभग तीन घंटे की छोटी समयावधि के भीतर भी अग्रिम चेतावनी प्रदान करेगी, जिससे वे सुरक्षित लैंडिंग का समय तय कर सकेंगे और अनावश्यक मार्ग परिवर्तन, रद्द होने और देरी से बच सकेंगे।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि स्काईकास्ट भारत के विमानन इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि यह कोहरे की निगरानी, ट्रबुलेंस का पता लगाने और गंभीर मौसम पूर्वानुमान के लिए कई वायुमंडलीय अवलोकन प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करता है। यह प्रणाली अत्याधुनिक वायुमंडलीय रिमोट सेंसिंग प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करती है, जिनमें रडार विंड प्रोफाइलर, एसओडीएआर, माइक्रोवेव रेडियोमीटर, ग्राउंड-बेस्ड फॉग एरोसोल स्पेक्ट्रोमीटर (जीएफएस) और सीएल61 लिडार-बेस्ड सीलोमीटर शामिल हैं, ताकि व्यापक वास्तविक समय की वायुमंडलीय जानकारी प्रदान की जा सके। उन्होंने कहा कि यह सुविधा रनवे पर निगरानी और चेतावनी क्षमताओं को मजबूत करेगी, जिससे टेक-ऑफ और लैंडिंग अधिक सुरक्षित हो जाएगी।
डॉ. सिंह ने कहा कि स्काईकास्ट का मुख्य आधार एक उन्नत बाउंड्री लेयर रडार विंड प्रोफाइलर है, जो हवाई अड्डे से लगभग 3 किलोमीटर ऊपर तक हवा की गति, दिशा, ट्रबुलेंस, ऊर्ध्वाधर वेग और बाउंड्री लेयर की गतिशीलता को लगातार मापता है। विमान के उतरने और लैंडिंग के दौरान ये पैरामीटर बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, जहां सटीक वायुमंडलीय जानकारी सुरक्षा को बेहतर बनाने में सहायक होती है।
स्काईकास्ट सुविधा में ग्राउंड-बेस्ड फॉग एरोसोल स्पेक्ट्रोमीटर (जीएफएएस) जैसे उन्नत कोहरे की निगरानी करने वाले उपकरण भी शामिल हैं, जो कोहरे की बूंदों, एरोसोल और एरोसोल-कोहरे की परस्पर क्रियाओं के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करते हैं। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह दिल्ली जैसे शहरों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां प्रदूषण के कण कोहरे के साथ परस्पर क्रिया करते हैं और दृश्यता की स्थिति को प्रभावित करते हैं।
इस प्रणाली में सीएल61 लिडार-आधारित सीलोमीटर भी एकीकृत है, जो कोहरे की ऊर्ध्वाधर संरचना की निरंतर निगरानी करता है। इससे कोहरे के बनने, दृश्यता में कमी और विमानन संचालन को प्रभावित करने वाली वायुमंडलीय स्थितियों को समझने में मदद मिलती है।
स्काईकास्ट कोहरे, एरोसोल, ट्रबुलेंस, नमी, दृश्यता और वायुमंडलीय स्थितियों के वास्तविक समय के मापों को एक उन्नत विमानन मौसम सूचना प्रणाली में एकीकृत करता है। यह प्रणाली पायलटों, एयरलाइनों, हवाई अड्डे के संचालकों और हवाई यातायात प्रबंधन एजेंसियों को सटीक पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी सेवाएं प्रदान करेगी।
स्काईकास्ट का वैज्ञानिक आधार विंटर फॉग एक्सपेरिमेंट (वाईएफईएक्स) है, जिसे पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत आईआईटीएम और आईएमडी द्वारा संयुक्त रूप से 2015 में आईजीआई हवाई अड्डे पर शुरू किया गया था। वाईएफईएक्स ने कोहरे के निर्माण, एरोसोल-बादल की परस्पर क्रिया, दृश्यता में कमी और शहरी सीमा-परत प्रक्रियाओं की महत्वपूर्ण समझ विकसित की, जिसने इस अगली पीढ़ी के परिचालन प्रणाली के विकास में योगदान दिया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक नवाचार और उन्नत मौसम प्रौद्योगिकियों के माध्यम से भारत "कोहरा-मुक्त उड़ानों" के युग की ओर अग्रसर है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विमानन को "हवाई चप्पल से हवाई जहाज" तक ले जाने के विजन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अब विमानन और नागरिकों के लाभ के लिए मौसम सेवाओं के लोकतंत्रीकरण की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन ने कहा कि स्काईकास्ट सुविधा न केवल विमानन संचालन में सहयोग देगी, बल्कि भारत की समग्र मौसम पूर्वानुमान क्षमताओं को भी मजबूत करेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे उन्नत उपकरणों द्वारा उत्पन्न हवा, आर्द्रता और तापमान के ऊर्ध्वाधर प्रोफाइल से भविष्य के मौसम पूर्वानुमानों में सुधार होगा। उन्होंने आगे कहा कि मिशन मौसम के तहत मौसम प्रणालियों की बेहतर निगरानी सुनिश्चित करने के लिए डॉप्लर मौसम रडार और इसी तरह की प्रणालियों सहित उन्नत अवलोकन नेटवर्क का देश भर में विस्तार किया जा रहा है।
डॉ. रविचंद्रन ने कहा कि ऐसी सुविधाओं से उच्च गुणवत्ता वाला वायुमंडलीय डेटा मिलेगा, जिससे आने वाले वर्षों में पूर्वानुमान की सटीकता में काफी सुधार होगा। उन्होंने कहा कि इन प्रौद्योगिकियों को हवाई अड्डों और भारत के अन्य हिस्सों में तेजी से तैनात किया जाएगा, साथ ही पूर्वानुमान क्षमताओं को और बेहतर बनाने के लिए विमान-आधारित अवलोकनों को भी एकीकृत किया जाएगा।
विमानन के अलावा स्काईकास्ट अवलोकन उन्नत पूर्वानुमान मॉडल, कृत्रिम बुद्धिमत्ता-सक्षम निर्णय समर्थन प्रणालियों, शहरी मौसम पूर्वानुमान, प्रदूषण प्रबंधन, परिवहन परामर्श और आपदा तैयारी पहलों को भी सहायता प्रदान करेगी।
मिशन मौसम के तहत स्काईकास्ट प्रणाली मौसम-अनुकूल बुनियादी ढांचे के निर्माण, विमानन क्षमता को मजबूत करने और वैज्ञानिक नवाचार के माध्यम से सुरक्षित और अधिक विश्वसनीय सेवाएं सुनिश्चित करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।





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पीके/केसी/आईएम/एचबी
(रिलीज़ आईडी: 2266728)
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