नागरिक उड्डयन मंत्रालय
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संसद में वायुयान वस्तुओं में हित संरक्षण विधेयक, 2025 पारित


नागर विमानन मंत्री श्री राममोहन नायडू के नेतृत्व में एक और महत्वपूर्ण सुधार

Posted On: 04 APR 2025 4:03PM by PIB Delhi

नागर विमानन मंत्री श्री राममोहन नायडू द्वारा प्रस्तुत वायुयान वस्तुओं में हित संरक्षण विधेयक, 2025, राज्यसभा में पूर्व स्वीकृति के बाद 03 अप्रैल 2025 को लोकसभा में पारित हो गया। दोनों सदनों द्वारा विधेयक को मंजूरी दिए जाने के साथ, यह नागर विमानन मंत्री श्री राममोहन नायडू के नेतृत्व में पारित किया गया, दूसरा प्रमुख विमानन सुधार है। इस विधेयक का उद्देश्य भारत के विमान पट्टे और वित्तपोषण इकोसिस्टम को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना है और यह भारत के तेजी से बढ़ते विमानन बाजार में निवेशकों के विश्वास को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह विधेयक 2001 के केप टाउन कन्वेंशन के ढांचे पर आधारित है, जिसका उद्देश्य इंटरनेशनल लीजिंग समझौतों को सरल बनाना और मानकीकृत करना था। भारत ने औपचारिक रूप से 2008 में इस कन्वेंशन को अपनाया था, लेकिन कानूनी प्रवर्तन में अंतराल के कारण पट्टे की लागत बढ़ गई जो अन्य देशों की तुलना में आमतौर पर 8 से 10 प्रतिशत अधिक है। इस विधेयक के माध्यम से भारत इन अंतरों को दूर करना चाहता है, विमान वित्तपोषकों को कानूनी निश्चितता प्रदान करना और भारतीय वाहकों के लिए लागत कम करना चाहता है।

श्री राममोहन नायडू ने इस कानून के पीछे की अत्यावश्यकता को रेखांकित किया और कहा, "नागर विमानन में इस छलांग के पीछे एक विजन था। उस विजन को पूरा करने के लिए एक मिशन था। साथ ही मिशन को संभव बनाने के लिए हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का मार्गदर्शन था। आज हम जिस तरह की प्रगति देख रहे हैं, वह उनके नेतृत्व के कारण ही संभव हो पाई है।"

 

मंत्री महोदय ने ठोस आंकड़ों के साथ इस प्रगति को दर्शाया। उन्होंने कहा, "आजादी से लेकर 2014 तक लगभग 65 वर्षों तक भारत में सालाना हवाई यात्रियों की कुल संख्या 10 करोड़ 38 लाख थी। अगले 10 वर्षों में ही यह संख्या दोगुनी से भी अधिक होकर 2024 में 22 करोड़ 81 लाख हो गई है।" उन्होंने कहा, "इसी तरह, भारत में हवाई अड्डों की संख्या 2014 के 74 से बढ़कर 2024 में 159 हो गई है, तथा दो और हवाई अड्डे जल्द ही शुरू होने वाले हैं।"

श्री राममोहन नायडू ने विमानों की संख्या में वृद्धि पर भी प्रकाश डाला, जो 2014 के 340 से बढ़कर 2024 तक 840 से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा "इन आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में नागर विमानन सिर्फ बढ़ ही नहीं रहा है, बल्कि फलफूल रहा है। किसी अन्य देश में इतने कम समय में विमानन क्षेत्र में इतना विस्तार नहीं हुआ है।

इस विधेयक से लीजिंग प्रक्रिया को और आसान बनाने, भारत को विमानन निवेश के लिए और अधिक आकर्षक गंतव्य बनाने  तथा केपटाउन कन्वेंशन के तहत देश के अनुपालन स्कोर में सुधार होने की उम्मीद है। ये परिवर्तन एयरलाइन लागत को कम करने और इस क्षेत्र में नई कंपनियों को प्रोत्साहित करने के लिए आवश्यक हैं।

विचार-विमर्श में नागर विमानन क्षेत्र के व्यापक मुद्दों पर भी चर्चा की गई, जैसे कि एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की उच्च लागत, जो एयरलाइन की परिचालन लागत का लगभग 45 प्रतिशत है। मंत्री महोदय ने राज्यों में एटीएफ कर में भिन्नता पर चिंता व्यक्त की और अधिक राज्यों से उन राज्यों का अनुसरण करने का आह्वान किया जिन्होंने अपनी दरें कम कर दी हैं। उन्होंने कहा, "इन करों को कम करने से क्षेत्रीय संपर्क बढ़ेगा और यात्रियों के लिए लागत कम होगी।"

भविष्य को देखते हुए, नागर विमानन मंत्रालय ने स्थिरता और क्षमता निर्माण के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं। हमारे पास कुल मिलाकर लगभग 80 हवाई अड्डे हैं जो शत-प्रतिशत हरित ऊर्जा का उपयोग करते हैं और हम 100 से अधिक हवाई अड्डों को नवीकरणीय ऊर्जा में बदलने की आकांक्षा रखते हैं, भारत हरित विमानन की दिशा में एक मजबूत कदम उठा रहा है। इस क्षेत्र में प्रशिक्षित पायलटों की मांग भी बढ़ रही है- अनुमान है कि अगले 10 से 15 वर्षों में यह संख्या 30,000 से 34,000 तक होगी। मंत्री महोदय ने कहा, "हम इस मांग को पूरा करने के लिए उड़ान प्रशिक्षण संगठनों (एफटीओ) की संख्या बढ़ाने और सालाना अधिक वाणिज्यिक पायलट लाइसेंस जारी करने पर काम कर रहे हैं।"

अंत में, श्री राममोहन नायडू ने सरकार के दीर्घकालिक दृष्टिकोण की पुष्टि करते हुए कहा: "भारत में नागर विमानन केवल विमान उड़ाने तक ही सीमित नहीं है। इसका मतलब लोगों को जोड़ना, अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना और अवसर पैदा करना है। साथ ही हम भारत को विमानन के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

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