वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
भारत–यूके सीईटीए तथा सामाजिक सुरक्षा समझौता लागू हुआ
भारत–यूके सीईटीए भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात को शून्य-शुल्क पहुंच प्रदान करता है
भारत के 20 से अधिक बंदरगाहों, हवाई अड्डों, आईसीडी, एसईजेड एवं कारखानों से 50 से अधिक निर्यात खेपों को अधिमान्य शुल्क प्रणाली के तहत रवाना किया गया
पहले दिन 140 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक मूल्य के निर्यात खेप को रवाना किया गया
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने इसे भारत–यूके संबंधों में एक निर्णायक मील का पत्थर कहा
वाणिज्य सचिव ने कहा कि भारत–यूके सीईटीए दो परस्पर पूरक अर्थव्यवस्थाओं के बीच वस्तुओं एवं सेवाओं के व्यापार को बढ़ावा देगा
भारत–यूके सीईटीए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है: ब्रिटिश उच्चायुक्त
भारत–यूके सीईटीए के तहत सबसे पहला मूल प्रमाणपत्र eCoO 2.0 प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से स्व-प्रमाणन आधार पर जारी किया गया
प्रविष्टि तिथि:
15 JUL 2026 7:54PM by PIB Delhi
भारत–यूनाइटेड किंगडम व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) तथा सामाजिक सुरक्षा समझौता आज औपचारिक रूप से लागू हो गया, जिसे डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (डीसीसी) भी कहा जाता है। यह दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
नई दिल्ली स्थित वाणिज्य भवन में सीईटीए के लागू होने के अवसर पर एक औपचारिक उद्घाटन समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में भारत में ब्रिटेन की उच्चायुक्त, सुश्री लिंडी कैमरून, वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल, विदेश व्यापार महानिदेशक, उद्योग निर्यात संवर्धन परिषदों के प्रतिनिधि, उद्योग संघों के प्रतिनिधि तथा अनेक निर्यातकों ने हिस्सा लिया।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि भारत–यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) तथा सामाजिक सुरक्षा समझौता का लागू होना भारत–यूके संबंधों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ये समझौते लागू हुए हैं जिनके तहत भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात को शून्य-शुल्क बाज़ार तक पहुंच मिलेगी और इसमें व्यापार मूल्य का लगभग 100 प्रतिशत हिस्सा शामिल है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह समझौता वस्त्र, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद, समुद्री उत्पाद, रसायन एवं प्रसंस्कृत खाद्य जैसे क्षेत्रों के लिए अभूतपूर्व अवसर उत्पन्न करता है, साथ ही एमएसएमई, किसानों एवं विनिर्माताओं को भी लाभ पहुंचाता है। उन्होंने आगे कहा कि यह समझौता भारत के आईटी, पेशेवर, वित्तीय, शिक्षा एवं व्यावसायिक सेवा क्षेत्रों के लिए नए अवसर खोलता है तथा भारतीय प्रतिभाओं की गतिशीलता को बढ़ाता है।
श्री गोयल ने बल देकर कहा कि सामाजिक सुरक्षा पर समझौता, यूनाइटेड किंगडम में अस्थायी रूप से कार्यरत भारतीय पेशेवरों को अधिकतम पांच वर्षों तक दोहरी सामाजिक सुरक्षा अंशदान से छूट प्रदान कर साझेदारी को मजबूत करता है, जिससे भारत के कार्यबल की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है। उन्होंने इस परिवर्तनकारी समझौते को सफलतापूर्वक अंतिम रूप प्रदान करने में उनकी प्रतिबद्धता के लिए अपने यूके समकक्ष और दोनों देशों के वार्ता दलों के प्रति आभार व्यक्त किया तथा विकास, निवेश एवं साझा समृद्धि को बढ़ावा देने वाली एक सुदृढ़, नवाचार-आधारित साझेदारी के निर्माण के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए, वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि सीईटीए का लागू होना भारत–यूके संबंधों को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है तथा वाणिज्य विभाग के सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत-यूके साझेदारी को मज़बूत करने के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप है और उन्होंने बातचीत को सफल बनाने में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल के नेतृत्व की सराहना की।
वाणिज्य सचिव ने वार्ताओं के बड़े पैमाने एवं जटिलता का उल्लेख करते हुए बताया कि समझौते को अंतिम रूप देने से पहले, 14 औपचारिक दौर की वार्ताओं में 800 से अधिक तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। उन्होंने कई वर्षों तक निरंतर प्रयास द्वारा इस सफलता को प्राप्त करने के लिए दोनों पक्षों की वार्ता टीमों की सराहना की।
श्री अग्रवाल ने कहा कि यह समझौता दो प्रमुख एवं पूरक अर्थव्यवस्थाओं के बीच हुआ है तथा इसकी व्यापकता एवं गहराई, दोनों के संदर्भ में, भारत के पूर्ववर्ती मुक्त व्यापार समझौतों की मिसालों से कहीं आगे जाता है। उन्होंने कहा कि जहां यह समझौता वस्तुओं के व्यापार में बाज़ार तक पर्याप्त पहुंच के अवसर प्रदान करता है, वहीं यह सेवाओं के व्यापार में भी उल्लेखनीय लाभ प्रदान कराता है। यह देखते हुए कि सेवाओं का भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 50 प्रतिशत से अधिक तथा यूनाइटेड किंगडम के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 70 प्रतिशत से अधिक योगदान है, उन्होंने कहा कि इस समझौते के माध्यम से प्रदान की गई प्रतिबद्धताएं एवं पूर्वानुमेयता आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय सेवाओं के व्यापार को सशक्त बनाएंगी।
कार्यान्वयन के महत्व पर बल देते हुए, श्री अग्रवाल ने कहा कि इस समझौते की वास्तविक सफलता का आकलन इन बातों से किया जाएगा कि दोनों देशों के नागरिकों के जीवन पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है, विशेष रूप से रोजगार, आजीविका एवं आर्थिक अवसरों के सृजन के माध्यम से। उन्होंने उद्योग जगत के हितधारकों से आग्रह किया कि वे इस समझौते द्वारा सृजित अवसरों को ठोस परिणामों में परिवर्तित करें और आश्वासन दिया कि वाणिज्य विभाग देशभर में निर्यात संवर्धन परिषदों तथा उद्योग समूहों के साथ मिलकर इस समझौते के लाभों को क्षेत्रीय, उत्पाद एवं क्लस्टर स्तर पर प्रभावी तरीके से पहुंचाने के लिए निकटता से कार्य करेगा।
वाणिज्य सचिव ने बताया कि 15 जुलाई 2026 से समझौते को लागू करने का निर्णय दोनों देशों के नेताओं ने फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई बैठक में लिया था। उन्होंने कहा कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी लंबित मुद्दों को सुलझाया गया और दोनों पक्षों की ओर से सभी ज़रूरी अधिसूचना जारी किए गए। व्यापार को सुगम बनाने के लिए ज़रूरी उपाय, जिनमें मूल नियम प्रमाणन एवं सीमा शुल्क की तैयारियों से संबंधित व्यवस्थाएं शामिल थीं, भी लागू की गई ताकि हितधारक समझौते के लाभों को पहले ही दिन से प्राप्त कर सकें।
उन्होंने कहा कि भारत–यूके सीईटीए के तहत कार्यान्वयन के पहले ही दिन 140 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक मूल्य के सामान का निर्यात यूनाइटेड किंगडम में किया जा रहा है। उन्होंने आशा व्यक्त किया कि इस समझौते का निरंतर उपयोग भारत–यूके व्यापार को मजबूत करेगा और वर्तमान में विचाराधीन अन्य व्यापारिक पहलों को आगे बढ़ाने के प्रयासों को प्रोत्साहित करेगा।
समझौते के लागू होने के अवसर पर, भारत–यूके सीईटीए की अधिमान्य शुल्क प्रणाली के तहत पहली निर्यात खेपों को रवाना करने के लिए पूरे देश में कार्यक्रम आयोजित किए गए। दिन भर में, 20 से अधिक बंदरगाहों, हवाई अड्डों, इनलैंड कंटेनर डिपो (आईसीडी), विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईज़ेड) और कारखानों से 140 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक मूल्य के 50 से अधिक निर्यात खेपों को रवाना किया गया। इन खेपों में इलेक्ट्रॉनिक्स, औषधियां तथा रत्न एवं आभूषण सहित उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल हैं। इन्हें मुंद्रा, न्हावा शेवा तथा चेन्नई के समुद्री बंदरगाहों सहित विभिन्न स्थानों से, साथ ही मुंबई (सहार), कोलकाता और हैदराबाद के हवाई मालवाहक परिसरों से निर्यात किया गया।
इस अवसर पर बोलते हुए, भारत में ब्रिटेन की उच्चायुक्त, सुश्री लिंडी कैमरून ने इस समझौते के लागू होने को एक ऐतिहासिक मील का पत्थर और यूके–भारत उन्नत द्विपक्षीय संबंधों का प्रमाण बताया।
द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने कहा कि 2025 में भारत, यूनाइटेड किंगडम का 11वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था, जहां दोनों देशों के बीच वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार लगभग 48 अरब पाउंड तक पहुंच गया था। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच निवेश संबंध 7 लाख से अधिक नौकरियों को समर्थन देते हैं।
सुश्री कैमरून ने कहा कि यह समझौता एक ऐसी संरचना प्रदान करता है जो दोनों देशों के व्यवसायों को अधिक व्यापार करने, अधिक निवेश करने, अधिक नवाचार करने और साथ मिलकर विकास करने में सक्षम बनाएगा। उन्होंने इसे एक व्यापक, ज्यादा महत्वाकांक्षी एवं भविष्य-केंद्रित साझेदारी की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया।
इसके दीर्घकालिक आर्थिक प्रभाव का उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा कि इस समझौते से दीर्घावधि में द्विपक्षीय व्यापार में प्रतिवर्ष 25 बिलियन पाउंड से अधिक की वृद्धि होने की उम्मीद है और यह यूके के जीडीपी तथा भारत के जीडीपी दोनों में प्रतिवर्ष लगभग 5 बिलियन पाउंड का योगदान देगा। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के व्यवसायों के लिए व्यापार को अधिक सरल, तेज़ एवं ज्यादा किफायती बनाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि यह समझौता भारतीय व्यवसायों को लगभग 99 प्रतिशत शुल्क लाइनों पर शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगा, जिसमें यूके को होने वाला लगभग सारा भारतीय निर्यात शामिल है। वहीं यूके के व्यवसायों को 90 प्रतिशत शुल्क लाइनों पर शुल्क में कटौती या उसकी पूर्ण समाप्ति का फ़ायदा मिलेगा, जिसमें भारत में होने वाले यूके का 92 प्रतिशत मौजूदा निर्यात शामिल है।
उच्चायुक्त ने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह समझौता केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है बल्कि सीमा शुल्क, डिजिटल व्यापार, वित्तीय सेवाओं, दूरसंचार, बौद्धिक संपदा, पेशेवर सेवाओं, पारदर्शिता एवं विनियमन में सहयोग को भी मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि यह समझौता उन्नत विनिर्माण, खाद्य एवं पेय, जीवन विज्ञान, ऊर्जा, उपभोक्ता वस्तुएं, वस्त्र, परिधान, इंजीनियरिंग उत्पाद, समुद्री उत्पाद तथा रसायन सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण अवसर उत्पन्न करेगा।
उन्होंने छोटे एवं मध्यम उद्यमों (एसएमई) तथा उपभोक्ताओं के लिए होने वाले लाभों की भी बात की और कहा कि यह समझौता एसएमई को अपनी पहुंच का विस्तार करने में मदद करेगा, जबकि उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प, अधिक मज़बूत प्रतिस्पर्धा और बेहतर मूल्य प्रदान करेगा।
यह उल्लेख करते हुए कि समझौता अब वार्ता एवं हस्ताक्षर के चरण से आगे बढ़कर कार्यान्वयन के चरण में पहुंच चुका है, सुश्री कैमरून ने कहा कि नई संरचना के तहत दोनों देशों के बीच वस्तुओं का आवागमन पहले ही शुरू हो चुका है और इस बात पर बल दिया कि इसका सफल कार्यान्वयन यह सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा कि व्यवसाय, श्रमिक एवं उपभोक्ता इसके सभी लाभों को प्राप्त कर सकें।
सीईटीए के लागू होने के भाग के रूप में, समझौते के तहत पहले मूल प्रमाणपत्र निर्यातकों को वितरित किए गए। ये प्रमाणपत्र eCoO 2.0 प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से स्व-प्रमाणीकरण के आधार पर जारी किए गए। पहले ही दिन मूल प्रमाणपत्रों का डिजिटल, स्व-प्रमाणित होना अनुपालन संबंधी जिम्मेदारियों एवं लेन-देन लागत को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए।
उद्योग संघों, निर्यात संवर्धन परिषदों और निर्यातकों के प्रतिनिधियों ने इस समझौते के लागू होने का स्वागत किया और कहा कि शुल्क-मुक्त पहुंच, सरल प्रमाणन प्रक्रियाओं तथा व्यवसाय-अनुकूल नियमों के साथ, यूके के बाज़ार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
उद्योग प्रतिनिधियों ने आशा व्यक्त किया कि यह समझौता भारतीय वस्तुओं को दुनिया के सबसे उन्नत बाज़ारों में से एक तक बेहतर पहुंच प्रदान करके विकसित भारत के दृष्टिकोण को सार्थक रूप से आगे बढ़ाने में योगदान देगा। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारतीय निर्यातकों को अन्य देशों के प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले समान अवसर प्रदान करेगा और भारत एं यूनाइटेड किंगडम के बीच आर्थिक साझेदारी को एक नए स्तर पर लेकर जाएगा।
उद्योग जगत के नेताओं ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि श्रम-प्रधान क्षेत्रों को बढ़ावा देकर यह समझौता महिला उद्यमियों, एमएसएमई, युवाओं एवं छात्रों के लिए नए अवसर उत्पन्न करेगा, जिससे गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजित होंगे एवं समावेशी विकास को समर्थन मिलेगा।
मुंबई में, महाराष्ट्र सरकार ने मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में भारत–यूके सीईटीए का औपचारिक उद्घाटन समारोह का आयोजन किया। समझौते के तहत अधिमान्य व्यापार की शुरुआत को चिह्नित करने के लिए, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और यूनाइटेड किंगडम के उप उच्चायुक्त ने ट्रॉलियों पर रखे गए विशेष रूप से चयनित उत्पादों के बक्सों का औपचारिक आदान-प्रदान किया, जो भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच द्विपक्षीय व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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पीके/केसी/एके
(रिलीज़ आईडी: 2285218)
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