रक्षा मंत्रालय
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वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच ऑपरेशन सिंदूर एक संतुलित सैन्य प्रतिक्रिया थी, यह भारत के साहस, शक्ति, संयम एवं राष्ट्रीय चरित्र का प्रतीक है: सेना दिवस पर जयपुर में रक्षा मंत्री


“भारत के शांति प्रयास जारी रहेंगे जब तक आतंकी विचारधारा का सफाया नहीं हो जाता”

“भारतीय सेना अदम्य साहस, अटूट समर्पण एवं अद्वितीय बलिदान की मिसाल है”

“सेना 2047 तक दुनिया की सबसे शक्तिशाली ताकत बनने की दिशा में बढ़ रही है”

“पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार सशस्त्र बलों को भारतीय जरूरतों के अनुरूप स्वदेशी एवं अत्याधुनिक हथियारों से लैस कर रही है”
“सभी सेवाओं के बीच मजबूत तालमेल युद्ध के विस्तार लेते आयामों की जरूरत है”

प्रविष्टि तिथि: 15 JAN 2026 7:35PM by PIB Delhi

ऑपरेशन सिंदूर दुनिया भर में व्याप्त अनिश्चितताओं के बीच एक संतुलित सैन्य प्रतिक्रिया के रूप में उभरा, और इसे इतिहास में भारत के साहस, शक्ति, संयम और राष्ट्रीय चरित्र के प्रतीक के रूप में याद किया जाएगा,” रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 15 जनवरी, 2026 को राजस्थान के जयपुर में 78वें भारतीय सेना दिवस समारोह के दौरान यह बात कही। सैनिकों के अदम्य साहस, अटूट समर्पण और युद्धक्षेत्र की बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने के उनके तरीके की सराहना करते हुए, रक्षा मंत्री ने कहा कि आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई सावधानीपूर्वक मूल्यांकन और मानवीय मूल्यों का उचित सम्मान करते हुए की गई।

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श्री राजनाथ सिंह ने जोर देते हुए कहा कि आतंकवादियों ने कभी उस बहादुरी और तत्परता की कल्पना भी नहीं की होगी जिसके साथ भारतीय सशस्त्र बलों ने उनके खिलाफ कार्रवाई की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यह सैनिकों की वीरता ही थी जिसने दुश्मन को किसी भी प्रकार की शरारत करने से रोका। उन्होंने कहा, “स्थिति कठिन थी और दबाव भी था, लेकिन हमारे सैनिकों ने जिस संयम, एकता और धैर्य के साथ इस ऑपरेशन को अंजाम दिया, वह अभूतपूर्व और प्रशंसनीय था।” उन्होंने आगे कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है, और शांति के लिए भारत के प्रयास तब तक जारी रहेंगे जब तक कि आतंकवादी विचारधारा का जड़ से सफाया नहीं हो जाता।

रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ऑपरेशन के दौरान स्वदेशी हथियारों के उपयोग ने इस तथ्य को रेखांकित किया है कि आत्मनिर्भरता केवल गर्व का विषय नहीं बल्कि एक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश आत्मनिर्भरता की राह पर एक लंबी दूरी तय कर चुका है, जिसमें सशस्त्र बल इस प्रयास का नेतृत्व कर रहे हैं और महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने आने वाले समय में 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इन प्रयासों को और तेज करने पर जोर दिया। इसके साथ ही, उन्होंने युद्ध के बदलते आयामों को देखते हुए सेना के तीनों अंगों के बीच आपसी समन्वय  को बढ़ाने के महत्व को भी रेखांकित किया।

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श्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार सशस्त्र बलों को भारत की जरूरतों के अनुरूप स्वदेशी, अत्याधुनिक हथियारों और प्लेटफार्मों से लैस कर रही है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता की दिशा में किए जा रहे निरंतर प्रयास रंग ला रहे हैं, क्योंकि घरेलू रक्षा उत्पादन, जो 2014 में केवल 46,000 करोड़ रुपये था, आज बढ़कर 1.51 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने आगे कहा कि रक्षा निर्यात, जो 2014 में 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था, अब आसमान छूते हुए रिकॉर्ड लगभग 24,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

भारतीय सेना द्वारा एक सैनिक को शारीरिक और मानसिक रूप से फिट होने के साथ-साथ तकनीकी रूप से भी अपडेट होना चाहिए’ के मंत्र को अपनाने की सराहना करते हुए, रक्षा मंत्री ने नवीनतम तकनीकी प्रगति के कारण उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए सशस्त्र बलों को निरंतर मजबूत करने के सरकार के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा, “दुनिया एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहाँ सभी स्थापित धारणाओं को चुनौती दी जा रही है। ऐसी स्थिति में, सशस्त्र बलों को सशक्त बनाना और उनकी आधुनिकता व आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। हमने हमेशा राष्ट्रीय सुरक्षा और अपने सैनिकों की क्षमताओं को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया है।”

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श्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना को अदम्य साहस, अटूट समर्पण और अद्वितीय बलिदान की मशाल और विविधता में एकता का एक शानदार उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि देश भर के अलग-अलग संस्कृतियों और पृष्ठभूमियों के सैनिक कम उम्र में ही एक साझा लक्ष्य के लिए एकजुट हो जाते हैं। उन्होंने कहा, “भारतीय सेना ने राष्ट्र की सामाजिक एकता को मजबूत करने में अमूल्य योगदान दिया है। यह केवल एक सैन्य बल नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक प्रमुख स्तंभ है। दुनिया भर के अधिकांश सैन्य बल एक अलग क्षेत्र  के रूप में कार्य करते हैं, लेकिन भारत में सेना नागरिकों के साथ मिलकर काम करती है। जनता का अटूट विश्वास ही सेना की सबसे बड़ी ताकत है। विश्वास का यही बंधन राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे की नींव है।”

रक्षा मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में भारतीय सैनिकों के अमूल्य योगदान पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हमारे सैनिकों ने न केवल शांति बनाए रखी है, बल्कि विभिन्न देशों के नागरिकों को चिकित्सा सहायता, बुनियादी ढांचे का विकास और मानवीय सहायता भी प्रदान की है। उन्होंने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा, “हमारी सेना दुनिया के लिए शांति के दूत के रूप में उभरी है। इसने 'वसुधैव कुटुंबकम' के भारत के दर्शन को और भी मजबूत किया है।”

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श्री राजनाथ सिंह ने वेटरन्स के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया, जिन्होंने मातृभूमि की सेवा में अपने जीवन के अमूल्य वर्ष समर्पित किए हैं। सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर उन्होंने कहा: “पहले, महिलाओं को सशस्त्र बलों में सहायक भूमिकाओं में भर्ती किया जाता था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी भूमिका का विस्तार करने की परिकल्पना की। अब, सेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन  दिया जा रहा है, जबकि राष्ट्रीय रक्षा अकादमी ने भी महिलाओं के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। हमारा प्रयास सशस्त्र बलों में महिलाओं को उनके पुरुष समकक्षों के समान निरंतर समान अवसर प्रदान करना है।”

रक्षा मंत्री ने युवाओं से सशस्त्र बलों में शामिल होने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा, “सेना में शामिल होने के लिए केवल शारीरिक शक्ति ही पर्याप्त नहीं है। मानसिक क्षमता, नैतिक साहस, निर्णय लेने की क्षमता और नेतृत्व जैसे गुणों की भी आवश्यकता होती है। युवाओं को ये गुण विकसित करने चाहिए।” श्री राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि यह जनता का कर्तव्य है कि वे सैनिकों के परिवारों का ख्याल रखें; राष्ट्र की एकता और अखंडता बनाए रखें ताकि सशस्त्र बलों का बलिदान व्यर्थ न जाए; और देश की प्रगति में योगदान दें क्योंकि केवल एक समृद्ध और शक्तिशाली राष्ट्र ही अपनी सेना को मजबूत कर सकता है।

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श्री राजनाथ सिंह की जयपुर यात्रा में जयपुर मिलिट्री स्टेशन पर सैनिकों के साथ बातचीत शामिल थी जिसके बाद दक्षिण-पश्चिमी कमान के तत्वावधान में सेना दिवस समारोह के हिस्से के रूप में, सवाई मानसिंह स्टेडियम में 'शौर्य संध्या' का आयोजन किया गया। यह शाम भारतीय सेना की वीरता, परंपरा और परिचालन तत्परता के प्रदर्शन को समर्पित थी। इस कार्यक्रम ने भारतीय सेना की बहादुरी, बलिदान और अडिग भावना को सम्मानित किया, साथ ही सशस्त्र बलों और नागरिकों के बीच के अटूट बंधन को और मजबूत किया।

कार्यक्रम की शुरुआत पैरामोटर शो और गुब्बारे छोड़ने के साथ हुई। कलारीपयट्टू और मल्लखंब जैसे मंत्रमुग्ध कर देने वाले मार्शल आर्ट्स और पारंपरिक खेलों के प्रदर्शन ने भारतीय सेना की शारीरिक शक्ति, अनुशासन और समृद्ध युद्ध विरासत को दर्शाया। इस शो का एक मुख्य आकर्षण नेपाली सेना के 30 सदस्यीय बैंड का प्रदर्शन था। इस अवसर पर रक्षा मंत्री द्वारा बैंड को सम्मानित भी किया गया।

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शाम का समापन 'ऑपरेशन सिंदूर' के शानदार मंचन, एक सिंक्रोनाइज्ड 'लाइट एंड साउंड' शो और उसके बाद एक प्रभावशाली ड्रोन डिस्प्ले के साथ हुआ, जिसने दर्शकों को प्रेरित और मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस कार्यक्रम के एक हिस्से के रूप में, 50 नमन केंद्रों का वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ किया गया। 'प्रोजेक्ट नमन' को सेना के पूर्व सैनिकों, पेंशनभोगियों, वीर नारियों और शहीदों के परिजनों (एनओके) को समर्पित सहायता और सेवाएं प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह एक ही सुविधाजनक स्थान पर स्पर्श- सक्षम पेंशन सेवाएं, 'सरकार से नागरिक'  सेवाएं और 'व्यवसाय से उपभोक्ता'  सेवाएं प्रदान करता है। यह मुख्य रूप से स्पर्श (पेंशन प्रशासन प्रणाली रक्षा) नामक डिजिटल पेंशन प्रणाली के कार्यान्वयन पर केंद्रित है, जो देश भर में पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों के लिए सुलभ सुविधा केंद्रों की महत्वपूर्ण आवश्यकता को पूरा करता है। इसके अंतर्गत स्वागत और सुविधा केंद्रों की स्थापना की जाती है।

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इस कार्यक्रम में राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ किसानराव बागड़े, मिजोरम के राज्यपाल जनरल (डॉ.) विजय कुमार सिंह, राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी, राजस्थान की उपमुख्यमंत्री श्रीमती दीया कुमारी और श्री प्रेम चंद बैरवा, दक्षिण-पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मंजींदर सिंह, अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, पूर्व सैनिक, एनओके, गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

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पीके/केसी/एसके


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