सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
शिल्प समागम मेला 2026-मैसूर, कर्नाटक
शिल्प समागम मेला 2026 में 83 स्टॉल लगाए गए, जिनमें से 80 स्टॉल कारीगरों को आवंटित किए गए हैं, जिनमें 37 महिला कारीगर शामिल
मेले में 12 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश भाग ले रहे हैं
केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता सचिव श्री सुधांश पंत मैसूरु में मेले का दौरा करेंगे
सचिव कर्नाटक के मैसूर में स्थल निरीक्षण के साथ-साथ केंद्रीय योजनाओं, कार्यक्रमों और पहल की समीक्षा करेंगे
प्रविष्टि तिथि:
17 OCT 2026 7:19PM by PIB Delhi
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव श्री सुधांश पंत कल कर्नाटक के मैसूर में चल रहे नौ दिवसीय शिल्प समागम मेला 2026 का दौरा करेंगे। यह मेला सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित किया जा रहा है।
सचिव मैसूर में स्थल भ्रमण के साथ-साथ मंत्रालय की कार्यान्वयन के अधीन योजनाओं, कार्यक्रमों और पहल की व्यापक समीक्षा भी करेंगे।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह मेला 11 अक्टूबर से मैसूर के मैसूर दशहरा प्रदर्शनी मैदान में चल रहा है। यह मेला 19 अक्टूबर, सोमवार को समाप्त होगा।
उन्होंने कहा कि यह मेला अनुसूचित जाति (SCs), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBCs) और सफाई कर्मचारियों के कारीगरों और लाभार्थियों के लिए एक विपणन मंच प्रदान करता है, जिससे वे अपने पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पादों और अन्य वस्तुओं को व्यापक दर्शकों के सामने प्रदर्शित कर सकते हैं।
अधिकारी ने बताया कि यह मेला मंत्रालय के अधीन तीन राष्ट्रीय निगमों, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (NSFDC), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (NBCFDC) और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (NSKFDC) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया है, जो कारीगरों और पात्र लाभार्थियों को वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं।
मेले में 83 स्टॉल लगे हैं, जिनमें से 80 स्टॉल कारीगरों के लिए आवंटित किए गए हैं, जिनमें 37 महिला कारीगर शामिल हैं। इस प्रदर्शनी में आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, केरल, राजस्थान, पुडुचेरी, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश सहित 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कारीगर भाग ले रहे हैं।
इन स्टॉलों में हस्तशिल्प, हथकरघा साड़ियाँ, मसाले, अचार, अगरबत्ती, शहद से बने उत्पाद, ब्लॉक प्रिंटेड वस्तुएँ, चमड़े के सामान, लकड़ी के खिलौने, बैग, पर्स, टेराकोटा उत्पाद, कृत्रिम आभूषण, रोज़वुड की दीवार पर टांगने वाली वस्तुएँ और बिस्तर तथा तकिये के कवर सहित विविध प्रकार के उत्पाद उपलब्ध हैं। उन्होंने पारंपरिक व्यंजनों से सजे फूड स्टॉलों का भी दौरा किया, जिससे आगंतुकों का अनुभव और भी बेहतर हुआ।
इस मेले का उद्देश्य कारीगरों के लिए बाज़ार संपर्क को मज़बूत करना, पारंपरिक शिल्प कौशल को बढ़ावा देना और स्थायी आजीविका के अवसर पैदा करना है। आगंतुकों और संभावित ग्राहकों के साथ सीधे संवाद के माध्यम से, भाग लेने वाले कारीगर अपने उत्पादों का प्रदर्शन कर सकते हैं, अपने ग्राहक आधार का विस्तार कर सकते हैं और अपने उद्यमों की बाज़ार पहुँच को बेहतर बना सकते हैं। यह पहल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी बढ़ावा देती है और पारंपरिक कला रूपों और कौशलों के संरक्षण में सहयोग करती है।
शिल्प समागम मेला 2026 मैसूर दशहरा प्रदर्शनी मैदान में 19 अक्टूबर, सोमवार तक जारी रहेगा। यह मेला आगंतुकों को भारत की पारंपरिक शिल्पकला और हथकरघा उत्पादों को देखने का अवसर प्रदान करेगा, साथ ही कारीगरों की आजीविका में सहयोग भी करेगा। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय इन पहल के माध्यम से बाजार तक पहुंच को मजबूत करने, उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और वंचित समुदायों के आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा देने का कार्य जारी रखे हुए है।
यह मेला मंत्रालय और उसके तीन राष्ट्रीय निगमों की योजनाओं और कार्यक्रमों के बारे में जानकारी प्रसारित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में भी कार्य करता है, जिससे पात्र लाभार्थियों को उपलब्ध वित्तीय सहायता और उद्यमिता के अवसरों के बारे में जानने में मदद मिलती है।
मंत्रालय लागू व्यवस्थाओं के अनुसार मुफ्त स्टॉल उपलब्ध कराकर और यात्रा व्यय, दैनिक भत्ता, माल परिवहन और भोजन के लिए सहायता प्रदान करके कारीगरों की भागीदारी को सुगम बनाता है।
मेले के अलावा, मंत्रालय भारत ट्यूलिप (पारंपरिक कारीगरों के उत्थान और आजीविका कार्यक्रम) पहल को बढ़ावा दे रहा है, जिसका उद्देश्य भारत और विदेशों में डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से लक्षित कारीगरों द्वारा निर्मित उत्पादों के लिए बाजार पहुंच का विस्तार करना है। भारत ट्यूलिप के तहत उत्पादों की ब्रांडिंग का उद्देश्य उनकी दृश्यता बढ़ाना, ऑनलाइन बिक्री को सुगम बनाना और पारंपरिक कारीगरों को व्यापक ग्राहक आधार से जोड़ना है।
मंत्रालय 2022 से शिल्प समागम मेलों का आयोजन कर रहा है, जिससे अब तक आयोजित 13 मेलों के माध्यम से 975 कारीगरों को लाभ हुआ है।
मैसूर में चल रहा यह शिल्प समागम मेला वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला मेला है।
मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष के दौरान गुवाहाटी (21 से 28 अक्टूबर, 2026) में अतिरिक्त मेलों का आयोजन करने का भी प्रस्ताव रखा है; इसके अलावा नई दिल्ली में दिल्ली हाट, जोधपुर और लखनऊ में भी मेले आयोजित किए जाएंगे। साथ ही, भारत मंडपम, नई दिल्ली में 14 से 27 नवंबर, 2026 तक आयोजित होने वाले भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले 2026 और फरवरी 2027 में सूरजकुंड मेले जैसी प्रमुख प्रदर्शनियों में भी भाग लिया जाएगा।
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पीके/केसी/आरटी/जेएस /डीए
(रिलीज़ आईडी: 2324782)
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