मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में मछली पकड़ने के लिए एक्सेस पास का शुभारंभ किया
बेहतर पहुंच, पता लगाने की क्षमता और उच्च आय के लिए पूरी तरह से ऑनलाइन और निःशुल्क एक्सेस पास
प्रविष्टि तिथि:
20 FEB 2026 3:49PM by PIB Delhi
माननीय केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री (एमओएफएएचडी) और पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने आज 20 फरवरी को गुजरात के वेरावल स्थित केसीसी ग्राउंड में विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में मछली पकड़ने के लिए एक्सेस पास का शुभारंभ किया। इस अवसर पर एमओएफएएचडी और पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो.एसपी सिंह बघेल, एमओएफएएचडी और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन, मत्स्य विभाग के केंद्रीय सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी और गुजरात सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (कृषि, किसान कल्याण और सहकारिता विभाग) श्री अरुणकुमार सोलंकी उपस्थित थे।
इस कार्यक्रम में सभी तटीय राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की 24 मत्स्य सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। साथ ही 2,000 से अधिक प्रतिभागियों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया और सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, मत्स्य सहकारी समितियों और मत्स्य पालन संगठनों (एफएफपीओ) ने 500 से अधिक स्थानों से ऑनलाइन भी शामिल हुए ।
इस दौरान माननीय केंद्रीय मंत्री एफएएचडी श्री सिंह ने देश के सभी तटीय राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की 24 मत्स्य सहकारी समितियों का प्रतिनिधित्व करने वाले 37 मछुआरों को ईईजेड में मछली पकड़ने के लिए एक्सेस पास प्रदान किए । माननीय केंद्रीय मंत्री एफएएचडी श्री सिंह ने मछुआरों को सुरक्षा किट भी वितरित किए। इसमें लाइफ जैकेट, हाई-बीम टॉर्च और जीपीएस उपकरण शामिल थे। ये उन्हें अपतटीय मत्स्य पालन गतिविधियों में सुरक्षित रूप से मार्गदर्शन करने में सक्षम बनाते हैं। इसके बाद गुजरात में नवगठित मत्स्य सहकारी समितियों को 2 लाख रुपये का अनुदान वितरित किया गया ।

एक्सेस पास का शुभारंभ देश के ईईजेड के लिए एक आधुनिक, टिकाऊ और मछुआरा-केंद्रित शासन ढांचे को क्रियान्वित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इसका उद्देश्य अपतटीय मत्स्य पालन का विस्तार करना, मछुआरों की आय बढ़ाना, समुद्री संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देना और एक लचीली और समावेशी नीली अर्थव्यवस्था की राष्ट्रीय दृष्टि को आगे बढ़ाना है।

माननीय केंद्रीय मंत्री एफएएचडी और पंचायती राज श्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि ईईजेड (विशेष आर्थिक क्षेत्र) ढांचा मछुआरा संघों, सहकारी समितियों, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और वैज्ञानिक संस्थानों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इससे एक पारदर्शी, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार प्रणाली सुनिश्चित हो सके। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि रियलक्राफ्ट पोर्टल पर अब तक कई आवेदन प्राप्त हो चुके हैं और आगामी माह के दौरान दिशानिर्देशों के अनुसार एक्सेस पास जारी किए जाएंगे।
माननीय केंद्रीय मंत्री श्री सिंह ने मछुआरों से विकास के लिए सहकारी समितियों में संगठित होने, एक्सेस पास के लिए आवेदन करने और ईईजेड नियमों का लाभ उठाने का आग्रह किया। क्योंकि बजट घोषणा 2026 के अनुसार ईईजेड/खुले समुद्र में किसी भी भारतीय पोत द्वारा पकड़ी गई मछली शुल्क-मुक्त है। उन्होंने विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, वास्तविक समय ट्रैकिंग के लिए ट्रांसपोंडर जैसे सुरक्षा प्रणालियों और जीवन रक्षक तथा उत्पादकता बढ़ाने वाले पीएफजेड परामर्शों में सरकार के निवेश को रेखांकिंत किया। उन्होंने मत्स्य सहकारी समितियों को मजबूत करने और गहरे समुद्र में मत्स्य पालन के अवसरों का विस्तार करने के लिए सहकारिता मंत्रालय के साथ संयुक्त कार्य समूह पर भी बल दिया।
मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती राज मंत्रालय के माननीय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने कहा कि एक्सेस पास को एक सरल, पारदर्शी और पूर्णतः डिजिटल प्रणाली के रूप में तैयार किया गया है। यह अधिकृत भारतीय मत्स्य जहाजों को अपतटीय जलक्षेत्र में संचालन के लिए स्पष्टता और विश्वास प्रदान करता है। एफएएचडी राज्य मंत्री प्रो. बघेल ने कहा कि ये नियम भारतीय समुद्री संपदा की रक्षा करते हुए विदेशी मत्स्य जहाजों के भारतीय समुद्री क्षेत्र में प्रवेश को सख्ती से प्रतिबंधित करते हैं। उन्होंने कहा कि यह कदम भारतीय मछुआरों को सशक्त बनाएगा और गहरे समुद्र में मत्स्य पालन के अवसरों का विस्तार करेगा।
मत्स्य पालन, पशुपालन डेयरी तथा अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय में माननीय राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन ने कहा कि आज का यह आयोजन समुद्री मत्स्य पालन विकास के अगले चरण में आगे बढ़ने के भारत के संकल्प का प्रतीक है। यह प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत 2047 के विजन को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि पीएमएमएसवाई के अंतर्गत वेरावल को 'मत्स्य बंदरगाह क्लस्टर' के रूप में नामित किया गया है। इससे दक्षता बढ़ेगी और इस क्षेत्र के लिए व्यापक लाभ प्राप्त होंगे।
मत्स्य विभाग के केंद्रीय सचिव डॉ.अभिलक्ष लिखी ने बताया कि एक्सेस पास एक पारदर्शी और सुगम पोर्टल के माध्यम से जारी किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक आकलन से पर्याप्त क्षमता का संकेत मिलने के बावजूद, विशेष रूप से ट्यूना और ट्यूना जैसी प्रजातियों जैसे उच्च मूल्य वाले समुद्री संसाधनों के लिए, ईईजेड का अभी भी काफी हद तक कम उपयोग हो रहा है। ट्यूना अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रीमियम कीमतें प्राप्त करते हैं। डॉ. लिखी ने कहा कि विभाग का ध्यान मत्स्य संसाधनों के सतत विकास और मत्स्य सहकारी समितियों और एफएफपी को मजबूत करने पर है। उन्होंने पीएमएमएसवाई के अंतर्गत जाखौ में स्मार्ट और एकीकृत बंदरगाह जैसे बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ तटीय राज्यों में प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर भी बल दिया।
एनएफडीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. बी.के. बेहरा ने संदर्भ प्रस्तुत करते हुए केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह को उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने मत्स्य विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के माध्यम से गुजरात में मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र में किए गए विभिन्न प्रयासों को रेखांकित किया।
इस कार्यक्रम में गिर सोमनाथ की प्रभारी कलेक्टर सुश्री स्नेहा भापकर, गिर सोमनाथ के एसपी श्री जयदीप सिंह जडेजा, गिर सोमनाथ के आरएसी श्री राजेश आल, मत्स्य आयुक्त श्री विजयकुमार खराड़ी, वेरावल-पाटन संयुक्त नगरपालिका, वेरावल की अध्यक्ष श्रीमती पल्लवीबेन जानी, गिर सोमनाथ की जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मंजुलाबेन मुच्छर, साथ ही मत्स्य विभाग, राज्य मत्स्य विभाग, राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी), समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए), राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी), निर्यात निरीक्षण परिषद (ईआईसी), मत्स्य सहकारी समितियों, मछली किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) और स्थानीय मछुआरों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया।
पृष्ठभूमि -
लगभग 24 लाख वर्ग किलोमीटर में फैले विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) वाले भारत में समुद्री मत्स्य पालन विकास, आजीविका सृजन और निर्यात विस्तार की अपार संभावनाएं हैं। भारतीय जहाजों द्वारा की जाने वाली अधिकांश मछली पकड़ने की गतिविधियां अभी भी तट से 40-50 समुद्री मील के भीतर के जलक्षेत्र तक ही सीमित हैं। इस सीमा से परे विशाल ईईजेड का अभी तक पूरी तरह से उपयोग नहीं किया गया है, हालांकि वैज्ञानिक आकलन से इसकी अपार संभावनाओं का संकेत मिलता है, विशेष रूप से टूना और टूना जैसी प्रजातियों जैसे उच्च मूल्य वाले समुद्री संसाधनों के लिए। इस क्षमता को उजागर करने के लिए सरकार ने केंद्रीय बजट 2025-26 की घोषणा के अनुरूप, 4 नवंबर 2025 को "विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में मत्स्य पालन का सतत दोहन, 2025" नियम अधिसूचित किए थे।
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पीके/ केसी/ एसके/डीके
(रिलीज़ आईडी: 2230831)
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