राज्यसभा सचिवालय
राज्यसभा के उपसभापति का कार्यालय
उत्तर प्रदेश के विधानसभा मंडप में 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन का समापन
श्री हरिवंश ने कहा कि राष्ट्रीय प्रगति के लिए आर्थिक शक्ति, रणनीतिक क्षमता और तकनीकी उन्नति अपरिहार्य हैं
श्री हरिवंश ने इस बात पर जोर दिया कि सभी विधानमंडलों और सरकारों का साझा उद्देश्य विचार-विमर्श, सुदृढ़ नीति निर्माण और दूरदर्शी दृष्टिकोण के माध्यम से राष्ट्रीय विकास में योगदान देना है
प्रविष्टि तिथि:
21 JAN 2026 6:02PM by PIB Delhi
उत्तर प्रदेश विधानसभा मंडप में आज 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (एआईपीओसी) का समापन हुआ। समापन सत्र को संबोधित करते हुए राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश ने सम्मेलन के दौरान हुई सार्थक चर्चाओं पर गहरी संतुष्टि व्यक्त की और इस बात पर जोर दिया कि देश भर के पीठासीन अधिकारियों के बीच विचारों के सामूहिक आदान-प्रदान ने चर्चा को काफी समृद्ध किया है।
श्री हरिवंश ने उत्तर प्रदेश की प्रभावशाली आर्थिक प्रगति का जिक्र किया, जिसमें सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि, प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि, बजट के आकार में विस्तार, निर्यात में वृद्धि और इंफ्रास्ट्रक्चर का तीव्र विकास शामिल हैं। उन्होंने कहा कि नीति आयोग द्वारा कभी "समस्याग्रस्त राज्य" के रूप में वर्णित उत्तर प्रदेश अब एक अग्रणी राज्य के रूप में उभरा है, जिसने पर्याप्त राजस्व वाले राज्य का दर्जा हासिल किया है और सुधारवादी शासन के लिए मान्यता प्राप्त की है।
श्री हरिवंश ने कहा कि आज के बदलते भू-राजनीतिक परिवेश में राष्ट्रीय प्रगति के लिए आर्थिक शक्ति, रणनीतिक क्षमता और तकनीकी उन्नति अपरिहार्य हैं। उन्होंने कहा कि भारत 2014 से इस दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है और प्रधानमंत्री के विकसित और आत्मनिर्भर भारत के विजन के अनुरूप उत्तर प्रदेश एक नई पहचान बना रहा है।
राज्य के विजन डॉक्यूमेंट-2047 का जिक्र करते हुए श्री हरिवंश ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के दोनों सदनों में 27 घंटे से अधिक समय तक चली व्यापक चर्चा की सराहना की और इसे सहभागी शासन और आम सहमति बनाने के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा परिकल्पित 2047 तक विकसित भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य को साकार करने के लिए यह अनिवार्य है कि राज्य स्पष्ट और दूरदर्शी विकास रोडमैप तैयार करें और उत्तर प्रदेश इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
श्री हरिवंश ने इस बात पर प्रकाश डाला कि 2017 से 2025 के बीच, उत्तर प्रदेश में सुनियोजित और लक्षित क्रियाकलापों के माध्यम से लगभग छह करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाया गया है। उन्होंने राज्य सरकार के उस महत्वाकांक्षी लक्ष्य का जिक्र किया जिसके तहत उत्तर प्रदेश को 2030 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में परिवर्तित करना, अगले पांच वर्षों में विकास दर को 20 प्रतिशत तक बढ़ाना और 2047 तक छह ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल करना तथा राष्ट्रीय जीडीपी में राज्य की हिस्सेदारी को 9.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 16 प्रतिशत करना शामिल है।
विधानमंडलों और सरकारों की साझा जिम्मेदारी पर जोर देते हुए, श्री हरिवंश ने कहा कि सभी हितधारकों का साझा उद्देश्य जागरुक विचार-विमर्श, सुदृढ़ नीति निर्माण और दूरदर्शी दृष्टिकोण के माध्यम से राष्ट्रीय विकास में योगदान देना है।
श्री हरिवंश ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष श्री सतीश महाना द्वारा आधुनिक प्रौद्योगिकी और पारंपरिक विधायी मूल्यों के सामंजस्य स्थापित करने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि विधानसभा द्वारा डिजिटल उपकरणों को अपनाना, प्रक्रिया नियमों में सुधार करना, अवधी, भोजपुरी, बुंदेली और ब्रज जैसी क्षेत्रीय बोलियों को शामिल करना और साथ ही अनुवाद की सुविधा प्रदान करना तथा अध्यक्ष का सदस्यों के साथ व्यक्तिगत रूप से जुड़ना, सहभागिता और समावेशिता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने में सहायक रहा है।
समापन सत्र का समापन करते हुए, श्री हरिवंश ने विश्वास व्यक्त किया कि 86वीं एआईपीओसी की चर्चाओं और अंतर्दृष्टियों से देश भर में विधायी संस्थानों को मजबूती मिलेगी और भारत की लोकतांत्रिक नींव को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा।
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पीके/केसी/एसकेएस/एसवी
(रिलीज़ आईडी: 2217051)
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