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स्टार्टअप इंडिया का एक दशक


नवाचार का विस्तार, भारत की विकास गाथा को आकार

प्रविष्टि तिथि: 15 JAN 2026 2:21PM by PIB Delhi

प्रमुख बिंदु

  • दिसंबर 2025 तक 2 लाख से अधिक उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप के साथ, भारत दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में मजबूती से खड़ा है।
  • स्टार्टअप इंडिया के एक दशक ने विचार, वित्तीय सहायता, मार्गदर्शन और विस्तार तक एक सम्पूर्ण सहायता प्रणाली का निर्माण किया है।
  • लगभग 50 प्रतिशत डीपीआईआईटी-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप टियर-II और टियर-III शहरों से आते हैं, जो उद्यमशीलता के लोकतांत्रिकरण का संकेत हैं।
  • अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम) 2.0 सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत और समुदायों के सहयोग से इकोसिस्टम की कमियों को दूर करने और सिद्ध मॉडलों को बढ़ाने के लिए नई पहल शुरू करने पर केंद्रित है।
  • एसवीईपी, एस्पायर और पीएमईजीपी जैसे ग्रामीण और जमीनी स्तर के कार्यक्रम सूक्ष्म उद्यमों, महिला नेतृत्व वाले उपक्रमों और स्थानीय रोजगारों को सक्षम बना रहे हैं।

स्टार्टअप्स: आर्थिक बदलाव में अहम भूमिका

16 जनवरी 2026 को मनाया जाने वाला 'राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस', स्टार्टअप इंडिया पहल का एक युगांतकारी दशक है। 2016 में उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करने के लिए यह नीतिगत कदम उठाया गया था, आज दुनिया के सबसे बड़े और सबसे विविध स्टार्टअप पारितंत्र में से एक बन चुका है। "स्टार्टअप इंडिया" के नेतृत्व में इस आंदोलन ने भारत के उद्यमशीलता और नवाचार तंत्र पर एक परिवर्तनकारी प्रभाव डाला है। यह आर्थिक आधुनिकीकरण को समावेशी क्षेत्रीय उत्थान के साथ मिलाते हुए, 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करने की भारत की यात्रा के साथ आगे बढ़ रहा है।

स्टार्टअप भारत के आर्थिक परिवर्तन, नवाचार, रोजगार सृजन और समावेशी विकास के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभर रहे हैं। पिछले एक दशक में, दिसंबर 2025 तक 2 लाख से अधिक स्टार्टअप के साथ, भारत तेजी से दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक बन गया है। बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई और दिल्ली-एनसीआर जैसे प्रमुख केंद्र इस परिवर्तन में सबसे आगे रहे हैं। साथ ही, छोटे शहर भी इस गति में लगातार योगदान दे रहे हैं और लगभग 50 प्रतिशत स्टार्टअप टियर II/III शहरों में उभर रहे हैं जो उद्यमिता के लोकतंत्रीकरण को दर्शाता है।

स्टार्टअप: आर्थिक विकास के लिए एक प्रेरणा

 

•     प्रौद्योगिकी नवाचार और उत्पादकता को गति देना

•     बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करना

•     वित्तीय समावेशन और डिजिटल पहुंच को बढ़ाना देना

•     क्षेत्रीय और जमीनी स्तर की उद्यमिता को प्रोत्साहित करना

स्टार्टअप कृषि-तकनीक, टेलीमेडिसिन, माइक्रोफाइनेंस (सूक्ष्म-ऋण), पर्यटन और शिक्षा प्रौद्योगिकी में समाधान लागू करके भारत की ग्रामीण-शहरी खाई को पाट रहे हैं। ये सीधे तौर पर विकास की दिशा में बढ़ते हुए कमियों को दूर कर रहे हैं और ग्रामीण आजीविका को सहायता दे रहे हैं। इस परिदृश्य के भीतर, महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप समावेशी और क्षेत्रीय रूप से संतुलित विकास के एक प्रमुख चालक के रूप में उभर रहे हैं। दिसंबर 2025 तक, मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में से 45 प्रतिशत से अधिक में कम से कम एक महिला निदेशक है या उसमें भागिदार है। यह न केवल एक आर्थिक इंजन के रूप में, बल्कि सामाजिक समानता और संतुलित क्षेत्रीय विकास के वाहक के रूप में नवाचार के उद्भव को दर्शाता है।

स्टार्टअप इंडिया पहल: भारत के नवाचार के निर्माण का एक दशक

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग के नेतृत्व में, 'स्टार्टअप इंडिया' पहल भारत के नवाचार और उद्यमशीलता पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) की आधारशिला के रूप में उभरी है। पिछले एक दशक में, यह पहल एक नीति-केंद्रित फ्रेमवर्क से एक व्यापक, बहु-आयामी प्लेटफार्म के रूप में विकसित हुई है, जो विचार से लेकर संचालन के विस्तार तक हर चरण में स्टार्टअप्स की सहायता करती है। यह प्रगति भारत के उच्च-मूल्य वाले स्टार्टअप इकोसिस्टम में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, 2014 में 1 बिलियन डॉलर से अधिक मूल्य वाली केवल चार निजी स्वामित्व वाली कंपनियां थी जो आज बढ़कर 120 से अधिक हो गई हैं। इनका कुल मूल्यांकन 350 बिलियन डॉलर से अधिक है, जो भारत के स्टार्टअप परिदृश्य के विशाल पैमाने और वैश्विक प्रासंगिकता को रेखांकित करता है।

स्टार्टअप्स भारत की युवा जनसँख्या का लाभ उठा रहे हैं, जिससे प्रौद्योगिकी, सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। इसके साथ ही, ये गिग वर्क और आपूर्ति श्रृंखलाओं के माध्यम से अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी सृजित कर रहे हैं। रोजगार से इतर, स्टार्टअप्स बड़ी ओद्योगिक कंपनियों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ सहयोग बढ़ा रहे हैं, जो प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, विस्तार की क्षमता और वैश्विक बाजार एकीकरण को सुविधाजनक बना रहे हैं।

पारंपरिक क्षेत्रों में, नवाचार पूरी अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डाल रहा है: 'हेसाजैसे कृषि-तकनीकी प्लेटफॉर्म ग्रामीण-शहरी अंतर को पाटकर किसानों की बाजार तक पहुंच में सुधार कर रहे हैं, जबकि 'जिप' जैसे स्वच्छ ईंधन वाले गतिशीलता स्टार्टअपईवी-आधारित समाधान प्रदान कर रहे हैं। ये नवाचार वित्त, आपूर्ति श्रृंखला, संवहनीयता और डिजिटल अवसंरचना में कई गुना प्रभाव पैदा कर रहे हैं, जो एक फलते-फूलते स्टार्टअप क्षेत्र के व्यापक परिवेश के लाभों को रेखांकित करते हैं।

नवाचार-आधारित उद्यमिता में तेजी लाने के लिए, डीपीआईआईटी ने 'स्टार्टअप इंडिया' पहल के माध्यम से, देश भर में स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता, मार्गदर्शन और विस्तार के लिए निम्नलिखित प्रमुख योजनाएं और डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किए हैं।

  • स्टार्टअप्स के लिए फंड ऑफ फंड्स (एफएफएस)

स्टार्टअप्स के लिए 'फंड ऑफ फंड्स'(एफएफएस) स्टार्टअप इंडिया कार्य योजना  के तहत उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग की एक प्रमुख पहल है और इसका प्रबंधन भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) द्वारा किया जाता है। 10,000 करोड़ रुपये के कोष के साथ, यह योजना सेबी के साथ पंजीकृत वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) को सहायता प्रदान करती है, जो बदले में स्टार्टअप्स में निवेश करते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू जोखिम पूंजी तक पहुंच बढ़ाना और उद्यमशीलता इकोसिस्टम को मजबूत करना है।

10,000 करोड़ रुपये का यह कोष 140 से अधिक एआईएफ को आवंटित किया गया है, जिन्होंने सामूहिक रूप से 1,370 से अधिक स्टार्टअप्स में 25,500 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है।

 

  • स्टार्टअप्स के लिए ऋण गारंटी योजना

स्टार्टअप्स के लिए ऋण गारंटी योजना, योग्य फाइनेंशियल संस्थानों के ज़रिए स्टार्टअप्स को बिना गारंटी के ऋण देने के लिए लागू की गई है। सीजीएसएस को नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड द्वारा संचालित किया जाता है। सीजीएसएस के तहत, स्टार्टअप ऋण लेने वालों के लिए 800 करोड़ रुपये अधिक मूल्य के 330 से अधिक ऋणों की गारंटी दी गई है।

  • स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना (एसआईएसएफएस)

945 करोड़ रुपये के कोष के साथ, स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना (एसआईएसएफएस) स्टार्टअप अवधारणा के प्रमाण, प्रोटोटाइप, उत्पाद परीक्षण, बाजार में प्रवेश और व्यावसायीकरण जैसी गतिविधियों के लिए स्टार्टअप को वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इस योजना की देखरेख एक विशेषज्ञ सलाहकार समिति (ईएसी) द्वारा की जाती है, जो इसके कार्यान्वयन, कार्यान्वयन और निगरानी के लिए जिम्मेदार है।

इस योजना के तहत शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को सहायता प्रदान करने के लिए 215 से अधिक इनक्यूबेटरों को 945 करोड़ रुपये के कोष की मंजूरी दी गई है।

  • स्टार्टअप इंडिया हब

स्टार्टअप इंडिया ऑनलाइन हब भारत में उद्यमशीलता इकोसिस्टम के सभी हितधारकों के लिए एक अनूठा डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जहाँ वे एक-दूसरे को खोज सकते हैं, उनसे जुड़ सकते हैं और बातचीत कर सकते हैं। स्टार्टअप हब निवेशकों, मार्गदर्शकों और इनक्यूबेटरों को भारत के उभरते उद्यमियों के साथ जोड़कर इसे कार्यान्वित करता है। यह वित्त पोषण, शैक्षणिक संस्थानों, कॉर्पोरेट्स और सरकारी निकायों को एक साझा मंच पर साथ लाता है।

  • राज्यों की स्टार्टअप रैंकिंग फ्रेमवर्क (एसआरएफ)

राज्यों की स्टार्टअप रैंकिंग फ्रेमवर्क  (एसआरएफ) राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का उनकी स्टार्टअप-अनुकूल नीतियों और कार्यान्वयन के आधार पर मूल्यांकन करता है, जो भारत के उद्यमशीलता इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए प्रतिस्पर्धी संघवाद  को बढ़ावा देती है। इस फ्रेमवर्क के तहत, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले, शीर्ष प्रदर्शन करने वाले, अग्रणीय, महत्वाकांक्षी अग्रणीय और उभरते स्टार्टअप इकोसिस्टम जैसी श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है, जो स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और स्टार्टअप प्रशासन में निरंतर सुधार को प्रोत्साहित करते हैं।

  • राष्ट्रीय मार्गदर्शन पोर्टल (एमएएआरजी)

मार्गदर्शन, परामर्श, सहायता, मजबूती और विकास (एमएएआरजी) कार्यक्रम को देश भर में स्टार्टअप्स को मार्गदर्शन देने के लिए विकसित किया गया है। उद्यमियों को अनुभवी सलाहकारों के साथ जोड़कर, पोर्टल का लक्ष्य स्टार्टअप विकास में सहायता करना, रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान करना और देश भर में समग्र उद्यमशीलता के परिवेश को मजबूत करना है।

  • स्टार्टअप इंडिया इन्वेस्टर कनेक्ट पोर्टल

सिडबी के सहयोग से विकसित, स्टार्टअप इंडिया इन्वेस्टर कनेक्ट पोर्टल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो शुरुआती चरण के उद्यमों पर विशेष ध्यान देने के साथ स्टार्टअप को उद्यम पूंजी कोष और निवेशकों से जोड़ता है। यह पोर्टल विशेष रूप से शुरुआती चरण के उद्यमों पर केंद्रित है। यह प्लेटफॉर्म उद्यमियों को एक एकल आवेदन के माध्यम से कई निवेशकों तक पहुँचने और अपने विचारों को कुशलतापूर्वक पेश करने में सक्षम बनाता है।

भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने वाली योजनाएं

स्टार्टअप इंडिया के अतिरिक्त, कई क्षेत्र-विशिष्ट और मंत्रालय-आधारित पहलों ने प्रौद्योगिकी विकास, ग्रामीण उद्यमिता, शैक्षणिक नवाचार और क्षेत्रीय समावेश के माध्यम से भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को और अधिक मजबूती प्रदान की है। ये योजनाएं यह सुनिश्चित करती हैं कि स्टार्टअप्स को मिलने वाली सहायता व्यापक, विकेंद्रीकृत और राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं के अनुरूप हो।

अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम)

नीति आयोग द्वारा 2016 में शुरू किया गया 'अटल इनोवेशन मिशन' (एआईएम) सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य स्कूलों, विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप्स और उद्योगों में नवाचार और उद्यमिता को राष्ट्रव्यापी स्तर पर बढ़ावा देना है। मार्च 2028 तक 2,750 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ, एआईएम नवाचार कार्यक्रमों को डिजाइन करने, साझेदारी को सक्षम बनाने और भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए एक एकीकृत ढांचा प्रदान करता है।

एआईएम 1.0: प्रमुख कार्यक्रम

विभिन्न केंद्रीय और राज्य मंत्रालयों, इनक्यूबेटरों और वैश्विक भागीदारों के साथ मिलकर काम करते हुए, अटल इनोवेशन मिशन के तहत प्रमुख कार्यक्रम भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देते हैं।

अटल टिंकरिंग लैब (एटीएल)

  • अटल टिंकरिंग लैब (एटीएल) कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों को रटने की पद्धति  से दूर ले जाकर सृजनशीलता, समस्या समाधान और नवाचार की ओर मोड़कर भारत के शैक्षिक परिदृश्य को नया रूप देना है।

733 जिलों में फैले 10,000 से अधिक एटीएल के साथ, अटल इनोवेशन मिशन लाखों छात्रों को 21वीं सदी के कौशल जैसे एआई, रोबोटिक्स, आईओटी, 3D प्रिंटिंग और उससे आगे के क्षेत्रों में अन्वेषण करने में सक्षम बना रहा है। इसने 1.1 करोड़ से अधिक छात्रों को जोड़ते हुए, 16 लाख से अधिक नवाचार परियोजनाओं को साकार किया है।

 

कम्युनिटी इनोवेटर फेलोशिप (सीआईएफ)

यूएनडीपी इंडिया के साथ साझेदारी में कार्यान्वित, यह कार्यक्रम उभरते हुए 'सामुदायिक नवाचारियों' को वह ज्ञान, मार्गदर्शन और बुनियादी ढांचा सहायता प्रदान करता है जो जमीनी स्तर पर उद्यमिता और सामाजिक प्रभाव को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है।

एक वर्ष की इस गहन फेलोशिप में, प्रत्येक फेलो को एक 'अटल कम्युनिटी इनोवेशन सेंटर' में रखा जाता है, जहाँ वे एसडीजी (संवहनीय विकास लक्ष्य) के प्रति जागरूकता, उद्यमशीलता एवं जीवन कौशल, और अपने स्वयं के नवाचार विचारों को विकसित करने व उन्हें परिष्कृत करने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करते हैं।

 

यूथ को: लैब कार्यक्रम

  • यूथ को:लैब कार्यक्रम का उद्देश्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र के युवाओं को सशक्त बनाना और उनमें निवेश करना है, ताकि वे नेतृत्व, सामाजिक नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से संवहनीय  विकास लक्ष्यों को गति दे सकें।
  • इस कार्यक्रम ने पैनल चर्चाओं, कार्यशालाओं और वेबिनार के माध्यम से विषय-आधारित राष्ट्रीय संवादों पर जोर दिया, साथ ही लंबी अवधि के इनक्यूबेशन और क्षेत्रीय शिखर सम्मेलनों में प्रतिनिधित्व के माध्यम से युवा-नेतृत्व वाले उद्यमों को सहायता प्रदान की।
  • यूथ को:लैब राष्ट्रीय नवाचार चुनौती (नेशनल इनोवेशन चैलेंज) 2024–25 ने, असिस्टेक फाउंडेशन के साथ साझेदारी में, दिव्यांग नवाचारियों सहित युवा उद्यमियों को ऐसे समाधान विकसित करने के लिए सक्षम बनाने पर ध्यान केंद्रित किया, जो सहायक तकनीक, समावेशी शिक्षा प्रौद्योगिकीकौशल विकास और देखभाल सेवा मॉडल के माध्यम से विकलांग व्यक्तियों के लिए पहुंच और कल्याण को बढ़ावा देते हैं।

 

 

जहाँ एआईएम् 1.0 का ध्यान नवाचार अवसंरचना को स्थापित करने और भारत के उभरते इकोसिस्टम को पोषित करने पर था, वहीं एआईएम् 2.0 (2024) का केंद्र सरकारों, उद्योग, शिक्षा जगत और समुदायों के सहयोग से इकोसिस्टम की कमियों को दूर करने वाली नई पहलों को संचालित करने और सफल मॉडलों का विस्तार करने पर है। यह 'अटल टिंकरिंग लैब' इकोसिस्टम का विस्तार करके शुरुआती चरण के नवाचार को भी मजबूत कर रहा है, जो स्कूली छात्रों के बीच समस्या-समाधान और उद्यमशीलता की मानसिकता को विकसित करता है।

एआईएम 2.0 के अंतर्गत कार्यक्रम

 

  • लैंग्वेज इनक्लूसिव प्रोग्राम ऑफ इनोवेशन (लिपि): यह कार्यक्रम भारत की 22 अनुसूचित भाषाओं के माध्यम से उन नवाचारियों, उद्यमियों और निवेशकों के लिए बाधाओं को कम करने पर केंद्रित है जो अंग्रेजी नहीं बोलते हैं। इसके लिए देश भर में 30  क्षेत्रीय नवाचार केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।
  • फ्रंटियर प्रोग्राम का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तर-पूर्वी राज्यों और 'आकांक्षी जिलों एवं ब्लॉकों' के लिए अटल टिंकरिंग लैब के माध्यम से विशेष रूप से तैयार नवाचार और उद्यमिता मॉडल तैयार करना है।
  • ह्यूमन कैपिटल डेवलपमेंट प्रोग्राम (मानव पूंजी विकास कार्यक्रम) का उद्देश्य पेशेवरों, प्रबंधकों, शिक्षकों और प्रशिक्षकों का एक ऐसा समूह तैयार करना है, जो भारत के नवाचार और उद्यमिता इकोसिस्टम को विकसित करने, संचालित करने और बनाए रखने के लिए पूरी तरह सुसज्जित हो।
  • डीपटेक रिएक्टर गहन तकनीकी नवाचारों के व्यावसायीकरण के लिए प्रभावी रास्ते तलाशने के लिए एक अनुसंधान के अनुकूल परिवेश के रूप में कार्य करता है, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जिनमें लंबी अवधि और महत्वपूर्ण निवेश की आवश्यकता होती है।
  • अंतर्राष्ट्रीय नवाचार सहयोग कार्यक्रम भारत के नवाचार और उद्यमिता इकोसिस्टम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाता है।
  • आउटपुट (नौकरियों, उत्पादों और सेवाओं) की गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से अन्य कार्यक्रमों में 'इंडस्ट्रियल एक्सेलेरेटर' शामिल है, जो उन्नत स्टार्टअप्स के विस्तार में उद्योगों की भागीदारी को बढ़ाता है; साथ ही 'अटल सेक्टोरल इनोवेशन लॉन्चपैड्स' (एएसआईएल) कार्यक्रम के माध्यम से केंद्रीय मंत्रालयों में आइडेक्स जैसे प्लेटफॉर्म तैयार किए जा रहे हैं, ताकि प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में स्टार्टअप्स के साथ तालमेल बिठाकर उनसे सीधे उत्पादों व सेवाओं की खरीद की जा सके।

 

जेनेसिस (नवप्रवर्तनशील स्टार्टअप्स के लिए जेन-नेक्स्ट सपोर्ट)

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा शुरू की गई 'जेनेसिस' पहल एक 'राष्ट्रीय डीप-टेक स्टार्टअप प्लेटफॉर्म' है। इसे जुलाई 2022 में शुरू किया गया था जिसका उद्देश्य भारत भर के टियर- II और टियर-III शहरों में कार्यान्वयन एजेंसियों के माध्यम से लगभग 1600 प्रौद्योगिकी स्टार्टअप को बढ़ाना और डीप-टेक नवाचार के लिए महत्वपूर्ण धन और सहायता प्रदान करना था।

पाँच वर्षों की अवधि में 490 करोड़ रुपये के बजटीय परिव्यय के साथ, यह योजना विभिन्न हितधारकों—स्टार्टअप्स, सरकारी संस्थानों, शिक्षा जगत और कॉर्पोरेट्स के बीच सहयोगात्मक जुड़ाव के माध्यम से भारत के तेजी से विस्तार करते प्रौद्योगिकी स्टार्टअप इकोसिस्टम को गति देने और मजबूत करने के लिए तैयार की गई है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय स्टार्टअप हब

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत 2016 में स्थापित, 'इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय स्टार्टअप हब' प्रौद्योगिकी-आधारित नवाचार को बढ़ावा देता है और भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करता है। यह हब तकनीक-आधारित आर्थिक विकास और नवाचार को गति देता है और एक केंद्रीय मंच के रूप में कार्य करता है जो इनक्यूबेशन केंद्रों, उभरती प्रौद्योगिकियों पर उत्कृष्टता केंद्रों और मंत्रालय द्वारा सहायता प्राप्त अन्य प्लेटफार्मों को एक साथ जोड़ता है।

दिसंबर 2025 तक, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय स्टार्टअप हब  द्वारा एक सम्पूर्ण इकोसिस्टम को सहायता दी गई जिसमें देशभर के 6,148 से अधिक स्टार्टअप्स, 517 से अधिक इनक्यूबेटर्स और 329 से अधिक प्रयोगशालाएं शामिल हैं।

प्रौद्योगिकी इनक्यूबेशन और उद्यमियों का विकास ((टीआईडीई) 2.0 योजना

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तत्वावधान में, टीआईडीई 2.0 योजना को 2019 में उन इनक्यूबेटरों को मजबूत करके प्रौद्योगिकी-आधारित उद्यमिता को उत्प्रेरित करने के लिए शुरू किया गया था, जो आईओटी, एआई, ब्लॉकचेन और रोबोटिक्स जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों का उपयोग करने वाले सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) स्टार्टअप्स को सहायता देते हैं। इन विषयों  में स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कृषि, वित्तीय समावेशन (डिजिटल भुगतान सहित), अवसंरचना  एवं परिवहन, और पर्यावरण एवं क्लीन-टेक शामिल हैं। यह राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप सात विषयगत क्षेत्रों में समग्र सहायता प्रदान करने का प्रयास करता है। यह सहायता देश भर के शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों और राष्ट्रीय अनुसंधान संगठनों में स्थित 51 इनक्यूबेटरों के माध्यम से प्रदान की जाती है।

निधि (नवाचारों के विकास और उपयोग के लिए राष्ट्रीय पहल)

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग  द्वारा 2016 में शुरू की गई 'नेशनल इनिशिएटिव फॉर डेवलपिंग एंड हार्नेसिंग इनोवेशन' (निधि) विचारों और नवाचारों (ज्ञान-आधारित और प्रौद्योगिकी-संचालित) को सफल स्टार्टअप्स में बदलने के लिए एक व्यापक कार्यक्रम के रूप में कार्य करता है। यह कार्यक्रम धन और रोजगार सृजन के माध्यम से सामाजिक-आर्थिक विकास के उद्देश्य से एक नवाचार-प्रेरित उद्यमशीलता के परिवेश के निर्माण पर केंद्रित है।

इसने 1,30,000 से अधिक रोजगार का सृजन करके अर्थव्यवस्था में योगदान दिया है, साथ ही 12,000 से अधिक स्टार्टअप्स को सहायता प्रदान की है, 175 से अधिक टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटरों (टीबीआई) को सहायता दी है और 1,100 से अधिक आईपी (बौद्धिक संपदा) सृजित की हैं।

घटक

निधि-प्रयास (युवा और महत्वाकांक्षी प्रौद्योगिकी उद्यमियों का प्रचार संवर्धन और गति वर्धन): यह योजना ''आइडिया से प्रोटोटाइप'' तक की यात्रा में सहायता करती है। इसके तहत किसी नवाचारी या स्टार्टअप को अधिकतम 10 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

निधि-ईआईआर(एंटरप्रेन्योर-इन-रेजिडेंस): यह उभरते हुए उद्यमियों के लिए जोखिम कम करने और स्नातक छात्रों को प्रोत्साहित करने की एक सहायता प्रणाली है। इसके तहत उद्यमियों को अपना स्टार्टअप विकसित करने के लिए 30,000 रुपये प्रति माह तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

निधि-टीबीआई (टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर): इसका उद्देश्य मेजबान संस्थान के पास उपलब्ध विशेषज्ञता और बुनियादी ढांचे का उपयोग करके नए उद्यमों के निर्माण के लिए नवाचारों और प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाना है।

निधि-आईटीबीआई (समावेशी-प्रौद्योगिकी बिजनेस इनक्यूबेटर): यह निधि-आईटीबीआई का एक नया संस्करण है, जो मुख्य रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों में उद्यमिता को बढ़ावा देने और समावेशी-प्रौद्योगिकी व्यवसाय इनक्यूबेटरों आई-टीबीआई को सहायता प्रदान करने पर केंद्रित है। इसका विशेष जोर भौगोलिक स्थिति, लिंग, दिव्यांगजनों आदि के संदर्भ में समावेशिता सुनिश्चित करने पर है।

निधि-एक्सेलेरेटर (स्टार्टअप एक्सेलेरेशन प्रोग्राम) : इसका उद्देश्य केंद्रित हस्तक्षेप के माध्यम से स्टार्टअप की प्रगति को तेज़ करना है।

निधि-एसएसएस (सीड सपोर्ट सिस्टम) : यह योजना शुरुआती चरण के निवेश की पेशकश करती है। इसके तहत एक इनक्यूबेटर को अधिकतम 1000 लाख (10 करोड़ रुपये) रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है, जो आगे प्रति स्टार्टअप 100 लाख (1 करोड़ रुपये) रुपये तक का सीड सपोर्ट (पूंजी) प्रदान कर सकता है।

निधि-सीओइ (सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस), स्टार्टअप्स को वैश्विक स्तर के बनने में मदद करता है और विश्व स्तर की प्रतिस्पर्धी सुविधाएं प्रदान करता है।

स्टार्टअप ग्राम उद्यमिता कार्यक्रम (एसवीईपी)

दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत एक उप-योजना के रूप में मई 2015 में लागू की गई, , एसवीईपी का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को स्थानीय उद्यम स्थापित करने और उनका विस्तार करने में सक्षम बनाकर ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देना है।

  • इसका उद्देश्य स्वरोजगार और कुशल वैतनिक रोजगार के माध्यम से गरीबी को कम करना है, जिसके परिणामस्वरूप गरीबों के लिए स्थायी और विविध आजीविका के विकल्प उपलब्ध हो सकें।
  • एसवीईपी ग्रामीण उद्यमों के लिए पूंजी तक पहुँच और तकनीकी सहायता के बीच के अंतर को पाटने का काम करता है।
  • इन लक्षित हस्तक्षेपों  के माध्यम से, 30 जून 2025 तक इस कार्यक्रम ने 3.74 लाख उद्यमों को सहायता प्रदान की है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है और जमीनी स्तर पर आय सृजन के अवसर बढ़े हैं।

एस्पायर (नवाचार, ग्रामीण उद्योग और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए योजना)

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा 2015 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण और कम सेवा वाले क्षेत्रों में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देना है। यह सूक्ष्म-उद्यम निर्माण के लिए 'आजीविका व्यवसाय इनक्यूबेटर' (एलबीआई) स्थापित करने, कौशल विकास और पुन: कौशल अवसर प्रदान करने और औद्योगिक समूहों  को कार्यबल की आपूर्ति करने पर ध्यान केंद्रित करती है।

वित्तीय प्रोत्साहन

 संयंत्र और मशीनरी की खरीद के लिए:

  • सरकारी एजेंसियों को अधिकतम 1 करोड़ रुपये
  • निजी एजेंसियों को 75 लाख रुपये

परिचालन व्यय के लिए: कार्यबल लागत, इनक्यूबेशन और कौशल विकास कार्यक्रम आदि पर परिचालन व्यय के लिए।

कार्यबल लागत, इनक्यूबेशन और कौशल विकास कार्यक्रमों के संचालन आदि के लिए सरकारी और निजी एजेंसियों को परिचालन व्यय सहायता के रूप में अधिकतम 1 करोड़ रुपये प्रदान किए जाते हैं।

 

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी)

स्वरोजगार और जमीनी स्तर पर उद्यम को बढ़ावा देने के लिए सरकार के प्रमुख हस्तक्षेप के रूप में परिकल्पित, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम को 2008 में तत्कालीन 'प्रधानमंत्री रोजगार योजना' और 'ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम' को एक एकल और सुव्यवस्थित ढांचे में एकीकृत करके लागू किया गया था। इस योजना को एमएसएमई मंत्रालय के तहत खादी और ग्रामोद्योग आयोग  के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है, जो व्यापक पहुंच और प्रत्येक व्यक्ति तक प्रभावी वितरण सुनिश्चित करता है।

  • एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में, यह 'सामान्य श्रेणी' के लाभार्थियों को मार्जिन मनी (एमएम) सहायता प्रदान करती है, जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में परियोजना लागत का 25 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 15 प्रतिशत दिया जाता है।
  • विशेष श्रेणी के लाभार्थी, जिनमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, महिलाएं, भूतपूर्व सैनिक, विकलांग व्यक्ति, ट्रांसजेंडर आवेदक और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र, पहाड़ी व सीमावर्ती क्षेत्रों तथा आकांक्षी जिलों के व्यक्ति शामिल होते हैंग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे व्यक्तियों को 35 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 25 प्रतिशत की बढ़ी हुई 'मार्जिन मनी' (सब्सिडी) सहायता प्रदान की जाती है।
  • इस योजना में मेनुफक्चरिंग क्षेत्र में 50 लाख रुपये तक और सेवा क्षेत्र में 20 लाख रुपये तक की परियोजनाओं को सहायता प्रदान की जाती है।

 

भविष्य की ओर: नवाचार और कार्यान्वयन पर निर्मित भविष्य

चूँकि भारत 'स्टार्टअप इंडिया' पहल के एक दशक पूरे कर रहा है, देश का स्टार्टअप इकोसिस्टम एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है—जहाँ यह तेज़ी से हो रहे विस्तार से आगे बढ़कर अब दीर्घकालिक विस्तार और वास्तविक अर्थव्यवस्था के साथ गहन एकीकरण की ओर दृढ़ता से बढ़ रहा है।

एक दशक के बाद, भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम केवल संख्यात्मक विस्तार का नहीं, बल्कि जनसांख्यिकीय लाभ, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और निरंतर सुधार के एजेंडे पर निर्मित एक संरचनात्मक परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करता है। स्टार्टअप अब सभी प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में गहराई से समाहित हो चुके हैं, जो नवाचार, रोजगार सृजन और वैश्विक बाजार एकीकरण को गति दे रहे हैं। जैसे-जैसे भारत 2030 तक 7.3 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर की अर्थव्यवस्था और विकसित भारत 2047 के व्यापक दृष्टिकोण की ओर बढ़ रहा है, स्टार्टअप देश के विकास पथ के केंद्र में बने रहने के लिए तैयार हैं। ये केवल विकास के उत्प्रेरक के रूप में ही नहीं बल्कि भारत के भविष्य के लिए तैयार, नवाचार-आधारित आर्थिक मॉडल के स्थायी प्रतीकों के रूप में भी कार्य करेंगे।

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एसआईडीबीआई

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पीआईबी शोध

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