रेल मंत्रालय
भारतीय रेल ने संचार और कवच प्रणाली के उन्नयन के लिए 1,236 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी
मध्य रेलवे के पाँचों मंडलों में 623.63 करोड़ रुपये की लागत से ड्यूल फाइबर संचार नेटवर्क स्थापित किया जाएगा
गुजरात के राजकोट और भावनगर मंडलों में 302.26 करोड़ रुपये की लागत से फाइबर संचार नेटवर्क पूरा किया जाएगा
तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के उच्च-यातायात वाले 548 किमी मार्गों पर 310.18 करोड़ रुपये की लागत से कवच 4.0 टक्कर-रोधी प्रणाली लागू की जाएगी
प्रविष्टि तिथि:
25 MAR 2026 8:35PM by PIB Delhi
भारतीय रेल ने लगभग 1,236 करोड़ रुपये की लागत वाली कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनका उद्देश्य संचार व्यवस्था को अद्यतन करना और विभिन्न ज़ोन में कवच स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली का विस्तार करना है। इन मंजूरियों में तीन अलग-अलग प्रस्ताव शामिल हैं। इनमें से दो प्रस्ताव मध्य और पश्चिम रेलवे में ऑप्टिकल फाइबर और ग्राउंड वायर इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास से संबंधित हैं, जबकि एक प्रस्ताव दक्षिण रेलवे के उच्च उपयोग वाले मार्गों पर कवच प्रणाली के कार्यान्वयन से जुड़ा है।
मध्य रेलवे को उन्नत फाइबर नेटवर्क मिलेगा: 623.63 करोड़ रुपये
मध्य रेलवे के पूरे नेटवर्क में मजबूत, ड्यूल-पाथ संचार व्यवस्था विकसित करने के लिए दो पूरक कार्यों को मंजूरी दी गई है, जो इसके पाँचों मंडलों — सोलापुर, नागपुर, पुणे, भुसावल और मुंबई — को कवर करेंगे।
पहले चरण में, ओपीजीडब्ल्यू (96 फाइबर) नामक एक विशेष प्रकार की कंपोजिट ओवरहेड वायर को मौजूदा 25 केवी इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन लाइनों के साथ 2,250.68 आरकेएम पर स्थापित किया जाएगा। इसके तहत सोलापुर, नागपुर, पुणे और भुसावल मंडलों को कवर किया जाएगा। यह वायर एक साथ दो काम करती है: यह ट्रैक्शन सिस्टम के लिए अर्थ प्रोटेक्शन वायर का काम करती है और साथ ही संचार के लिए ऑप्टिकल फाइबर भी प्रदान करती है। चूंकि यह मौजूदा ट्रैक्शन टावरों पर ही लगाई जाएगी, इसलिए किसी नए सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता नहीं होगी। इसकी लागत 238.9363 करोड़ रुपये है।
दूसरे चरण में, अंडरग्राउंड ऑप्टिकल फाइबर केबल (2x48 फाइबर) को ट्रैक के एक तरफ 2,673.21 आरकेएम तक बिछाया जाएगा। इसके तहत सोलापुर, पुणे, नागपुर, भुसावल और मुंबई —पाँचों मंडलों को कवर किया जाएगा। दूसरी तरफ लगाए गए ओपीजीडब्ल्यू के साथ मिलकर यह प्रत्येक रूट पर दो स्वतंत्र फाइबर मार्ग तैयार करेगा, जिससे किसी एक मार्ग के फेल होने पर भी संचार नेटवर्क लगातार चालू रहेगा। इसकी लागत 384.6887 करोड़ रुपये है।
अतिरिक्त फाइबर क्षमता को ‘डार्क फाइबर’ के रूप में लीज पर भी दिया जाएगा, जिससे भारतीय रेल को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा।
दक्षिण रेलवे पर कवच सुरक्षा प्रणाली का 548 किमी तक विस्तार: 310.18 करोड़ रुपये
कवच भारतीय रेल की स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जो दो ट्रेनों के आमने-सामने आने या किसी ट्रेन द्वारा सिग्नल को खतरे की स्थिति में पार करने पर स्वतः ब्रेक लगाकर टक्कर को रोकती है। इस मंजूरी के तहत इसे तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के उच्च-यातायात वाले मार्गों पर लागू किया जाएगा।
इस स्वीकृति के अंतर्गत, दक्षिण रेलवे के दो खंडों पर कवच संस्करण 4.0 को तैनात किया जाएगा:
जोलारपेट्टई–इरोड (180 आरकेएम, सलेम मंडल) और चेन्नई बीच – तांबरम – चेंगलपट्टू (60 किमी, चेन्नई मंडल) खंडों पर, नवीन ऑप्टिकल फाइबर केबलिंग के साथ। लागत: 158.74 करोड़ रुपये ।
शोरनूर–मैंगलोर (308 किमी, पालक्काड मंडल) - नए 4x48 फाइबर ओएफसी केबलिंग के साथ। लागत: 151.44 करोड़ रुपये ।
ये कार्य दक्षिण रेलवे की 2,950 करोड़ रुपये की सब-अम्ब्रेला परियोजना का हिस्सा हैं।
पश्चिम रेलवे राजकोट और भावनगर मंडलों के लिए फाइबर बैकबोन पूरा करेगा: 302.2589 करोड़ रुपये
गुजरात में पश्चिम रेलवे के दो मंडलों के शेष हिस्सों पर ऑप्टिकल फाइबर केबल (2x48 फाइबर, ट्रैक के दोनों ओर) बिछाए जाएंगे — राजकोट मंडल में 1,064 किमी और भावनगर मंडल में 589 किमी, कुल मिलाकर 1,653 किमी। इससे इन मंडलों के फाइबर संचार नेटवर्क की अंतिम कमी भी पूरी हो जाएगी।
कवच और एलटीई आधारित ट्रेन नियंत्रण प्रणालियों के विश्वसनीय संचालन के लिए एक मजबूत फाइबर बैकबोन अत्यंत आवश्यक है। इस नेटवर्क के पूरा होने से पश्चिम रेलवे में कवच के कार्यान्वयन को बिना किसी देरी के आगे बढ़ाया जा सकेगा। ये सभी कार्य पश्चिम रेलवे की 2,800 करोड़ रुपये की सब-अम्ब्रेला परियोजना का हिस्सा हैं।
समग्र प्रभाव
ये परियोजनाएं भारतीय रेल की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं, जिसके तहत उन्नत संचार प्रणालियों और सुरक्षा तकनीकों के एकीकरण के माध्यम से बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। ट्रैक्शन से जुड़ी संचार प्रणालियों को मजबूत करना और ओएफसी नेटवर्क का विस्तार, कवच प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे संचालन क्षमता में सुधार होगा, सुरक्षा बढ़ेगी और देशभर में भविष्य के लिए तैयार रेलवे संचालन को सक्षम बनाया जा सकेगा।
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पीके/केसी/आरके/ डीए
(रिलीज़ आईडी: 2245475)
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