वस्त्र मंत्रालय
भारतीय ब्रांडों, डिज़ाइनरों और कारीगरों के लिए वैश्विक मंच पर अग्रणी पहचान स्थापित करने का उपयुक्त अवसर : श्री गिरिराज सिंह
प्रविष्टि तिथि:
16 JUL 2026 8:08PM by PIB Delhi
भारत का फैशन और परिधान उद्योग एक ऐतिहासिक परिवर्तन के दौर से गुजरते हुए अपनी पारंपरिक विनिर्माण क्षमता से आगे बढ़कर डिज़ाइन नवाचार, उच्च गुणवत्ता और सांस्कृतिक विशिष्टता के लिए वैश्विक पहचान बना रहा है। वर्ष 2025-26 में भारत का कपड़ा एवं परिधान निर्यात लगभग 3.16 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने और उसे वर्ष 2030 तक 9 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित करने, मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के बढ़ते नेटवर्क से भारत की प्रमुख वैश्विक बाजारों तक पहुंच के साथ सत्र में इस बात पर चर्चा की गई कि भारतीय ब्रांड किस प्रकार मजबूत ब्रांड पहचान विकसित कर, व्यवसाय करने की रणनीति (ओम्नीचैनल) क्षमताओं का विस्तार करते हुए तथा बदलती उपभोक्ता और नियामकीय आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को ढालकर अपनी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को दीर्घकालिक वैश्विक विकास में बदल सकते हैं।
इसी परिप्रेक्ष्य में 16 जुलाई, 2026 को भारत टेक्स 2026 के अंतर्गत नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में ‘इंडियन ब्रांड्स, ग्लोबल एम्बिशंस: रीडिफाइनिंग रिटेल ग्रोथ बियॉन्ड बॉर्डर्स’ विषय पर एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में डिज़ाइनरों, उद्यमियों, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों और विनिर्माताओं ने भाग लेकर इस बात पर विचार-विमर्श किया कि भारतीय वस्त्र एवं लाइफस्टाइल ब्रांड अपनी पारंपरिक शिल्पकला और विरासत को बनाए रखते हुए वैश्विक बाजारों में किस प्रकार विस्तार कर सकते हैं। इस सत्र में 20 से अधिक प्रतिष्ठित पैनल विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिनमें भारतीय ब्रांडों, लक्ज़री डिज़ाइनरों, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों तथा पीडीएस (PDS), वेलस्पन वर्ल्ड, नेयट होम्स, पश्मीना डॉट कॉम, एक्सपोबाज़ार और ट्राइडेंट जैसे प्रमुख ब्रांडों के उद्योग विशेषज्ञ शामिल थे। पैनलिस्टों ने भारतीय ब्रांडों को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने, खुदरा क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत बनाने तथा नवाचार के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार के अवसरों पर अपने विचार साझा किए।
भारतीय वस्त्र एवं परिधान ब्रांडों, डिज़ाइनरों, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों, खुदरा विक्रेताओं, निर्यातकों और नवाचार क्षेत्र के विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए केन्द्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने भारत के वस्त्र क्षेत्र के भविष्य के लिए एक प्रेरक दृष्टि प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि भारतीय कारीगरों, डिज़ाइनरों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के पास देश की उत्कृष्ट शिल्पकला, समृद्ध वस्त्र परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय ब्रांड स्थापित करने की अपार संभावनाएँ हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक बाजारों में सफलता प्राप्त करने के लिए भारतीय ब्रांडों को मात्रा के साथ-साथ गुणवत्ता, स्थिरता और अनुरेखणीयता पर विशेष ध्यान देना होगा। साथ ही, भारत की समृद्ध हस्तशिल्प और वस्त्र विरासत को प्रभावी ढंग से विश्व के सामने प्रस्तुत करना भी आवश्यक है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा, “कारीगर भारत की पूंजी हैं।” उन्होंने दोहराया कि भारत के कारीगर और बुनकर ही देश के वस्त्र उद्योग की वास्तविक शक्ति और आधार हैं। उन्होंने कहा कि भारत टेक्स 2026 जैसे आयोजन कारीगरों की उत्कृष्ट शिल्पकला को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने, उन्हें अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जोड़ने तथा भारत की समृद्ध वस्त्र विरासत को संरक्षित रखते हुए उनके लिए सतत आजीविका के नए अवसर सृजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

केन्द्रीय वस्त्र मंत्री ने कहा कि भारतीय ब्रांड गुणवत्ता, स्थिरता, समृद्ध विरासत और उत्कृष्ट शिल्पकला से अपनी वैश्विक महत्वाकांक्षा पूरी करते हुए विकास की नई परिभाषा गढ़ सकते हैं। उन्होंने भारत की समृद्ध हस्तशिल्प विरासत को विश्व स्तर पर बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए निर्माताओं, कारीगरों और बुनकरों को अधिक सहयोग प्रदान करने का आह्वान किया। उन्होंने इन्हें भारत की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि वस्त्र क्षेत्र में समावेशी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विकास सुनिश्चित करने के लिए इनका सशक्तीकरण अत्यंत आवश्यक है।
इस अवसर पर प्रसिद्ध भारतीय डिज़ाइनर वैशाली शाडांगुले और राहुल मिश्रा ने भी वैश्विक मंच पर भारतीय ब्रांडों और हस्तशिल्प की बढ़ती प्रतिष्ठा पर अपने विचार साझा किए। अपने अनुभव साझा करते हुए वैशाली शाडांगुले ने बताया कि उनकी पहल केवल चार बुनकर परिवारों के साथ शुरू हुई थी, जो आज एक ऐसे समुदाय के रूप में विकसित हो चुकी है, जहां 90 प्रतिशत से अधिक बुनकर युवा महिलाएँ हैं। यह पहल पारंपरिक शिल्प को संरक्षित रखने के साथ-साथ उनके लिए सतत आजीविका के अवसर भी उपलब्ध करा रही है। उन्होंने भारत की 100 विलुप्तप्राय बुनाई परंपराओं को पुनर्जीवित करने के अपने संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा, “यदि आप वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं, तो आपको भारतीय बुनाई की विशेषताओं और उसकी ताकत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करना होगा।” जयपुर रग्स के संस्थापक श्री नंद किशोर चौधरी ने कहा कि किसी भी ब्रांड की सबसे बड़ी ताकत उसकी प्रामाणिक जानकारी देना होती है। उन्होंने कहा कि कोई भी ब्रांड जितना अधिक अपनी जड़ों, परंपराओं और विरासत से जुड़ा होता है, प्रतिस्पर्धियों के लिए उसकी नकल करना उतना ही कठिन हो जाता है।
प्रख्यात फैशन डिज़ाइनर राहुल मिश्रा ने स्वदेशी शिल्पकला के संरक्षण और संवर्धन पर जोर देते हुए कहा, “हर भौगोलिक क्षेत्र की पसंद के अनुरूप डिज़ाइनों में बदलाव करने के बजाय भारतीय शिल्पकला की मौलिकता और प्रामाणिकता को बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि यही प्रामाणिकता भारतीय ब्रांडों की सबसे बड़ी विशिष्टता है।” उन्होंने कहा कि हस्तनिर्मित शिल्प और हथकरघा भारत की आत्मा हैं, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के इस युग में इनका महत्व और भी बढ़ जाता है।
ई-कॉमर्स क्षेत्र के विशेषज्ञों ने कहा कि ऑनलाइन मार्केटप्लेस और ओम्नीचैनल रणनीतियाँ अंतरराष्ट्रीय विस्तार की आधारशिला बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर विस्तार करने में समय अवश्य लगता है, लेकिन एक बार यह लक्ष्य हासिल हो जाने पर इससे दीर्घकालिक स्थिरता और सतत विकास सुनिश्चित होता है। अमेज़न ग्लोबल सेलिंग की कंट्री हेड श्रीमती श्रीनिधि कल्पवुडी ने बताया कि उनका प्लेटफॉर्म दो लाख से अधिक विक्रेताओं को सहयोग प्रदान कर रहा है, जिनमें टियर-2 और टियर-3 शहरों के अनेक कारीगर भी शामिल हैं। ब्रांड निर्माण के महत्व पर बल देते हुए उन्होंने कहा, “भारत को केवल अधिक निर्यात ही नहीं करना चाहिए, बल्कि वैश्विक स्तर पर ऐसी पहचान भी बनानी चाहिए कि उसे लंबे समय तक याद रखा जाए।” उन्होंने आगे कहा, “ब्रांड निर्माण अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि अस्तित्व की अनिवार्यता बन चुका है।” वक्ताओं ने प्रौद्योगिकी, डेटा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने क्षेत्रीय भाषाओं में एआई-सक्षम समाधानों के उपयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डाला तथा विश्वसनीयता प्रमाण-चिह्न, नमूना लॉजिस्टिक्स सहायता और बिजनेस-टू-कंज्यूमर (बी2सी) निर्यात के लिए प्रोत्साहन जैसे व्यावहारिक उपायों को भारतीय ब्रांडों के वैश्विक विस्तार के लिए महत्वपूर्ण बताया।
बड़े विनिर्माताओं ने भारत के उत्पादन इकोसिस्टम, आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के वरिष्ठ कार्यकारी उपाध्यक्ष एवं कॉर्पोरेट एवं उद्योग मामलों के प्रमुख डॉ. अनिल राजवंशी ने क्लस्टर विकास की दिशा में सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि एकीकृत विनिर्माण इकोसिस्टम भारतीय ब्रांडों को अधिक उत्पादन क्षमता, दक्षता और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान करेगा। ट्रेंट के प्रबंध निदेशक श्री वेंकटेसालु पलानीस्वामी ने कहा कि भारत को मूल्य श्रृंखला के प्रत्येक स्तर पर अधिक पारदर्शिता और गति सुनिश्चित करते हुए अपने वस्त्र क्षेत्र के लिए एक मजबूत वैश्विक पहचान विकसित करनी होगी, जो गुणवत्ता, समय पर आपूर्ति और उत्कृष्ट सेवाओं में निरंतरता पर आधारित हो। वक्ताओं ने यह प्रश्न भी उठाया कि कपास, जो भारत की प्रमुख ताकतों में से एक है, उसका प्रसंस्करण और ब्रांडिंग अक्सर अन्य देशों में क्यों होती है। उन्होंने नैसकॉम की तर्ज पर एक ऐसे केन्द्रीय संस्थान की स्थापना का सुझाव दिया, जो वैश्विक ब्रांड निर्माण के लिए उद्योग को प्रारंभ से अंत तक समग्र सहयोग प्रदान कर सके। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक विकास वैश्विक बाजारों तक पहुंच का एक महत्वपूर्ण आधार बन चुका है तथा बड़े निर्यातकों और डिज़ाइनरों के बीच सहयोग से उत्पादन क्षमता और रचनात्मकता का प्रभावी समन्वय स्थापित किया जा सकता है।
सत्र के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इन विचारों का समर्थन किया। भारतीय व्यापार संवर्धन संगठन (आईटीपीओ) के अध्यक्ष श्री जावेद अशरफ (आईएफएस) ने कहा कि भारत केवल अधिक मात्रा में उत्पाद नहीं बेचता, बल्कि उत्कृष्ट गुणवत्ता भी प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि ‘मेड इन इंडिया’ की पहचान उच्च गुणवत्ता का पर्याय बननी चाहिए तथा प्रदर्शनियाँ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए आज भी अत्यंत महत्वपूर्ण मंच हैं। भारतीय ब्रांडों और डिज़ाइनरों को संबोधित करते हुए वस्त्र मंत्रालय की सचिव श्रीमती नीलम शमी राव ने मजबूत डिज़ाइन हाउसों के विकास, साझा अवसंरचना और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर अधिक प्रभावी उपस्थिति की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ब्रांड निर्माण एक दीर्घकालिक प्रक्रिया है, जिसके लिए निरंतर प्रयास, गुणवत्ता और नवाचार अनिवार्य हैं।
सत्र का समापन सरकार और उद्योग जगत के बीच अधिक प्रभावी सहयोग के आह्वान के साथ हुआ, ताकि भारतीय ब्रांडों को वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय, उच्च गुणवत्ता वाले और विशिष्ट पहचान रखने वाले ब्रांडों के रूप में स्थापित किया जा सके। इस दौरान भारतीय हस्तशिल्प और शिल्पकला की वैश्विक दृश्यता बढ़ाने, क्लस्टर विकास को सुदृढ़ करने, तथा प्रामाणिक जानकारी देने और गुणवत्तापूर्ण कंटेंट को विकास के प्रमुख माध्यमों के रूप में अपनाने पर विशेष बल दिया गया।
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पीके/केसी/केपी / डीके
(रिलीज़ आईडी: 2285557)
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