कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय
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नारी नारायणी हैं: कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका पर वैश्विक सम्मेलन में बोले श्री शिवराज सिंह चौहान


कृषि क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी देश की शक्ति, आज देश में महिला वैज्ञानिकों की संख्या 41 प्रतिशत- श्री शिवराज सिंह चौहान

10 करोड़ महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं, 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य हासिल करेंगे- श्री शिवराज सिंह चौहान

प्रविष्टि तिथि: 12 MAR 2026 6:55PM by PIB Delhi

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नई दिल्ली में कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका पर वैश्विक सम्मेलन (जीसीडब्ल्‍यूएएस-2026) के उद्घाटन सत्र में शिरकत की और सत्र को संबोधित किया।

इस दौरान अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यह भारतीय परंपरा का हिस्सा है कि यहां बहन-बेटियों को समाज में सर्वोच्च स्थान दिया गया है। यहां धरती को भी माता की संज्ञा दी गई है और मां मानकर हम इसकी वंदना करते हैं। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि आज देश के कृषि वैज्ञानिकों में महिला वैज्ञानिकों की संख्या 41 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने कहा कि कृषि शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का ये प्रमाण है।

केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए भारत में अभूतपूर्व कार्य हो रहा है। देश के अऩ्न भंडार भरने में महिलाओं की भूमिका उल्लेखनीय है। श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और कृषि कार्य में महिलाएं अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। कार्यक्रम में उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किए जा रहे सराहनीय कार्यों की चर्चा करते हुए कहा कि आज देश में 10 करोड़ बहनों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा गया है। 3 करोड़ लखपति दीदी का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है और अब तीन करोड़ अतिरिक्त लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि इस कार्य के पूर्ण होते ही लखपति दीदीयों की संख्या 6 करोड़ हो जाएगी।

श्री शिवराज सिंह ने कहा कि आज देश में महिलाएं ड्रोन दीदी, बैंक दीदी बनकर विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सकारात्मक भागीदारी सुनिश्चित कर रही हैं। अपने संबोधन के अंत में केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि नारी नारायणी हैं। इनके बिना न खेती का काम चलेगा न देश का काम चलेगा।

इससे पहले कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका पर वैश्विक सम्मेलन (जीसीडब्ल्‍यूएएस-2026) का शुभारंभ राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के द्वारा किया गया। उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित  करते हुए कहा कि बुवाई, कटाई, प्रसंस्करण और फसलों को बाजार तक पहुंचाने सहित कृषि संबंधी सभी गतिविधियों में महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वे मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, पशुपालन, वन उत्पादों के समुचित इस्‍तेमाल और कृषि आधारित उद्यमों के संचालन सहित कई क्षेत्रों में अथक परिश्रम करती हैं। कृषि अर्थव्यवस्था में महिलाओं का अमूल्य योगदान है।

राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों में कुल छात्रों में 50 प्रतिशत से अधिक लड़कियां हैं और कई विश्वविद्यालयों में यह संख्या 60 प्रतिशत से अधिक है। उन्होंने कहा कि ये सभी हितधारकों का दायित्व है कि वे इन होनहार लड़कियों को कृषि तथा अनाज उत्पादन के क्षेत्र में नेतृत्व प्रदान करने के लिए हर संभव सहायता और प्रोत्साहन दें। उन्होंने कहा कि नेतृत्व मातृत्व का अंतर्निहित गुण है। हालांकि, मातृत्व को अक्सर घर की चारदीवारी तक ही सीमित माना जाता है। हमें इस मानसिकता को दूर करना होगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2026 को 'अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष' घोषित किया है। इस घोषणा में कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखलाओं में महिला-पुरुष आधारित असमानताओं को दूर करने और महिलाओं के लिए नेतृत्व की भूमिकाओं को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया गया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि कृषि, विशेषकर कृषि-खाद्य प्रणालियों में कार्यरत महिलाओं के नेतृत्व को प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि महिला किसानों को भूमि के औपचारिक स्वामित्व, तकनीकी ज्ञान, वित्तीय संसाधन और अन्य सहायता प्रणालियों से संबंधित मामलों में मदद मिलनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि पिछले एक दशक में भारत ने कृषि क्षेत्र में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस वैश्विक सम्मेलन के प्रतिभागी प्रगति को गति देने और नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने के मार्ग प्रशस्‍त करेंगे।

ट्रस्ट फॉर एडवांसमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज़ (TAAS) के अध्यक्ष डॉ. आर. एस. परोदा ने कहा कि यह सम्मेलन कृषि मूल्य श्रृंखला के विभिन्न चरणों- उत्पादन, फसलोपरांत प्रबंधन, मूल्य संवर्धन और बेहतर बाज़ार संपर्कमें महिलाओं की परिवर्तनकारी भूमिका को पहचानने और सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक आंदोलन की शुरुआत है।उन्होंने जोर देते हुए कहा कि केवल प्रतिनिधित्व पर्याप्त नहीं है, बल्कि महिलाओं को पूरी कृषि मूल्य श्रृंखला में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने के लिए सशक्त बनाना आवश्यक है।

अपने स्वागत भाषण में डॉ. रेणु स्वरूप, पूर्व सचिव, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकारने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य संवाद को एक्शन में बदलना है। इसके लिए लैंगिक संवेदनशील पहलों को संस्थागत रूप देने हेतु ठोस रणनीतियां और एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया जाएगाजिसेमज़बूत नीतिगत समर्थन प्राप्त हो।

डॉ. एग्नेस कालीबाता, संस्थापक एवं अध्यक्ष, कनेक्ट4 इम्पैक्ट एडवाइजरी ग्रुप, रवांडा ने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाना केवल निष्पक्षता और न्याय का विषय नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास, लचीलापन और वैश्विक खाद्य सुरक्षा में एक रणनीतिक निवेश भी है।

कार्यक्रम में डॉ. एम. एल. जाट, सचिव, डीएआरई तथा महानिदेशक, आईसीएआर और डॉ. त्रिलोचन मोहापात्रा, अध्यक्ष, पौध किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPV&FRA) भी उपस्थित रहे। वहीं, डॉ. राजबीर सिंह, उप महानिदेशक (कृषि विस्तार), आईसीएआरने उद्घाटन सत्र के दौरान सह-अध्यक्ष की भूमिका निभाई।

जीसीडब्ल्यूएस-2026 का आयोजन कृषि विज्ञान संवर्धन ट्रस्ट (टीएएएस), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), अंतरराष्ट्रीय कृषि अनुसंधान सलाहकार समूह (सीजीआईएआर) और पादप किस्मों और किसानों के अधिकारों के संरक्षण प्राधिकरण (पीपीवी एंड एफआरए) द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य महिला-पुरुष भागीदारी को मुख्यधारा में लाने के लिए नीतिगत ढांचों और इकोसिस्‍टम को मजबूत करने पर विचार-विमर्श करना और टिकाऊ एवं समावेशी कृषि-खाद्य प्रणालियों के निर्माण में महिलाओं की अपरिहार्य भूमिका को उजागर करना है।

प्रेस विज्ञप्ति लिंक:

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2238851&reg=3&lang=2

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आरसी/एमएस/ डीके


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