अंतरिक्ष विभाग
डॉ. जितेंद्र सिंह ने फ्रांसीसी मंत्री के साथ अंतरिक्ष, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती प्रौद्योगिकियों में भारत-फ्रांस संबंधों के विस्तार की संभावना को लेकर द्विपक्षीय बैठक की
भारत-फ्रांस के विज्ञान और अंतरिक्ष संबंधों को नई गति मिली; दोनों देशों के मंत्रियों ने प्रगति और भविष्य की कार्ययोजना की समीक्षा की
भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 द्विपक्षीय सहयोग के अगले चरण को गति देगा: डॉ. जितेंद्र सिंह
भारत और फ्रांस कृत्रिम बुद्धिमत्ता, प्रयुक्त गणित और उन्नत सामग्री के क्षेत्र में सहयोग के नए आयाम तलाश रहे हैं: डॉ. जितेंद्र सिंह
फ्रांसीसी मंत्री प्रो. फिलिप बैपटिस्ट ने भारत के साथ मानव अंतरिक्ष उड़ान में सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव रखा
प्रविष्टि तिथि:
07 MAY 2026 4:06PM by PIB Delhi
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान (स्वतंत्र प्रभार) राज्य मंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से फ्रांस के उच्च शिक्षा, अनुसंधान और अंतरिक्ष मंत्री प्रो. फिलिप बैपटिस्ट के साथ द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत-फ्रांस सहयोग के बढ़ते दायरे की समीक्षा की गई।
इस वार्ता से भारत-फ्रांस की दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी की गहराई का पता चला, जिसमें दोनों पक्षों ने विशेष रूप से उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग की निरंतर गति पर संतोष व्यक्त किया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर प्रकाश डाला कि विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत-फ्रांस की सहभागिता द्विपक्षीय संबंधों का एक मजबूत स्तंभ बन गई है, जो तकनीकी प्रगति और जन-जन के बीच घनिष्ठ जुड़ाव में योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि 2026 को भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष घोषित किए जाने से उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्राप्त होता है।
हाल के घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और प्रमुख फ्रांसीसी संगठनों के बीच संस्थागत साझेदारी को मजबूत करने के बारे में चर्चा की, जिसमें उन्नत सामग्री और डिजिटल विज्ञान में नई पहल के साथ-साथ इस वर्ष शुरू की गई प्रयुक्त गणित और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर संयुक्त पहल भी शामिल है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने अंतरिक्ष सहयोग को लेकर इसरो और सीएनईएस के बीच लंबे समय से चले आ रहे सहयोग के बारे में बताया, जिसमें मेघा-ट्रॉपिक्स और सरल जैसे संयुक्त उपग्रह मिशन और तृष्णा पर चल रहा कार्य शामिल है। उन्होंने फ्रांस में नेविक ग्राउंड स्टेशन के विकास में सहयोग का भी जिक्र किया और भारत के गगनयान मिशन में फ्रांस के समर्थन को स्वीकार किया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि हाल के सुधारों के बाद भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में तेजी से विस्तार हुआ है, जिसमें लगभग 400 अंतरिक्ष स्टार्टअप का एक बढ़ता हुआ इकोसिस्टम है और आने वाले वर्षों में अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत अनुमान हैं, जो दोनों देशों के बीच गहन उद्योग-स्तरीय साझेदारी के नए अवसर पैदा कर रहे हैं।
फ्रांस के उच्च शिक्षा, अनुसंधान और अंतरिक्ष मंत्री प्रो. फिलिप बैपटिस्ट ने भारत को अंतरिक्ष और अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग का एक प्रमुख और विश्वसनीय भागीदार बताया। इसरो के साथ अपने पूर्व संबंधों को याद करते हुए, उन्होंने सहयोग की मजबूत विरासत पर प्रकाश डाला और पृथ्वी अवलोकन, प्रक्षेपण प्रणालियों और अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने में रुचि व्यक्त की।
प्रो. फिलिप बैपटिस्ट ने "स्पेस फॉर ओशन एलायंस" के माध्यम से महासागर संबंधी डेटा साझाकरण में सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव रखा और सीएनईएस तथा भारतीय संस्थानों के बीच घनिष्ठ संबंध स्थापित करने का सुझाव दिया। उन्होंने प्रशिक्षण, सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण प्रयोगों और दीर्घकालिक सहयोगात्मक अवसरों सहित मानव अंतरिक्ष उड़ान में सहयोग के विस्तार के लिए तत्परता भी व्यक्त की।
प्रो. बैपटिस्ट ने वैश्विक सहभागिता का जिक्र करते हुए भारत को सितंबर 2026 में पेरिस में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए आमंत्रित किया, और अंतरिक्ष संबंधी चर्चाओं के लिए एक समन्वित वैश्विक मंच बनाने के लिए भारत के बेंगलुरु अंतरिक्ष कार्यक्रम के साथ तालमेल बिठाने का सुझाव दिया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रस्तावों पर अपनी राय देते हुए पहलों का स्वागत किया और महासागर अनुसंधान और मानव अंतरिक्ष उड़ान में आगे सहयोग के लिए भारत की तत्परता व्यक्त की। उन्होंने महासागर संबंधी साझेदारियों को आगे बढ़ाने में भारत के गहन महासागर मिशन और इसके विस्तृत समुद्रतट को प्रमुख शक्तियों के रूप में भी दर्शाया।
दोनों पक्षों ने दीर्घकालिक वैज्ञानिक सहयोग को बनाए रखने और संस्थानों के बीच अनुसंधान साझेदारी को बढ़ावा देने में भारत-फ्रांस उन्नत अनुसंधान संवर्धन केंद्र (सीईएफआईपीआरए) द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका को भी स्वीकार किया।
बैठक का समापन विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत-फ्रांस सहयोग को और भी अधिक मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ, जिसमें नवाचार, अनुसंधान क्षमताओं और बढ़ती उद्योग भागीदारी का लाभ उठाकर पारस्परिक और वैश्विक लाभ प्राप्त करने की बात कही गई।




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पीके/केसी/एसकेएस/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2258777)
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