जनजातीय कार्य मंत्रालय

श्री अर्जुन मुंडा ने एसोचैम के साथ मिलकर उत्कृष्टता केंद्र पहल के तहत जनजातीय कार्य मंत्रालय के जनजातीय उद्यमिता विकास कार्यक्रम का आभासी माध्यम से शुभारंभ किया

Posted On: 02 OCT 2020 7:59PM by PIB Delhi

जनजातीय कार्य मंत्रालय और एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम), उद्योग जगत का एक शीर्ष निकाय, ने जनजातीय उद्यमिता विकास के लिए संयुक्त रूप से तीन साल की अवधि वालीएक नई पहल शुरू की है। इस कार्यक्रम की शुरुआत आज केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री अर्जुन मुंडा ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से की। एसोचैम को विभिन्न उत्कृष्टता केंद्रों में से एक के रूप में नामित किया गया है, जो जनजातीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास से संबंधित विशेष परियोजनाओं को पूरा करने के लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय के साथ साझेदारी कर रहे हैं।

 

श्री अर्जुन मुंडा ने अपने संबोधन में, उद्योग जगत के सदस्यों सहित सभी हितधारकों से जनजातीय समुदायों की क्षमता को विकसित करनेऔर सामाजिक-आर्थिक विकास में उनके योगदान को बढ़ाने के लिए उनकी क्षमताओं का निर्माण करने के प्रयासों में शामिल होने का आह्वान किया ताकि प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को पूरा किया जा सके। उन्होंने कहा कि कोई देश सिर्फ तभी आत्मनिर्भर हो सकता है, जब उसके लोगों को आत्मनिर्भर बनाया जायेगा। अपने मंत्रालय की विभिन्न पहलों का हवाला देते हुए, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कैसे ये कार्यक्रम ग्रामीण एवं जनजातीय समुदायों की अप्रशिक्षित क्षमता और कौशल को समझेंगे और उनकी आजीविका के लिए हरसंभव समाधान प्रदान करेंगे। एसोचैम की इस नई पहल के साथ, उन्होंने जनजातीय उत्पादों के राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थान बनाने एवं विकसित होने और बदले में आदिवासी कारीगरों के लिए आजीविका के बेहतर अवसर पैदा होने की आशा व्यक्त की।

 

जनजातीय कार्य मंत्रालय में सचिव श्री दीपक खांडेकर ने जनजातीय उद्यमिता पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि जनजातीय समुदायों के पास एक महान ज्ञान एवं कौशल है और उद्यमिता विकास पहल उन्हें उनकी अंतर्निहित ताकत के बारे में एहसास कराएगी ताकि वे अपने सामने उपलब्ध विशाल अवसर का लाभ उठा सकें, अपने कौशल का उपयोग कर सकें और व्यावसायिक उद्यम स्थापित कर सकें।

 

एसोचैम के अध्यक्ष डॉ. निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि वर्तमान में 4.5 लाख से अधिक एसएमई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हमारे संगठन से जुड़े हैं। इस उत्कृष्टता केंद्र के माध्यम से, जनजातीय समुदायों को जनजातीय उत्पादों के लिए मूल्य संवर्धन, प्रौद्योगिकीय अग्रतातथा विपणन की सुविधा अधिक कारगर एवं कुशल तरीके से प्रदान की जाएगी। ‘जनजातीय उद्यमिता विकास कार्यक्रम हमारे देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था में जनजातीय आबादी के योगदानों को बढ़ायेगा और आत्मनिर्भर बनने के भारत के दृष्टिकोण में सहयोग करेगा। उन्होंने सभी सदस्यों से मंत्रालय की मदद से अपने कारखानों के निकट एक गांव को गोद लेने के लिए आगे आनेऔर मंत्रालय के साथ सहयोग करने का आग्रह किया।

 

आईआईपीए के महानिदेशक श्री एस. एन. त्रिपाठी ने जोर देकर बताया कि आत्मनिर्भर भारत पहल कैसे राष्ट्रपिता, जिन्होंने हमेशा राष्ट्र निर्माण में आदिवासियों एवं ग्रामीण भारत की भूमिका पर जोर दिया, की शिक्षाओं से जुड़ी है।

 

एसोचैम के महासचिव श्री दीपक सूद ने कहा, “भारतीय आदिवासी समुदायों में उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के क्रम में प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए कृषि एवं वन उपजों को बाजारों के साथ जोड़ने, स्वयं सहायता समूहों के निर्माण, महिलाओं को सशक्त बनानेऔर स्व-स्थायी उद्यम बनाने की कोशिश चल रही है।” उन्होंने कहा,“एसोचैम एक मजबूत जनजातीय ब्रांड की पहचान बनाने के रास्ते तलाशने का प्रयास करेगा और इस प्रक्रिया में आदिवासी कारीगरों की उद्यमिता क्षमताओं का निर्माण करेगा और उन्हें बढ़ायेगा।

 

डॉ. नवलजीत कपूर, संयुक्त सचिव, जनजातीय कार्य मंत्रालयने एक प्रेजेंटेशन दिया और राज्यों, ट्राइफेड तथा प्रतिष्ठित सरकारी एवं गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से मंत्रालय द्वारा देशभर में शुरू की गयी कई परियोजनाओं के बारे में जानकारी दी और उत्कृष्टता केंद्र के रूप में नामित इन साझेदार संगठनों के साथ शुरू किये गये उद्यमिता विकास के विभिन्न मॉडलों के बारे में  भी चर्चा की।

 

सुश्री मीनाक्षी शर्मा,एएसजी, एसोचैम ने इस परियोजना के बारे में जानकारी दी, जहां 1000 आदिवासी कारीगरों को इस पहल के तहत पहचाना जाएगा और उन्हें एक विभेदित मूल्य प्रस्ताव के साथ एक अनूठी ब्रांड पहचान बनाने और प्रदर्शनियों, वर्चुअल रोड शो और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अहम कार्यक्रमों में उद्यमियों की भागीदारी के माध्यम से संभावित ग्राहक आधार से जुड़ने में मदद की जाएगी।

 

'आदिवासी उद्यमिता विकास कार्यक्रम के शुभारंभ' को इंगित करने, महात्मा गांधी की जयंती मनाने और हमारे वंचित समुदायों एवं हाशिए पर रहने वाले लोगों के उत्थान, समावेशन एवं सशक्तीकरण का जश्न मनाने के लिए एसोचैम ने एक वेबिनार भी आयोजित किया, जिसका शीर्षक था, 'खादी: स्वतंत्र आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक'। यह चर्चा देश में जनजातीय समुदायों की उद्यमशीलता को अविलंब बढ़ावा देने एवं उनका समर्थन करने के आग्रह पर केंद्रित थी।

 

श्री विनीत अग्रवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, एसोचैम, डॉ. अतुल कोचर, सीईओ, राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (एनएबीएच), डॉ. मनीष पांडे, निदेशक एवं प्रमुख, परियोजना विश्लेषण और प्रलेखन (पीएडी) डिवीजन, क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया, डॉ. मनु गुप्ता, सह-संस्थापक, सस्टेनेबल एनवायरनमेंट एंड इकोलॉजिकल डेवलपमेंट सोसाइटी (सीईईडीएस) तथा उद्योग जगत के अन्य वरिष्ठ हस्तियों ने जनजातीय विकास के बारे में अपने विचार साझा किये।

 

राज्य सरकार, टीआरआई, विभिन्न मंत्रालयों के साथ काम करने वाले विभिन्न साझेदार संगठनों के अधिकारियों तथा जनजातीय कार्य मंत्रालय, आईआईपीए एवं एसोचैम के अधिकारियों के साथ- साथ गोल कार्यक्रम के मेंटरों समेत देश भर के 300 से अधिक प्रतिभागियों ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से इस कार्यक्रम में भाग लिया।

 

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