सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय का चंडीगढ़ में राष्ट्रीय चिंतन शिविर, दूसरे दिन राज्यों और केंद्र के बीच गहन चर्चा के साथ 'विजन से एक्शन' की ओर बढ़े कदम
केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार चिंतन शिविर के दूसरे दिन के सत्रों में हुए शामिल, केंद्र और राज्यों के बीच गहन विचार-विमर्श पर रहा जोर
केंद्रीय राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा ने राष्ट्रीय चिंतन शिविर में दूसरे दिन के विचार-विमर्श को "सार्थक और व्यावहारिक अनुभव पर आधारित" बताया
केंद्रीय राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा के नेतृत्व में सुबह के योग सत्र के साथ चिंतन शिविर के दूसरे दिन की शुरुआत हुई, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ विषय-आधारित चर्चाओं का मार्ग प्रशस्त हुआ
पाँच अलग-अलग समूहों ने छात्रवृत्ति सुधार, नशामुक्त भारत, श्रम की गरिमा, सम्मानजनक वृद्धावस्था और दिव्यांग बच्चों की प्रारंभिक पहचान एवं सहायता जैसे विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया
प्रविष्टि तिथि:
25 APR 2026 6:51PM by PIB Delhi
"अंत्योदय का संकल्प, अमृत काल का प्रतिबिंब – विकसित भारत @2047" विषय पर आधारित तीन दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर का आज चंडीगढ़ में दूसरा दिन रहा। चंडीगढ़ में आयोजित इस शिविर के दूसरे दिन का मुख्य फोकस सामुदायिक जुड़ाव को मजबूत करने, सार्वजनिक-निजी-जन भागीदारी को बढ़ावा देने और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से सामाजिक न्याय योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने पर रहा। समावेशी और जवाबदेह गवर्नेंस पर उद्घाटन सत्र के दौरान दिए गए जोर को आगे बढ़ाते हुए, आज के विचार-विमर्श में देश भर से मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने एक साथ मिलकर समयबद्ध और कार्यान्वयन योग्य समाधानों पर काम किया। इस सत्र का उद्देश्य गवर्नेंस की पारदर्शिता को बढ़ाना और ऐसी नीतियों को धरातल पर उतारना है जो विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में सहायक हों।
दिन की शुरुआत एक संयुक्त योग सत्र के साथ हुई, जिसमें सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (एमओएसजेई) के वरिष्ठ अधिकारियों, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों और अन्य प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इस सत्र में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा ने अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ सहभागिता की। इस कार्यक्रम ने दिनभर की कार्यवाही के लिए स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और सहभागिता का वातावरण तैयार किया तथा सामाजिक न्याय की सेवाओं को प्रदान करने में मंत्रालय के समग्र और व्यक्ति-केंद्रित दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
“सामुदायिक सहभागिता का लाभ उठाना और बेहतर सामाजिक न्याय वितरण हेतु सार्वजनिक-निजी-जन भागीदारी (पीपीपीपी) मॉडल की संभावनाएं तलाशना” विषय पर आयोजित थीमैटिक ब्रेकफास्ट के दौरान प्रतिभागियों ने इस बात पर चर्चा की कि कैसे स्थानीय समुदाय, नागरिक समाज संगठन और निजी क्षेत्र के संस्थान सबसे वंचित वर्गों तक पहुँचने के लिए सरकारी प्रयासों के पूरक बन सकते हैं। इस संवाद में ऐसे व्यावहारिक पीपीपीपी मॉडलों पर प्रकाश डाला गया जो नशामुक्ति, वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल, छात्रवृत्ति वितरण, स्वच्छता कर्मियों को सहायता और कमजोर वर्गों के पुनर्वास जैसे कार्यों को और अधिक सशक्त बना सकते हैं।
दूसरे दिन के सत्रों के दौरान, केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार कार्यवाही में शामिल हुए और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के साथ हो रही विषय-आधारित चर्चाओं का बारीकी से अवलोकन किया। शिविर के समग्र उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने इस बात को दोहराया कि सामाजिक क्षेत्र में 'विकसित भारत @2047' का विजन पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति के लिए गरिमा, सुलभता और निरंतरता के तीन स्तंभों पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ इस विचार-विमर्श का मुख्य उद्देश्य 'कल्याण से सशक्तिकरण' की ओर बढ़ना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह तभी संभव है जब कागजों पर स्वीकृत लाभ विद्यार्थियों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और अन्य वंचित समूहों के लिए धरातल पर निर्बाध और उपयोगकर्ता के अनुकूल सेवाओं के रूप में परिवर्तित हों।
चिंतन शिविर की प्रक्रिया की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए, सचिव (सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग) श्री सुधांश पंत ने बताया कि इस शिविर के लिए दस प्रमुख विषयों की पहचान की गई है—जिनमें से सात सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग से और तीन दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) से संबंधित हैं। चर्चा को प्रभावी बनाने के लिए प्रतिभागियों को पाँच विषय-आधारित समूहों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक समूह का मार्गदर्शन एक लीड कोऑर्डिनेटर और रैपोर्टियर कर रहे हैं। इन समूहों का उद्देश्य सामान्य चर्चा के बजाय ऐसे संक्षिप्त प्रेजेंटेशन तैयार करना है, जिनमें मुख्य नीतिगत मुद्दे, क्रियान्वयन में आने वाली कमियाँ, सर्वोत्तम कार्यप्रणाली और समय-सीमा के साथ स्पष्ट कार्य-बिंदु शामिल हों।
दूसरे दिन के ब्रेकआउट सत्र के दौरान, पाँच विषय-आधारित समूहों ने 'विकसित भारत 2047' रूपरेखा के तहत अपने विषयों के पहले सेट पर विस्तृत चर्चा की।
समूह-I ने “शिक्षा से समृद्धि: छात्रवृत्ति वितरण और शैक्षिक पहुंच का सुदृढ़ीकरण” विषय पर चर्चा की। इस चर्चा का मुख्य केंद्र छात्रवृत्ति तक समयबद्ध और निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करना, सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में इसके समान क्रियान्वयन, सत्यापन और वितरण की प्रक्रिया में तेजी लाना, शिकायत निवारण प्रणाली में सुधार और छात्रों के समग्र कल्याण पर ध्यान केंद्रित करना रहा।
समूह-II ने “नशामुक्त भारत: नशामुक्ति और पुनर्वास इकोसिस्टम का सुदृढ़ीकरण” विषय पर कार्य किया। इस दौरान उपचार और पुनर्वास सुविधाओं के विस्तार, डिजिटल निगरानी, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और समुदाय-आधारित आउटरीच (जनसंपर्क) बढ़ाने पर विस्तार से विचार किया गया।
समूह-III ने “श्रम की गरिमा : डिग्निटी इन लेबर” विषय पर विचार-विमर्श किया। इसमें मैनहोल से मशीन-होल प्रणाली की ओर बढ़ने (मैन्युअल सफाई की जगह मशीनी सफाई), स्वच्छता कार्यों के दौरान शून्य मृत्यु दर सुनिश्चित करने के लक्ष्य (मिशन ज़ीरो) और स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा, गरिमा तथा सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया।
समूह-IV ने “सम्मानजनक वृद्धावस्था: भारत में समग्र दृष्टिकोण और बुनियादी ढांचा सहायता प्रणालियों के साथ अपनों के बीच वृद्धावस्था” विषय पर चर्चा की। इस सत्र का मुख्य ध्यान वृद्धों की देखभाल हेतु बुनियादी ढांचे, सामाजिक और वित्तीय सुरक्षा, तथा व्यापक योजनाओं और कानूनी ढांचे के बेहतर उपयोग पर केंद्रित रहा।
समूह-V ने “नन्हे कदम स्वावलंबन की ओर: प्रारंभिक सहायता” विषय पर चर्चा की। इस सत्र का मुख्य केंद्र दिव्यांग बच्चों और विकासात्मक चुनौतियों का सामना कर रहे बच्चों की समय रहते पहचान और उपचार सुनिश्चित करना था। साथ ही, सामुदायिक स्तर पर विभिन्न सरकारी सेवाओं के एकीकरण पर भी विशेष जोर दिया गया।
इन समूह चर्चाओं के दौरान, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने धरातल पर आने वाली बाधाओं को साझा किया और अपने यहाँ के सफल नवाचारों का प्रदर्शन किया। इनमें छात्रवृत्ति वितरण की बेहतर प्रणालियाँ, एकीकृत नशामुक्ति निगरानी प्लेटफॉर्म, वरिष्ठ जन देखभाल मॉडल और प्रारंभिक सहायता रणनीतियाँ शामिल रहीं। चर्चा का मुख्य जोर हितधारकों पर केंद्रित ऐसे विशिष्ट कार्य-बिंदु तैयार करने पर रहा, जिन्हें मंत्रालय के दिशा-निर्देशों, 'समावेश' और 'सेतु' जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्मों और केंद्र-राज्य के बीच मजबूत समन्वय के माध्यम से आगे बढ़ाया जा सके।
“सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (एमओएसजेई) में अंतिम छोर तक सेवा वितरण और कार्यान्वयन तंत्र को मजबूत करना” विषय पर आयोजित थीमैटिक लंच ने मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों को जिला स्तर पर आने वाली चुनौतियों, प्रक्रियाओं के सरलीकरण और डेटा-आधारित निगरानी पर विचार करने का अवसर प्रदान किया। चर्चा के दौरान एक समान छात्रवृत्ति प्रणाली, सुव्यवस्थित नशामुक्ति एवं पुनर्वास मार्ग और एक मजबूत निगरानी ढांचे की आवश्यकता को दोहराया गया, जिसमें केंद्र, राज्य और जिला स्तर पर जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया हो।
दिन की कार्यवाही के समापन पर, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा ने इन चर्चाओं को "सार्थक और व्यावहारिक अनुभव पर आधारित" बताया। उन्होंने सहभागी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उनके स्पष्ट सुझावों और रचनात्मक इनपुट के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय चिंतन शिविर "केवल तीन दिनों का आयोजन नहीं है, बल्कि अंतिम छोर तक सेवाओं की पहुँच को मजबूत करने का एक सामूहिक संकल्प है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक छात्रवृत्ति, वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली हर सहायता और नशामुक्त भारत या दिव्यांगजनों के लिए किए गए सभी प्रयास, लक्षित लाभार्थी तक ससम्मान और बिना किसी विलंब के पहुँचें।" उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समूह चर्चा से निकलने वाले सुझाव मंत्रालय और राज्यों को विचारों से कार्यान्वयन की ओर एक साथ बढ़ने में मदद करेंगे।
दूसरे दिन के विचार-विमर्श से प्राप्त सुझावों को अंतिम दिन और अधिक परिष्कृत किया जाएगा। शिविर के समापन दिवस पर समूह अपने विषयों के दूसरे सेट पर चर्चा करेंगे, जो अंत्योदय से आत्मनिर्भरता, समावेशन–पहचान–एकीकरण, आर्थिक सशक्तिकरण तथा दिव्यांगजनों के लिए सुलभता एवं प्रमाणन से संबंधित होंगे। ये प्रयास वर्ष 2047 तक एक अधिक न्यायपूर्ण, समावेशी और सुलभ 'विकसित भारत' के निर्माण में अपना योगदान देंगे।















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पीके/केसी/डीवी/डीए
(रिलीज़ आईडी: 2255572)
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