इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय
सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) की तीसरी किश्त के तहत 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी
41,863 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश से 33,791 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद
इस कार्यक्रम ने भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण तंत्र को सुदृढ़ किया है, जिससे घरेलू मांग के बड़े हिस्से को स्वदेशी रूप से पूरा करना संभव हो पाया : केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव
प्रविष्टि तिथि:
02 JAN 2026 6:04PM by PIB Delhi
पूर्व में घोषित 12,704 करोड़ रुपये के 24 आवेदनों की स्वीकृति के क्रम में, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना (ईसीएमएस) के तहत 41,863 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश और 2,58,152 करोड़ रुपये के अनुमानित उत्पादन वाले 22 और प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इन स्वीकृतियों से 33,791 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है।
इन स्वीकृतियों में 11 लक्षित सेगमेंट उत्पादों का निर्माण शामिल है, जिनका उपयोग मोबाइल निर्माण, दूरसंचार, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, रणनीतिक इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव और आईटी हार्डवेयर उत्पादों जैसे विभिन्न क्षेत्रों में होता है। ये 11 उत्पाद निम्नलिखित हैं:
- पीसीबी, कैपेसिटर, कनेक्टर, एनक्लोजर और लिथियम-आयन सेल जैसे 5 मूल कंपोनेंट
- कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले मॉड्यूल और ऑप्टिकल ट्रांससीवर जैसे 3 सब-असेंबली
- आपूर्ति श्रृंखला की 3 वस्तुएं जैसे एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न, एनोड सामग्री और लैमिनेट (तांबे की परत चढ़ी हुई)

पीसीबी (एचडीआई सहित) के विनिर्माण की मंजूरी 9 आवेदकों को दी गई है, जिनमें इंडिया सर्किट्स प्राइवेट लिमिटेड, वाइटल इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड, सिग्नुम इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, एपिटोम कंपोनेंट्स प्राइवेट लिमिटेड, बीपीएल लिमिटेड, एटी एंड एस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, एसेंट-के सर्किट प्राइवेट लिमिटेड, सीआईपीएसए टेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और शोगिनी टेक्नोआर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं । इसके अतिरिक्त, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में ऊर्जा भंडारण और पावर कंडीशनिंग के लिए आवश्यक कैपेसिटर के विनिर्माण की मंजूरी डेकी इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और टीडीके इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को दी गई है, जो इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और सिस्टम्स की एक प्रमुख वैश्विक विनिर्माता कंपनी है। हाई-स्पीड कनेक्टर्स के विनिर्माण की मंजूरी एम्फेनॉल हाई स्पीड टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को दी गई है। इसके अतिरिक्त, मोबाइल, आईटी हार्डवेयर उत्पादों और संबंधित उपकरणों के लिए इनक्लोजर बनाने की मंजूरी युझान टेक्नोलॉजी (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड ( इलेक्ट्रॉनिक घटकों की एक वैश्विक निर्माता कंपनी), मदरसन इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स प्राइवेट लिमिटेड (इलेक्ट्रॉनिक घटकों और प्रणालियों की एक प्रमुख भारतीय निर्माता कंपनी) और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड (एक प्रमुख भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता और एक विश्वसनीय वैश्विक ब्रांड) को दी गई है। साथ ही, डिजिटल अनुप्रयोगों के लिए लिथियम-आयन सेल बनाने के लिए आवेदन को भी मंजूरी मिल गई है। ये सेल उपभोक्ता और औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए रिचार्जेबल ऊर्जा भंडारण इकाइयों के रूप में कार्य करते हैं। लिथियम-आयन सेल विनिर्माण में अग्रणी वैश्विक कंपनियों में से एक, एटीएल बैटरी टेक्नोलॉजी (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड को यह मंजूरी मिली है।
सब-असेंबली श्रेणी में, ऑप्टिकल ट्रांससीवर (एसएफपी) के विनिर्माण के लिए डिक्सन इलेक्ट्रोकनेक्ट प्राइवेट लिमिटेड को ; कैमरा मॉड्यूल सब असेंबली के विनिर्माण के लिए कुनशान क्यू टेक माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड को; और डिस्प्ले मॉड्यूल सब-असेंबली के निर्माण के लिए सैमसंग डिस्प्ले नोएडा प्राइवेट लिमिटेड को, जो वैश्विक स्तर पर शीर्ष इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांडों में से एक है, अनुमोदन दिया गया है ।
इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए, एनपीएसपीएल एडवांस्ड मैटेरियल्स प्राइवेट लिमिटेड को एनोड सामग्री के निर्माण के लिए भी मंजूरी दी गई है , जो लिथियम-आयन सेल निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण वस्तु है और लिथियम-आयन सेल की ऊर्जा घनत्व और जीवन-चक्र निर्धारित करती है; विप्रो ग्लोबल इंजीनियरिंग एंड इलेक्ट्रॉनिक मैटेरियल्स प्राइवेट लिमिटेड को लैमिनेट (कॉपर क्लैड) के निर्माण के लिए मंजूरी दी गई है, जो पीसीबी निर्माण के लिए आधार सामग्री है और पीसीबी निर्माण की सामग्री सूची का एक महत्वपूर्ण हिस्सा (~30 प्रतिशत) है; और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड को मोबाइल फोन के इनक्लोजरों के लिए एल्युमीनियम एक्सट्रूज़न के विनिर्माण के लिए मंजूरी दी गई है , जिसका वर्तमान में 100 प्रतिशत आयात किया जा रहा है।

स्वीकृत इकाइयां आंध्र प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित आठ राज्यों में फैली हुई हैं, जो भौगोलिक रूप से संतुलित औद्योगिक विकास और देश भर में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के विस्तार पर सरकार के फोकस को मजबूत करती हैं। अनुमोदन के नवीनतम चरण के साथ, ईसीएमएस के तहत अब तक 11 राज्यों में कुल 46 आवेदन स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें कुल 54,567 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है। इससे लगभग 51,000 लोगों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होगा।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने इस अवसर पर कहा कि इस कार्यक्रम ने भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण तंत्र को मजबूत किया है, जिससे घरेलू मांग के बड़े हिस्से को स्वदेशी रूप से पूरा करना संभव हो गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के लिए अपने विजन को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि 2047 में भी भारत की बड़ी जनसंख्या युवाओं की ही रहेगी, जबकि उस समय तक कई अन्य अर्थव्यवस्थाओं में विकास ठहर चुका होगा। उन्होंने कहा कि भारत एकमात्र ऐसी अर्थव्यवस्था होगी जो 2100 तक निरंतर विकास करती रहेगी, इसलिए विकास को जारी रखने के लिए सभी संरचनात्मक आधारभूत तत्वों को स्थापित करना महत्वपूर्ण है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने कहा कि भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के अगले बड़े गंतव्य के रूप में देखा जा रहा है और यह वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में उभर रहा है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी सचिव श्री एस. कृष्णन ने कहा कि वर्तमान चरण में स्वीकृत आवेदन देश के इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण इको-सिस्टम के लिए महत्वपूर्ण हैं और ईसीएमएस के महत्वपूर्ण लक्ष्यों में से एक को साकार करने में मदद करते हैं।
इन स्वीकृतियों से घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं को काफी मजबूती मिलेगी, महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक घटकों के लिए आयात पर निर्भरता कम होगी और भारत में उच्च मूल्य वाली विनिर्माण क्षमताओं के विकास को मदद मिलेगी।
इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत मिली ये स्वीकृतियां इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में एक साहसिक और दूरदर्शी कदम को दर्शाती हैं, जो भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप है।
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पीके/केसी/एसकेजे/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2210928)
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