रेल मंत्रालय
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रेल-पर-ट्रक: भारतीय रेलवे के समर्पित माल ढुलाई गलियारे द्वारा संचालित एक रणनीतिक परिवहन बदलाव


सड़क दक्षता को रेल दक्षता के साथ मिलाकर; रेल-पर-ट्रक, बहु-मॉडल एकीकरण के माध्यम से लंबी दूरी के माल परिवहन को अनुकूलित करता है, उत्सर्जन, भीड़भाड़ और लॉजिस्टिक लागत को कम करता है

प्रविष्टि तिथि: 22 JAN 2026 5:46PM by PIB Delhi

जैसे-जैसे भारत की अर्थव्यवस्था बढ़ रही है और खपत में विविधता आ रही है, माल परिवहन में तेज़ी से वृद्धि हुई है, जिससे सड़क परिवहन, ईंधन उपयोग और वायु गुणवत्ता पर दबाव बढ़ा है। इसे हल करने के लिए, भारतीय रेलवे ने अपने दूरदर्शी समर्पित माल ढुलाई गलियारा (डीएफसी) पहल के माध्यम से अभिनव रेल-पर-ट्रक (टीओटी) सेवा शुरू की है। यह योजना भारतीय रेलवे की दीर्घकालिक माल परिवहन परिवर्तन रणनीति के हिस्सा के रूप में बनाई गई थी, डीएफसी नेटवर्क वह ढांचा प्रदान करता है जो नई पीढ़ी की बहु-मॉडल लॉजिस्टिक्स को सक्षम बनाता है।

टीओटी भारतीय रेलवे के समर्पित माल ढुलाई गलियारा कार्यक्रम के तहत विकसित विद्युत रेल अवसंरचना की दक्षता और पर्यावरणीय लाभों के साथ सड़क परिवहन के लचीलेपन को जोड़ता है। इस सेवा के तहत माल से लदे ट्रकों को विशेष रूप से संशोधित फ्लैट वैगनों पर समर्पित माल ढुलाई गलियारा के माध्यम से ले जाया जाता है। ट्रक लंबे और भारी यातायात वाली राजमार्ग यात्रा से बचते हैं और मुख्य मार्ग के लिए रेल द्वारा यात्रा करते हैं। इसके बाद वे केवल प्रथम-मील और अंतिम-मील तक छोटी सड़क यात्राएं पूरी करते हैं।

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किफायती लेकिन भरोसेमंद

वर्तमान में, टीओटी सेवा पश्चिमी डीएफसी नेटवर्क पर न्यू रेवाड़ी और न्यू पालनपुर के बीच संचालित होती है। जैसे-जैसे अवसंरचना का विकास होगा, इसका विस्तार अतिरिक्त खंडों तक किया जाएगा। न्यू पालनपुर–न्यू रेवाड़ी कॉरिडोर पर, यह सेवा लगभग 636 किलोमीटर तक फैली हुई है, जो सड़क मार्ग से लगभग 30 घंटे लगने वाले सफर को टीओटी सेवा के माध्यम से लगभग 12 घंटे में पूरा कर देती है। यह एकीकृत सड़क–रेल समाधान परिवहन की विश्वसनीयता बढ़ाता है, वापसी (टर्नअराउंड) समय को कम करता है, और लॉजिस्टिक्स की कुल लागत में कमी लाता है, इसके साथ ही लंबी दूरी के माल परिवहन को राजमार्ग परिवहन की कई अनिश्चितताओं से सुरक्षित रखता है।

टीओटी की एक प्रमुख ताकत इसकी सरल और प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य संरचना में निहित है। माल ढुलाई शुल्क पारदर्शी वजन श्रेणी के आधार पर लिया जाता है: 25 टन तक के ट्रकों के लिए ₹25,543 प्रति वैगन, 25-45 टन के लिए ₹29,191, और 45-58 टन के लिए ₹32,000, जबकि खाली ट्रकों के लिए शुल्क केवल ₹21,894 प्रति वैगन है। डेयरी क्षेत्र का और अधिक समर्थन करने के लिए, दूध टैंकरों पर कोई जी एस टी नहीं लगाया जाता है, जिससे यह सेवा समय-संवेदनशील और खराब होने वाले माल के लिए विशेष रूप से आकर्षक हो जाती है। संचालन में लचीलापन बढ़ाने के लिए, जनवरी 2024 से खुली मांगपत्र (ओपन इंडेंट) बुकिंग उपलब्ध है, जिससे ग्राहक अपनी गतिशील लॉजिस्टिक्स आवश्यकताओं के अनुसार परिवहन की योजना बना सकते हैं।

वर्तमान वित्त वर्ष का परिचालन डेटा, सेवा की बढ़ती लोकप्रियता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। वित्त वर्ष 2025 (अप्रैल–दिसंबर) के दौरान, रेल-पर-ट्रक सेवा ने कुल 545 रेक्स को संभाला, 3 लाख टन से अधिक माल को स्थानांतरित किया और ₹36.95 करोड़ का राजस्व अर्जित किया। यह मात्रा टीओटी के पायलट-चरण नवाचार की बजाय एक वाणिज्यिक रूप से व्यावहारिक और पैमाना बढ़ाने योग्य लॉजिस्टिक्स उत्पाद के रूप में उभरने को रेखांकित करती है।

मूल केंद्र प्रदर्शन पर करीब से नजर डालने से इसकी ताकत स्पष्ट रूप से सामने आती है। केवल न्यू पालनपुर ने ही 273 रैक संभाले, लगभग 2 लाख टन से अधिक माल को संभाला और ₹20.18 करोड़ का राजस्व अर्जित किया, जो पश्चिमी भारत के माल ढुलाई क्लस्टर, विशेष रूप से डेयरी और एफएमसीजी क्षेत्र द्वारा उत्साह से अपनाने को दर्शाता है। न्यू रेवाड़ी ने परिचालन दृष्टि से लगभग समान योगदान दिया, 272 रैक संभाले, लगभग 0.1004 मिलियन टन माल की आवाजाही की और ₹16.76 करोड़ का राजस्व अर्जित किया। साथ मिलकर, ये टर्मिनल दिखाते हैं कि डी एफ सी पर रणनीतिक रूप से स्थित केंद्र कैसे सतत मल्टीमॉडल माल प्रवाह को संभाल सकते हैं और कॉरिडोर आधारित लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ा सकते हैं। इस सेवा को पश्चिमी भारत के माल ढुलाई क्लस्टर, विशेष रूप से प्रमुख ग्राहकों जैसे गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (अमूल) से दूध और डेयरी उत्पादों के लिए, साथ ही अन्य लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं का मजबूत समर्थन मिला है । जून 2023 में जीसीएमएमएफ के साथ समझौता ज्ञापन के माध्यम से रेल-पर-ट्रक सेवा की फिर से शुरुआत ने उद्योग जगत के विश्वास को मजबूती प्रदान की और डेयरी क्षेत्र से नियमित मात्रा सुनिश्चित करने में मदद की।

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अग्रणी मोडल बदलाव

पश्चिमी समर्पित माल गलियारे पर रेल-पर-ट्रक सेवा के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक परिणामों में से एक है लंबी दूरी के मालवाहन को सड़क से रेल पर स्थानांतरित करना। ट्रक यात्रा के सबसे लंबे और ऊर्जा-गहन खंड को विद्युत चालित, उच्च क्षमता वाले समर्पित माल गलियारे में स्थानांतरित करके, टीओटी मॉडल राजमार्गों की भीड़भाड़ को कम करने, आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स लागतों को अनुकूलित करने में मदद करता है। प्रत्येक मालवाहक रेल लंबी दूरी के दर्जनों ट्रकों की जगह ले सकती है, जिससे यातायात का प्रवाह सुचारू होता है, दुर्घटना का जोखिम कम होता है, डीज़ल की खपत घटती है और सड़क अवसंरचना की क्षति और टूटफूट में कमी आती है।

परिवहन संचालकों के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक लाभ राजमार्ग टोल लागत से बचना है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर लंबी दूरी की ट्रक यात्रा में टोल प्लाजा में होने वाला व्यय शामिल होता है, जो लॉजिस्टिक लागत को बढ़ाता है और यात्रा की अनिश्चितता में वृद्धि करता है। लंबी दूरी के हिस्से को रेल पर स्थानांतरित करके, रेल-पर-ट्रक सेवा संचालकों को इन आवर्ती टोल खर्चों से पूरी तरह बचने में सक्षम बनाता है, जिससे विशेष रूप से उच्च-आवृत्ति और लंबी दूरी की यात्राओं के संदर्भ में लागत के पूर्वानुमान में आसानी होती है और लाभ में सुधार होता है।

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स्वच्छ और सुरक्षित परिवहन

पर्यावरणीय लाभ इस तथ्य से और मजबूत होते हैं कि पूरा डी एफ सी नेटवर्क पूरी तरह से विद्युतीकृत है। ट्रकों को सड़क से रेल में स्थानांतरित करने से कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ), नाइट्रोजन ऑक्साइड्स (एनओ) और कण पदार्थ के उत्सर्जन में महत्वपूर्ण कमी आती है। जैसे-जैसे भारत के बिजली उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा अधिक से अधिक शामिल हो रही है, टीओटी मॉडल के तहत रेल आधारित माल परिवहन का कार्बन उत्सर्जन और भी कम होने की उम्मीद है। पीछे की पाइप के उत्सर्जन से परे, रेल-पर-ट्रक सेवा सड़क धूल प्रदूषण की अक्सर नजरअंदाज की जाने वाली समस्या को भी संबोधित करता है। भारी ट्रक यातायात राजमार्गों पर धूल निर्माण में प्रमुख योगदानकर्ता होता है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य, कृषि और सड़कों के किनारे के इकोसिस्टम को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। ट्रक यातायात को रेल गलियारों में स्थानांतरित करके, टीओटी प्रमुख परिवहन मार्गों के किनारे रहने वाले समुदायों के लिए हवा की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करता है।

इस बदलाव का ठोस प्रभाव पालनपुर–रेवाड़ी कॉरिडोर पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जो लगभग 636 किलोमीटर लंबा है। जब इस मार्ग पर ट्रक को रेल में स्थानांतरित किया जाता है, तो लगभग 48,875 ट्रक मुख्य यात्रा के लिए राजमार्ग से प्रभावी रूप से हट जाते हैं और केवल प्रथम और अंतिम मील तक की यात्रा करते हैं। इस बदलाव से अनुमानित 88,81,285 लीटर डीज़ल की बचत होती है, जबकि लगभग 2,30,91,343 किलोग्राम कार्बन डायोक्साइड (सीओ) उत्सर्जन को रोका जाता है। ये आंकड़े दिखाते हैं कि कैसे गलियारा-आधारित मोडल बदलाव बड़े पैमाने पर पर्यावरणीय और ऊर्जा लाभ प्रदान करता है।

सेवा का एक अन्य महत्वपूर्ण लाभ प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों के प्रति इसकी मजबूती है। भारत के कई हिस्सों में सड़क परिवहन को कुहासा, भारी वर्षा, अत्यधिक गर्मी और कम दृश्यता के कारण काफी खतरा रहता है, विशेषकर उत्तर के इलाकों में शीतकाल के महीनों में, जहां घना धुंध अक्सर राजमार्गों पर आवाजाही को बाधित करता है और दुर्घटना के जोखिम को बढ़ाता है। समर्पित माल ढुलाई गलियारों पर रेल संचालन, जो उन्नत सिग्नल व्यवस्था और नियंत्रित मार्ग अधिकार से सुसज्जित हैं, ऐसे व्यवधानों के प्रति काफी कम संवेदनशील होते हैं। यात्रा के सबसे लंबे हिस्से को रेल पर स्थानांतरित करके, टीओटी समय-अवधि की विश्वसनीयता बढ़ाता है और चुनौतीपूर्ण मौसम की स्थिति में भी आपूर्ति श्रृंखला की निरंतरता सुनिश्चित करता है।

लंबी दूरी का ट्रक परिचान शारीरिक रूप से थकाऊ और दुर्घटना-संभावित होता है। लगातार व लंबी दूरी तक ट्रक परिचान घंटों को कम करके, टीओटी मॉडल चालक की थकान कम करता है, काम करने की परिस्थितियों में सुधार करता है, और कम सड़क दुर्घटनाओं के साथ सुरक्षित राजमार्गों में योगदान देता है। सड़क यातायात में कमी का मतलब यह भी है कि बुनियादी ढांचे को कम नुकसान होता है और सड़क रखरखाव पर सार्वजनिक खर्च कम होता है।

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रेल-आधारित लॉजिस्टिक्स के लिए नया राजस्व स्रोत

वाणिज्यिक दृष्टिकोण से, रेल-पर-ट्रक सेवा रेल-आधारित लॉजिस्टिक्स के लिए एक नयी और सतत् राजस्व स्रोत के रूप में उभर कर सामने आयी है। इस सेवा की शुरूआत के बाद से, इसने 1,955 से अधिक यात्राएँ पूरी की हैं, एक मिलियन टन से अधिक माल का परिचालन किया है, और ₹131 करोड़ से अधिक का संचयी राजस्व अर्जित किया है। डेयरी, ऑटोमोबाइल, उपभोक्ता उत्पाद और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों से मजबूत मांग, इस मॉडल में उद्योग जगत के बढ़ते हुए भरोसे को दर्शाती है। जून 2023 में गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएमएमएफ) के साथ समझौता ज्ञापन के माध्यम से सेवा की फिर से शुरुआत बड़े संस्थागत ग्राहकों के बीच इसकी साख को और भी मजबूत करती है।

फ्लैट मल्टीपर्पज़ (एफएमपी) प्लेटफ़ॉर्म के तहत नए पीढ़ी के वैगन डिज़ाइनों के विकास के माध्यम से पैमाने के विस्तार को मजबूत किया जा रहा है, जिन्हें ट्रकों को अधिक कुशलता, सुरक्षा और उच्च भार के साथ ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। ये वैगन विभिन्न ट्रक बनावटों व भार में लदान की कुशलता और संचालन के लचीलेपन को बढ़ाएंगे। इसके साथ ही, डीएफसी नेटवर्क में अतिरिक्त मूल-गंतव्य बिंदु और टर्मिनल की शुरुआत से पहले और अंतिम मील की लागत में कमी आएगी और सेवा की पहुंच नए औद्योगिक क्लस्टरों तक बढ़ेगी।

दूरदर्शी दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह सेवा उन भारतीय व्यवसायों के लिए नए अवसर खोलती है, जो विश्वसनीय, पूरे भारत के बाजार तक पहुँच की सुविधा और अनुमान योग्य परिवहन समय की इच्छा रखते हैं। जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पादकों और खाद्य-प्रसंस्करण उद्योगों के लिए, टीओटी वास्तविक रूप से प्रथम-मील से अंतिम-मील एकीकरण को सक्षम बनाती है। महाराष्ट्र में उगाए गए ताज़ा चीकू को बागानों से नज़दीकी टीओटी टर्मिनलों तक ले जाया जा सकता है, इसे समर्पित माल ढुलाई गलियारे के माध्यम से तेजी से स्थानांतरित किया जा सकता है, और सड़क मार्ग से दूर के उपभोक्ता केंद्रों तक न्यूनतम रख-रखाव और समय हानि के साथ पहुँचाया जा सकता है। इसी तरह, नासिक से प्याज, जो भारत के सबसे महत्वपूर्ण बागवानी केंद्रों में से एक है, उत्तरी और पूर्वी बाजारों तक कुशलतापूर्वक पहुँच सकता है, जिससे खराब होने की संभावना और मूल्य अस्थिरता में कमी आती है।

एक बड़े बहु-मोडल विज़न का हिस्सा

रेल-पर-ट्रक एक स्वतंत्र पहल नहीं है बल्कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (डीएफसीसीआईएल) के व्यापक बहु-मोडल लॉजिस्टिक्स विज़न का मुख्य घटक है। उच्च-क्षमता वाले माल ढुलाई गलियारे, बहु-मोडल कार्गो टर्मिनल और लॉजिस्टिक्स पार्क के साथ-साथ, यह सेवा सुनिश्चित करती है कि सड़क और रेल एक-दूसरे के पूरक हों, और प्रत्येक मोड का उपयोग उस स्थान पर किया जाए जहाँ यह सबसे अधिक प्रभावी, किफायती और पर्यावरण के अनुकूल हो।

कुल मिलाकर, रेल-पर-ट्रक भारत के माल ढुलाई परिवहन पैटर्न में संरचनात्मक बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है। नवाचार, विद्युतीकृत अवसंरचना, प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य निर्धारण, परिचालन सुदृढ़ता और स्पष्ट पर्यावरणीय तथा सामाजिक लाभों को मिलाकर, डीएफसीसीआईएल यह दिखा रहा है कि माल ढुलाई परिवहन एक ही समय में कुशल, विश्वसनीय और जिम्मेदार हो सकता है।

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पीके/केसी/जेके/एसएस


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