पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास मंत्रालय
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 केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री (डीओएनईआर) ज्योतिरादित्य  सिंधिया ने 13वीं एनईएसएसी बैठक में भाग लिया

केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने पूर्वोत्तर के लिए भविष्य के लिए तैयार अंतरिक्ष-आधारित विकास रणनीति का आह्वान किया

उन्होंने पूर्वोत्तर में कृषि, आपदा प्रबंधन और अवसंरचना नियोजन को गति देने के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, भू-स्थानिक खुफिया जानकारी, ड्रोन और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करने की बात कही

 प्रधानमंत्री मोदी के प्रौद्योगिकी-आधारित विकास के दृष्टिकोण और गृह मंत्री अमित शाह के भविष्य के लिए तैयार पूर्वोत्तर के आह्वान के अनुरूप ये पहल हैं

प्रविष्टि तिथि: 04 JUN 2026 8:31PM by PIB Delhi

केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री (डीओएनईआर) ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज शिलांग में उत्तर पूर्वी अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (एनईएसएसी) सोसायटी की बैठक में भाग लिया। इस बैठक में मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा, डीओएनईआर राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार, एनईएसएसी सोसायटी के उपाध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव एवं इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन सहित केंद्र और पूर्वोत्तर राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

एक मेज पर बैठे पुरुषों का एक समूह - एआई द्वारा उत्पन्न सामग्री गलत हो सकती है।

श्री सिंधिया ने इस बैठक को संबोधित करते हुए  क्षेत्रीय विकास, आपदा तैयारियों, जलवायु-अनुकूल शासन, वैज्ञानिक नवाचार और डेटा-आधारित नीति निर्माण के लिए एनईएसएसी को एक परिवर्तनकारी संस्था के रूप में स्थापित करने हेतु पांच रणनीतिक पहलों की रूपरेखा प्रस्तुत की। इनमें उच्च-स्पष्टता वाला ग्राम संसाधन मानचित्रण; आर्द्रभूमि, वन, नदियों और भूदृश्यों की नियमित निगरानी, पूर्वोत्तर में भू-स्थानिक और अंतरिक्ष-प्रौद्योगिकी स्टार्टअप को प्रोत्साहन, सभी तरह के -खतरे वाली आपदा से निपटने की क्षमता वाले डिजिटल ट्विन प्लेटफॉर्म, एनईआर-शील्ड का विकास और पूर्वोत्तर हरित संपदा एवं प्राकृतिक पूंजी लेखांकन ढांचा तैयार करना शामिल हैं।

इस बैठक में एनईएसएसी परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई और पूर्वोत्तर क्षेत्र में विकास को गति देने के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, उपग्रह अनुप्रयोगों और भू-स्थानिक खुफिया जानकारी का लाभ उठाने हेतु भविष्य की कार्ययोजना पर विचार-विमर्श किया गया। विचार-विमर्श में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रौद्योगिकी-आधारित विकास के दृष्टिकोण की झलक मिली और केंद्रीय गृह मंत्री तथा एनईएसएसी सोसायटी के अध्यक्ष अमित शाह द्वारा प्रतिपादित पूर्वोत्तर के लिए भविष्य-तैयार रणनीति को आगे बढ़ाया गया।

सूट और टाई पहने एक व्यक्ति के बगल में सूट पहने एक और व्यक्ति खड़ा है। एआई-जनित सामग्री गलत हो सकती है।

त्रिपुरा में आयोजित 12वीं एनईएसएसी बैठक के बाद से अब तक कृषि, आपदा प्रबंधन, मौसम सेवाएं, संचार, प्राकृतिक संसाधन मानचित्रण, अवसंरचना नियोजन और ग्रामीण विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों में 50 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं जबकि 78 परियोजनाएं पूरी होनी बाकी हैं। एनईएसएसी द्वारा शुरू की गई कई प्रमुख पहलों की समीक्षा की गई जिनमें कृषि उत्पादकता में सुधार के लिए फसल प्रणाली विश्लेषण, असम और मेघालय में बांस और अगरवुड संसाधन मानचित्रण, मौसम और जलवायु सेवाएं, उपग्रह आधारित संचार सहायता और एनई-स्पार्क्स जैसे आउटरीच कार्यक्रम शामिल हैं। इसके माध्यम से पूर्वोत्तर राज्यों के 786 छात्रों ने इसरो सुविधाओं का दौरा किया।

बैठक में विजन एनईएसएसी रोडमैप की भी समीक्षा की गई जिसमें अंतरिक्ष-आधारित शासन और नवाचार के माध्यम से क्षेत्र के चरणबद्ध परिवर्तन की परिकल्पना की गई है जो स्मार्ट एनालिटिक्स से स्मार्ट क्षेत्र और अंततः एक स्वायत्त पारिस्थितिकी तंत्र की ओर प्रगति करेगा।

डोनर और एनईएसएसी के बीच दीर्घकालिक साझेदारी पर प्रकाश डालते हुए सिंधिया ने कहा कि एनईएसएसी और डोनर का अपने शुरुआती दौर से ही एक अटूट रिश्ता रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दूरदर्शी नेतृत्व में स्थापित ये दोनों संस्थान विकास और परिवर्तन के साधन के रूप में पिछले 26 वर्षों से लगातार पूर्वोत्तर के आठ राज्यों की सेवा कर रहे हैं।

टेबलों पर बैठे लोगों का एक समूह। एआई द्वारा उत्पन्न सामग्री गलत हो सकती है।

उन्होंने कहा कि पिछली सोसाइटी मीटिंग के बाद से 50 परियोजनाओं का पूरा होना इस क्षेत्र में 4.5 करोड़ से अधिक लोगों की विकास आकांक्षाओं का समर्थन करने वाले एक मूल्यवान डिजिटल ज्ञान आधार के निर्माण का प्रतिनिधित्व करता है।

श्री सिंधिया ने अगरवुड की खेती और मूल्य-श्रृंखला विकास की आर्थिक क्षमता पर भी प्रकाश डाला, और कहा कि भू-स्थानिक मानचित्रण और पता लगाने योग्य प्रणालियाँ पूर्वोत्तर के किसानों और उद्यमियों के लिए नए अवसर खोल सकती हैं।

आपदा से निपटने की क्षमता को मजबूत करने के लिए श्री सिंधिया ने दूरसंचार नेटवर्क से एकीकृत अति-स्थानीय, बहुभाषी अंतिम-मील चेतावनी प्रणालियों की आवश्यकता पर बल दिया और भूस्खलन तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं के लिए भू-स्थानिक जोखिम निगरानी उपकरणों के विस्तार की सिफारिश की। कृषि क्षेत्र में उन्होंने उत्पादकता का पता लगाने की क्षमता और बाजार तक पहुंच में सुधार के लिए किसान-हितैषी सटीक कृषि प्लेटफार्मों और अगरवुड सहित उच्च मूल्य वाले और जीआई-टैग वाले उत्पादों के लिए भू-स्थानिक रजिस्टरों के उपयोग की वकालत की। अवसंरचना विकास के लिए उन्होंने परियोजना नियोजन, जोखिम मूल्यांकन और कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए भू-स्थानिक निर्णय-सहायता प्रणालियों के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने ड्रोन प्रौद्योगिकियों की क्षमता पर भी प्रकाश डाला और नमो ड्रोन दीदी पहल के साथ समन्वय सहित युवाओं और महिलाओं के लिए आजीविका और कौशल विकास के अवसर पैदा करने के लिए एनईएसएसी की यूएवी क्षमताओं का लाभ उठाने का सुझाव दिया।

ट्रॉफी पकड़े हुए व्यक्ति द्वारा प्रदर्शित कृत्रिम कृत्रिम सामग्री गलत हो सकती है।

एनईएसएसी की क्षमताओं को मजबूत करने में इसरो के योगदान का उल्लेख करते हुए श्री सिंधिया ने कहा कि इसरो की भागीदारी ने एनईएसएसी के प्रयासों को नई गति प्रदान की है। चंद्रयान-3 और आदित्य-11 जैसे मिशन भारत की तकनीकी उत्कृष्टता और उल्लेखनीय दक्षता के साथ असाधारण परिणाम प्राप्त करने की हमारी क्षमता को प्रदर्शित करते हैं।

अपने संबोधन के समापन में मंत्री ने कहा कि  गृह मंत्री अमित शाह द्वारा परिकल्पित भविष्य के लिए तैयार रणनीति को हमें अपनाना होगा जो पूर्वोत्तर में शासन को बदलने, लचीलापन मजबूत करने और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, भू-स्थानिक खुफिया जानकारी, संचार अवसंरचना और नवाचार का लाभ उठाती है।

बैठक का समापन एनईएसएसी, इसरो, डीओएनईआर और पूर्वोत्तर राज्यों की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और नवाचार का लाभ उठाने की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि के साथ हुआ ताकि पूरे क्षेत्र में समावेशी, टिकाऊ और भविष्य के लिए तैयार विकास को गति मिल सके।

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पीके/केसी/एनकेएस/डीए


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