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56वें ​​भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में भारत के क्रिएटिव दिग्गजों को याद किया गया


फिल्म महोत्सव के फिनाले में उन महान हस्तियों को सम्मान दिया गया जो इस वर्ष हमसे बिछड़ गए

गोवा में 56वें  भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव ​​का समापन समारोह भावुक और सोचने पर विवश करने वाला रहा। इस दौरान भारतीय सिनेमा, संगीत, रंगमंच और क्रिएटिव आर्ट्स की कई बड़ी हस्तियों को श्रद्धांजलि दी गई, जिनका इस वर्ष निधन हो गया। इस दौरान विशेष रूप से तैयार किया गया वीडियो दिखाया गया, जिसमें उन कलाकारों को सम्मान दिया गया जिनके योगदान ने देश के सांस्कृतिक वातावरण पर अमिट छाप छोड़ी है।

ट्रिब्यूट सेगमेंट में मशहूर अभिनेता धर्मेंद्र के निधन की भावना से वातावरण  में भावुकता और बढ़ गई, जो फिल्म महोत्सव के दौरान ही 24 नवंबर को हमें छोड़कर चले गए। इफ्फी की श्रद्धांजलि विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों तक व्यापक थी जिनमें अभिनेता, निर्देशक, संगीतकार, थिएटर प्रैक्टिशनर्स और क्रिएटिव प्रोफेशनल्स शामिल थे जो भारत की कलात्मक विरासत की गहराई और विविधता को दिखाते हैं। इनमें से प्रत्येक हस्ती ने ज़िंदगी भर के जुनून, समर्पण और रचनात्मक उत्कृष्टतता को दिखाया।

नीचे उन कलाकारों के नाम दिए गए हैं जिन्हें इस समारोह में सम्मानित किया गया:

धर्मेंद्र

भारतीय सिनेमा की महान हस्ती, धर्मेंद्र ने रोमांस और ड्रामा से लेकर एक्शन तक, हर जॉनर में कमाल किया। महोत्सव के दौरान उनके निधन से भारतीय फिल्म उद्योग में दुख की लहर दौड़ गई।

कामिनी कौशल

हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर की मशहूर अदाकारा अपने महीन किरदारों और स्क्रीन पर हमेशा रहने वाली उपस्थिति के लिए जानी जाती थीं। उनका करियर सात दशकों से ज़्यादा लंबा था, जिसने एक्टर्स की कई पीढ़ियों को प्रेरित किया।

 

सुलक्षणा पंडित

वह प्रतिभावान गायिका थीं जिनकी सुरीली आवाज़ ने कई यादगार हिंदी फिल्मी गानों को पहचान दी। अभिनेत्री के तौर पर, उन्होंने 1970 और 1980 के दशक में अपनी भूमिकाओं में भावुक गहराई का समावेश किया।

सतीश शाह

वे सिनेमा और भारतीय टेलीविज़न दोनों में पसंदीदा हस्ती थे। सतीश शाह को उनकी शानदार कॉमिक टाइमिंग और यादगार परफॉर्मेंस के लिए जाना जाता था। उनके काम को हर पीढ़ी के दर्शक पसंद करते हैं।

पीयूष पांडे

भारतीय विज्ञापन जगत के बड़े नाम पीयूष पांडे ने अपने शानदार कैंपेन और अपनी अनोखी रचनात्मक आवाज़ से उद्योग को आकार दिया।

ऋषभ टंडन

वह ज़बरदस्त संगीत प्रतिभा के धनी थे। वह अपनी दिल को छू लेने वाली आवाज़ और आज के ज़माने के क्रिएटिव स्टाइल के लिए जाने जाते थे। उनके अचानक गुज़र जाने से इंडिपेंडेंट म्यूज़िक कम्युनिटी में खालीपन आ गया।

गोवर्धन असरानी

असरानी के नाम से मशहूर, वह भारतीय सिनेमा के सबसे अधिक बहुमुखी कलाकारों में से एक थे। वे आसानी से कॉमेडी और सीरियस रोल के बीच तालमेल बिठा लेते थे। उनके डायरेक्शन के कार्यों ने भी उनके कई तरह के करियर में गहराई का समावेश किया।

पंकज धीर

भारतीय टेलीविज़न और फ़िल्म में मशहूर भूमिका के लिए सबसे ज़्यादा जाने जाते हैं, उन्होंने अपने हर किरदार में गंभीरता और गरिमा का परिचय दिया।

वरिंदर सिंह घुमन

वे प्रोफेशनल बॉडीबिल्डर से अभिनेता बने। उन्होंने अपनी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और यूनिक पर्सनैलिटी के लिए सराहना पाई।

ज़ुबीन गर्ग

एक मशहूर आवाज़, उन्होंने अपनी खास गायकी और म्यूज़िकल रेंज से राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रियता हासिल की। असमिया और इंडियन पॉप म्यूज़िक में उनका असर बेमिसाल है।

बाल कर्वे

वे मराठी थिएटर और सिनेमा के जाने-माने परफॉर्मर थे। वह अपनी सधी हुई अभिनय शैली और यादगार स्टेज रोल के लिए जाने जाते थे। उनके योगदान ने  कहानी कहने की क्षेत्रीय परंपरा को बेहतर बनाया।

जसविंदर भल्ला

वे पंजाबी सिनेमा की मशहूर हस्ती थी। जसविंदर भल्ला को उनकी बेहतरीन कॉमिक परफॉर्मेंस और ऐसे किरदारों के लिए पसंद किया जाता था जिनसे दर्शकों को जुड़ाव महसूस होता था।

ज्योति चंदेकर

ज्योति अनुभवी फिल्म और थिएटर परफॉर्मर थी। उन्होंने मराठी सिनेमा में अपनी भावुक भूमिकाओं के लिए सराहना पाई।

रतन थियम

मणिपुरी थिएटर में ग्लोबल हस्ती, वह पारंपरिक रूपों को आज के ज़माने के एक्सप्रेशन के साथ मिलाने के लिए जाने जाते थे।

बी. सरोजा देवी

वे दक्षिण भारतीय सिनेमा के सबसे अधिक  प्रसिद्ध सितारों में से एक थी। उन्होंने कन्नड़, तमिल, तेलुगु और हिंदी फिल्मों में काम किया।

शेफाली जरीवाला

पॉपुलर म्यूज़िक वीडियो और टेलीविज़न में अपने ब्रेकआउट अपीयरेंस के लिए लोकप्रिय शेफाली जरीवाला इंडियन पॉप कल्चर में जाना-पहचाना चेहरा बनी रहीं।

पार्थो घोष

उन्होंने 1990 और 2000 के दशक की शुरुआत में कई प्रसिद्ध हिंदी फिल्मों का निर्देशन किया। पार्थों अपनी कमर्शियल फिल्ममेकिंग सेंसिबिलिटी के लिए प्रसिद्ध थे।

विभु राघवे

विभु युवा और होनहार टेलीविज़न अभिनेता थे। विभु राघवे को उनकी शानदार स्क्रीन प्रेजेंस और रिलेटेबल परफॉर्मेंस के लिए सराहा गया।

चंद्रकांत

वे तेलुगु टेलीविज़न में एक जाना-पहचाना चेहरा थे। चंद्रकांत अपनी भरोसेमंद परफॉर्मेंस और अपने काम के प्रति समर्पण के लिए लोकप्रिय थे।

शाजी एन. करुण

मलयालम सिनेमा में जानी-मानी आवाज़ शाजी अपनी पोएटिक विज़ुअल स्टोरीटेलिंग के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर थे।

मनोज कुमार

मनोज कुमार अपनी देशभक्ति वाली भूमिकाओं रोल के लिए मशहूर थे। वह भारतीय राष्ट्रवादी सिनेमा में योगदान के लिए प्रसिद्ध थे। उनकी फ़िल्में आज भी गर्व और सांस्कृतिक पहचान को प्रेरित करती हैं।

आलोक चटर्जी

आलोक भारतीय रंगमंच का बड़ा नाम थे। उन्होंने रंगमंच के लिए अपनी प्रतिबद्धता से अनगिनत परफॉर्मर्स को प्रशिक्षित किया और प्रेरित किया।

श्याम बेनेगल

भारतीय  समानांतर सिनेमा के एक बड़े नाम, श्याम बेनेगल ने अपनी ज़बरदस्त कहानियों और सिनेमैटिक भाषा के ज़रिए आधुनिक  भारतीय फिल्म निर्माण कला को आकार दिया।

ज़ाकिर हुसैन

ज़ाकिर हुसैन विश्व-प्रसिद्ध तालवादक थे। उन्हें तबला को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए जाना जाता था। उनकी आर्टिस्ट्री ने संस्कृतियों को जोड़ा और भारतीय  शास्त्रीय संगीत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिर से परिभाषित किया।

IFFI का परिचय

भारत अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) 1952 में शुरू हुआ। यह दक्षिण एशिया का सबसे पुराना और सबसे बड़ा सिनेमा उत्सव है। राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम  (NFDC), भारत सरकार का सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और गोवा सरकार की एंटरटेनमेंट सोसाइटी ऑफ़ गोवा (ESG), इसे मिलकर आयोजित करते हैं। यह फेस्टिवल ग्लोबल सिनेमा पावरहाउस बन गया है—जहाँ रिस्टोर की गई क्लासिक फिल्में बोल्ड एक्सपेरिमेंट से मिलती हैं, और लेजेंडरी उस्ताद निडर एवं पहली बार आने वालों के साथ जगह शेयर करते हैं। IFFI को जो चीज़ सच में शानदार बनाती है, वह है इसका इलेक्ट्रिक मिक्स—इंटरनेशनल कॉम्पिटिशन, कल्चरल शोकेस, मास्टरक्लास, ट्रिब्यूट और हाई-एनर्जी वेव्स फिल्म बाज़ार, जहाँ आइडिया, डील और कोलेबोरेशन उड़ान भरते हैं। 20-28 नवंबर तक गोवा के शानदार समुद्र तटीय पृष्ठभूमि में, 56वां फिल्म महोत्सव भाषाओं, जॉनर, इनोवेशन और आवाज़ों की शानदार रेंज के वादे पर खरा उतरा और विश्व मंच पर भारत की रचनात्मक उत्कृष्टतता का शानदार उत्सव बन गया।

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पीके/केसी/पीके


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