वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय
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वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल और मत्स्य पालन मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने समुद्री खाद्य क्षेत्र के विकास में तेजी लाने के लिए उच्च स्तरीय बैठक की


केंद्र सरकार भारत के समुद्री खाद्य क्षेत्र और निर्यात इकोसिस्‍टम को मजबूत करने के लिए विशाखापत्तनम में दो दिवसीय 'चिंतन शिविर' का आयोजन करेगी

सरकार मूल्यवर्धित निर्यात बढ़ाने और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को समर्थन देने के लिए समुद्री खाद्य क्षेत्र के लिए पीएलआई ढांचे पर विचार कर रही है

सरकार सतत हार्वेस्टिंग और निर्यात प्रोत्साहन के माध्यम से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में टूना क्षेत्र के विकास पर ध्यान केंद्रित करेगी

मत्स्य विभाग और एमपीईडीए वैश्विक व्यापार प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व करेंगे, एसपीएस अनुपालन को मजबूत करेंगे, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में समुद्री खाद्य निर्यात इकोसिस्‍टम का विस्तार करेंगे

प्रविष्टि तिथि: 14 MAY 2026 6:26PM by PIB Delhi

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल और केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह के बीच आज एक उच्च स्तरीय संयुक्त बैठक हुई। बैठक में भारत के समुद्री खाद्य क्षेत्र के विकास में तेजी लाने और देश की वैश्विक निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने के लिए एक रोडमैप पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में वाणिज्य विभाग, मत्स्य विभाग, एमपीएफआई, डीपीआईआईटी, एमपीईडीए और ईआईसी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में निर्यात प्रोत्साहन गतिविधियों को पीएमएमएसवाई और संबद्ध योजनाओं के उद्देश्यों के साथ तालमेल बिठाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

दोनों मंत्रालयों ने मूल्यवर्धन, इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर विकास, उत्पाद विविधीकरण, गुणवत्ता आश्वासन, बाजार विस्तार, गहरे समुद्र में मछली पकड़ने और अधिक हितधारकों की भागीदारी पर केंद्रित समन्वित रणनीति के माध्यम से समुद्री खाद्य निर्यात की वृद्धि को बढ़ाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

इस पहल के अंतर्गत, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए), राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी), तटीय मत्स्य पालन प्राधिकरण (सीएए), राज्य मत्स्य विभाग, समुद्री खाद्य निर्यातक, स्टार्टअप, मछुआरे, किसान और अन्य उद्योग हितधारक भाग लेंगे और मंत्रालयों द्वारा संयुक्त रूप से 5-6 जून, 2026 को विशाखापत्तनम में दो दिवसीय "चिंतन शिविर" का आयोजन किया जाएगा।

मत्स्य पालन विभाग, समुद्री खाद्य क्षेत्र में सूक्ष्‍म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए एक समर्पित उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना विकसित करने की संभावना तलाशेगा ताकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार किया जा सके, निर्यात-उन्मुख बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा सके, प्रौद्योगिकी को अपनाने को प्रोत्साहित किया जा सके, अनुसंधान और विकास का समर्थन किया जा सके और मूल्यवर्धन को बढ़ावा दिया जा सके।

प्रस्तावित ढांचे का उद्देश्य भारत के कुल समुद्री खाद्य निर्यात में मूल्यवर्धित समुद्री खाद्य उत्पादों की हिस्सेदारी को काफी हद तक बढ़ाना और समुद्री खाद्य निर्यातकों की संख्या को वर्तमान में लगभग 1,200 से बढ़ाकर आने वाले वर्षों में 5,000 तक पहुंचाना है। इस पहल से निर्यात से होने वाली आय में सुधार और वैश्विक समुद्री खाद्य मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को मजबूत करने की उम्मीद है।

टूना मछली पालन क्षेत्र के विकास पर विशेष जोर दिया जाएगा, विशेषकर अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में। टूना और अन्य उच्च मूल्य वाले समुद्री उत्पादों की सतत हार्वेस्टिंग, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए लक्षित क्रियाकलाप किए जाएंगे।

मत्स्य पालन विभाग और एमपीईडीए मिलकर प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों में व्यापार और व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडलों का आयोजन करेंगे ताकि बाजार पहुंच का विस्तार हो सके, व्यापार साझेदारी मजबूत हो सके और भारतीय समुद्री खाद्य को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा मिल सके। एमपीईडीए और एनएफडीबी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, जिनमें अंतर्देशीय क्षेत्र भी शामिल हैं, में निर्यात क्षमता और बुनियादी ढांचे की कमियों का व्यापक आकलन करेंगे ताकि समुद्री खाद्य निर्यात प्रणाली में व्यापक भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

बैठक में मत्स्य पालन और मछली पकड़ने में स्वच्छता और पादप स्वच्छता (एसपीएस) संबंधी मुद्दों के समाधान के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया गया। प्राथमिक उत्पादन चरण से ही पता लगाने की क्षमता, गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली, रोग-मुक्त क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन को मजबूत करने के प्रयास किए जाएंगे। समुद्री खाद्य प्रजातियों और उत्पादों की जीआई टैगिंग की संभावनाओं का भी पता लगाया जाएगा।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रयोगशाला के बुनियादी ढांचे को उन्नत किया जाएगा ताकि परीक्षण, प्रमाणीकरण और निर्यात अनुपालन क्षमताओं को मजबूत किया जा सके, जिसमें लक्षद्वीप और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

दोनों मंत्रियों ने मछुआरों के सहयोग से समुद्री प्लास्टिक कचरे के संग्रहण और रिसाइक्लिंग के लिए एमपीईडीए की प्रायोगिक पहल की भी सराहना की। समुद्री संरक्षण को मजबूत करने और टिकाऊ मत्स्य पालन को समर्थन देने के लिए इस कार्यक्रम को सभी तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विस्तारित करने की परिकल्पना की गई है।

बैठक में दोनों मंत्रालयों ने सतत मत्स्य पालन विकास, आधुनिक बुनियादी ढांचे, बेहतर गुणवत्ता प्रणालियों और सूक्ष्‍म, लघु और मध्यम उद्यमों, स्टार्टअप उद्यमों और मछुआरा सहकारी समितियों की बढ़ी हुई भागीदारी के माध्यम से भारत को एक अग्रणी वैश्विक समुद्री खाद्य निर्यात केंद्र में बदलने की प्रतिबद्धता पर बल दिया। इन पहलों से रोजगार सृजन, मछुआरों की आय में वृद्धि, तटीय और द्वीपीय क्षेत्रों के समावेशी विकास और भारत की नीली अर्थव्यवस्था के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।

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पीके/केसी/एसकेएस/ओपी

 


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