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ट्राई ने “निजी रेडियो प्रसारकों के लिए डिजिटल रेडियो प्रसारण नीति तैयार करने” पर अनुशंसाएं जारी कीं

प्रविष्टि तिथि: 03 OCT 2025 12:13PM by PIB Delhi

भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने आज चार 'ए+' श्रेणी के शहरों अर्थात दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई और नौ '' श्रेणी के शहरों अर्थात हैदराबाद, बेंगलुरु, अहमदाबाद, सूरत, पुणे, जयपुर, लखनऊ, कानपुर और नागपुर में डिजिटल रेडियो प्रसारण सेवा शुरू करने के लिए नियम और शर्तों तथा आरक्षित मूल्य के साथ "निजी रेडियो प्रसारकों के लिए एक डिजिटल रेडियो प्रसारण नीति तैयार करने" पर अपनी अनुशंसाएं जारी की हैं।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) ने 23 अप्रैल 2024 के अपने संदर्भ के माध्यम से निजी रेडियो प्रसारकों के लिए डिजिटल रेडियो प्रसारण नीति तैयार करने पर ट्राई अधिनियम, 1997 की धारा 11 (1) (ए) (आई) के तहत ट्राई से अनुशंसाएं मांगी थीं।

इस संबंध में, 30 सितंबर 2024 को एक परामर्श पत्र जारी किया गया था जिसमें निजी रेडियो प्रसारकों के लिए डिजिटल रेडियो प्रसारण नीति तैयार करने से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर हितधारकों की टिप्पणियां मांगी गई थीं। परामर्श पत्र पर 43 टिप्पणियां और 13 प्रति-टिप्पणियां प्राप्त हुईं, जो ट्राई की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। इसके बाद, 8 जनवरी 2025 को एक ओपन हाउस चर्चा आयोजित की गई ।

प्राप्त सभी टिप्पणियों/प्रति-टिप्पणियों पर विचार करने और मुद्दों के विश्लेषण के बाद, प्राधिकरण ने अपनी अनुशंसाओं को अंतिम रूप दिया है। अनुशंसाओं की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • नए प्रसारकों द्वारा डिजिटल रेडियो सेवाएं सिमुलकास्ट मोड में शुरू की जानी चाहिए। विद्यमान एनालॉग एफएम रेडियो प्रसारकों को भी स्वैच्छिक आधार पर सिमुलकास्ट मोड में स्थानांतरित करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
  • प्रस्तावित सिमुलकास्ट मोड उन्हें निर्धारित स्पॉट फ्रीक्वेंसी पर एक एनालॉग, तीन डिजिटल और एक डेटा चैनल प्रसारित करने में सक्षम बनाएगा।
  • भारत में वीएचएफ बैंड II में डिजिटल रेडियो प्रसारण आरंभ करने के लिए एकल डिजिटल रेडियो प्रौद्योगिकी मानक अपनाया जाना चाहिए।
  • सरकार को देश में तैनाती के लिए उपयुक्त डिजिटल रेडियो प्रौद्योगिकी का चयन या तो मुख्य हितधारकों अर्थात रेडियो प्रसारकों और रेडियो रिसीवर निर्माताओं के साथ परामर्श करके करना चाहिए या स्पेक्ट्रम नीलामी प्रक्रिया में प्रौद्योगिकी के चयन को शामिल करके  या सरकार द्वारा उपयुक्त समझी जाने वाली किसी अन्य विधि का उपयोग करना चाहिए।
  • सरकार को श्रेणी 'ए+' के चार शहरों और श्रेणी '' के ​​नौ शहरों में से प्रत्येक के लिए एकल प्रौद्योगिकी परिदृश्य में फ्रीक्वेंसी योजना तैयार करनी चाहिए और उसे सार्वजनिक कार्यक्षेत्र में रखना चाहिए।
  • नए चैनलों के लिए फ्रीक्वेंसी दूरसंचार अधिनियम, 2023 की धारा 4(4) के अनुसार नीलामी के माध्यम से आवंटित की जानी चाहिए।
  • डिजिटल रेडियो प्रसारण के लिए नीलामी के माध्यम से फ्रीक्वेंसी के सफल आवंटन के तुरंत बाद, विद्यमान एफएम रेडियो प्रसारकों को स्वैच्छिक आधार पर सिमुलकास्ट मोड में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव दिया जाना चाहिए।
  • नीलामी प्रक्रिया की समाप्ति की तिथि से 6 महीने की समय-सीमा विद्यमान प्रसारकों को सिमुलकास्ट मोड में स्थानांतरित करने का विकल्प चुनने के लिए दी जानी चाहिए।
  • सिमुलकास्ट मोड में स्थानांतरण के लिए, मौजूदा एफएम रेडियो प्रसारकों को किसी शहर में डिजिटल रेडियो प्रसारण के लिए नीलामी द्वारा निर्धारित मूल्य और विद्यमान अनुमति की शेष अवधि के लिए गैर-वापसी योग्य एकमुश्त प्रवेश शुल्क (नोटईएफ) की आनुपातिक राशि के अंतर के बराबर राशि का भुगतान करना होगा।
  • रेडियो प्रसारकों को नीलामी प्रक्रिया के समापन या माइग्रेशन के विकल्प की स्वीकृति के दो वर्ष के भीतर सिमुलकास्ट परिचालन शुरू कर देना चाहिए।
  • एनालॉग प्रसारण की समाप्ति की तिथि बाद में डिजिटल रेडियो प्रसारण की प्रगति का मूल्यांकन करने के बाद तय की जानी चाहिए।
  • सरकार को सक्रिय और निष्क्रिय डिजिटल अवसंरचना के प्रावधान हेतु 'रेडियो प्रसारण अवसंरचना प्रदाता' के लिए एक नया प्राधिकरण शुरू करना चाहिए, जिसे रेडियो प्रसारकों को पट्टे पर दिया जा सके। हालांकि, डिजिटल रेडियो सेवाओं की शुरुआत के लिए यह कोई पूर्व-आवश्यकता नहीं होगी।
  • सरकार को मोबाइल फोन और कार इंफोटेनमेंट सिस्टम में डिजिटल रेडियो रिसीवर की उपलब्धता के संबंध में एक परामर्शी जारी करना चाहिए, जैसा कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा मोबाइल फोन में एफएम रेडियो रिसीवर की उपलब्धता के लिए जारी किया गया परामर्शी है।
  • निजी स्थलीय रेडियो प्रसारकों को उपयोगकर्ता नियंत्रण के बिना, अपने लाइव स्थलीय चैनलों को एक साथ स्ट्रीम करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
  • डिजिटल रेडियो रिसीवरों के विकास और प्रसार तथा बाजार की गतिशीलता की देखरेख और निगरानी के लिए, सूचना और प्रसारण मंत्रालय को एक उच्च स्तरीय संचालन समिति का गठन करना चाहिए, जिसमें एमआईबी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय,  रेडियो प्रसारकों, उपकरण निर्माताओं और प्रौद्योगिकी प्रदाता के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हों।
  • डिजिटल रेडियो प्रसारण सेवा प्राधिकरण के लिए पात्रता शर्तें (न्यूनतम नेटवर्थ मानदंड सहित) वही होनी चाहिए जो 21 फरवरी 2025 को जारी 'दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत प्रसारण सेवाओं के प्रावधान के लिए सेवा प्राधिकरणों के ढांचे' पर ट्राई की अनुशंसाओं में प्रदान की गई हैं
  • डिजिटल रेडियो प्रसारण के लिए प्राधिकरण की अवधि 15 वर्ष होनी चाहिए।
  • एमआईबी द्वारा 25.07.2011 को अधिसूचित निजी एफएम रेडियो के चरण-III के लिए नीति दिशानिर्देशों में उल्लिखित सकल राजस्व की परिभाषा को बरकरार रखा गया है।
  • यदि रेडियो प्रसारणकर्ता द्वारा स्ट्रीमिंग प्रदान की जा रही है, तो रेडियो चैनल की स्ट्रीमिंग से प्राप्त राजस्व को जी.आर. की परिभाषा में शामिल किया जाना चाहिए।
  • दूरसंचार प्राधिकरणों के समान ही समायोजित जी.आर. पर प्राधिकरण शुल्क लगाया जाना चाहिए।
  • लागू सकल राजस्व (एपीजीआर) लाइसेंसधारक के कुल सकल राजस्व (जीआर) के बराबर होना चाहिए, जिसमें से रेडियो प्रसारण सेवाओं से सीधे संबंधित न होने वाले राजस्व मदों को घटाया जाएगा।
  • समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) की गणना भुगतान किए गए किसी भी जीएसटी को घटाने के बाद की जाएगी।
  • वार्षिक/प्राधिकरण शुल्क होगा:
  1. 'ए+', '', 'बी', 'सी' और 'डी' श्रेणी के शहरों के लिए एजीआर का 4 प्रतिशत।
  2. 'अन्य' श्रेणी (पूर्वोत्तर, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और द्वीप क्षेत्र के सीमावर्ती और पहाड़ी क्षेत्रों में) और '' श्रेणी के शहरों के लिए - 3 वर्षों की प्रारंभिक अवधि के लिए एजीआर का 2 प्रतिशत, उसके बाद उपरोक्त के समान।

 

  • किसी अधिकृत निकाय को किसी शहर में कुल स्पॉट फ्रीक्वेंसी के 40 प्रतिशत से अधिक का स्वामित्व रखने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, बशर्ते कि शहर में कम से कम तीन अलग-अलग ऑपरेटर हों।
  • एमआईबी द्वारा श्रेणी ए+ और ए शहरों में चिन्हित कुल स्पॉट फ़्रीक्वेंसी में से प्रत्येक शहर में डिजिटल रेडियो प्रसारण के लिए दो नई स्पॉट फ़्रीक्वेंसी की नीलामी इस चरण में की जानी चाहिए। इन शहरों में शेष फ़्रीक्वेंसी की नीलामी पर इस दौर के परिणामों और रिसीवर डिवाइस इकोसिस्टम के विकास एवं प्रसार की प्रगति की समीक्षा के बाद विचार किया जाएगा। डिजिटल रेडियो के लिए स्पॉट फ़्रीक्वेंसी की परिभाषा प्रदान की गई है।
  • किसी शहर में किसी निकाय के विभिन्न रेडियो चैनलों पर शैलियों का चयन बाजार शक्तियों पर छोड़ दिया जाना चाहिए।
  • केन्द्र सरकार को स्थलीय रेडियो सेवाओं के लिए अलग कार्यक्रम कोड और विज्ञापन कोड अधिसूचित करना चाहिए।
  • 24 महीने की अवधि के भीतर सेवाओं के गैर-प्रचालन की स्थिति में, फ्रीक्वेंसी असाइनमेंट वापस ले लिया जाना चाहिए और निकाय को ऐसी वापसी की तिथि से पांच साल की अवधि के लिए उसी शहर में एक और स्पॉट फ्रीक्वेंसी के आवंटन से वंचित किया जाना चाहिए।

ल.  प्रसार भारती को अपनी भूमि और टावर अवसंरचना (एलटीआई) के साथ-साथ सामान्य प्रसारण अवसंरचना (सीटीआई) को निजी प्रसारकों के साथ रियायती किराये की दरों पर साझा करना चाहिए और प्रचालनगत व्यय की पूरी वसूली भी करनी चाहिए।

    • प्रसारण अवसंरचना के अनिवार्य सह-स्थान की शर्त को हटा दिया जाना चाहिए तथा स्थलीय रेडियो सेवा की अधिकृत संस्थाओं को तकनीकी और वाणिज्यिक व्यवहार्यता के अनुसार प्रसारण सेवाओं, दूरसंचार सेवाओं, अवसंरचना प्रदाताओं आदि के निकायों के साथ स्वैच्छिक आधार पर अवसंरचना साझा करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
    • श्रेणी 'ए+' और '' के ​​13 शहरों में नए रेडियो प्रसारकों द्वारा सिमुलकास्ट के लिए आवश्यक स्पेक्ट्रम की नीलामी के लिए आरक्षित मूल्य निम्नानुसार होने चाहिए:

शहर

श्रेणी

सिमुलकास्ट के लिए स्पेक्ट्रम हेतु आरपी

(करोड़ रुपये में)

चेन्नई

ए+

146.68

दिल्ली

ए+

177.63

कोलकाता

ए+

79.96

मुंबई

ए+

194.08

अहमदाबाद

40.44

बेंगलुरू

87.22

हैदराबाद

65.85

जयपुर

26.89

कानपुर

20.52

लखनऊ

24.59

नागपुर

29.48

पुणे

41.26

सूरत

25.89

 

    • नई स्पॉट फ्रीक्वेंसी के सफल बोलीदाताओं को दूरसंचार सेक्टर के लिए सरकार द्वारा की गई स्पेक्ट्रम नीलामी के समान बोली राशि के भुगतान के लिए कई विकल्प दिए जाने चाहिए।
    • विद्यामान ऑपरेटर जो सिमुलकास्ट पर माइग्रेट करते हैं, उन्हें माइग्रेशन राशि के भुगतान के लिए भी कई विकल्प दिए जाने चाहिए।
    •   वार्षिक किस्तों में बोली राशि के भुगतान के मामले में, 5 वर्ष की तीन स्लैबों में वृद्धिशील किस्तों की अनुमति दी जानी चाहिए, जिससे एनपीवी की विधिवत सुरक्षा करते हुए 15 वर्षों में समान किस्तों में एडीपी का 66.67 प्रतिशत वसूल किया जा सके और शेष 33.33 प्रतिशत इन दरों पर वसूला जा सके:
    1. पहले पांच वर्षों में शून्य;
    2. अगले पांच वर्षों में 1/3 , पांच वर्ष की अवधि में समान रूप से वितरित ;
    3. अंतिम पांच वर्षों में 2/3 भाग , पांच वर्ष की अवधि में समान रूप से वितरित;

एनपीवी को विधिवत संरक्षित करना।

क्ष. वार्षिक किस्तों में माइग्रेशन राशि के भुगतान के मामले में, 5 वर्ष की तीन स्लैबों में वृद्धिशील किस्तों की अनुमति दी जानी चाहिए, जिससे मौजूदा अनुमति की शेष अवधि के लिए एनओटीईएफ की आनुपातिक राशि से कम एडीपी के 66.67 प्रतिशत की वसूली, एनपीवी की विधिवत सुरक्षा करते हुए 15 वर्षों में समान किस्तों में की जा सके और एडीपी के शेष 33.33 प्रतिशत को निम्न दरों पर वसूला जा सके:

    1. पहले पांच वर्षों में शून्य;
    2. अगले पांच वर्षों में 1/3 , पांच वर्ष की अवधि में समान रूप से वितरित ;
    3. अंतिम पांच वर्षों में 2/3 भाग , पांच वर्ष की अवधि में समान रूप से वितरित;

एनपीवी को विधिवत संरक्षित करना।

त्र.   वार्षिक किस्त विकल्प या आंशिक भुगतान विकल्प के मामले में, एडीपी/माइग्रेशन राशि के एनपीवी को भारतीय स्टेट बैंक की एक वर्ष की एमसीएलआर की लागू ब्याज दर पर किस्तों की छूट देकर संरक्षित किया जाना चाहिए।

डिजिटल रेडियो प्रसारण, एनालॉग रेडियो प्रसारण की तुलना में कई लाभ प्रदान करेगा। इन अनुशंसाओं में ट्राई द्वारा प्रस्तावित डिजिटल रेडियो प्रसारण का प्रमुख लाभ, सिमुलकास्ट मोड में एकल स्पॉट आवृत्ति पर एक एनालॉग चैनल के अतिरिक्त, तीन डिजिटल और एक डेटा चैनल प्रसारित करने की क्षमता है। इस मोड में, डिजिटल रेडियो चैनल बेहतर ऑडियो गुणवत्ता प्रदान करते हैं, जबकि एनालॉग मोड में करियर फ्रीक्वेंसी पर केवल एक चैनल का प्रसारण संभव होता है। प्रतिस्पर्धी माहौल में, डिजिटल रेडियो प्रसारण, रेडियो प्रसारकों को नए अवसर प्रदान करने के साथ-साथ श्रोताओं को सुनने के अलग-अलग विकल्प और मूल्यवर्धित सेवाएं भी प्रदान कर सकता है।

अनुशंसाओं का पूर्ण मूल पाठ ट्राई की वेबसाइट www.trai.gov.in पर उपलब्ध है। किसी भी स्पष्टीकरण/जानकारी के लिए, ट्राई की सलाहकार (प्रसारण एवं केबल सेवाएं) डॉ. दीपाली शर्मा से टेलीफोन नंबर: +91-11-20907774 पर संपर्क किया जा सकता है।

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पीके/केसी/एसकेजे/एसके


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