नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
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भारत-ब्रिटेन अपतटीय पवन ऊर्जा कार्यबल आरंभ; श्री प्रल्हाद जोशी ने इसे स्वच्छ ऊर्जा सहयोग को गति देने वाला 'विश्वासबल' बताया


श्री प्रल्हाद जोशी ने कहा, अपतटीय पवन ऊर्जा भारत के ऊर्जा संक्रमण के अगले चरण का संभावित महत्‍वपूर्ण स्तंभ है

प्रविष्टि तिथि: 18 FEB 2026 2:07PM by PIB Delhi

केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने आज ब्रिटेन के उप प्रधानमंत्री श्री डेविड लैमी और भारत में ब्रिटिश उच्चायुक्त सुश्री लिंडी कैमरून की उपस्थिति में भारत-ब्रिटेन अपतटीय पवन ऊर्जा कार्यबल शुभारंभ होने के अवसर पर अपने संबोधन में कार्यबल को "ट्रस्टफोर्स"-विश्‍वासबल बताया। उन्‍होंने कहा कि यह इस विश्‍वास को दर्शाता है कि भारत और ब्रिटेन वास्तविक कार्यान्वयन चुनौतियों के समाधान के लिए मिलकर काम कर सकते हैं। उन्होंने कार्यबल का आह्वान किया कि वह समयबद्ध कार्य, मापन योग्य लक्ष्य और स्पष्ट प्रगति से वैश्विक अनुभवों को भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप समाधानों में परिवर्तित करे।

भारत-ब्रिटेन अपतटीय पवन ऊर्जा कार्यबल को प्रतीकात्मक मंच के बजाय कार्यशील तंत्र बताते हुए  श्री जोशी ने कहा कि इसे विजन 2035 और चौथे ऊर्जा संवाद के तहत भारत के अपतटीय पवन ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र के लिए रणनीतिक नेतृत्व और समन्वय प्रदान करने हेतु गठित किया गया है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन अपतटीय पवन ऊर्जा को बढ़ावा देने और सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने में वैश्विक रूप से अग्रणी रहा है, वहीं भारत व्यापक क्षमता, दीर्घकालिक मांग और तेजी से विकसित हो रहे स्वच्छ ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र स्‍थापन में लगा है।

केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री ने सहयोग के तीन व्यावहारिक स्तंभों की रूपरेखा प्रस्तुत की: जिनमें परिष्कृत समुद्री तल पट्टे और विश्वसनीय राजस्व-अवश्यंभाविता तंत्र सहित पारिस्थितिकी तंत्र नियोजन और बाजार डिजाइन, बंदरगाह आधुनिकीकरण, स्थानीय विनिर्माण और विशेष पोत सहित बुनियादी ढांचा और आपूर्ति श्रृंखलाएं तथा मिश्रित वित्त संरचनाओं और दीर्घकालिक संस्थागत पूंजी जुटाने के माध्यम से वित्तपोषण और जोखिम न्यूनीकरण शामिल है।

उन्‍होंने जोर देकर कहा कि भारत के विद्युत ऊर्जा परिवर्तन के अगले चरण में विश्वसनीयता, ग्रिड स्थिरता, औद्योगिक क्षमता और ऊर्जा सुरक्षा सुदृढ़ बनाना आवश्यक है, जिसमें अपतटीय पवन ऊर्जा की महत्‍वपूर्ण भूमिका है। उन्‍होंने कहा कि गुजरात और तमिलनाडु के तटों के पास अपतटीय पवन ऊर्जा क्षेत्रों की पहचान की गई है। साथ ही प्रारंभिक परियोजनाओं के लिए ग्रिड योजना तथा राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान द्वारा आवश्यक अध्ययन एवं सर्वेक्षण किए गए हैं।

श्री जोशी ने कहा कि प्रारंभिक परियोजनाओं के लिए, सरकार ने 7,453 करोड़ रुपये (लगभग 710 मिलियन पाउंड) के कुल परिव्यय से व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण योजना आरंभ की है। उन्‍होंने कहा कि अपतटीय पवन ऊर्जा वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन के सबसे जटिल क्षेत्रों में एक है, जिसके लिए विशेष बंदरगाह अवसंरचना, समुद्री प्रचालन तंत्र, सुदृढ़ सीबेड लीजिंग फ्रेमवर्क (कानूनी और प्रशासनिक ढांचा जो समुद्र के तल को अपतटीय पवन ऊर्जा,खनिज खनन या बुनियादी ढांचे के विकास के लिए पट्टे पर देने के नियम तय करता है), स्पष्ट जोखिम आवंटन(जोखिम उस पार्टी को सौंपना जो उसे सबसे अच्छी तरह प्रबंधित या नियंत्रित कर सकती है, जिससे विवाद कम हों और लागत दक्षता बढे) तथा विश्‍वसनीय वाणिज्यिक संरचनाओं की आवश्यकता होती है।

श्री जोशी ने अपतटीय पवन ऊर्जा और भारत की हरित हाइड्रोजन महत्वाकांक्षाओं के बीच तालमेल को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय ब्रेकथ्रू एजेंडा (2030 तक हरित प्रौद्योगिकियों को विश्व स्तर पर सबसे सस्ता और आकर्षक विकल्प बनाने) के तहत हाइड्रोजन ब्रेकथ्रू लक्ष्य में अग्रणी भूमिका निभा रहा है और राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी मानक हासिल कर चुका है। उन्होंने कहा कि हरित हाइड्रोजन की कीमतें ऐतिहासिक रूप से गिरकर 279 रुपये प्रति किलोग्राम (लगभग £2.65 प्रति किलोग्राम) और हरित अमोनिया की कीमतें 49.75 रुपये प्रति किलोग्राम (लगभग £0.47 प्रति किलोग्राम) पहुंच गई हैं।

उन्होंने कहा कि अपतटीय पवन ऊर्जा उभरते तटीय औद्योगिक और हरित हाइड्रोजन समूहों को उच्च गुणवत्ता वाली नवीकरणीय ऊर्जा प्रदान कर सकती है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत होगी।

श्री जोशी ने कहा कि भारत ने स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन योजना व्यापक रूप से क्रियान्वित की है। उन्होंने बताया कि भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा स्थापन क्षमता 272 गीगावाट से अधिक हो गई है, जिसमें 141 गीगावाट से अधिक सौर ऊर्जा और 55 गीगावाट पवन ऊर्जा शामिल है।  वर्तमान वित्त वर्ष में ही भारत ने 35 गीगावाट से अधिक सौर ऊर्जा और 4.61 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ी है।

श्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि उद्देश्य स्पष्टता और साझा प्रतिबद्धता द्वारा, अपतटीय पवन ऊर्जा भारत के स्वच्छ, विश्वसनीय और आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य का मजबूत स्तंभ और विजन 2035 के तहत भारत-ब्रिटेन सहयोग का प्रमुख उदाहरण बन सकती है।

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पीके/केसी/एकेवी/एसके


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