वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय
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केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने 2030 तक भारत-रूस के बीच 100 बिलियन डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार करने के लिए तेजी से आर्थिक साझेदारी बढ़ाने का आह्वान किया


श्री पीयूष गोयल ने फार्मास्यूटिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स और खाद्य उत्पादों के क्षेत्र में रूस को भारत के निर्यात को बढ़ाने के अवसरों की चर्चा की

श्री गोयल ने रूस की कंपनियों को भारत में विनिर्माण के लिए देश के प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक गलियारों का उपयोग करने के लिए आमंत्रित किया

प्रविष्टि तिथि: 10 SEP 2026 7:10PM by PIB Delhi

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज भारत-रूस के बीच तेजी से आर्थिक और औद्योगिक साझेदारी बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने दोनों देशों के उद्योग जगत से 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 बिलियन डॉलर तथा दोतरफा निवेश को 50 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में काम करने का आग्रह किया। नई दिल्ली में रूस के उद्योग और व्यापार मंत्री श्री एंटोन अलीखानोव के साथ 'इनोप्रोम इंडिया 2026’ के सह-अध्यक्ष पूर्ण बैठक को संबोधित करते हुए श्री गोयल ने कहा कि दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों द्वारा निर्धारित किए गए लक्ष्य, दोनों सरकारों और उद्योग जगत के कामकाज का पैमाना होंगे।

श्री गोयल ने कहा कि वर्तमान लगभग 60 बिलियन डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 100 बिलियन  डॉलर तक पहुंचाने के लिए अगले चार वर्षों में लगभग 40 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी और प्रति वर्ष लगातार दोहरे अंकों (डबल-डिजिट) की वृद्धि की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए न केवल सरकारों को, बल्कि दोनों देशों के उद्योग जगत को भी समान रूप से महत्वपूर्ण प्रयास करने होंगे।

दोनों देशों के बीच व्यापार में विविधता लाने के अवसरों पर ज़ोर देते हुए, श्री गोयल ने कहा कि मांस और मांस से बने खाने-पीने के उत्पादों का भारतीय निर्यात 36 मिलियन डॉलर से बढ़कर 97 मिलियन डॉलर हो गया है, जो लगभग 170 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। मछली और जलीय उत्पादों का निर्यात 123 मिलियन डॉलर से बढ़कर 159 मिलियन डॉलर हो गया, जिसमें लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई,वहीं खाद्य सब्जियों का निर्यात 38 मिलियन डॉलर से बढ़कर 54 मिलियन डॉलर हो गया, जो 40 प्रतिशत की वृद्धि है। कॉफी, चाय और मसालों का निर्यात 13 प्रतिशत बढ़कर 116 मिलियन डॉलर हो गया और मिलिंग उद्योग के उत्पादों का निर्यात लगभग दोगुना हो गया।

श्री गोयल ने कहा कि ये आंकड़े रूस के बाज़ार में भारतीय किसानों, खाद्य प्रसंस्करणकर्ताओं, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और एमएसएमई निर्यातकों के उत्पादों की बढ़ती मांग को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि अब तक इसकी क्षमता का बहुत कम हिस्सा ही इस्तेमाल किया जा सका है। उन्होंने दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक-दूसरे की ज़रूरतों को पूरा करने की क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे कई उत्पाद हैं जिनका वैश्विक स्‍तर पर रूस बड़े पैमाने पर आयात करता है और भारत बड़े पैमाने पर निर्यात करता है, लेकिन भारत अभी भी रूस को बड़े पैमाने पर निर्यात नहीं करता है। उन्होंने कहा कि फ़ार्मास्यूटिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स, ट्रैक्टर और खाद्य उत्पादों के क्षेत्र में ऐसे अवसर है़, जिनका लाभ अभी तक नहीं उठाया गया है।

मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच गैर-ऊर्जा व्यापार अपनी क्षमता की तुलना में बहुत कम है और इस अंतर को समाप्त करने की आवश्यकता है, ताकि द्विपक्षीय व्यापार को 60 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि फ़ार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग के सामान, केमिकल्स, टेक्सटाइल्स, खाद्य उत्पादों, समुद्री उत्पादों और ऑटो उत्पादों के भारतीय निर्यात को बढ़ाकर द्विपक्षीय व्यापार में संतुलन लाना इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

निवेश के संबंध में, श्री गोयल ने कहा कि भारत-रूस प्राथमिकता निवेश परियोजना तंत्र वर्तमान में उन्नत विनिर्माण, ऊर्जा, खनन, रेलवे और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में 40 सक्रिय निवेश परियोजनाओं पर नज़र रख रहा है। उन्होंने रूसी पक्ष से अपील की कि वे रूस में भारतीय निवेश के लिए फार्मास्यूटिकल्स, आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेवाओं, इंजीनियरिंग और रेलवे जैसे क्षेत्रों में और अधिक अवसर उपलब्ध कराए, ताकि 50 बिलियन डॉलर के निवेश का लक्ष्य वास्तव में दोनों तरफ़ से होने वाला निवेश बन सके।

श्री गोयल ने कहा कि भारत और रूस एक नई द्विपक्षीय निवेश संधि पर तेज़ी से काम कर रहे हैं, ताकि दोनों पक्षों के निवेशकों को निवेश गंतव्यों को अंतिम रूप देते समय अपेक्षित कानूनी भरोसा मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और रूस, बेलारूस, कजाकिस्तान, आर्मेनिया और किर्गिज़ गणराज्य से मिलकर बने यूरेशियन आर्थिक संघ ने पिछले वर्ष औपचारिक मुक्त व्यापार वार्ता शुरू की थी और भारत उन्हें शीघ्र पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे उद्योगों और विशेष रूप से एमएसएमई के लिए नए बाजार खुलेंगे।

मंत्री ने कहा कि दोनों देश राष्ट्रीय और स्थानीय मुद्रा में भुगतान की व्यवस्था को मज़बूत कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अक्सर जमीनी स्तर पर व्यापार टैरिफ की तुलना में भुगतान संबंधी अड़चनों से अधिक धीमा होता है। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के मज़बूत आधार, जैसे अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री गलियारा में निवेश पर भी ज़ोर देते हुए कहा कि कनेक्टिविटी केवल इंफ्रास्ट्रक्चर का ही नहीं, बल्कि व्यापार नीति का भी हिस्सा है।

श्री गोयल ने दोनों देशों के कारोबारियों और अधिकारियों से पांच विशिष्ट आग्रह किए। पहला, उन्होंने कारोबारियों से कहा कि वे दिल्ली से जाने से पहले कम से कम एक करार करें, एक नया मित्र और साझेदार बनाएं और कम से कम एक ठोस परियोजना को आगे बढ़ाएं। दूसरा, उन्होंने कारोबारियों से कहा कि वे अपने व्यापार और निवेश योजनाओं में ऊर्जा के अलावा विशेष रूप से फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग वस्तुओं, केमिकल्‍स, ऑटो कंपोनेंट्स, ट्रैक्टर पार्ट्स, टेक्‍सटाइल, खाद्य, एग्री-टेक और समुद्री उत्पादों में एक नई लाइन भी जोड़ें। उन्होंने कहा कि ये क्षेत्र 100 बिलियन डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेंगे।

तीसरा, श्री गोयल ने रूसी उद्योग से कहा कि वे भारत में केवल सामान विक्रय करने के बजाय देश में ही विनिर्माण भी करें। उन्होंने कहा कि भारत के राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारे निवेश के लिए तैयार हैं और वैश्विक साझेदारों के लिए प्लग-एंड-प्ले बुनियादी ढांचा उपलब्ध है। उन्होंने रूसी कंपनियों के लिए भारत की युवा प्रतिभा और कुशल श्रमबल को एक महत्वपूर्ण संसाधन बताया और कहा कि रूस में ऐसा कुशल श्रमबल मिलना मुश्किल हो सकता है।

चौथा, उन्होंने भारतीय उद्योग से आग्रह किया कि वे रूस केवल आगंतुकों के रूप में नहीं, बल्कि निवेशकों और निर्यातकों के रूप में जाएं तथा मित्रता, नई साझेदारियां और नई व्यावसायिक संभावनाएं तलाशें।

पांचवां, श्री गोयल ने दोनों पक्षों के अधिकारियों से उद्योग की बात सुनने और व्यापार तथा निवेश में बाधा डालने वाले कारकों की पहचान करने का आह्वान किया। उन्होंने उनसे कहा कि वे देखें कि क्या भुगतान प्रणालियां, प्रमाणन आवश्यकताएं, मानक, लॉजिस्टिक्स, वीज़ा या मंज़ूरी मिलने में कोई दिक्कत आ रही है। उन्होंने रूसी पक्ष को भरोसा दिलाया कि वे और उनके सहयोगी इस पूरी प्रक्रिया को आसान, सुचारू और उत्साहपूर्ण बनाने में मदद करने के लिए तैयार हैं।

निवेश और विनिर्माण गंतव्य के रूप में भारत की खूबियों को बताते हुए, श्री गोयल ने कहा कि भारत, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, औद्योगिक पार्क योजना और स्टार्टअप इंडिया जैसी पहलों के तहत बड़े पैमाने पर काम करने की क्षमता और तेजी से विस्तार करते औद्योगिक विनिर्माण आधार की सुविधा देता है। उन्होंने कहा कि भारत नए बुनियादी ढांचे के निर्माण और हवाई अड्डों, बंदरगाहों, एक्सप्रेसवे, रेलवे, अंतर्देशीय जलमार्गों, पावर इंफ्रास्ट्रक्चर, वॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक पार्कों में अपनी क्षमता को मजबूत करने के लिए प्रति वर्ष 130 बिलियन डॉलर का निवेश करता है। उन्होंने कहा कि भारत में वैश्विक साझेदारों के स्वागत के लिए सही इकोसिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की दिशा में काफी काम हो रहा है।

श्री गोयल ने कहा कि भारत में प्रतिभा और कौशल की कोई कमी नहीं है, इसके साथ ही यहां युवा और महत्वाकांक्षी आबादी है, जो अपने वैश्विक साझेदारों के साथ मिलकर नवाचार, डिज़ाइन, सह-डिज़ाइन, सह-निर्माण और सह-विनिर्माण करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि रूस के पास इंजीनियरिंग में विशेष रूप से एयरोस्पेस, धातुकर्म, परमाणु प्रौद्योगिकी और खनन के क्षेत्रों में दशकों का बेहतरीन अनुभव है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत और रूस की ताकतों के  एक साथ आने पर उनके संबंध व्यापार से आगे बढ़कर दोनों अर्थव्यवस्थाओं को मज़बूत करेंगे।

भारत-रूस के दीर्घकालिक संबंधों का उल्लेख करते हुए, श्री गोयल ने कहा कि इन संबंधों में बदलती दुनिया के सात दशकों का उतार-चढ़ाव आया है। उन्होंने कहा कि अब दोनों देशों के सामने केवल काम को जारी रखने की ही नहीं, बल्कि उसे तेज़ी आगे बढ़ाने की चुनौती है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, "भारत-रूस संबंधों की सबसे बड़ी ताकत भरोसा है। यह भरोसा हमारे संयुक्त प्रयासों को दिशा और गति देता है और नए सपनों और महत्वाकांक्षाओं को प्रेरित करने वाले लॉन्चपैड का काम करता है।"

श्री गोयल ने कहा कि भारत में पहली बार इनोप्रोम का आयोजन होना बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक से अधिक समय से वैश्विक औद्योगिक प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी, इनोप्रोम एक ऐसे मंच के तौर पर काम कर रहा है, जहां रूसी इंजीनियरिंग और विनिर्माण क्षमता का प्रदर्शन दुनिया के सामने किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस मंच को भारत लाना यह दर्शाता है कि दोनों देश अब किस स्थिति में हैं और यह "प्रोटोकॉल से प्रोडक्शन और इरादे से इंडस्ट्री" की ओर बढ़ने की उनकी तैयारी को दर्शाता है।

श्री गोयल ने कहा कि दोनों मंत्रालय पिछले कुछ महीनों से आर्थिक और औद्योगिक सहयोग को मज़बूत करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि रूस के उद्योग और व्यापार मंत्री श्री एंटन अलीखानोव की यात्रा इस प्रगति को गति देगी।

अपने संबोधन के अंत में, श्री गोयल ने मंत्री अलीखानोव और पूरे रूसी प्रतिनिधिमंडल को उनकी साझेदारी के लिए धन्यवाद दिया और इनोप्रोम इंडिया 2026 तथा प्रदर्शनी में शामिल सभी व्यवसायों के लिए सफलता की कामना की।

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पीके/केसी/एमके/डीए


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