सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने पहुंच-नियंत्रित उच्च गति वाले राष्ट्रीय राजमार्गों के डिजाइन और निर्माण के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं
इन दिशा-निर्देशों से योजना और डिजाइन के लिए एक समान ढांचा स्थापित होगा, सुरक्षा को मजबूती मिलेगी और उच्च रफ्तार कॉरिडोर पर सुगम आवागमन संभव होगा
प्रविष्टि तिथि:
21 SEP 2026 4:43PM by PIB Delhi
केंद्र सरकार के विकसित भारत 2047 के विजन और विश्व स्तरीय राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क विकसित करने के दीर्घकालिक उद्देश्य के अनुरूप, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने एक्सप्रेसवे के अलावा अन्य उच्च गति पहुंच नियंत्रित राष्ट्रीय राजमार्गों की योजना और डिजाइन के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य उच्च गति वाले राष्ट्रीय राजमार्ग गलियारों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के मानकों में एकरूपता लाना, तकनीकी मानकों में अधिक स्थिरता लाना, सड़क सुरक्षा को मजबूत करना और राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में परिचालन दक्षता में सुधार करना है। ये दिशा-निर्देश सभी आगामी 4/6 लेन वाले ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड उच्च गति वाले नियंत्रित राष्ट्रीय राजमार्गों पर लागू होंगे।
एकसमान मानकों की आवश्यकता
ये दिशा-निर्देश भारत सरकार के दीर्घकालिक रणनीतिक रोडमैप के अनुरूप हैं, जिसमें विकसित भारत 2047 के तहत 50 हजार किलोमीटर के एक्सेस-नियंत्रित हाई-स्पीड कॉरिडोर के विकास की परिकल्पना की गई है, जिससे कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगा और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी।
वर्तमान में, एक्सप्रेसवे को छोड़कर, उच्च गति नियंत्रण वाले राष्ट्रीय राजमार्गों की योजना और डिजाइनिंग के लिए कोई अलग मानक और विनिर्देश मौजूद नहीं हैं। ऐसे गलियारों के लिए डिजाइन रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने हेतु अपनाए गए मानकों में भिन्नताएं देखी गई हैं। नए दिशा-निर्देश तकनीकी और सुरक्षा प्रावधानों का एक समान सेट प्रदान करके इस आवश्यकता को पूरा करते हैं।
दिशा-निर्देशों का मुख्य उद्देश्य गलियारों पर उच्च गति यातायात की स्थितियों के अनुरूप अतिरिक्त सुरक्षा उपायों को शामिल करना है। निकास और प्रवेश द्वारों की अग्रिम सूचना के लिए विशेष प्रावधान निर्धारित किए गए हैं, ताकि राष्ट्रीय राजमार्ग उपयोगकर्ता आगामी प्रवेश और निकास द्वारों का अनुमान लगा सकें और सुरक्षित रूप से उनका उपयोग कर सकें।
पहुंच-नियंत्रित राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए एकसमान डिज़ाइन ढांचा
विस्तृत यातायात आकलन के आधार पर उच्च गति वाले राष्ट्रीय राजमार्गों की लेन संरचना को मानकीकृत किया जाएगा। चार लेन वाले राजमार्ग और चार लेन संरचनाओं वाले 15,000 वाहनों तक के यातायात प्रवाह वाले गलियारों की चौड़ाई 60 मीटर होगी। इसी प्रकार, चार लेन वाले राजमार्ग और छह लेन संरचनाओं वाले 15,000 से 25,000 वाहनों के यातायात प्रवाह वाले गलियारों की चौड़ाई 70 मीटर होगी। साथ ही, छह लेन वाले राजमार्ग और छह लेन संरचनाओं वाले 25,000 से 40,000 वाहनों के यातायात प्रवाह वाले राजमार्गों की चौड़ाई भी 70 मीटर होगी।
प्रवेश नियंत्रण और निर्बाध यातायात संचालन
एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग और पर्याप्त यातायात उत्पन्न करने वाली महत्वपूर्ण धमनी सड़कों के साथ-साथ बंदरगाहों, हवाई अड्डों, मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्कों (एमएमएलपी), औद्योगिक क्षेत्रों और प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे प्रमुख यातायात-उत्पादक गंतव्यों को जोड़ने वाली सड़कों के चौराहों पर रैंप के साथ इंटरचेंज उपलब्ध कराए जाएंगे।
उच्च गति वाले गलियारों पर अतिक्रमण, अनधिकृत प्रवेश और आवारा पशुओं के प्रवेश को रोकने और पहुंच नियंत्रण को मजबूत करने के लिए, इन दिशा-निर्देशों में गलियारे के बाहरी किनारे पर एक मीटर ऊंची चारदीवारी के निर्माण का प्रावधान है। ये व्यापक दिशा-निर्देश पूरी तरह से पहुंच-नियंत्रित राष्ट्रीय राजमार्गों की योजना और डिजाइन को मानकीकृत करने और उच्च गति वाले राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में एकरूपता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह पहल एक सुरक्षित, निर्बाध और भविष्य के लिए तैयार राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क विकसित करने के लिए एनएचएआई की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करती है, साथ ही केंद्र सरकार के विकसित भारत 2047 के विजन में योगदान देती है।
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पीके/केसी/आरटी/एके/एनजे
(रिलीज़ आईडी: 2313089)
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