वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
मुक्त व्यापार समझौते (एफ टी ए) भारत के औषधि, स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा प्रौद्योगिकी (मेडटेक) क्षेत्रों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रहे हैं: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल
एफटीए से किसान, एमएसएमई और नवाचार क्षेत्र लाभान्वित हो रहे हैं, साथ ही ‘वैश्विक औषधि केंद्र’ के रूप में भारत की भूमिका और मजबूत हो रही है: श्री पीयूष गोयल
स्वास्थ्य क्षेत्र को निर्यात और कौशल विकास से जोड़ना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है: श्री पीयूष गोयल
प्रविष्टि तिथि:
09 MAR 2026 7:37PM by PIB Delhi
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज कहा कि भारत के मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) औषधि, स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा प्रौद्योगिकी क्षेत्रों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रहे हैं। साथ ही ये समझौते वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति को और मजबूत बनाने में भी सहायक सिद्ध हो रहे हैं।
बजट 2026 के उपरांत नई दिल्ली में ‘सबका साथ, सबका विकास: लोगों की आकांक्षाओं की पूर्ति’ विषय पर वेबिनार को संबोधित करते हुए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने पिछले लगभग साढ़े तीन वर्षों में कुल नौ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें से पाँच समझौते पिछले 12 महीनों के दौरान संपन्न हुए हैं। उन्होंने कहा कि इन समझौतों के परिणामस्वरूप अब वैश्विक व्यापार का लगभग दो-तिहाई हिस्सा भारत के लिए खुल चुका है। इन एफटीए के माध्यम से भारत को कई अन्य देशों की तुलना में प्राथमिकता आधारित बाजार पहुंच मिल रही है, जिसमें कम आयात शुल्क और अधिक बाजार अवसर शामिल हैं। इससे व्यापार को बढ़ाने के लिए नए रास्ते खुल रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि औषधि और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों में भारत का दुनिया के साथ व्यापार अब पहले से कहीं अधिक व्यापक स्वरूप ले चुका है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) केवल बड़े उद्योगों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका लाभ किसानों, मछुआरों, एमएसएमई, छोटे उद्योगों और व्यापारियों को भी मिलता है। उन्होंने कहा कि इन समझौतों से चिकित्सा उपकरणों का निर्माण करने वाले मेड-टेक क्षेत्र और औषधि क्षेत्र को भी लाभ मिलता है। साथ ही नवाचार और उभरती प्रौद्योगिकियों से जुड़े लोगों के लिए वैश्विक स्तर पर नए अवसर भी खुलते हैं। भारत की औषधि क्षेत्र में मजबूत उपस्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को विश्व स्तर पर “दुनिया की फार्मेसी” के रूप में व्यापक पहचान प्राप्त हुई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में तैयार की गई मजबूत आधारशिला के बल पर भारत आगे बढ़ते हुए वैश्विक बाजारों में नए अवसरों का लाभ उठाने में सफल होगा।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि अमृत काल के दौरान 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ते हुए भारत की यात्रा को मार्गदर्शन देने के लिए पाँच प्रमुख प्राथमिकताओं पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब उद्योग और संस्थान उनका सक्रिय रूप से उपयोग करेंगे। सरकार मार्ग खोल सकती है और अवसर उपलब्ध करा सकती है, लेकिन व्यापार और कारोबार को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अंततः उद्योग जगत की ही होती है। श्री गोयल ने कहा कि भारत को एक समग्र स्वास्थ्य सेवा पारिस्थितिकी (हेल्थकेयर इकोसिस्टम) विकसित करना होगा, जिसमें विनिर्माण, नवाचार, स्टार्टअप और अस्पताल सभी को एक साथ जोड़ा जाए। ऐसा एकीकृत पारिस्थितिकी एफटीए से उत्पन्न अवसरों का पूरा लाभ उठाने में देश की मदद करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया में एमएसएमई की महत्वपूर्ण भूमिका होगी, विशेष रूप से गुणवत्ता उन्नयन (क्वालिटी अपग्रेडेशन) के क्षेत्र में। उनके अनुसार गुणवत्ता मानकों और परीक्षण सुविधाओं को मजबूत बनाने से यह सुनिश्चित होगा कि भारत से निर्यात होने वाले उत्पाद “ब्रांड इंडिया” की छवि को मजबूत करें और वैश्विक स्तर पर देश की क्षमताओं को प्रदर्शित करें।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आगे कहा कि भारत विश्व के विभिन्न क्षेत्रों के साथ अपने व्यापारिक सहयोग का लगातार विस्तार कर रहा है। उन्होंने बताया कि भारत के कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं और क्षेत्रों के साथ पहले से समझौते हैं या उन पर वार्ता चल रही है। इनमें अमरीका, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड शामिल हैं। इसके अतिरिक्त यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के चार देशों— स्विट्ज़रलैंड, नॉर्वे, लिकटेंस्टीन और आइसलैंड के साथ भी भारत के समझौते हो गए हैं या वार्ताएँ चल रही हैं। उन्होंने बताया कि खाड़ी क्षेत्र में संयुक्त अरब अमीरात और ओमान के साथ समझौते हो चुके हैं, जबकि खाड़ी सहयोग परिषद के सभी छह देशों ने भारत के साथ समझौते करने में रुचि व्यक्त की है। श्री गोयल ने यह भी कहा कि कनाडा के साथ वार्ताएं तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं। इसके साथ ही लैटिन अमेरिका के मर्कोसुर देशों तथा यूरेशियन आर्थिक संघ के साथ भी बातचीत आगे बढ़ रही है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने में विश्व के विभिन्न देशों की बढ़ती रुचि भारत की आर्थिक क्षमता की वैश्विक मान्यता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था का वर्तमान आकार लगभग चार ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के आसपास है और आने वाले दो से ढाई दशकों में बढ़कर लगभग तीस ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच सकती है। उनके अनुसार यह स्थिति वैश्विक आर्थिक सहयोग और भागीदारी के लिए एक ऐतिहासिक अवसर प्रस्तुत करती है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्वास्थ्य क्षेत्र को निर्यात से और अधिक मजबूती से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत को देखभाल करने वाले और नर्स जैसे कुशल पेशेवरों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान देना चाहिए, जिनकी मांग भारत में ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काफी अधिक है। उन्होंने कहा कि कौशल विकास को मजबूत बनाकर भारत ऐसा कार्यबल तैयार कर सकता है जो निर्यात को बढ़ावा देने, विदेशों से आने वाली धनराशि (प्रेषण) में वृद्धि करने और भारतीय उत्पादों तथा सेवाओं की वैश्विक उपस्थिति को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए।
श्री गोयल ने डिजिटल स्वास्थ्य और उभरती प्रौद्योगिकियों के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल स्वास्थ्य के एकीकरण को विश्व स्तर पर तेजी से महत्व मिल रहा है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता को आशंका के साथ देखने के बजाय एक सक्षम बनाने वाली प्रौद्योगिकी के रूप में अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि भारत के पास उन्नत अनुप्रयुक्त प्रौद्योगिकियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाधानों के विकास के लिए आवश्यक प्रतिभा उपलब्ध है। इन प्रौद्योगिकियों का उपयोग दूरचिकित्सा सेवाओं को बढ़ावा देने और रोग निदान को बेहतर बनाने में किया जा सकता है, जिससे भारत की लगभग 140 करोड़ की आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने आगे जोर दिया की हमें एक व्यापक, समग्र और एकीकृत स्वास्थ्य सेवा पारिस्थितिकी विकसित करने की आवश्यकता है। केन्द्रीय मंत्री के अनुसार यदि विभिन्न हितधारक अलग-अलग काम करते रहेंगे तो प्रगति सीमित रह जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार, उद्योग जगत, स्वास्थ्य संस्थानों और नवाचार से जुड़े लोगों के बीच समन्वित प्रयास किए जाने की आवश्यकता है तभी यह सुनिश्चित होगा कि देश इन पहलों का अधिकतम लाभ उठा सके।
इस अवसर पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रति विश्व में बढ़ती रुचि को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद और योग जैसी प्रणालियों को विश्व स्तर पर लगातार अधिक मान्यता मिल रही है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इन पद्धतियों पर अनुसंधान को और विस्तार दिया जाए, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनके मानकों का निर्धारण किया जाए तथा अन्य देशों के साथ सहयोग के माध्यम से इन्हें वैश्विक स्तर पर प्रोत्साहित किया जाए।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि स्वस्थ भारत ही विकसित भारत की मजबूत नींव बनेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन सभी क्षेत्रों में सामूहिक प्रयासों के माध्यम से भारत वैश्विक स्तर पर एक अग्रणी भूमिका में उभरेगा और विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में सफल होगा।
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पीके/केसी/डीटी
(रिलीज़ आईडी: 2237277)
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