पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय
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आईडब्ल्यूडीसी 3.0 ने भारत के अंतर्देशीय जलमार्गों पर ग्रीन मोबिलिटी, माल ढुलाई और नदी पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ₹1,500 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी दी


केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “आईडब्ल्यूडीसी मंच अंतर्देशीय जल परिवहन विकास के लिए केंद्र-राज्य के प्रयासों को सुदृढ़ करता है”

आईडब्ल्यूडीसी ने ₹900 करोड़ की नई अंतर्देशीय जलमार्ग परियोजनाओं को मंजूरी दी

अंतर्देशीय जल परिवहन क्षमता को बेहतर करने के लिए ₹465 करोड़ की परिसंपत्ति खरीद को भी मंजूरी दी गई

प्रविष्टि तिथि: 23 JAN 2026 6:39PM by PIB Delhi

नई दिल्ली, 23 जनवरी 2026: अंतर्देशीय जलमार्ग विकास परिषद् (आईडब्ल्यूडीसी 3.0) की तीसरी बैठक केरल के कोच्चि में हुई, जिसमें भारत के अंतर्देशीय जल परिवहन नेटवर्क का विस्तार करने, प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर निवेशों को मंजूरी देने और देश की नदियों की पूरी आर्थिक क्षमता को उजागर करने के लिए केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करने के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया गया।

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल की अध्यक्षता में दिनभर की इस बैठक में हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, बिहार सरकार में परिवहन मंत्री श्रवण कुमार, नगालैंड सरकार में विद्युत और संसदीय कार्य मंत्री के. जी. केन्ये, अरुणाचल प्रदेश सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री ओजिंग तासिंग, उत्तर प्रदेश सरकार में परिवहन मंत्री दया शंकर सिंह और पंजाब सरकार में जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल भी मौजूद रहे। यह बैठक भारत के लिए संपोषित और कुशल लॉजिस्टिक्स के एक प्रमुख स्तंभ के तौर पर अंतर्देशीय जल परिवहन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हुई।

आईडब्ल्यूडीसी 3.0 ने ₹1,500 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं की पहचान की, जिनका उद्देश्य ग्रीन मोबिलिटी को तेज करना, बहुआयामी लॉजिस्टिक्स को सुदृढ़ करना और नदी आधारित आर्थिक विकास को प्रोत्साहन देना है। केरल, गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा और तेलंगाना में नदी क्रूज जेट्टी को मिलाकर ₹150 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई, जो देश भर में क्रूज पर्यटन सर्किट के विस्तार में सहायक होंगी।

परिषद् को आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी (एनडब्ल्यू4) पर मुक्त्याला और हरिश्चंद्रपुरम में रो-रो और कार्गो टर्मिनलों के विकास के बारे में जानकारी दी गई, जिससे माल ढुलाई में तेजी आएगी। जम्मू एवं कश्मीर में झेलम नदी (एनडब्ल्यू49) पर तटवर्ती सुविधाओं को भी यात्री आवागमन और पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर को सहयोग देने के लिए मंजूरी दी गई। जम्मू और कश्मीर में एनडब्ल्यू49 पर कुल 10 हाइब्रिड इलेक्ट्रिक पोत तैनात किए जाएंगे।

जहाजरानी, सुरक्षा और सालाना आधार पर परिचालन को बेहतर बनाने के लिए ₹465 करोड़ से अधिक की परिसंपत्ति खरीद की भी घोषणा की गई। इनमें केरल में सर्वेक्षण पोत; बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में रो-पैक्स बर्थिंग जेट्टी; उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में फ्लोटिंग पोंटून और तेजी से खुलने वाले तंत्र; हाइब्रिड सर्वेक्षण पोत; जलथलचर और कटर सक्शन ड्रेजर; और टग-बार्ज इकाइयां शामिल हैं।

परिषद को ₹900 करोड़ से अधिक की प्रमुख नई परियोजनाओं के बारे में जानकारी दी गई, जिनमें कोच्चि में स्लिपवे सुविधा का विकास, ओडिशा (25) और पूर्वोत्तर (85) में 110 जेट्टी का निर्माण, महाराष्ट्र में राष्ट्रीय नदी यातायात और नौवहन प्रणाली (एनआरटीएनएस) का कार्यान्वयन, गुवाहाटी में उजान बाजार घाट पर ₹70 करोड़ के क्रूज टर्मिनल का निर्माण और ब्रह्मपुत्र (एनडब्ल्यू-2) पर डिब्रूगढ़ में बोगीबील नदी बंदरगाह के लिए ₹144 करोड़ की एप्रोच रोड कनेक्टिविटी परियोजना शामिल है।

परिषद्‌ को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अंतर्देशीय जलमार्ग भारत के परिवहन और लॉजिस्टिक्स बदलाव के एक रणनीतिक स्तंभ के तौर पर उभरे हैं। उन्होंने कहा, “हमारे ऊर्जावान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने अंतर्देशीय जलमार्गों को विशेष प्रोत्साहन दिया है, जिससे सड़कों पर भीड़ कम हुई है, लॉजिस्टिक्स की लागत में कमी आई है और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बढ़ा है। आज मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में अंतर्देशीय जलमार्ग, भारत के बहुआयामी लॉजिस्टिक्स फ्रेमवर्क का एक रणनीतिक स्तंभ बन गया है। इस दूरदृष्टि से प्रेरित होकर, नदियों को अब केवल प्राकृतिक संसाधन के तौर पर नहीं, बल्कि विकास, स्थिरता और संपर्क को गति देने वाली आर्थिक जीवनरेखा के तौर पर देखा जाता है।”

केरल के विशाल बैकवॉटर और नहरों के नेटवर्क को अंतर्देशीय जलमार्गों के लिए एक प्रमुख अवसर के तौर पर रेखांकित किया गया। परिषद् ने गुवाहाटी, वाराणसी, पटना, तेजपुर, डिब्रूगढ़ और अन्य शहरों को मिलाकर कुल 18 शहरों में शहरी जल परिवहन के लिए व्यवहार्यता अध्ययन करने की आईडब्ल्यूएआई की पहल का भी उल्लेख किया।

अंतर्देशीय जल परिवहन और लॉजिस्टिक्स को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण घोषणाओं के साथ, केरल आईडब्ल्यूडीसी 3.0 में एक प्रमुख फोकस क्षेत्र के तौर पर उभरा। जल वाहक कार्गो प्रोत्साहन योजना को केरल समेत अन्य राष्ट्रीय जलमार्गों तक फैलाने पर विचार किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत अंतर्देशीय जलमार्गों के जरिए माल ढुलाई पर होने वाले कुल परिचालन व्यय के 35% तक की प्रतिपूर्ति की पेशकश की जाएगी। इस योजना से निजी भागीदारी को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है, क्योंकि इससे कार्गो मालिकों को आईडब्ल्यूएआई या आईसीएसएल के अलावा अन्य संस्थाओं की ओर से संचालित जहाजों को किराए पर लेने की सुविधा मिलेगी, जिससे यह प्रमुख शिपिंग कंपनियों, माल भेजने वाले, व्यापारिक निकायों और थोक एवं कंटेनरीकृत कार्गो का प्रबंधन करने वाले ऑपरेटरों के लिए विशेष तौर पर आकर्षक बन जाएगी। शुरुआत में तीन वर्षों के लिए वैध यह पहल आपूर्ति श्रृंखला नेटवर्क को अनुकूलित करने और जल-आधारित लॉजिस्टिक्स की व्यावसायिक योग्यता को बढ़ाने में मदद करेगी। आईडब्ल्यूडीसी में, व्यावसायिक रूप से योग्य रास्तों पर निश्चित दिन निर्धारित नौकायन सेवाओं के प्रारंभ की भी घोषणा की गई,  जिससे जलमार्गों को कार्गो परिवहन के एक कुशल, लागत प्रभावी और पर्यावरण की दृष्टि से संपोषित माध्यम के तौर पर दिखाया जा सके। केरल पैकेज में नदी क्रूज जेट्टी का निर्माण और एक सर्वेक्षण पोत की तैनाती भी शामिल है, जिससे यात्रियों की आवाजाही, पर्यटन और सुरक्षित नौवहन के लिए राज्य की क्षमता को और बेहतर किया जा सकेगा।

बैठक में इस विषय पर फिर से जोर दिया गया कि अंतर्देशीय जलमार्ग परिवहन का सबसे अधिक ईंधन-कुशल, लागत-प्रभावी और पर्यावरण-अनुकूल साधन है, जो कार्बन उत्सर्जन को कम करने, सड़कों और रेलवे पर भीड़भाड़ कम करने और कुल लॉजिस्टिक्स की लागत को कम करने में मददगार है। नदी क्रूज पर्यटन को समुद्री अर्थव्यवस्था के सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक के तौर पर पहचाना गया, जिसके लिए सरकार आधुनिक क्रूज टर्मिनल, एडवांस नौवहन प्रणाली और समर्पित क्रूज सर्किट तैयार कर रही है।

“हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के ओजस्वी नेतृत्व में, भारत के अंतर्देशीय जलमार्ग हरित विकास, डिजिटल परिवर्तन और पर्यटन आधारित विकास के शक्तिशाली कारक के रूप में उभर रहे हैं। माल ढुलाई, यात्री सेवाओं और क्रूज पर्यटन में तीव्र विस्तार के साथ, हमारी नदियां लगातार गतिशीलता और आर्थिक अवसरों का इंजन बन रही हैं। स्वच्छ ऊर्जा से चलने वाले जहाजों, स्मार्ट नेविगेशन प्रणालियों और विश्व स्तरीय यात्री अवसंरचना को एकीकृत करके, हम लॉजिस्टिक्स की लागत को कम करने, उत्सर्जन में कटौती करने और नई आजीविका निर्माण करने के लिए जलमार्गों की पूरी क्षमता का इस्तेमाल कर रहे हैं। कोच्चि वॉटर मेट्रो जैसी पहलों की सफलता दिखाती है कि नदियां शहरी गतिशीलता को कैसे बदल सकती हैं, और यह सुनिश्चित करते हुए कि भारत के जलमार्ग विकसित भारत के पथ पर समावेशी विकास को गति प्रदान करें, हम गुवाहाटी, वाराणसी, पटना, तेजपुर और डिब्रूगढ़ समेत अन्य शहरों में इस मॉडल को दोहराने के प्रति प्रतिबद्ध हैं,” सोनोवाल ने कहा।

पूर्वोत्तर क्षेत्र पर विशेष जोर दिया गया, जहां जलमार्ग परियोजनाओं से कनेक्टिविटी, व्यापार, पर्यटन और नदी किनारे बसे समुदायों की आजीविका में भारी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। सरकार ने पूर्वोत्तर में ₹500 करोड़ से अधिक के निवेश से 85 घाटों का निर्माण करने की योजना बनाई है, जिससे क्षेत्रीय लॉजिस्टिक्स एकीकरण बेहतर होगा।

“भारत की अंतर्देशीय जलमार्ग परियोजनाओं में पूर्वोत्तर का केंद्रीय स्थान है। अपने विशाल नदी नेटवर्क के साथ, यह क्षेत्र संपोषित परिवहन, व्यापार और पर्यटन के एक प्रमुख केंद्र के तौर पर उभरने की क्षमता रखता है। ₹500 करोड़ से अधिक के निवेश से 85 घाटों का निर्माण कनेक्टिविटी को बेहतर करेगा, क्षेत्रीय लॉजिस्टिक्स को एकीकृत करेगा और नदी किनारे बसे समुदायों के लिए आजीविका के नए मौके तैयार करेगा। अंतर्देशीय जलमार्ग न केवल पूर्वोत्तर को राष्ट्रीय बाजारों के करीब लाएगा, बल्कि विकास, समृद्धि और क्षेत्रीय एकीकरण के प्रवेश द्वार के तौर पर इसकी भूमिका को भी उजागर करेगा,” सर्बानंद सोनोवाल ने कहा।

बैठक में बीते दशक में इस क्षेत्र के तीव्र विस्तार की समीक्षा की गई। राष्ट्रीय जलमार्गों पर माल ढुलाई 2013-14 में 18 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 145.84 मिलियन टन हो गई, जबकि परिचालन में मौजूद राष्ट्रीय जलमार्गों की संख्या 3 से दस गुना बढ़कर 32 हो गई है। नदी पर लग्जरी क्रूज जहाजों की संख्या 5 से बढ़कर 25 हो गई है, जो उद्योग, निवेशकों और राज्य सरकारों के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है। परिचालन में मौजूद टर्मिनलों की संख्या 15 से बढ़कर 25 हो गई है, और तैरने वाली जेट्टी की संख्या 30 से बढ़कर 100 हो गई है।

परिषद् ने सरकार की दूरदर्शी प्राथमिकताओं की पुष्टि की, जिनमें ग्रीन और हाइब्रिड जहाजों की तैनाती, डिजिटल नेविगेशन और यातायात प्रबंधन प्रणालियों का विस्तार, आधुनिक अंतर्देशीय टर्मिनलों का निर्माण, जहाज निर्माण और मरम्मत सुविधाओं को बेहतर करना और समुद्री कौशल विकास को प्रोत्साहन देना शामिल है। बैठक में लचीली शहरी जल परिवहन प्रणालियों के निर्माण, माल परिवहन दक्षता में सुधार, यात्री आवागमन के लिए ग्रीन और हाइब्रिड जहाजों को प्रोत्साहन देने, नदी क्रूज पर्यटन का विस्तार करने और डिजिटल और संपोषित प्रथाओं को सुदृढ़ करने पर विस्तृत चर्चा भी हुई। राज्यों की ओर से चल रही और प्रस्तावित अंतर्देशीय जल परिवहन परियोजनाओं के संबंध में उठाए गए नियामक मुद्दों और चिंताओं की समीक्षा की गई, जिसमें समन्वित प्रयासों के माध्यम से कार्यान्वयन में तेजी लाने पर जोर दिया गया। आईडब्ल्यूडीसी 3.0, 2024 में आईडब्ल्यूडीसी 1.0 और 2025 में आईडब्ल्यूडीसी 2.0 के दौरान रखी गई नींव पर आधारित है, जिसमें स्थिरता, प्रौद्योगिकी-संचालित समाधानों और त्वरित परियोजना कार्यान्वयन पर विशेष ध्यान दिया गया है।

इस बैठक में लोक परिवहन मंत्रालय के सचिव विजय कुमार, अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण अध्यक्ष सुनील पालीवाल, अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण उपाध्यक्ष सुनील कुमार सिंह के साथ केंद्र और राज्य सरकारों के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों, उद्योग प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। बैठक में अंतर्देशीय जलमार्ग सम्मेलन 1.0 और 2.0 के बाद हुई प्रगति की समीक्षा की गई और अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास के अगले चरण की रूपरेखा तैयार की गई। दिनभर चलने वाली इस बैठक में विभिन्न क्षेत्रों की उपलब्धियों की भी समीक्षा की गई, प्रमुख निवेशों और परियोजनाओं की घोषणा की गई और देश भर में अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास के लिए एक दूरदर्शी रोडमैप प्रस्तुत किया गया।

अंतर्देशीय जलमार्ग सम्मेलन 3.0 का समापन केंद्र और राज्यों की ओर से अंतर्देशीय जल परिवहन को प्रोत्साहन देने, क्षेत्रीय संपर्क को सुदृढ़ करने, स्वच्छ परिवहन समाधानों को प्रोत्साहित करने और नदियों को आर्थिक विकास के इंजन के तौर पर स्थापित करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। बैठक में अंतर्देशीय जलमार्गों को माल और यात्रियों दोनों के लिए परिवहन के एक पसंदीदा, भविष्य के लिए तैयार साधन के रूप में पुनर्स्थापित किया गया, जो स्वच्छ परिवहन, बेहतर लॉजिस्टिक्स और एक सुदृढ़ भारत में योगदान देगा।

भारत के अंतर्देशीय जलमार्ग ईंधन की बचत और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन के साधन उपलब्ध कराकर सड़क और रेल नेटवर्क पर बोझ कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। 23 राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों में फैले 111 राष्ट्रीय जलमार्गों के साथ, अंतर्देशीय जलमार्ग रो-रो वाहन संचालन और क्रूज पर्यटन जैसी पहलों को तेजी से प्रोत्साहन दे रहे हैं। पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) राष्ट्रीय जलमार्गों के विकास, रखरखाव और विनियमन के लिए समर्पित नोडल एजेंसी है।

 

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पीके/केसी/एमएम


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