पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय

वर्षांत समीक्षा-2020: पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय

जहाजरानी मंत्रालय का नाम बदलकर पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालयकिया गया

हजीरा-घोघा रो-पैक्स फेरी का उद्घाटन दक्षिण गुजरात और गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र को जोड़ने के लिए किया गया;

भारत के पहले सीप्लेन ने अपना संचालन आईडब्ल्यूएआई द्वारा बनाए गए इनोवेटिव फ्लोटिंग जेटी के साथ शुरू किया;

वधावन बंदरगाह को नए प्रमुख बंदरगाह के रूप में विकसित किया जाएगा;

नया विवाद निवारण संस्थागत तंत्र 'सरोद-पोर्ट्स' स्थापित किया गया;

जहाजों का रीसाइक्लिंग करने के लिए राष्ट्रीय प्राधिकरण की स्थापना की गई

Posted On: 29 DEC 2020 4:51PM by PIB Delhi

वर्ष 2020 में, सरकार द्वारा नौवहन क्षेत्र के समग्र विकास में तेजी लाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रगतिशील नीतिगत मध्यवर्तन और नई पहलें की गई है।

कोविड प्रबंधन

आवश्यकवस्तुओं की आपूर्ति को बनाए रखने के लिए और कोविड-19महामारी के खिलाफ लड़ाई को प्रभावी रूप से समर्थन प्रदान करने के लिए, कुछ सेवाओं को आवश्यक घोषित किया गयाजिसमें पानी के रास्ते माल ढुलाई के लिए परिवहन सेवा भी शामिल है। हालांकि, लॉकडाउन के कारण बंदरगाहों और उनके आश्रित साझेदारों को अपने कार्यों को पूरा करने में बहुत कठिनाईयों का सामना करना पड़ा।

सरकार ने महामारी के प्रभाव को कम करने के लिए और आपूर्ति श्रृंखलाओं का संचालन सुचारू रूप से सुनिश्चित करने के लिए कई प्रयास किए हैं। इनमें से कुछ प्रमुख पहलें निम्न प्रकार हैं:

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय(एमओपीएसडब्लू) और संबद्ध निकायों द्वाराअनेक सलाह/परिपत्र जारी किए गए हैं जिससेविलम्ब शुल्क और अन्य दंड/शुल्क न वसूलने के संदर्भ में व्यापार को राहत प्रदान क जा सके।

एमओपीएसडब्लूने प्रमुख बंदरगाहों के कर्मचारियों के आश्रित सदस्यों/कानूनी उत्तराधिकारियों को कोविड-19 के कारण जान गंवाने की स्थिति में 50 लाख रूपये का मुआवजा/अनुग्रह राशि देने का फैसला किया है।

प्रमुख बंदरगाहों ने अपने परिसर में काम करने वालेप्रवासी मजदूरों के लिए कार्गो, आवास और भोजन के लिए भंडारण स्थान सुनिश्चित किया है।

प्रमुख बंदरगाहों ने क्वारंटाइन किए गए जहाजों के लिए वीआरसी शुल्क माफ किया है।

बंदरगाहों ने पीपीई किट, अन्य आवश्यक चिकित्सा उपकरणों और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की और सभी कार्य स्थानों का सैनिटाइजेशन सुनिश्चित किया।

प्रमुख बंदरगाहों पर आइसोलेशन और अन्य चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की गई।

 

कोविड-19 महामारी के दौरन मानवीय हस्तक्षेप के बिना कामकाज कोसुचारू रूप से चालू रखने के लिए विभिन्न तकनीकी/ डिजिटल अधिष्ठापनोंका विस्तार किया गया, जैसे

1.      आंतरिक उपयोग के लिए ई-ऑफिस; पीसीएस 1x पर ई-चालान, -भुगतान, -डीओ और ई-बीओएल

2.      साइन-ऑन और साइन-ऑफ (-पास मॉड्यूल) की उपयोगिता

3.      चार्टर्ड उड़ानों से नाविकों के डेटा सत्यापन की उपयोगिता

4.      समुद्री प्रशिक्षण: -लर्निंग, वर्चुअल क्लासेज, ऑनलाइन एग्जिट एग्जाम

5.      ऑनलाइन जहाज पंजीकरण और ऑनलाइन चार्टर लाइसेंसिंग।

एमओपीएसडब्ल्यू ने भारतीय बंदरगाहों पर और चार्टर उड़ानों के माध्यम से 1,00,000 से ज्यादा क्रू बदलने की सुविधा प्रदान की है। यह दुनिया में क्रू बदलनेकी सबसे बड़ी संख्या है। क्रू बदलाव में,एक जहाज के चालक दल के सदस्यों का दूसरे जहाज के चालक दल के सदस्यों से स्थानांतरणऔर जहाजों पर उनकी प्रक्रियाओं के लिए साइन-ऑन और साइन-ऑफ करना शामिल है।

कोरोना महामारी के कारण समुद्री क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में से एक है।इसके बावजूद, सभी भारतीय बंदरगाह कार्यरत रहे हैं और महामारी के दौरान भारत और दुनिया के लिए सुचारू आपूर्ति श्रृंखला के लिए मुख्य स्तंभ के रूप में आवश्यक सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

सागरमाला कार्यक्रम   

समुद्र तट का उपयोग करने के लिए, प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों पर 14,500 किलोमीटरलंबा संभावित नौवहन जलमार्ग और रणनीतिक स्थान, भारत सरकार ने देश में बंदरगाह आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए महत्वाकांक्षी सागरमाला कार्यक्रम शुरू किया है।इस कार्यक्रम का उद्देश्य न्यूनतम बुनियादी संरचना के निवेश के साथ एक्जिम और घरेलू व्यापार की लॉजिस्टिक लागत को कम करना है।इसमें घरेलू कार्गो की परिवहन लागत को कम करना; समुद्र तट के पास भविष्य की औद्योगिक क्षमताओं का पता लगाकर थोक वस्तुओं की लॉजिस्टिक लागत को कम करना; बंदरगाह के निकट अलग से विनिर्माण क्लस्टरों का विकास करके निर्यात मेंप्रतिस्पर्धात्मक सुधार लाना शामिल है।सागरमाला कार्यक्रम में चार स्तंभों के अंतर्गत 504 परियोजनाओं की पहचान की गई है- 211 बंदरगाह आधुनिकीकरण परियोजनाएं, 199 बंदरगाह कनेक्टिविटी परियोजनाएं, 32 बंदरगाह आधारित औद्योगीकरण परियोजनाएं और 62 तटीय सामुदायिक विकास परियोजनाएं, जो बंदरगाह आधारित विकास के अवसरों को अनलॉक कर सकती हैं और इसके द्वारा 3.57 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बुनियादी संरचना में निवेश होने की संभावना है।

पिछले 15 महीनों (जुलाई 2019- अक्टूबर 2020) में, 4,543 करोड़ रुपये की 20 सागरमाला परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं जिनमें 1,405 करोड़ रुपये लागत वाली बंदरगाह आधुनिकीकरण की 9 परियोजनाएं, 2,799 करोड़ रुपये की लागत वाली 7 बंदरगाह कनेक्टिविटी परियोजनाएं और 339 करोड़ रुपये लागत वाली 4 तटीय सामुदायिक विकास परियोजनाएं शामिल हैं।

घोघा - हजीरा रो-पैक्स फेरी

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर, 2020 को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से गुजरात के हजीरा में रो-पैक्स टर्मिनल का उद्घाटन किया और हजीरा और घोघा के बीच रो-पैक्स फेरी सेवा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।गुजरात के भावनगर और सूरत के बीच एक नई समुद्री कनेक्टिविटी स्थापित की गई है।हजीरा और घोघा के बीच सेवा की शुरूआत होने से सफर का समय 10-12 घंटे से कम होकर 3-4 घंटे तक का हो जाएगा। इससे समय की बचत होगी और लागत में भी कमीआएगी।

जहाजरानी मंत्रालय का नया नाम

घोघा-हजीरा रो-पैक्स फेरी का उद्घाटन करने के दौरान, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने जहाजरानी मंत्रालय के लिए नया नामपत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालयकी घोषणा की।

भारत के पहले सीप्लेन ने गुजरात में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, केवड़िया से साबरमती नदी तक अपना संचालन शुरू किया।

भारत के पहले सीप्लेन सेवा अभियान का उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 31 अक्टूबर, 2020 को अहमदाबाद में केवड़िया और साबरमती रिवर फ्रंट के बीच किया गया।सीप्लेन ऑपरेशन को समर्थन प्रदान करने के लिए इनलैंड वॉटर अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा कंक्रीट से बनी हुई इनोवेटिव फ्लोटिंग जेटी लगाई गई है। मंत्रालय उन एयरलाइन ऑपरेटरों की दिलचस्पी का आंकलन करना चाहता है जो चुनिंदा मार्गों पर समुद्री विमान सेवाओं के संचालन में रुचि रखते हैं।मुख्य फोकस यात्रियों, पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को सीप्लेन के माध्यम से उनके गंतव्यों स्थानं तक तीव्र गति से और परेशानी मुक्त यात्रा सुनिश्चित करना है जो वर्तमान समय में लंबी और कष्टदायक सड़क यात्रा के माध्यम से ही उपलब्ध हैं।

बंदरगाह

बंदरगाहों का विकास अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होता है।बंदरगाहों के माध्यम से एक्जिम कार्गो कामात्रा मेंलगभग 90% और मूल्य में 70% नियंत्रित होते हैं। व्यापार की बढ़ती हुई लगातार आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए,पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालयद्वारा बंदरगाह क्षमता के विस्तार को सुकल्पित बुनियादी संरचना विकास परियोजनाओं के माध्यम से सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।मार्च 2014 के अंत में प्रमुख बंदरगाहों की क्षमता जो 871.52 एमटीपीए थी वह मार्च 2020 के अंत तक बढ़कर 1534.91 एमटीपीए हो चुकी है।मार्च, 2020 तक देश के प्रमुख बंदरगाहों की संस्थापित क्षमता 1534.91 एमटीपीए है और 2019-20 के दौरान 704.92 मीट्रिक टन यातायात को नियंत्रित किया गया।

पोत परिवहन और बंदरगाहों क्षेत्र के सामने आई हुई चुनौतियां और हाल ही में उठाए गए नीतिगत पहल

बंदरगाह क्षेत्रों के सामने आई प्रमुख चुनौतियां इस प्रकार हैं:

·         बंदरगाह शासन में सुधार

·         क्षमता का कम उपयोग

·         बंदरगाह दक्षता में सुधार

·         पोर्ट कनेक्टिविटी में सुधार

इन चुनौतियों से निपटने के लिए पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई पहल की गई हैं। सरकार द्वारा हाल ही में की गई कुछ पहल इस प्रकार हैं:

1.      प्रमुख पत्तन प्राधिकरण (एमपीए) विधेयक, 2020 जैसे नए कानून को हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श और मंत्रणा करने के बाद तैयार किया गया है।एमपीए विधेयक, 2020 लोकसभा द्वारा पारित किया जा चुका है और अगले सत्र में इसे राज्यसभा में प्रस्तुत किया जाएगा। यह भारत में प्रमुख बंदरगाहों के प्रशासन के लिए एक नए युग का सूत्रपात करेगा जिसमें प्रमुख बंदरगाहों को ज्यादा स्वायत्तता मिलेगी और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा और विकास के लैंडलॉर्ड मॉडल को अपनाकर विश्व स्तरीय बंदरगाह बुनियादी संरचना प्रदान करेगा।

2.      बंदरगाह पर आश्रित उद्योगों के लिए एक नई कैप्टिव नीति तैयार की गई है, रियायत अवधि का नवीकरण, विस्तार की संभावना और गतिशील व्यावसायिक वातावरण की चुनौतियों से निपटने के लिए।

3.      सभी प्रमुख बंदरगाहों को 2.1.2014 से भूमि प्रबंधन 2014 कोलागू करने के लिए नीतिगत दिशानिर्देश जारी किए गए।बाद में, 17 जुलाई, 2015 को प्रमुख बंदरगाहों द्वारा नीतिगत दिशानिर्देशों के कार्यान्वयन को सुविधाजनक बनाने के लिए लैंड पॉलिसी दिशानिर्देश, 2014 के कुछ प्रावधानों को और ज्यादा स्पष्ट किया गया।हालांकि, कई प्रमुख बंदरगाहों ने पीजीएलएम, 2015 के कुछ उपबंधों को लागू करने में विभिन्न कठिनाइयों के बारे में बताया और इसे और अधिक स्पष्ट करने का अनुरोध किया।दिशा-निर्देशों के कार्यान्वयन में उत्पन्न होने वाली विभिन्न कठिनाइयों के साथ सामंजस्य बैठाने के लिए,जिससे जनहित में व्यावहारिक अनिवार्यताओं और आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके, मंत्रालय द्वारा समय-समय पर इनके उपर स्पष्टीकरण जारी किए गए और जारी किए गए सभी स्पष्टीकरणों को संकलित करके इन्हें 29-4-2019 को नए सिरे से जारी किया गया।

4.      मध्यस्थता के ऐसे मामलों से निपटने के लिए जहां प्रमुख बंदरगाहों के लिए पुरस्कार पारित किए गए, प्रमुख बंदरगाहों में मध्यस्थता पुरस्कार को संसाधित करने के लिए दिशानिर्देश 10.06.2019 को जारी किए गए।

5.      भूमि के लिए एसओआर का आवधिक पुनरीक्षणऔर पीपीपी परियोजनाओं पर इसकी प्रासंगिकता 5.11.2019 को जारी किया गया।

6.      प्रमुख बंदरगाहों के लिए सामूहिक सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पर संशोधित दिशानिर्देश 4.3.2020 जारी किए गए।

7.      प्रमुख बंदरगाहों से संबंधित भूमि का एक बड़ा हिस्सा भारत सरकार और राज्य सरकारों के विभागों के पास पट्टे पर है जिन पर अवैतनिक पट्टा किराया के मामलों में ब्याज और दंडात्मक ब्याज लगाया गया है।समय के साथ इन ब्याज और दंडात्मक ब्याज में बहुत वृद्धि हुई है जो पट्टा किरायाका निपटारा करने के रास्ते में आ रही है।प्रमुख बंदरगाहों के इन विशाल लंबित बकाए की वसूली को सुगम और गतिशील बनाने के लिए पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालयने 13-08-2019 को भारत सरकार/राज्य सरकार के मंत्रालयों/विभागों के साथ बकाया राशि का निपटारा करने के लिए "वन टाइम सेटलमेंट स्कीम (ओटीएसएस) जारी किया है।

8.      केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महाराष्ट्र के वधावन मेंदहानु के पास एक मुख्य बंदरगाह स्थापित करने के लिए 05 फरवरी, 2020 को अपनी 'सैद्धांतिक' मंजूरी प्रदान की है। परियोजना की कुल अनुमानित लागत 65,544.54 करोड़ रूपये है।वधावन बंदरगाह को "लैंडलॉर्ड मॉडल" के आधार पर विकसित किया जाएगा।इस परियोजना को लागू करने के लिए 50% से अधिक ज्यादा या बराबर इक्विटी भागीदारी के साथ प्रमुख साझेदार के रूप में जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) के साथ एक स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) का गठन किया जाएगा।एसपीवीद्वारा आंतरिक इलाकों में कनेक्टिविटी स्थापित करने के अलावा सुधार, ब्रेकवाटर का निर्माण सहित बंदरगाह बुनियादी संरचना का भी विकास करेगा। सभी व्यावसायिक गतिविधियां निजी डेवलपर्स द्वारा पीपीपी मोड के अंतर्गत शुरू की जाएंगी।

9.      इंडियन प्राइवेट पोर्ट्स एंड टर्मिनल्स एसोसिएशन (आईपीपीए) और इंडियन पोर्ट्स एसोसिएशन (आईपीए) द्वारा संयुक्त रूप से सरोद-पोर्ट्स के रूप में एक नया विवाद निवारण संस्थागत तंत्र का गठन किया गया है।

10.  भारत ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (ईओडीबी) के ट्रेडिंग एक्रॉस बॉर्डर (टीएबी) पैरामीटर के अंतर्गत अपनी रैंकिंग में सुधार किया है और यह 2020 में 80 से 68वें स्थान पर पहुंच गया है। इस शानदार रिकॉर्ड को प्रमुख बंदरगाहों द्वारा विभिन्न उपायों को अपनाकर प्राप्त की गई है जैसे कि डायरेक्ट पोर्ट डिलिवरी (डीपीडी), डायरेक्ट पोर्ट एंट्री (डीपीई), आरएफआईडी की शुरुआत, स्कैनर/कंटेनर स्कैनर की स्थापना, प्रक्रियाओं का सरलीकरण आदि।

11.  एक्जिम कंटेनर के ट्रैक एंड ट्रेस गतिविधियों को सक्षम बनाने के लिए दिल्ली मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (डीएमआईसीडीसी) के अंतर्गत लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक सेवा को सभी कंटेनर प्रबंधन करने वाले मुख्य बंदरगाहों में लागू किया गया है।

12.  एक डिजिटल बंदरगाह पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करने के, 5 प्रमुख बंदरगाहों (मुंबई, चेन्नई, दीनदयाल, पारादीप, कोलकाता (हल्दिया सहित) बंदरगाहों पर एक उद्यम व्यापार प्रणाली (ईबीएस) लागू किया जा रहा है, जिसकी परियोजना लागत लगभग 320 करोड़ रूपये है और जो मौजूदा स्थानीय जरूरतों के लिए अपना मार्गरेखा गवांए बिना अग्रणी अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं को अपनाएगा।कुल 2474 प्रक्रियाएं (सीएचपीटी- 671, डीपीटी- 376, सीओपीटी- 501, एचडीसी- 374, एमबीपीटी- 278 और पीपीटी- 274) को युक्तिसंगत सामंजस्यपूर्ण, अनुकूलित और मानकीकृत किया गया, जिससे 162 प्रक्रियाओं के लिए अंतिम पुनः अभियांत्रिकरण गणना प्रक्रिया तक पहुंचा जा सके।

13.  एक केंद्रीकृत वेब-आधारित पोर्ट कम्युनिटी सिस्टम (पीसीएस) को सभी प्रमुख बंदरगाहों में संचालित किया गया है, जो सामान्य इंटरफेस के माध्यम से विभिन्न हितधारकों के बीच निर्बाध डेटा प्रवाह को सक्षम बनाता है।पूर्ण रूप से कागज रहित शासन की ओर बढ़ने के लिए, -चालान और ई-भुगतान के साथ-साथ पीसीएस के माध्यम से ई-डीओ (इलेक्ट्रॉनिक डिलीवरी ऑर्डर) अनिवार्य कर दिया गया है। दिसंबर, 2018 में एक उन्नत संस्करण पीसीएस1x की शुरूआत की गई है।

14.  पिछले डेढ़ वर्षों में, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर केंद्रित कई नई व्यावहारिकता को पीसीएस 1x के साथ जोड़ा गया है जैसे ई-डिलिवरी ऑर्डर, -इनवॉइसिंग और ई-पेमेंट आदि।पीसीएस 1x के माध्यम से ई-डीओ को केवल डीपीडी कंटेनरों के लिए लागू किया गया था, लेकिन अब इसे सभी अभिरक्षकों के लिए बढ़ा दिया गया है जैसे टर्मिनल, सीएफएस/आईसीडी और पीसीएस 1x का उपयोग करने वालेअन्य गैर-प्रमुख बंदरगाह।

15.  इसके अलावा, नेशनल लॉजिस्टिक्स पोर्टल-मरीन (एनएलपी-मरीन) में पीसीएस 1x  को बूटस्ट्रैप करने की प्रक्रिया पहले से ही चल रही है जो सभी समुद्री हितधारकों के लिए एकीकृत डिजिटल मंच के रूप में कार्य करेगी।एनएलपी मरीन + पीसीएस 1x प्लेटफॉर्म को विभिन्न हितधारकों जैसे पोर्ट, टर्मिनल पोत परिवहन लाइन्स/एजेंटों, सीएफएस और सीमा शुल्क दलालों, आयातकों/निर्यातकों आदि के साथ सभी प्रकार की बातचीत के लिए केंद्रीकृत केंद्र के रूप में परिकल्पित किया गया है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के भव्य 150वीं वर्षगांठ समारोह में शामिल हुए और उन्होंने कोलकाता बंदरगाह के लिए मल्टीमॉडल विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया।प्रधानमंत्री मोदी ने कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के लिए नए नाम डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट ट्रस्ट की घोषणा की। प्रधानमंत्री ने कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के कर्मचारियों के पेंशन फंड के लिए 501 करोड़ रूपये का चेक प्रदान किया।

अंतर्देशीय जल परिवहन

2020-21 में हल्दिया से वाराणसी तक राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (एनडब्ल्यू-1) (गंगा नदी) पर जल मार्ग विकास परियोजना (जेएमवीपी) के अंतर्गत प्रमुख अंतर्देशीय जल परिवहन (आईडब्ल्यूटी) परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।

विश्व बैंक की सहायता से लागू किए जा रहे जेएमवीपी के अंतर्गत, तकनीकी चुनौतियों से निपटने के लिए नवीनतम तकनीकी हस्तक्षेप शुरू किए जा रहे हैं।24x7 नेविगेशन को समर्थन प्रदान करने के लिए, एनडब्ल्यू-1 पर अत्याधुनिक रिवर इनफार्मेशन सिस्टम (आरआईएस) और डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (डीजीपी) के रूप में डिजिटल समाधान लागू किए जा रहे हैं। कार्गो एकत्रीकरण और परिवहन को सक्षम बनाने के लिए वाराणसी और साहिबगंज एमएमटीएस के निकट फ्रेट विलेज और लॉजिस्टिक्स हब विकसित किए जाने का प्रस्ताव है। फ्रेट विलेज, वाराणसी के लिए निवेश-पूर्व कार्य शुरू किए जा चुके हैं।

राष्ट्रीय जलमार्ग (एनडब्ल्यू-2) (ब्रह्मपुत्र नदी) पर धुबरी और हथसिंगिमारी, नेमाती और कमलाबाड़ी और गुवाहाटी और उत्तरी असम के बीच रो-रो सेवाएं चालू है। एनडब्लू-4 (नदी कृष्णा) के विकास के फेज-I के अंतर्गत, विजयवाड़ा और मुक्तियाला के बीच ड्रेजिंग और फ्लोटिंग टर्मिनलों की स्थापना पर काम शुरू किया गया है।एनडब्ल्यू-4 (कृष्णा नदी) पर निर्माण सामग्री के परिवहन के लिए इब्राहिमपट्टनम और लिंगयापालम के बीच रो-रो सेवाएं भी चालूहैं।भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण ने राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 के अंतर्गत घोषित 10 नए एनडब्ल्यू पर भी काम शुरू कर दिया है।वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान एनडब्ल्यूएस पर कार्गो मूवमेंट 73.61 एमएमटी था, जबकि पिछले वर्ष के दौरान यह 72.3 एमएमटी था। अप्रैल-सितंबर, 2020 के दौरान कुल कार्गो मूवमेंट 30.38 एमएमटी रहा है, जो कोविड-19 महामारी के कारण लगाए गए प्रतिबंधों के कारण पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 16% कम है।

जहाजरानी मंत्रालय ने अंतर्देशीय जलमार्गों को परिवहन के अनुपूरक, पर्यावरण अनुकूल और सस्ते साधन के रूप में बढ़ावा देने वाले भारत सरकार के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए जलमार्ग उपयोग शुल्क माफ कर दिया।शुरूआत में तीन वर्ष के लिए इस शुल्क को माफ किया गया है। इस फैसले के बाद अनुमान है कि अंतर्देशीय जलमार्ग यातायात मूवमेंट2019-20 में 72एमएमटीसे बढ़ाकर 2022-23 में 110एमएमटी हो जाएगी। इससे इस क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों और विकास को लाभ प्राप्त होगा।

पूर्वोत्तर तक पहुंच का विस्तार करने औरबांग्लादेश के माध्यम से वैकल्पिक जलमार्ग संपर्क स्थापित करने के लिए नए पहल और उपाय किए जा रहे हैं।भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्ग पर, बांग्लादेश में 80:20 लागत के आधार पर (भारत द्वारा 80%और बांग्लादेश द्वारा 20%) आशुगंज और जकीगंज (295 किमी) और सिराजगंज और दाइखवा (175 किमी) के बीच तलकर्षण की शुरूआत की गई है।भारत और बांग्लादेश के बीच तटीय और प्रोटोकॉल मार्गों पर यात्री और क्रूज सेवा पर हस्ताक्षर किए गए एमओयू और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के अंतर्गत मार्च-अप्रैल 2019 में दोनों देशों के निजी ऑपरेटरों द्वारा भारत और बांग्लादेश के बीच क्रूज मूवमेंट शुरू हुआ।

दोनों देशों द्वारा अंतर्देशीय जल व्यापार और पारगमन (पीआईडब्ल्यूटीएंडटी) के लिए प्रोटोकॉल के दूसरे परिशिष्ट पर 20 मई, 2020 को हस्ताक्षर किए गए, जिसमें दोनों देशों की ओर से क्रमशः 5 पड़ाव पत्तन और 2 विस्तारित पड़ाव पत्तन जोड़ा गया। बांग्लादेश द्वारा इस उद्देश्य के लिए हस्ताक्षर किए गए एमओयू और समझौते/एसओपी के अंतर्गत भारत से वस्तुओं के आवागमन के लिए अपने मोंगला और चट्टोग्राम बंदरगाहों का उपयोग करने की अनुमति प्रदान की गई है।समझौते के अंतर्गत आठ मार्ग उपलब्ध कराए गए हैं जिससे बांग्लादेश से होते हुए पूर्वोत्तर क्षेत्र (एनईआर) तक पहुंच बन सकेगी। पहचान किए गए मार्गों में, त्रिपुरा के अगरतला और श्रीमंतपुर, मेघालय के दावकी और असम के सुतारखंडी में प्रवेश/निकास की अनुमति प्राप्त है।जुलाई 2020 में, दालों और टीएमटी स्टील छड़ों दोनों को चट्टोग्राम बंदरगाह के रास्ते कोलकाता से अगरतला ले जाया गया।

पोत परिवहन: पोत परिवहन क्षेत्र में उपलब्धियां

1.      सरकार द्वारा तटीय जहाजों और विदेशी जाने वाले जहाजों दोनों के लिए बंकर ईंधन पर जीएसटी को घटाकर 18% से 5% कर दिया गया है। 

2.      सरकार द्वारा विदेशी ध्वजपोतों और भारतीय ध्वजपोतों पर काम करने वाले भारतीय नाविकों की कर व्यवस्था में अनुरूपताप्रदान की गई है।

3.      भारतीय शिपिंग उद्योग को राइट ऑफ फर्स्ट रीफ्युजल के माध्यम से कार्गो समर्थन प्रदान किया गया है।

4.      भारतीय ध्वजपोतों कोभारत के पूर्वी तट और पश्चिमी तट के बीच तटीय परिवहन सेवाओं का संचालन कुशलतापूर्वक करने में सहायता प्रदान करने के लिए, पूर्वोत्तर भारत के साथ-साथ श्रीलंका/ बांग्लादेश और भारत से एक्जीमकार्गो की ढुलाई के लिए, सरकार ने श्रीलंका और बांग्लादेशी बंदरगाहों के माध्यम से एक भारतीय बंदरगाह से दूसरे भारतीय बंदरगाह तक तटीय माल ढुलाई की अनुमति प्रदान की है।

5.      अधिकांश तटीय नौवहन मार्गों पर रिटर्न कार्गो की सीमित उपलब्धता के कारण, खाली कंटेनरों के प्रतिस्थापन की लागत ज्यादा थी, जिससे तटीय पोत परिवहन की कुल लॉजिस्टिक लागत बढ़ जाती थी।तटीय पोत परिवहन की लॉजिस्टिक लागत में कमी लाने के उद्देश्य से सरकार ने घरेलू कार्गो ले जाने के लिए आयातित कंटेनरों के उपयोग की अनुमति प्रदान की है।

6.      विदेशी शिपिंग लाइनों और घरेलू कंटेनरों के स्वामित्व वाले एक्जिम कंटेनरों पर कर-उपाय के बीच समान अवसर प्रदान करने के लिए,सरकार ने एक्जिम कार्गो के परिवहन के लिए अंतर्राष्ट्रीय संगठन (आईएसओ) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप स्थानीय रूप से निर्मित या घरेलू आईएसओ कंटेनरों के उपयोग की अनुमति प्रदान की है।

7.      सरकार ने कृषि एवं अन्य वस्तुओं, उर्वरकों, एक्जिम से भरे हुए ट्रांसशिपमेंट कंटेनरों और खाली कंटेनरों आदि के तटीय आवागमन को प्रोत्साहित करने के लिए विदेशी पंजीकृत जहाजों को चार्टर करने के लिए लाइसेंसिंग आवश्यकताओं को समाप्त कर दिया है।

तटीय पोत परिवहन

ईंधन कुशल होने और पर्यावरण के अनुकूल होने के अलावा, तटीय पोत परिवहन अन्य साधनों की तुलना में बड़ी मात्रा में कार्गो परिवहन करने में सक्षम है और यह संभावित रूप से परिवहन का सबसे सस्ता साधन है।हालांकि, कुछ आंतरिक बाधाओं के कारण, भारत में तटीय पोत परिवहन की हिस्सेदारी लगभग 6% है, जो कि विकसित देशों की तुलना में बहुत कम है।सड़क और रेल से रूपात्मक स्थानांतरण को प्रोत्साहित करने और तटीय पोत परिवहन को बढ़ावा देने के लिए, () एक्जिम/खाली कंटेनरों, () कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन और पशुपालन वस्तुओं और () उर्वरकों के तटीय परिवहन के लिए तट व्यापार में छूट प्रदान की गई है।तटीय जहाजों को विदेश जाने वाले जहाजों के लिए बंदरगाह शुल्क में 40% की छूट भी प्रदान की गई है। ऑटोमोबाइल के तटीय आवागमन में लगे हुए रो-रो जहाजों और कंटेनर जहाजों को अतिरिक्त रियायतें प्रदान गई है। पोत परिवहन में बंकर ईंधन पर जीएसटी में कमी, तटीय कार्गो के लिए ग्रीन चैनल क्लीयरेंस और प्रमुख बंदरगाहों पर तटीय जहाजों के लिए लंगर प्रदान करने की प्राथमिकता जैसे अन्य उपायों को भीलागू किया गया है।

क्रूज शिपिंग

भारत में क्रूज शिपिंग अपनी प्रारंभिक अवस्था में है और पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय सक्रिय रूप से इसके विशाल आर्थिक प्रभाव, रोजगार सृजन की क्षमता और विदेशी मुद्रा अर्जित करने के लिए क्रूज पर्यटन को बढ़ावा दे रहे हैं।क्रूज पर्यटन के विकास को बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रीय रोडमैप तैयार किया गया है और भारत में क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कदम उठाए गए हैं, इनमें फरवरी, 2024 से 5 वर्षों की एक अन्य अवधि के लिए भारत के बंदरगाहों तक पहुंचने वाले विदेशी क्रूज जहाजों के लिए अनुतट यात्रा में छूट का विस्तार, यानी फरवरी, 2029 तक, भारत में आने वाले क्रूज यात्रियों के लिए ई-वीजा सुविधाएंऔर क्रूज जहाजों के लिए रियायती टैरिफ दरें शामिल हैं।

शिपब्रेकिंग

1.      रिसाइकलिंग ऑफ शिप्स एक्ट,2019 को संसद द्वारा अधिनियमित किया गया  और 16.12.2019 को अधिसूचित किया गया।

2.      भारत ने दिनांक 28.11.2019 को हांगकांग इंटरनेशनल कन्वेंशन फॉर सेफ एंड इनवारमेंटली साउंड रीसाइक्लिंग ऑफ शिप्स, 2009 को स्वीकार कर लिया है।

3.      भारत वैश्विक जहाज पुनर्चक्रण उद्योग में अग्रणी देशों में से एक है, जिसका इस बाजार में लगभग 25% से 30% हिस्सा है।

पोत-निंर्माण

दस वर्षों की अवधि 2016-2026 के दौरान हस्ताक्षरित किए गए अनुबंधों के लिए भारतीय पोत-निर्माण वित्तीय सहायता नीति के अंतर्गत, भारतीय शिपयार्डों को वित्त वर्ष 2018-19 में 12 जहाजों के लिए 29.02 करोड़ रुपये की राशि; वित्त वर्ष 2019-20 में 7 जहाजों के लिए 26.97 करोड़ रुपये और 2020-21 में 3 जहाजों के लिए 5.06 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने सभी प्रमुख बंदरगाहों को निर्देश जारी किया है कि वे सिर्फ भारत में निर्मितकर्षण-नौकाओं की खरीद या चार्टर करें। प्रमुख बंदरगाहों द्वारा की जा रही सभी खरीद को अब संशोधित मेक इन इंडिया आदेश के अनुसार किए जाने की आवश्यकता होगी।

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय का लक्ष्य भारतीय जहाज निर्माण उद्योग को बढ़ावा देना है और मेक इन इंडिया जहाज निर्माण के लिए कुछ अग्रणी देशों के साथ बातचीत भी करना है।

कोचीन पोर्ट ट्रस्ट में अंतर्राष्ट्रीय जहाज रिपेयर सुविधा (आईएसआरएफ)

कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने कोचीन बंदरगाह परिसर में पट्टे पर दिए गए क्षेत्र (प्रथम चरण) में शुष्क-गोदी और मौजूदा सुविधाओं का संचालन जारी रखा है।वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान सीएसएल ने 11 जहाजों केरिपेयर का काम पूरा किया है। 17.11.2017 को शुरू की गई आईएसआरएफ परियोजना का निर्माण कार्य जोरों पर चल रहा है।95% से ज्यादा पाइलिंग कार्य, 50% डेक कंक्रीटिंग और 80% तलकर्षण गतिविधियां पूरी की जा चुकी है और इस सुविधा की शुरूआत वित्त वर्ष 2021-22 में होने की उम्मीद है।कोच्चि को भारत के समुद्री केंद्र के रूप में विकसित करने के प्रयास के रूप में, सीएसएल ने विलिंगडन द्वीप पर अंतर्राष्ट्रीय जहाज रिपेयर सुविधा के समीप एक समुद्री पार्क की स्थापना की है, जिसका उद्घाटन पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), श्री मनसुख एल. मांडविया ने 19.09.2019 को किया था।पहले चरण में, समुद्री उद्योग में वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध दस फर्मों ने समुद्री पार्क में अपनी इकाइयां स्थापित करने के लिए सीएसएल के साथ पहले ही साझेदारी कर ली है।सीएसएल को विश्वास है कि वर्तमान जहाज रिपेरय डॉक में प्रमुख परिचालनों के साथ कोच्चि को एक प्रमुख जहाज रिपेयर केंद्र के रूप में स्थान प्राप्त होगा, साथ ही आईएसआरएफ के संचालित होने के साथ हीउपलब्ध क्षमताओं में वृद्धि होगी।

नई शुष्क-गोदी परियोजना

नए गोदी से कंपनी की जहाज निर्माण और जहाज रिपेयर क्षमता में वृद्धि होगी जो कि विशेष और तकनीकी रूप से उन्नत जहाजनिर्माण के बाजार की क्षमता को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है,जैसे किजैसे एलएनजी वाहक, उच्च क्षमता वाले विमान वाहक,जैक अप रिग्स, ड्रिल जहाज, बड़े ड्रेजर और अपतटीय प्लेटफार्मों और बड़े जहाजों की रिपेयरिंग आदि। नई शुष्क-गोदी सुविधा की शुरात वित्त वर्ष 2022-23 में होने की संभावना है।

रामायण क्रूज

अयोध्या में सरयू नदी पर रामायण क्रूज यात्राकी शुरूआत जल्द की जाएगी।पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), श्री मनसुख एल. मांडविया नेक्रूज सेवा के कार्यान्वयन के लिए समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। यह अयोध्या, उत्तर प्रदेश में सरयू नदी (घाघरा/राष्ट्रीय जलमार्ग-40) पर अपने प्रकार की पहली लग्जरी क्रूज सेवा होगी।इसका उद्देश्य पवित्र नदी सरयू के प्रसिद्ध घाटों का परिभ्रमण कराते हुए भक्तों कोमंत्रमुग्ध करने वाली एक आध्यात्मिक यात्रा काअनुभव प्रदान करना है।

वीटीएस और वेसल्स ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम (वीटीएमएस)

पोत यातायात सेवाओं (वीटीएस) और पोत यातायात मॉनिटरिंग पद्धति (वीटीएमएस) के लिए स्वदेशी सॉफ्टवेयर समाधान का विकास शुरू किया गया है।वीटीएस और वीटीएमएस एक सॉफ्टवेयर है, जो कि पोत की स्थिति, अन्य यातायात की स्थिति, मौसम संबंधी चेतावनियों और बंदरगाह या जलमार्ग के अंदर यातायात के व्यापक प्रबंधन को निर्धारित करता है।पोत यातायात सेवाएं (वीटीएस) समुद्र में जानमाल की सुरक्षा, समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा और नौवहन की दक्षता और सुरक्षा, निकटवर्ती तट क्षेत्रों, कार्य स्थलों और समुद्री यातायात के संभावित दुष्प्रभावों से सुरक्षा स्थापित करने में सहायता प्रदान देती है।

नेशनल अथॉरिटी फॉर शिप्स रीसाइक्लिंग

जहाजों के पुनर्चक्रण के लिए राष्ट्रीय प्राधिकरण के रूप में शिपिंग महानिदेशालय को अधिसूचित किया गया है।भारत में जहाज पुनर्चक्रण उद्योग के लिए जहाजों के रीसाइक्लिंग अधिनियम, 2019 के अंतर्गत एक शीर्ष प्राधिकरण के रूप में शीर्ष प्राधिकारी के रूप में शिपिंग डीजी को नामित किया गया है। गुजरात के गांधीनगर में राष्ट्रीय प्राधिकरण का कार्यालय स्थापित किया जाएगा।

 

भारत-मालदीव के बीच सीधी कार्गो फेरी सेवा शुरू

भारत और मालदीव के बीच सीधी कार्गो फेरी सेवा की शुरूआत की गई है।अपनी पहली यात्रा के दौरान, 200 टीईयू और 3000 मीट्रिक टन भार-विभाजनकार्गो की क्षमता वाला एक पोत तूतीकोरिन से कोच्चि के लिए रवाना हुआ, जहां से वह उत्तरी मालदीव के कुलहुधूफुसी बंदरगाह और फिर माले बंदरगाह के लिए रवाना हुआ।भारतीय जहाजरानी निगम द्वारा संचालित की जा रही यह फेरी सेवा, भारत और मालदीव के बीच माल परिवहन के लागत प्रभावी, प्रत्यक्ष और वैकल्पिक साधन उपलब्ध कराएगी।

पर्यटन आकर्षण के लिए लाइटहाउस

संपूर्ण भार में लगभग 194 मौजूदा लाइटहाउसों को प्रमुख पर्यटक आकर्षण केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई।श्री मंडाविया ने कहा कि इससे लाइटहाउसों के आसपास क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और लाइटहाउसों के समृद्ध इतिहास के बारे में जानने का अवसर प्राप्त होगा।

नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स

लोथल, गुजरात में एक विश्व स्तरीय नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स विकसित किया जाएगा, जिसके लिए भारत सरकार के शिपिंग मंत्रालय और राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय, पुर्तगाल के बीच एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया गया है।

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